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Saturday, 16 June 2012

नवग्रह

यदि कोई व्यक्ति सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति चाहता है तो उसे नीचे लिखे नवग्रह मंत्रों का जाप करने से हर तरह की परेशानियों से मुक्ति मिल सकती है।


- सूर्य मंत्र- ऊँ घृणि सूर्याय नम:।

- चन्द्र मंत्र-ऊँ सों सोमाय नम:।

- मंगल मंत्र-ऊँ अंगारकाय नम:।

- बुध मंत्र - ऊँ बुं बुधाय नम:।

- गुरु मंत्र- ऊँ बृं बृहस्पत्ये नम:।

- शुक्र मंत्र- ऊँ शुं शुक्राय नम:।

- शनि मंत्र- ऊँ शं शनैश्चराय नम:।

- राहु मंत्र- ऊँ रां राहवे नम:।

Tuesday, 12 June 2012

चाहें दिन की

चाहें दिन की अच्छी शुरुआत तो इस 1 मंत्र से करें त्रिदेव व नवग्रह का ध्यान


हिन्दू धर्म में ब्रह्मा, विष्णु और महेश त्रिदेव पुकारे जाते हैं। मान्यता है कि ब्रह्मदेव सृष्टि, भगवान विष्णु पालन और महेश यानी शिव संहारक शक्तियों के  स्वामी है। इस तरह संपूर्ण सृष्टि और कालचक्र पर त्रिदेव का नियंत्रण है। पौराणिक मान्यता है कि त्रिदेवों के अधीन होने से ही नवग्रह भी रचना, पालन व संहार की इस प्रक्रिया में अलग-अलग शक्तियों द्वारा भूमिका निभाकर दैहिक, दैविक और भौतिक सुख-दु:ख नियत करते हैं।

यही कारण है कि शास्त्रों में सांसारिक जीवन में हर संताप से मुक्ति व सुखों की कामनासिद्धि के लिये सुबह की शुरुआत एक ऐसे मंत्र के ध्यान से करने का महत्व बताया गया है, जिसके द्वारा त्रिदेवों के साथ-साथ नवग्रहों का ध्यान हो जाता है। यह मंत्र आसान ही नहीं, बल्कि नवग्रह दोषों को भी दूर करने वाला माना गया है। जानते हैं यह मंत्र -

- सुबह स्नान के बाद त्रिदेव व नवग्रह की प्रतिमा या तस्वीर की गंध, अक्षत,  नैवेद्य, धूप व दीप लगाकर पूजा करें व मंगलकामना से नीचे लिखा मंत्र बोलें -

ब्रह्मा मुरारिस्त्रिपुरान्तकारी भानु: शशी भूमिसुतो बुधश्च।

गुरुश्च शुक्र: शनिराहुकेतव: कुर्वन्तु सर्वे मम सुप्रभातम्।।

सरल शब्दों में अर्थ है ब्रह्मा, विष्णु, शिव, सूर्य, चन्द्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु सभी देवता मेरे प्रात:काल को मंगलमय करें।

- मंत्र स्मरण के बाद आरती कर, प्रसाद ग्रहण करें।

Tuesday, 13 September 2011

नवग्रह

चरित्र गुरु (बृहस्पति) शुक्र शनि राहू (उत्तर आसंधि) केतु (दक्षिण आसंधि)
सहचरी तारा सुकिर्थी और उर्जस्वथी नीलादेवी ====सिंही ------चित्रलेखा
रंग स्वर्ण सफेद/पीला काला/नीला-- -----धुंए के रंग का ------धुंए के रंग का
सम्बंधित लिंग नर मादा तटस्थ - -
तत्व ईथर जल वायु वायु पृथ्वी
देवता इंद्र इंद्राणी ब्रह्मा निरृति गणेश
प्रत्यादी देवता ब्रह्मा इंद्र यम मृत्यु चित्रगुप्त
धातु स्वर्ण चांदी लोहा सीसा सीसा
रत्न पीला नीलम हीरा नीला नीलम हेसोनाईट कैट्स आई
शरीरिक अंग मस्तिष्क वीर्य मांसपेशी - -
स्वाद मीठा खट्टा स्तम्मक - -
भोजन काबुली चना राजमा तिल उड़द (सेम) चना
मौसम सर्दी वसंत सभी मौसम - -
दिशा उत्तर पूर्व दक्षिण पूर्व पश्चिम दक्षिण पश्चिम -
दिन बृहस्पतिवार शुक्रवार शनिवार - -

नवग्रह

चरित्र सूर्य देव चंद्र मंगल बुध
सहचरी सुवर्णा एवं छाया-------- रोहिणी शक्तिदेवी------------ इला
रंग तांबा सफ़ेद लाल हरा
सम्बंधित लिंग नर नर नर तटस्थ
तत्व अग्नि जल अग्नि पृथ्वी
देवता अग्नि वरुण सुब्रमण्य विष्णु
प्रत्यादी देवता रुद्र गौरी मुरुगन विष्णु
धातु स्वर्ण/पीतल चांदी पीतल पीतल
रत्न लाल मणि मोती/मूनस्टोन लाल मूंग पन्ना
शरीरिक अंग हड्डी रक्त मज्जा त्वचा
स्वाद तीव्र गंध नमक एसिड मिश्रित
भोजन गेहूं चावल अरहर मुंग सेम
मौसम गर्मी सर्दी गर्मी पतझड़
दिशा पूर्व उत्तर पश्चिम दक्षिण उत्तर
दिन रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार

Saturday, 10 September 2011

नवग्रह जैनागम

नवग्रह अरिष्ट शांति का जैनागम में शास्त्रोक्त उपाय

    1.........सूर्य सिंह राशि का स्वामी है, यह दशम स्थान में शुभ फलदायी, आत्माकारक तथा पितृकारक होता है। इसकी अशुभता से जातक आलसी, भयालु पितृ वैरी होता है। नौकरी व व्यवसाय में बार-बार विघ्न आते हैं। व्यापारिक कार्यों में असफलता मिलती है, जातक राजकीय प्रकोप का भाजन बनता है, कोर्ट कचहरी, विवाद, पितृ दोष, हृदय रोग, उदर विकार, ऋण (कर्जा) , झूठे अभियोग, प्रतिष्ठा हानि, अल्सर, पित्त आदि होता हैं। आत्म विश्वास कम रहता है, मन पाप कार्यों में अधिक प्रवृत्त होता है, गृहस्थ जीवन कलहपूर्ण व संतान सुख से हीन बनता है, इत्यादि सूर्य ग्रह के अरिष्ट प्रभाव होने पर उसकी शांति हेतु प्रतिदिन श्री पद्मप्रभु चालीसा, श्री नवग्रह शांति चालीसा करें एवं वर्ष में कम से कम एक बार श्री नवग्रह शांति विधान कर जीवन का उत्थान अवश्य करें।
     
    2...........चंद्रमा कर्क राशि का स्वामी है। यह चतुर्थ स्थान, माता, भूमि-भवन, वाहन, वाणी, सुख का प्रमुख कारण होता है, चन्द्र की शुभता उपरोक्त विषयों की अनुकूलता प्रदान करती है और यदि माता, भूमि-भवन, वाहन सुख का अभाव हो, वाणी में कर्कशता हो, मानसिक तनाव, फेफड़े का रोग, चिंता, दुर्बलता, धन की कमी, हृदय का रोग, जलोदर रोग, रक्ताल्पता, रक्त प्रकोप, हाय-ब्लडप्रेशर आदि की संभावना हो, मन में बुरे विचार आते हों, आत्महत्या की भावनायें बनती हों, विद्यार्जन, उच्च पद प्राप्ति में निरंतर असफलता मिलती हो तो चंद्र की प्रतिकूलता का प्रभाव है, इन समस्याओं का एकमात्र समाधान श्री चंद्रप्रभु चालीसा, श्री नवग्रह शांति चालीसा व नवग्रह शांति विधान से हो सकता है।
     
