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Saturday, 4 February 2012

सूर्य

सूर्य के शुभ प्रभाव को पाने के लिए

सबसे पहले नित्य अपने पिता के चरणों को स्पर्श करे और उनका सम्मान करे।
  ॐ सुम सूर्याय नमः इस मंत्र की एक माला का जप करे।
 

     नित्य सूर्य भगवान को तांबे,पीतल,चांदी के लोटे में जल भरकर उसमे लाल फूल,गेहू के दाने,लाल चन्दन डालकर पूरब की तरफ मुह करके अर्घ दे। 

नित्य शंकर जी,विष्णु जी की पूजा करे।

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
 
ॐ नमः शिवाय इन दोनों मंत्रो की एक - एक माला का जप करे।


दान सामग्री                                                                                   
अपने वजन के बराबर गेहू,गुड,ताम्बा का दान,मसूर की दाल हर रविवार को करे।
 

Tuesday, 13 September 2011

सूर्य अटल नियम

सूर्य के साथ अन्य ग्रहों के अटल नियम जो कभी असफ़ल नही हुये


सूर्य का अन्य ग्रहों से आपसी सम्बन्ध

सूर्य का अन्य ग्रहों से आपसी सम्बन्ध

  • चन्द्र के साथ इसकी मित्रता है.अमावस्या के दिन यह अपने आगोश में लेलेता है.
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  • मंगल भी सूर्य का मित्र है.
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  • बुध भी सूर्य का मित्र है तथा हमेशा सूर्य के आसपास घूमा करता है.
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  • गुरु यह सूर्य का परम मित्र है,दोनो के संयोग से जीवात्मा का संयोग माना जाता है.गुरु जीव है तो सूर्य आत्मा.
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  • शनि सूर्य का पुत्र है लेकिन दोनो की आपसी दुश्मनी है,जहां से सूर्य की सीमा समाप्त होती है,वहीं से शनि की सीमा चालू हो जाती है."छाया मर्तण्ड सम्भूतं" के अनुसार सूर्य की पत्नी छाया से शनि की उतपत्ति मानी जाती है.सूर्य और शनि के मिलन से जातक कार्यहीन हो जाता है,सूर्य आत्मा है तो शनि कार्य आत्मा कोई काम नही करती है.इस युति से ही कर्म हीन विरोध देखने को मिलता है.
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  • शुक्र रज है सूर्य गर्मी स्त्री जातक और पुरुष जातक के आमने सामने होने पर रज जल जाता है.सूर्य का शत्रु है.
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  • राहु सूर्य और चन्द्र दोनो का दुश्मन है.एक साथ होने पर जातक के पिता को विभिन्न समस्याओं से ग्रसित कर देता है.
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  • केतु यह सूर्य से सम है.

Friday, 2 September 2011

12 भावों में सूर्य

कुंडली के 12 भावों में सूर्य को अनुग्रहित करने के उपाय:–
  • प्रथम भाव में सूर्य हो तो पानी का नल या प्याऊ लगवाएं।
  • दूसरे भाव में नारियल का तेल दान करें।
  •  तीसरे भाव में निर्धन बच्चों की सहायता करें।
  •  चतुर्थ भाव में अंधों को रोटी दें।
  • पंचम भाव में कुत्ते पाले।
  • छठे भाव में बंदर को गुड चना खिलाएं।
  • सप्तम भाव में तांबे के चौकोर पतरे गाढ़े।
  • अष्टम भाव में गेंहू और गुड का दान करें।
  •  नवम भाव में चावल दूध और चांदी रखने से सूर्य का बल बढ़ता है।
  • दशम भाव में काले नीले कपड़े ना पहने व तांबे के सिक्के डालें।
  • ग्यारहवें भाव में बकरी का दान करें, मांस व मदिरा से बचें।
  •  बारहवें भाव में बंदरों को गुड खिलाएं व सूर्य की उपासना करें।

Thursday, 11 August 2011

सूर्य ग्रह

जिस जातक की राशि में सूर्य ग्रह दुष्प्रभावी हो वह यदि इन जांचे-परखे अचूक टोटकों को पूरे विश्वास के साथ अपनाए तो निश्चित रूप से लाभ पहुंचता है।

१. कोई महत्वपूर्ण कार्य प्रारम्भ करने से पूर्व तथा कहीं यात्रा पर निकलने से पूर्व थोड़ा गुड़ खाकर तथा पानी पीकर ही निकलें।

२. हरिवंश पुराण का पाठ करें का सुने ।

३. रविवार के दिन नमक का सेवन न करें हो सके तो पूरा उपवास रखें । इस दिन सफेद कपड़े ही पहने।