    3..........मंगल ग्रह मेष और वृश्चिक राशि का स्वामी है और ग्रहों में सेनापति है, दशम स्थान का कारक है। इसके शुभ होने पर उच्च राजयोग बनता है, जातक में नेतृत्व क्षमता आती है। इसकी प्रतिकूलता होने पर जीवन में पदोन्नति में बाधायें आती हैं और घर में आग लगना, लड़ाई-झगड़ा, अनावश्यक कोर्ट कचहरी के झगड़ों में उलझना, मकान में वास्तु दोष, पराक्रम का अभाव, अतिरिक्त मांसपेशियों के रोग, तीव्र ज्वर, विषम ज्वर, बार-बार एक्सीडेंट, रक्त विकार, फोड़े-फुँसी, होठ फटना, भौतिक विषयों के प्रति तीव्र लालसा होती है। उपरोक्त मंगल के अरिष्ट शांति हेतु श्री वासुपूज्य भगवान का चालीसा करें। श्री नवग्रह शांति चालीसा एवं श्री नवग्रह शांति विधान करके अपना सौभाग्य जगायें।
     
    4.........बुध ग्रह मिथुन व कन्या राशि का स्वामी है इसकी अनुकूलता होने पर जातक की वाणी में सरस्वती का वास होता है। बुध वाणी, विद्या, बुध्दि, व्यापार और धन का कारक ग्रह माना गया है। इसकी प्रतिकूलता होने पर व्यापार में परेशानी, धन हानि, बुध्दि विभ्रम, ब्लड कैंसर, चर्म कैंसर, कुष्ठरोग, वाणी के कारण झगड़े आदि होते है। जिन्हें उपरोक्त अरिष्ट हो वे तथा बुध्दि जीवी, कवि, लेखक, वास्तुविद्, प्रवचनकार, ज्योतिषी, वैद्य, डाँक्टर, साधु-संत, दार्शनिक आदि लोग बुध ग्रह की अरिष्ट शांति हेतु एवं बुध ग्रह को प्रबल बनाने के लिए श्री शांतिनाथ भगवान का चालीसा करें। श्री नवग्रह शांति चालीसा करें। श्री नवग्रह शांति चालीसा एवं श्री नवग्रह शांति विधान के माध्यम से जीवन की सर्वांगीण भाग्योन्नति संभव है।
     
    5.........गुरू ग्रह धनु और मीन राशि का स्वामी है। यह दूसरे, पाँचवें व नववें भाव का विशेष कारक होता है। विद्या, विवाह, धार्मिक भावना एवं अध्यात्म का प्रमुख कारक है। इसकी प्रतिकूलता होने पर उच्च शिक्षा में व्यवधान आता है। आध्यात्मिक और नैतिक भावनाऐं कम होती हैं, विवाह संबंध में परेशानी, संतान हानि, गले में खराबी, बुध्दि भ्रम इत्यादि गुरू ग्रह संबंधी अरिष्ट शांति हेतु भगवान श्री आदिनाथ जी का चालीसा, श्री नवग्रह शांति चालीसा एवं श्री नवग्रह शांति विधान ही उत्तम उपाय है।
     
    6..........शुक्र ग्रह वृषभ और तुला राशि का स्वामी है। यह संगीत, नृत्य, अभिनय, लेखन, गायन, चित्रकला आदि का मुख्य कारक है। यदि लग्नेश शुक्र भाग्य भवन में बैठ जायें तो जातक को उच्च धर्माधिकारी बनाता है और इसकी प्रतिकूलता तंबाखु, सिगरेट, शराब आदि व्यसनों के आधीन बनाती है। गुर्दा रोग, जलोदर, गुप्त रोग, नजला-जुकाम, कंठ रोग, खुशी में गम आना, प्रोस्टेट कैंसर आदि शुक्र ग्रह की प्रतिकूलता से होते हैं। उपरोक्त प्रतिकूलताओं से बचने के लिए श्री पुष्पदंत भगवान का चालीसा पाठ करें। श्री नवग्रह शांति चालीसा व नवग्रह शांति विधान करके भाग्य को समुन्नत बनायें व कला कौशल बनें।
     
    7........शनि ग्रह मकर और कुंभ राशि का स्वामी है, शनि अध्यात्म का मुख्य कारक है। यह अनुकूल होने पर जातक को दीर्घायु देकर मालामाल कर देता है। अनुकूलता में धन आदि सुख छप्पर फाड़ के देता है और प्रतिकूल होने पर कपड़े भी उतार देता है। अर्थात इसकी अनुकूलता करोड़पति और प्रतिकूलता रोडपति बना देती है। अग्निकाण्ड, दुर्घटना, अयोग्य संतान, शरीर के निचले भाग में रोग, पैर-तलवे स्नायु संबंधी पीड़ा, हड्डी टूटना, धीमी गति से कार्य होना, कार्यों में रुकावटें आना इत्यादि शनि के अरिष्ट शांति हेतु श्री मुनिसुव्रतनाथ भगवान का चालीसा करें। श्री नवग्रह शांति चालीसा व श्री नवग्रह शांति विधान से अपना सर्वांगीण विकास करें।
     
    8........राहू ग्रह कन्या राशि का स्वामी माना गया है। इसकी अनुकूलता में अकस्मात धन प्राप्ति के योग बनते हैं। लाटरी खुलना, पूर्वजों की वसीयत प्राप्त होना आदि अचानक धन लाभ राहू ग्रह कराता है और प्रतिकूल होने पर जातक को जुआँ, सट्टा, रिश्वतखोरी, चोरी, डकैती, तस्करी आदि के माध्यम से राजकोप का भाजन बनाता है। इसकी तीव्र प्रतिकूलता फांसी के फन्दे तक ले जाती है। सिर पर चोट, गैस्टिक, विचारों में अस्थिरता, मधुमेह (डायबिटीज), हृदय रोग, लम्बी बीमारी आदि राहू की प्रतिकूलता के लक्षण हो सकते हैं। इसकी अरिष्ट शांति हेतु प्रतिदिन नेमिनाथ भगवान का चालीसा करें। कुंडली में ग्रहण योग, पाप कर्तरी योग, कालसर्प योग होने पर प्रतिदिन श्री नवग्रह शांति चालीसा करें एवं प्रतिमास श्री नवग्रह शांति विधान से समस्त पापों का नाश करें।
     
    9........केतु ग्रह मीन राशि का अधिपति माना गया है। यह जिस ग्रह के साथ बैठता है उसकी ही प्रतिकूलता या अनुकूलता को बढ़ाता है। इसकी प्रतिकूलता से जातक के साथ बार-बार विश्वासघात होता है। मूत्र विकार, पुत्र पर संकट, अचानक परेशानी, पुत्र द्वारा दुर्व्यवहार, कारागृह, यकृत (लीवर) सम्बंधी रोग, हाथ-पैरों में सूजन, बावासीर आदि केतु ग्रह की प्रतिकूलता से होते हैं। इसकी अरिष्ट शांति हेतु श्री पार्श्वनाथ भगवान का चालीसा करें और कालसर्प योग होने पर श्री नवग्रह शांति चालीसा एवं प्रतिमास श्री नवग्रह शांति विधान से समस्त दुःखों का निदान करें।

Friday, 19 August 2011

नवग्रह



नवग्रह एवं दान


कुंडली (जातक/ जन्म पत्री) में यदि कोई ग्रह कमजोर है या अशुभ भाव का स्वामी हो एवं अन्य भाव को देख कर अपना अशुभ प्रभाव दे रहा हो तो उस ग्रह को शांत करना आवश्यक होता हैं जिस्से ग्रह अपना प्रतिकूल प्रभाव के स्थान पर अनुकूल प्रभाव प्रदान करें।

किसी भी ग्रह के प्रभाव को अनुकूल बनाने का सरल उपाय हैं उस ग्रह से संबंधिक वस्तु विशेष का जल प्रवाह या दान करना, जिस्से ग्रह के अशुभ प्रभाव को कम किया जासके।

ग्रह:- सूर्य
वार:- रविवार
सूर्य ग्रह कि शांति हेतु गेहूँ, ताँबा, घी, गुड़, माणिक्य, लाल कपड़ा, मसूरकी दाल, कनेर या कमल के फूल, गौ दान करने से शुभ फल कि प्राप्ति होती हैं
ग्रह:- चंद्र
वार:- सोमवार
चंद्र ग्रह कि शांति हेतु मोती, चाँदी, चावल, चीनी, जल से भरा हुवा कलश, सफेद कपड़ा, दही, शंख, सफेद फूल, साँड आदि का दान करने से शुभ फल कि प्राप्ति होती हैं
ग्रह:- मंगल
वार:- मंगलवार
मंगल ग्रह कि शांति हेतु मूंगा, मसूर, घी, गुड़, लाल कपड़ा, रक्त चंदन, गेहूँ, केसर, ताँबा, लाल फूल का दान करने से शुभ फल कि प्राप्ति होती हैं
ग्रह:- बुध
वार:- बुधवार
बुध ग्रह कि शांति हेतु हरे पन्ना, मूँग, घी, हरा कपड़ा, चाँदी, फूल, काँसे का बर्तन, कपूर का दान करने से शुभ फल कि प्राप्ति होती हैं
ग्रह:- बृहस्पति (गुरु)
वार:- गुरुवार
बृहस्पति ग्रह कि शांति हेतु पुखराज, चने की दाल, हल्दी, पीला कपड़ा, गुड़, केसर, पीला फूल, घी और सोने की वस्तुओं का दान करने से शुभ फल कि प्राप्ति होती हैं
ग्रह:- शुक्र
वार:- शुक्रवार
शुक्र ग्रह कि शांति हेतु श्वेत रत्न, चाँदी, चावल, दूध, सफेद कपड़ा, घी, सफेद फूल, धूप, अगरबत्ती, इत्र, सफेद चंदन दान करने से शुभ फल कि प्राप्ति होती हैं
ग्रह:- शनि
वार:- शनिवार
शनि ग्रह कि शांति हेतु निलम, काला कपड़ा, साबुत उड़द, लोहा, यथा संभव दक्षिणा, तेल, काला पुष्प, काले तिल, चमड़ा, काले कंबल का दान करने से शुभ फल कि प्राप्ति होती हैं
ग्रह:- राहु
वार:- शनिवार
राहु ग्रह कि शांति हेतु काला एवं नीला कपड़ा, गोमेद, कंबल, साबूत सरसों (राई), ऊनी कपड़ा, काले तिल व तेल का दान करने से शुभ फल कि प्राप्ति होती हैं
ग्रह:- केतु
वार:- मंगलवार
केतु कि शांति हेतु सात प्रकार के वैदूर्य, अनाज, काजल, झंडा, ऊनी कपड़ा, तिल आदि का दान करने से शुभ फल कि प्राप्ति होती हैं
  • कृप्या दान अपनी श्रद्धा एवं क्षमता के अनुसार एक या अधिक वस्तुओं का कर सकते हैं।
  • दान ग्रहों के तय वार के अनुशार हि करें।
  • किसी गरीब या जरुरतमंद व्यक्ति को दान करना चाहिए।
  • अपने द्वारा दान का बखान या दिखावा करने हेतु दान करने से पुण्य कम हो जाता हैं।

नवग्रह की शांति के लिये गायत्री मंत्र



नवग्रह की शांति के लिये गायत्री मंत्र
निम्न लिखीत मंत्रो का ग्रहो के अनुशार जाप करने से ग्रहो की प्रतिकूलता दूर होकर अनुकूलता प्राप्त होती हैं।


सूर्य गायत्री

ॐ आदित्याय च विधमहे प्रभाकराय धीमहि, तन्नो सूर्य :प्रचोदयात


चन्द्र गायत्री

ॐ अमृतंग अन्गाये विधमहे कलारुपाय धीमहि, तन्नो सोम प्रचोदयात


मंगल गायत्री

ॐ अंगारकाय विधमहे शक्तिहस्ताय धीमहि, तन्नो भोम :प्रचोदयात



बुध गायत्री

ॐ सौम्यरुपाय विधमहे वानेशाय च धीमहि, तन्नो सौम्य प्रचोदयात



गुरु गायत्री

ॐ अन्गिर्साय विधमहे दिव्यदेहाय धीमहि, जीव: प्रचोदयात



शुक्र गायत्री

ॐ भ्रगुजाय विधमहे दिव्यदेहाय, तन्नो शुक्र:प्रचोदयात



शनि गायत्री

ॐ भग्भवाय विधमहे मृत्युरुपाय धीमहि, तन्नो सौरी:प्रचोदयात





राहू गायत्री

ॐ शिरोरुपाय विधमहे अमृतेशाय धीमहि, तन्नो राहू:प्रचोदयात





केतु गायत्री

ॐ पद्म्पुत्राय विधमहे अम्रितेसाय धीमहि तन्नो केतु: प्रचोदयात

Thursday, 18 August 2011

नवग्रह

नवग्रह अनुकंपा के उपाय
ग्रहों की शांति का सर्वोत्तम उपाय क्या हो? इस विषय में ज्योतिष में अनेक सिद्धांत प्रचलित हैं। मंत्र-तंत्र-यंत्र, टोटके, दान-पुण्य, रंग और अनेक प्रकार के कर्मकांडों के माध्यम से ग्रह शांति की जाती है। प्राय: सभी की कुंडली मे कहीं न कहीं अनिष्ट ग्रह विराजते ही हैं। आहार और सुगंध के माध्यम से ग्रह शांति की जा सकती है। ग्रहों की प्रकृति के अनुसार आहार और सुगंध का इस्तेमाल किया जाए, तो ग्रहों के प्रकोप में न्यूनता लाई जा सकती है। आहार और सुगंध द्वारा ग्रह शांति इस प्रकार हैं-

सूर्य: सूर्य की अनुकूलता प्राप्त करने के लिए जातक को अपने आहार में गेहूं, आम, गुड़ आदि का उपयोग करना चाहिए। केसर तथा गुलाब का इत्र या सुगंध का उपयोग करने से सूर्य प्रसन्न होते हैं।

चंद्र: चंद्रमा मन का कारक है। मन की प्रसन्नता जीवन को सुखी व स्वस्थ बना देती है। चंद्रमा की अनुकूलता के लिए गन्ना, शक्कर, दूध और दूध से बने पदार्थ, नमक, आइसक्रीम और मिठाइयों को अपने आहार में शामिल करना चाहिए। इसके अतिरिक्त चमेली और रातरानी का इत्र या सुगंध चंद्रमा की पीड़ा को कम करते हैं।