४. दाहिने हाथ की अनामिका अंगुली में ५ रत्ती का उत्तम किस्म का माणिक्य सोने या तांबे की अंगूठी में पहने। यह अंगूठी रविवार के दिन प्रात: ब्रह्ममुहूर्त में ही पहने ।
५. क्षमता के अनुसार तांबे के दो टुकड़े लाकर एक को रविवार के दिन बहती हुई नदी में बहा दें।

६. रविवार के दिन किसी एक गरीब की सेवा अवश्य करें ।

Saturday, 6 August 2011

* सूर्य देव मन्त्र ~


* सूर्य  देव  के  सामान्य  मन्त्र  :     
          " ॐ  घृनिः  सूर्याय  नमः "

* सूर्य  देव  के  बीज  मन्त्र   :                  
                     "   ॐ  ह्राम  ह्रीम  ह्रौम   सः  सूर्याय  नमः  "

*  सूर्य  देव  के  गायत्री  मन्त्र   : 
               "   ॐ  आदित्याय  विदमहे  प्रभाकराय   धीमहि  तन्नो  सूर्यः  प्रचोदयात  "

* सूर्य  देव  के  वैदिक  मन्त्र  :
                     "  ॐ  आकृष्नेन  रजसा  वर्तमानो  निवेशय्न्न्मृतम  मर्त्यंच  !
                       हिरण्येन  सविता  रथेन  देवो  याति  भुवनानि  पश्यन  !! "

* सूर्य  देव  के  पौराणिक  मन्त्र   :
                " ॐ  जपाकुसुमसंकाशं   काश्यपेयं  महाद्युतिम  ! 
               तमो S रि  सर्वपापघ्नं  प्रनतो S स्मी  दिवाकरम  !! 

* सूर्य  देव  के  ध्यान  मन्त्र   :  
               "  पद्मासन:   पद्मकर : पद्मगर्भ :  समद्युतिः !
                    सप्ताश्चः सप्तरज्जुश्च  द्विभुजः  स्यात सदारविः !!"

Monday, 1 August 2011

सूर्योपासना कीजिए,आरोग्यता पाईए



कुंडली के विभिन्न भावों में स्थित सूर्य से उत्पन्न रोग व कष्टों में लाभ इनकी उपासना से प्राप्त किया जा सकता है। समस्त रोगों के निराकरण सूर्य उपासना से संभव हैं, विशेषकर आंखों के रोग का निराकरण। तुलसीदासजी ने श्रीरामचरित मानस में उल्लेख किया है "नयन दिवाकर कच धन माला।" भगवान राम ने भी रावण पर विजय प्राप्त करने के लिए अगस्त्य ऋषि के कहने पर "आदित्य ह्वदयस्त्रोत" का पाठकर विजय प्राप्त की थी। महाभारत में बताया गया है कि धर्मराज युधिष्ठर ने सूर्य के 108 नामों का जप करके ही "अक्षय पात्र" प्राप्त किया था। सूर्य उपासना अत्यन्त सरल है। कोई भी व्यक्ति आसानी से कर सकता है। सूर्य की उपासना का विधान इस प्रकार है-
सूर्य उदय से पूर्व तांबे के पात्र में जल भरकर लाल चंदन के छींटे दें। जल में चुटकी भर चावल पानी में डालें तथा पूर्वामुखी होकर सूर्य को अƒर्य देकर प्रणाम करें। इसके बाद सात परिक्रमा करें।
"आदित्य ह्वदयस्त्रोत" का नित्य पाठ करें।
प्रतिदिन सूर्य के 108 नामों का जप करें। यदि आप चाहें तो सूर्य सहस्त्रनाम का पाठ कर सकते हैं।
" ऊ घृणि: सूर्याय नम:" मंत्र की एक माला जाप करें।
रविवार के दिन तेल, नमक, अदरक का सेवन नहीं करें।
ऋग्वेद में सूर्य उपासना के कई मंत्र हैं। उनमें से कोई एक मंत्र का जप करने से सभी प्रकार के कष्ट दूर हो जाते हैं।
यदि आप ऊपर बताए गए उपाय नहीं कर पाएं तो सूर्य से संबंधित वस्तुओं का दान जैसे माणिक्य, लाल वस्त्र या पुष्प, लाल चंदन,गुड,गेहूं, केसर अथवा तांबे की वस्तु का दान दे सकते हैं।
उपरोक्त वस्तुओं का दान देने से भी सूर्य की अनुकूलता प्राप्त होती है। सूर्य की अनुकूलता के लिए यदि आप रविवार का व्रत करना चाहें तो किसी माह के शुक्लपक्ष के पहले रविवार से व्रत शुरू करके एक वर्ष तक अथवा 30 व्रत करें। व्रत सूर्यास्त से पूर्व खोलें। व्रत के दिन नमक का सेवन कदापि ना करें।
उपरोक्त साधना श्रद्धा एवं विश्वास से करने पर ही पूर्ण लाभ की प्राप्ति संभव है।