मंगल: मंगल की पीड़ा को कम करने के लिए जातक को अपने आहार में गुड़, मसूर की दाल, अनार, चाय, कॉफी, जौ और शहद का उपयोग करना चाहिए। लाल चंदन का इत्र, तेल अथवा सुगंध मंगल को प्रसन्न करते हैं।

बुध: बुध को इलायची सर्वाधिक प्रिय है। इलायची तथा चंपा की सुगंध बुध को प्रिय होती है। मटर, ज्वार, कुलपी, हरी दालें, मूंग, हरी सब्जियां आहार में लेनी चाहिए। चंपा का इत्र तथा तेल का प्रयोग बुध की दृष्टि से उत्तम है।

गुरू: बृहस्पति की कृपा प्राप्ति के लिए चना, चना दाल, बेसन, मक्का, केला, हल्दी, सैंधा नमक, पीले दालें और फलों को सम्मिलित करना चाहिए। पीले फूलों की सुगंध, केसर और केवड़े का इत्र गुरू की कृपा प्राप्ति के लिए उत्तम है।

शुक्र: शुक्र की कृपा प्राप्ति के लिए त्रिफला, दाल चीनी, कमलगट्टा, मिश्री, मूली और सफेद शलजम का प्रयोग करना चाहिए। सफेद फूल, चंदन और कपूर की सुगंध लाभकारी होती है। चंपा, चमेली और गुलाब की तीक्ष्ण खुशबू से शुक्र नाराज हो जाते हैं। हल्की खुशबू के परफ्यूम ही काम में लेने चाहिए।
शनि: शनि की कृपा प्राप्त करने के लिए तिल, उड़द, कालीमिर्च, मूंगफली का तेल, आचार, लौंग, तेजपत्ता तथा काले नमक का उपयोग करना चाहिए। कस्तुरी, लोबान तथा सौंफ की सुगंध शनि देव को पसंद है।

राहु और केतु: राहु और केतु की पीड़ा से बचने के लिए उड़द, तिल और सरसों का प्रयोग लाभदायक रहता है। काली गाय का घी व कस्तुरी का इत्र इन्हें पसंद है। रविवार को चना, सोमवार को खीर अथवा दूध, मंगलवार को चूरमा तथा हलवा, बुधवार को हरी सब्जी, गुरूवार को चने की दाल अथवा बेसन का प्रयोग, शुक्रवार को मीठा दही और शनिवार को उड़द का सेवन करने से सभी ग्रह प्रसन्न रहते हैं।

Wednesday, 17 August 2011

नवग्रह : ग्रहानुसार दान

नवग्रह : ग्रहानुसार दान की विशेष सामग्री विभिन्न ग्रहों की दान-वस्तुएँ
नवग्रह

सूर्य :

कुंडली में यदि कोई ग्रह कमजोर है या अरिष्ट भाव का स्वामी होकर शुभ भाव को देखता है तो वह ‍अनिष्टकारक हो जाता है। गोचर में भी ग्रह यदि प्रतिकूल भाव में हो तो अशुभ फल प्रदान करता है। ऐसे में ग्रहों से संबंधित वस्तुओं का दान कर अशुभता को कम किया जा सकता है।

सूर्य (रविवार) : सूर्य के लिए गेहूँ, ताँबा, घी, गुड़, लाल कपड़ा, कनेर के फूल, सोना, गाय-बछड़ा आदि का दान किया जाता है।

चंद्र (सोमवार) : चंद्र के लिए सफेद कपड़ा, मोती, चाँदी, चावल, चीनी, दही, शंख, सफेद फूल, साँड आदि का दान किया जाता है।

मंगल (मंगलवार) : मंगल के लिए मसूर, घी, गुड़, लाल कपड़ा, गेहूँ, केसर, ताँबा, लाल फूल का दान किया जाता है।

बुध (बुधवार) : बुध के लिए मूँग, घी, हरा कपड़ा, चाँदी, फूल, काँसे का बर्तन, हाथी दाँत और कपूर का दान किया जाता है।

गुरु (गुरुवार) : चने की दाल, हल्दी, पीला कपड़ा, गुड़, पीला फूल, घी और सोने की वस्तुओं का गुरु के लिए दान किया जाता है।


शुक्र (शुक्रवार) : शुक्र के लिए चाँदी, चावल, दूध, सफेद कपड़ा, घी, सफेद फूल, धूप, अगरबत्ती, इत्र, सफेद चंदन का दा‍न किया जाता है।

शनि (शनिवार) : शनि के लिए काला कपड़ा, साबुत उड़द, लोहा, अलसी, तेल, काला पुष्प, कस्तूरी, काले तिल, चमड़ा, काले कंबल का दान किया जाता है।

राहु (शनिवार) : राहु के लिए काला-नीला कपड़ा, कंबल, सरसों का दाना, राई, ऊनी कपड़ा, काले तिल व तेल का ‍दान किया जाता है।

केतु (मंगलवार) : केतु के लिए सात अनाज, काजल, झंडा, ऊनी कपड़ा, तिल आदि का दान किया जाता है।
विशेष : अपनी क्षमतानुसार एक या अधिक वस्तुओं का श्रद्धानुसार ग्रहों के तय वार को किसी गरीब को दान करना चाहिए। दान का बखान या उल्लेख करने से पुण्य कम हो जाता है।

नवग्रह शांति के अचूक उपाय स्नान करे




प्रयोग विधि :-
निम्न सामग्री को लेकर लगभग 8-10 लीटर पानी में डालकर खूब उबाल लें (लगभग १ घंटा ) । फिर इस पानी को रात भर ठंडा होने के लिए छोड़ दे । अगले दिन जब आप स्नान करने जाएँ तो इस liquid को छान कर किसी बर्तन में लगभग 2 ग्लास के आसपास निकाल कर ले जाये फिर जब आपका स्नान समाप्त हो जाये तो अंत में लगभग एक बाल्टी सादा पानी में इस liquid को मिलाकर खूब अच्छी तरह से स्नान करे , फिर देखें इसका चमत्कार !


सामग्री :-१) कच्चा चावल (अरवा चावल ) :- १०० ग्राम
२) सरसों :- १०० ग्राम
३) नागरमोथा :- १०० ग्राम
४) सुखा आंवला :- १०० ग्राम
५) हल्दी (गाँठ वाली ) :- ५० ग्राम
६) ढुबी (दूब घास ) :- १०० ग्राम लगभग
७) तुलसी पत्र :- ५१ से १०८ पत्ता
८) बेलपत्र :- ५१ से १०८ पत्ता ( ३-३ पत्तों वाला )



लाभ :-
* कोई भी इंसान कितना ही tension में क्यों न हो ?कोई भी कार्य यदि विफल हो रहा हो !उपरोक्त प्रयोग प्रतेक मनुष्य को शारीरिक , मानसिक एवं आर्थिक रूप में तुंरत लाभ प्रदान करता है ।
*यदि किसी भी ग्रह का कोई विशिस्ट अनुष्ठान करने का कोई सलाह दिए हो और उसे करने में आप असमर्थता अनुभव कर रहे हो तो भी ऊपर लिखे प्रयोग कर आप तुंरत लाभान्वित हो सकते है -

नवग्रह






यह देवी का नौ अक्षरी बीज मंत्र है। इस मंत्र के नौ अक्षर नवदुर्गा रूप नौ शक्तियां माने गए हैं। ये नौ शक्तियां ही नवग्रहों में से एक-एक ग्रह की नियंत्रक हैं। ये ग्रह हैं - सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु। इसलिए इस मंत्र का जप नवग्रह दोष शांति के लिए बहुत असरदार माना गया है।

यह मंत्र है -

ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे। 


















































































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Monday, 8 August 2011

नवग्रह

नवग्रह  टोटके


नवग्रह शांतिदायक टोटके-------   
सूर्यः-

१॰ सूर्यदेव के दोष के लिए खीर का भोजन बनाओ और रोजाना चींटी के बिलों पर रखकर आवो और केले को छील कर रखो ।
२॰ जब वापस आवो तभी गाय को खीर और केला खिलाओ ।
३॰ जल और गाय का दूध मिलाकर सूर्यदेव को चढ़ावो। जब जल चढ़ाओ, तो इस तरह से कि सूर्य की किरणें उस गिरते हुए जल में से निकल कर आपके मस्तिष्क पर प्रवाहित हो ।
४॰ जल से अर्घ्य देने के बाद जहाँ पर जल चढ़ाया है, वहाँ पर सवा मुट्ठी साबुत चावल चढ़ा देवें ।
चन्द्रमाः-
१॰ पूर्णिमा के दिन गोला, बूरा तथा घी मिलाकर गाय को खिलायें । ५ पूर्णमासी तक गाय को खिलाना है ।
२॰ ५ पूर्णमासी तक केवल शुक्ल पक्ष में प्रत्येक १५ दिन गंगाजल तथा गाय का दूध चन्द्रमा उदय होने के बाद चन्द्रमा को अर्घ्य दें । अर्घ्य देते समय ऊपर दी गई विधि का इस्तेमाल करें ।
३॰ जब चाँदनी रात हो, तब जल के किनारे जल में चन्द्रमा के प्रतिबिम्ब को हाथ जोड़कर दस मिनट तक खड़ा रहे और फिर पानी में मीठा प्रसाद चढ़ा देवें, घी का दीपक प्रज्जवलित करें । उक्त प्रयोग घर में भी कर सकते हैं, पीतल के बर्तन में पानी भरकर छत पर रखकर या जहाँ भी चन्द्रमा का प्रतिबिम्ब पानी में दिख सके वहीं पर यह कार्य कर सकते हैं ।
मंगलः-
१॰ चावलों को उबालने के बाद बचे हुए माँड-पानी में उतना ही पानी तथा १०० ग्राम गुड़ मिलाकर गाय को खिलाओ ।
२॰ सवा महीने में जितने दिन होते हैं, उतने साबुत चावल पीले कपड़े में बाँध कर यह पोटली अपने साथ रखो । यह प्रयोग सवा महीने तक करना है ।
३॰ मंगलवार के दिन हनुमान् जी के व्रत रखे । कम-से-कम पाँच मंगलवार तक ।
४॰ किसी जंगल जहाँ बन्दर रहते हो, में सवा मीटर लाल कपड़ा बाँध कर आये, फिर रोजाना अथवा मंगलवार के दिन उस जंगल में बन्दरों को चने और गुड़ खिलाये ।
बुधः-
१॰ सवा मीटर सफेद कपड़े में हल्दी से २१ स्थान पर “ॐ” लिखें तथा उसे पीपल पर लटका दें ।
२॰ बुधवार के दिन थोड़े गेहूँ तथा चने दूध में डालकर पीपल पर चढ़ावें ।
३॰ सोमवार से बुधवार तक हर सप्ताह कनैर के पेड़ पर दूध चढ़ावें । जिस दिन से शुरुआत करें उस दिन कनैर के पौधे की जड़ों में कलावा बाँधें । यह प्रयोग कम-से-कम पाँच सप्ताह करें ।
बृहस्पतिः-
१॰ साँड को रोजाना सवा किलो ७ अनाज, सवा सौ ग्राम गुड़ सवा महीने तक खिलायें ।
२॰ हल्दी पाँच गाँठ पीले कपड़े में बाँधकर पीपल के पेड़ पर बाँध दें तथा ३ गाँठ पीले कपड़े में बाँधकर अपने साथ रखें ।
३॰ बृहस्पतिवार के दिन भुने हुए चने बिना नमक के ग्यारह मन्दिरों के सामने बांटे । सुबह उठने के बाद घर से निकलते ही जो भी जीव सामने आये उसे ही खिलावें चाहे कोई जानवे हो या मनुष्य ।
शुक्रः-
१॰ उड़द का पौधा घर में लगाकर उस पर सुबह के समय दूध चढ़ावें । प्रथम दिन संकल्प कर पौधे की जड़ में कलावा बाँधें । यह प्रयोग सवा दो महीने तक करना है ।
२॰ सवा दो महीने में जितने दिन होते है, उतने उड़द के दाने सफेद कपड़े में बाँधकर अपने पास रखें ।
३॰ शुक्रवार के दिन पाँच गेंदा के फूल तथा सवा सौ उड़द पीपल की खोखर में रखें, कम-से-कम पाँच शुक्रवार तक ।
शनिः-
१॰ सवा महिने तक प्रतिदिन तेली के घर बैल को गुड़ तथा तेल लगी रोटी खिलावें ।
राहूः-
१॰ चन्दन की लकड़ी साथ में रखें । रोजाना सुबह उस चन्दन की लकड़ी को पत्थर पर घिसकर पानी में मिलाकर उस पानी को पियें ।
२॰ साबुत मूंग का खाने में अधिक सेवन करें ।
३॰ साबुत गेहूं उबालकर मीठा डालकर कोड़ी मनुष्यों को खिलावें तथा सत्कार करके घर वापस आवें ।
केतुः-
१॰ मिट्टी के घड़े का बराबर आधा-आधा करो । ध्यान रहे नीचे का हिस्सा काम में लेना है, वह समतल हो अर्थात् किनारे उपर-नीचे न हो । इसमें अब एक छोटा सा छेद करें तथा इस हिस्से को ऐसे स्थान पर जहाँ मनुष्य-पशु आदि का आवागमन न हो अर्थात् एकान्त में, जमीन में गड्ढा कर के गाड़ दें । ऊपर का हिस्सा खुला रखें । अब रोजाना सुबह अपने ऊपर से उबार कर सवा सौ ग्राम दूध उस घड़े के हिस्से में चढ़ावें । दूध चढ़ाने के बाद उससे अलग हो जावें तथा जाते समय पीछे मुड़कर नहीं देखें ।

Saturday, 6 August 2011

नवग्रह


                  
                                     
 
 

Thursday, 4 August 2011

नवग्रह शांतिदायक टोटके

नवग्रह शांतिदायक टोटके-------   
सूर्यः-

१॰ सूर्यदेव के दोष के लिए खीर का भोजन बनाओ और रोजाना चींटी के बिलों पर रखकर आवो और केले को छील कर रखो ।
२॰ जब वापस आवो तभी गाय को खीर और केला खिलाओ ।
३॰ जल और गाय का दूध मिलाकर सूर्यदेव को चढ़ावो। जब जल चढ़ाओ, तो इस तरह से कि सूर्य की किरणें उस गिरते हुए जल में से निकल कर आपके मस्तिष्क पर प्रवाहित हो ।
४॰ जल से अर्घ्य देने के बाद जहाँ पर जल चढ़ाया है, वहाँ पर सवा मुट्ठी साबुत चावल चढ़ा देवें ।
चन्द्रमाः-
१॰ पूर्णिमा के दिन गोला, बूरा तथा घी मिलाकर गाय को खिलायें । ५ पूर्णमासी तक गाय को खिलाना है ।
२॰ ५ पूर्णमासी तक केवल शुक्ल पक्ष में प्रत्येक १५ दिन गंगाजल तथा गाय का दूध चन्द्रमा उदय होने के बाद चन्द्रमा को अर्घ्य दें । अर्घ्य देते समय ऊपर दी गई विधि का इस्तेमाल करें ।
३॰ जब चाँदनी रात हो, तब जल के किनारे जल में चन्द्रमा के प्रतिबिम्ब को हाथ जोड़कर दस मिनट तक खड़ा रहे और फिर पानी में मीठा प्रसाद चढ़ा देवें, घी का दीपक प्रज्जवलित करें । उक्त प्रयोग घर में भी कर सकते हैं, पीतल के बर्तन में पानी भरकर छत पर रखकर या जहाँ भी चन्द्रमा का प्रतिबिम्ब पानी में दिख सके वहीं पर यह कार्य कर सकते हैं ।
मंगलः-
१॰ चावलों को उबालने के बाद बचे हुए माँड-पानी में उतना ही पानी तथा १०० ग्राम गुड़ मिलाकर गाय को खिलाओ ।
२॰ सवा महीने में जितने दिन होते हैं, उतने साबुत चावल पीले कपड़े में बाँध कर यह पोटली अपने साथ रखो । यह प्रयोग सवा महीने तक करना है ।
३॰ मंगलवार के दिन हनुमान् जी के व्रत रखे । कम-से-कम पाँच मंगलवार तक ।
४॰ किसी जंगल जहाँ बन्दर रहते हो, में सवा मीटर लाल कपड़ा बाँध कर आये, फिर रोजाना अथवा मंगलवार के दिन उस जंगल में बन्दरों को चने और गुड़ खिलाये ।
बुधः-
१॰ सवा मीटर सफेद कपड़े में हल्दी से २१ स्थान पर “ॐ” लिखें तथा उसे पीपल पर लटका दें ।
२॰ बुधवार के दिन थोड़े गेहूँ तथा चने दूध में डालकर पीपल पर चढ़ावें ।
३॰ सोमवार से बुधवार तक हर सप्ताह कनैर के पेड़ पर दूध चढ़ावें । जिस दिन से शुरुआत करें उस दिन कनैर के पौधे की जड़ों में कलावा बाँधें । यह प्रयोग कम-से-कम पाँच सप्ताह करें ।
बृहस्पतिः-
१॰ साँड को रोजाना सवा किलो ७ अनाज, सवा सौ ग्राम गुड़ सवा महीने तक खिलायें ।
२॰ हल्दी पाँच गाँठ पीले कपड़े में बाँधकर पीपल के पेड़ पर बाँध दें तथा ३ गाँठ पीले कपड़े में बाँधकर अपने साथ रखें ।
३॰ बृहस्पतिवार के दिन भुने हुए चने बिना नमक के ग्यारह मन्दिरों के सामने बांटे । सुबह उठने के बाद घर से निकलते ही जो भी जीव सामने आये उसे ही खिलावें चाहे कोई जानवे हो या मनुष्य ।
शुक्रः-
१॰ उड़द का पौधा घर में लगाकर उस पर सुबह के समय दूध चढ़ावें । प्रथम दिन संकल्प कर पौधे की जड़ में कलावा बाँधें । यह प्रयोग सवा दो महीने तक करना है ।
२॰ सवा दो महीने में जितने दिन होते है, उतने उड़द के दाने सफेद कपड़े में बाँधकर अपने पास रखें ।
३॰ शुक्रवार के दिन पाँच गेंदा के फूल तथा सवा सौ उड़द पीपल की खोखर में रखें, कम-से-कम पाँच शुक्रवार तक ।
शनिः-
१॰ सवा महिने तक प्रतिदिन तेली के घर बैल को गुड़ तथा तेल लगी रोटी खिलावें ।
राहूः-
१॰ चन्दन की लकड़ी साथ में रखें । रोजाना सुबह उस चन्दन की लकड़ी को पत्थर पर घिसकर पानी में मिलाकर उस पानी को पियें ।
२॰ साबुत मूंग का खाने में अधिक सेवन करें ।
३॰ साबुत गेहूं उबालकर मीठा डालकर कोड़ी मनुष्यों को खिलावें तथा सत्कार करके घर वापस आवें ।
केतुः-
१॰ मिट्टी के घड़े का बराबर आधा-आधा करो । ध्यान रहे नीचे का हिस्सा काम में लेना है, वह समतल हो अर्थात् किनारे उपर-नीचे न हो । इसमें अब एक छोटा सा छेद करें तथा इस हिस्से को ऐसे स्थान पर जहाँ मनुष्य-पशु आदि का आवागमन न हो अर्थात् एकान्त में, जमीन में गड्ढा कर के गाड़ दें । ऊपर का हिस्सा खुला रखें । अब रोजाना सुबह अपने ऊपर से उबार कर सवा सौ ग्राम दूध उस घड़े के हिस्से में चढ़ावें । दूध चढ़ाने के बाद उससे अलग हो जावें तथा जाते समय पीछे मुड़कर नहीं देखें ।

नवग्रह शान्ति

नवग्रह शान्ति के लिए जाप्य मंत्र :-
सूर्य के लिए            :  ॐ णमो सिद्धाणं |                       (10 हजार)
चन्द्र के लिए          :   ॐ णमो अरिहंताण |                  (10 हजार)
मंगल के लिए        :   ॐ णमो सिद्धाणं |                       (10 हजार)
बुध के लिए             :   ॐ णमो उवज्झायाण |              (10 हजार)
(गुरु) वृहस्पति          :   ॐ णमो आइरियाणं |                 (10 हजार)
शुक्र के लिए        :   ॐ णमो अरिहंताणं |                  (10 हजार)
शनि के लिए            :   ॐ णमो लोए सव्व साहूणं |    (10 हजार)
केतु के लिए             :   ॐ णमो सिद्धाणं |                      (10 हजार)
राहू के लिए              :   ॐ णमो अरिहंताणं,       ॐ णमो सिद्धाणं,
                                      ॐ णमो आइरियाणं, ॐ णमो उवज्झायाण
                                      ॐ णमो लोए सव्व साहूणं,      (10 हजार)

Tuesday, 2 August 2011

ग्रह शांति हेतु करें नवग्रह एवं दान


 

 
कुंडली (जातक/ जन्म पत्री) में यदि कोई ग्रह कमजोर है या अशुभ भाव का स्वामी हो एवं अन्य भाव को देख कर अपना अशुभ प्रभाव दे रहा हो तो उस ग्रह को शांत करना आवश्यक होता हैं जिस्से ग्रह अपना प्रतिकूल प्रभाव के स्थान पर अनुकूल प्रभाव प्रदान करें।
 
किसी भी ग्रह के प्रभाव को अनुकूल बनाने का सरल उपाय हैं उस ग्रह से संबंधिक वस्तु विशेष का जल प्रवाह या दान करना, जिस्से ग्रह के अशुभ प्रभाव को कम किया जासके।
 
ग्रह:- सूर्य (वार:- रविवार)
सूर्य ग्रह कि शांति हेतु गेहूँ, ताँबा, घी, गुड़, माणिक्य, लाल कपड़ा, मसूरकी दाल, कनेर या कमल के फूल, गौ दान करने से शुभ फल कि प्राप्ति होती हैं
 
ग्रह:- चंद्र (वार:- सोमवार)
चंद्र ग्रह कि शांति हेतु मोती, चाँदी, चावल, चीनी, जल से भरा हुवा कलश, सफेद कपड़ा, दही, शंख, सफेद फूल, साँड आदि का दान करने से शुभ फल कि प्राप्ति होती हैं
 
ग्रह:- मंगल (वार:- मंगलवार)
मंगल ग्रह कि शांति हेतु मूंगा, मसूर, घी, गुड़, लाल कपड़ा, रक्त चंदन, गेहूँ, केसर, ताँबा, लाल फूल का दान करने से शुभ फल कि प्राप्ति होती हैं
 
ग्रह:- बुध (वार:- बुधवार)
बुध ग्रह कि शांति हेतु हरे पन्ना, मूँग, घी, हरा कपड़ा, चाँदी, फूल, काँसे का बर्तन, कपूर का दान करने से शुभ फल कि प्राप्ति होती हैं
 
ग्रह:- बृहस्पति (गुरु) (वार:- गुरुवार)
बृहस्पति ग्रह कि शांति हेतु पुखराज, चने की दाल, हल्दी, पीला कपड़ा, गुड़, केसर, पीला फूल, घी और सोने की वस्तुओं का दान करने से शुभ फल कि प्राप्ति होती हैं
 
ग्रह:- शुक्र (वार:- शुक्रवार)
शुक्र ग्रह कि शांति हेतु श्वेत रत्न, चाँदी, चावल, दूध, सफेद कपड़ा, घी, सफेद फूल, धूप, अगरबत्ती, इत्र, सफेद चंदन दान करने से शुभ फल कि प्राप्ति होती हैं
 
ग्रह:- शनि (वार:- शनिवार)
शनि ग्रह कि शांति हेतु निलम, काला कपड़ा, साबुत उड़द, लोहा, यथा संभव दक्षिणा, तेल, काला पुष्प, काले तिल, चमड़ा, काले कंबल का दान करने से शुभ फल कि प्राप्ति होती हैं
 
ग्रह:- राहु (वार:- शनिवार)
राहु ग्रह कि शांति हेतु काला एवं गोमेद, नीला कपड़ा, कंबल, साबूत सरसों (राई), ऊनी कपड़ा, काले तिल व तेल का दान करने से शुभ फल कि प्राप्ति होती हैं
 
ग्रह:- केतु (वार:- मंगलवार)
केतु कि शांति हेतु सात प्रकार के वैदूर्य, अनाज, काजल, झंडा, ऊनी कपड़ा, तिल आदि का दान करने से शुभ फल कि प्राप्ति होती हैं
 
नोट:- * कृप्या दान अपनी श्रद्धा एवं क्षमता के अनुसार एक या अधिक वस्तुओं का कर सकते हैं। * दान ग्रहों के तय वार के अनुशार हि करें। * किसी गरीब या जरुरतमंद व्यक्ति को दान करना चाहिए। * अपने द्वारा दान का बखान या दिखावा करने हेतु दान करने से पुण्य कम हो जाता हैं।

Remedies

         

Remedies for a Sun :
Donate a ruby or another fine red jewel like red spinel, gold, copper, wheat, or sugar candy to poors or brahmins at 12:00 noon on a Sunday.

Fasting : On Sundays, especially during Sun transits and major or minor Sun Periods.
Mantra : To be chanted on Sunday morning at sunrise, especially during Sun transits and major or minor Sun Periods :
Surya mantra : "Om hram hreem hroum sah suryaya namah"

Result : The planetary deity Surya is pleased increasing courage and notoriety
Remedies for a Moon :
Donate a pearl or moonstone, conch shell, silver, water, cow`s milk or white rice to poors or Brahmins on Monday evening during the waxing moon.

Fasting : On Mondays, especially during Moon transits and major or minor Moon periods.

Mantra : To be chanted on Monday evening, especially, during major or minor Moon periods:
Chandra mantra : "Om shram sreem shraum sah chandraya namah"
Result : The planetary deity Chandra is pleased increasing mental health and peace of mind .
Remedies for a Mars :
Donate a red coral, wheat bread, sweets made from sugar mixed with white sesamum seeds, or masoor dal ( red lentils ) to a celibate on Tuesday at noon .

Fasting : On Tuesday, especially during Mars transits and major or minor Mars periods.

Mantra : To be chanted on Tuesday, one hour after sunrise, especially during major or minor Mars periods:
Mangala mantra : "Om kram kreem kroum sah bhaumaya namah"
Result : The planetary deity Mangala is pleased increasing determination and drive, and pro tecting one from violence.
Remedies for a Mercury :
Donate emerald or another fine green gem, small green lentils, a green pumpkin, a goat, or green clothes to a poor student on Wednesday at noon.

Fasting : On Wednesday, especially during Mercury transits and major or minor Mercury periods.

Mantra : To be chanted on Wednesday, two hours after sunrise, especially during major or minor Mercury periods :
Budha mantra : "Om bram breem broum sah budhaya namah"
Result : The planetary deity Budha is pleased increasing health and intelligence.
Remedies for a Jupiter:
Donate yellow sapphire or another yellow gem like yellow topaz, a peepal sapling, saffron, turmeric, sugar, a horse, or yellow flowers to a brahmin ( priest ) on Thursday morning.

Fasting : On Thursday , especially during Jupiter transits and major or minor Jupiter periods.

Mantra : To be chanted on Thursday, one hour before sunset , especially during major Jupiter periods:
Guru mantra : " Om jhram jhreem jroum sah gurave namah."
Result : The Planetary deity Brihaspati is pleased increasing satisfaction and facilitating marriage and childbirth.
Remedies for a Venus:
Donate a diamond or another colorless gem , silk clothes, dairy cream, yogurt, scented oils, sugar, cow dung, or camphor to a poor young woman on Friday evening.

Fastings : On Friday, especially during Venus transits and major or minor Venus periods.

Mantra : To be chanted on Friday at sunrise, especially during major or minor Venus periods.
Shukraseed mantra : "Aum dram drim draum sah shukraya namah"
Result : The planetary deity Shukra is propitiated increasing riches and conjugal bliss.
Remedies for a Shani:
Donate a blue sapphire or another blue to purple gemstone, iron, steel, leather, farm land, a black cow, a cooking utensils, a buffalo, black mustard or black sesamum seeds, to a poor man on Saturday evening.

Fasting : On Saturday during Saturn transits, and especially major or minor Saturn periods.

Mantra : To be chanted on Saturday, two hours and forty minutes before sunset, especially during major or minor Saturn periods:
Shani seed mantra : "Aum pram prim praum sah shanaisharaya namah "
Result: The planetary deity Shani is pleased insuring victory in quarrels, over coming chronic pain, and bringing success to those engaged in the iron or steel trade.
Remedies for a Rahu:
Donate a hessonite or another fine orange gem, a coconut, old coins or coal to a leper on Saturday.

Fasting : On the first Saturday of the waxing moon, especially during major or minor Rahu periods.

Mantra : To be chanted on Saturday, two hours after sunset, especially during major or minor Rahu periods
Shani mantra : " Aum bhram bhrim bhrim bhraum sah rahave namah. "
Result: The planetary deity Rahu is pleased granting victory over enemies, favour from the King or government, and reduction in diseases caused by Rahu.
Remedies for a Ketu:
Donate a cat's eye gem, a brown cow with white spots, colored blankets, or a dog to a poor on Wednessday. Fasting : On the first Thursday of the waxing moon, especially during major Ketu periods.
Mantra : To be chanted on Thursday at midnight, especially during major Ketu periods:
Ketu mantra : "Aum sram srim sraum sah ketave namah "
Result : The palanetary deity Ketu is pleased granting victory over enemies, favour from theKing or government, and reduction in diseases caused by Ketu.
 
 
NavGreh Homa and Yantra :
 
Do the homa of above mantra. 108 times or more, 1008 time is good. Keep yantra of weak planets is good.
 
 
TULA DANAM : Give danam to poors according to the weight of native.

Saturday, 30 July 2011

नवग्रह की शांति


 नीचे नवग्रहों की शांति के उपाय दिए गए है जिन्हें अपनाकर जातक नवग्रह की शांति कर सकता है

- प्रथम सूर्य जो सभी ग्रहों का नेतृत्व करता है | इसे पिता और आत्मा का कारक मानते है , उसकी शांति के लिए पिता का सम्मान करे | पिता के साथ रहे | सूर्य को अघ्र्य चढ़ाए |

- चन्द्र जो माता और मन की शांति का कारक होता है | इसकी शांति के लिए सोमवार को भगवान शंकर का दूध मिश्रित जल अथवा पंचामृत से अभिषेक करे एवं महाम्रत्युन्जय मंत्र अथवा ॐ नम : शिवाय का जाप करे | माता को सम्मान दे |

- मंगल युद्द का देवता है | इसकी शांति के लिए हनुमान जी को सिंदूर और चोला चढ़ाए | मंगल वार को हनुमान चालीसा का पाठ करे |

- बुध ग्रह बुद्धि और व्यापार जगत का कारक है | बुध अच्छा होने से व्यक्ति ज्योतिषी , व्यापारी , वकील , डाक्टर होता है | बुध ग्रह शांति के लिए गणेश जी को मोदक के लड्डू चढ़ाए | जिनके संतान न हो वे संतान गोपाल स्त्रोत का पाठ करे |

- गुरु आध्यात्मिक ज्ञान का कारक है | अत : ब्राम्हण देवता , गुरु का सम्मान करे | वृहस्पति वार को ॐ ब्रम्ह वृहस्पताये नम : का जाप करे |

- शुक्र ग्रह जो सौन्दर्य , स्वास्थ्य , कला और काम का कारक होता है | उसके सम्मान के लिए पौक्षिक पदार्थो का सेवन करे | धुले हुए स्वच्छ वस्त्र पहने | हीरा रत्न धारण करे अथवा अमेरिकन जेरिकोन धारण करे | इत्र का प्रयोग करे | ब्राम्हणों की कन्याओ को भोजन कराए और यथासंभव दक्षिणा दे | सौन्दर्य प्रसाधन तथा श्रंगार की चीजो का दान शुक्रवार को करे | वैभव लक्ष्मी का व्रत करे| गाय को नित्य घास डाले |


- शनि ग्रह जो यमराज है तथा मोक्ष का कारक है | शनि कर्मो का फल देता है | इसके लिए काले कुत्ते को रोटी डाले | शनिवार को तिल मिश्रित तेल और लोहे का दान करे | गरीबो की सेवा करे | शनि अपना सुफल देगा |

- राहू ग्रह राजनीती का कारक होता है | यह कक्ष देता है और गुस युक्ति बल का कारक होता है| इसकी शांति के लिए भूरे कुत्ते को रोटी खिलाए | खोटा सिक्का नदी में प्रवाहित करे | ॐ रा : रहावे : मंत्र का राहू की महादशा , अन्तर्दशा में जाप करे |

- केतु ग्रह की शांति के लिए उसकी महादशा , अन्तर्दशा में जानवरों को भोजन कराए और चीटियों और चिडियों को दान करे

Saturday, 23 July 2011

ग्रहों की दक्षिणा

ग्रहों की दक्षिणा
सूर्य की प्रसन्नता के लिए धेनु, 
चंद्रमा की प्रसन्नता के लिए शंख,
मंगल की प्रसन्नता के लिए लाल बैल
, बुध की प्रसन्नता के लिए सोना,
गुरु की प्रसन्नता के लिए पीताम्बर,

शुक्र की प्रसन्नता के लिए सफ़ेद घोड़ा, 
शनि की प्रसन्नता के लिए काली गौ,
राहु की प्रसन्नता के लिए बकरा ब्रह्मण को दान में देना चाहिए.

रंग चिकित्सा

रंग चिकित्सा 
सूर्य की लाल (Infra red), पराबैंगनी (Ultravoilet) किरणों की कीटाणुनाशक क्षमता से हमारे वैदिक ऋषि भलीभांति परिचित थे। वास्तु नियमों में पूर्व दिशा स्नानागार के लिए प्रशस्त मानी गई है। वैदिक काल में उषा काल में स्नान का प्रावधान था।
इस प्रकार विटामिन डी से भरपूर बाल सूर्य की किरणों का सेवन व्यक्ति करता था और स्वस्थ रहता था। योग में सूर्य नमस्कार और आसन का भी यही उद्देश्य है। त्राटक विधा में बाल सूर्य को एकटक देखे जाने का प्रावधान है। सूर्य की धातु सोना और ताँबा होती है। आयुर्वेदाचार्य ताँबे के पात्र में रात भर रखा हुआ पानी सुबह पीने की सलाह देते हैं अत: सूर्य की सप्त रश्मियां पूर्ण स्वास्थ्य प्रदान करने वाली हैं।
हमारे ऋषि-मुनि भी सूर्य की किरणों में निहित असीम रोगनाशक शक्तियों से अवगत थे। ऋग्वेद और अथर्ववेद में सूर्य भगवान से आरोग्य के आशीर्वाद की कामना के लिए अनेक श्लोक हैं।
"ह्वद्रोगं मम सूर्य हरिमागं च नाशम नम: सूर्यात्र शातात्र सर्व रोग विनाशने आयु: आरोग्यमैश्वर्य देहि देव नमोùस्तुते।" "
हे सूर्य नारायण! मेरे ह्वदय रोग का नाश करो। सर्व रोगों का विनाश कर शांति प्रदान करने वाले, हे, सूर्य देव! आपको शत्-शत् नमस्कार है। हे सूर्य भगवान् आप हमें आयु, आरोग्य और ऎश्वर्य दें।"
रंग चिकित्सा में विभिन्न रंगों वाली बोतलों में तैयार किए गए जल के प्रयोग से इलाज किया जाता है। एक विशिष्ट रंग की बोतल में पानी भरकर उसे धूप में रखा जाता है और फिर इस जल का सेवन किया जाता है। इस विधि में बीमारी और अंग विशेष की पुष्टि के लिए प्रयुक्त रंग की तुलना, ज्योतिष में ग्रहों और उन्हें प्रदत्त रंगों से की जाए तो आश्चर्यजनक तारतम्य देखने को मिलता है।
लाल रंग :
लाल रंग की बोतल में तैयार जल का प्रयोग शरीर पर ऊष्ण प्रभाव के लिए होता है। यह बलदायक होता है तथा विद्युत प्रभाव के कारण शरीर को शक्ति प्रदान करता है।
ज्योतिष में लाल रंग मंगल का प्रतीक होता है। जन्म पत्रिका में यदि मंगल सुदृढ़ स्थिति में नहीं हो तो इसका तात्पर्य है मंगल ग्रह की रश्मि की कमी। ऎसा व्यक्ति शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर होता है।
एक लाल रंग की कांच की बोतल लेकर उसमें साफ पानी भरकर धूप में रख दें और शाम को उस जल को पी लें। यही प्रयोग रात में करें। लाल रंग की कांच की बोतल में पानी भरकर रात को अपने घर की छत पर रख दें और सुबह इस जल को पी लें। इससे कमजोर ग्रह की स्थिति में सुधार होगा और आपको लाभ मिलेगा।
पीला रंग :
पीले रंग की बोतल में तैयार पानी विशेष रूप से यकृत और प्लीहा पर होता है। यह यकृत की शिथिलता को दूर करता है। ज्योतिष में पीला रंग बृहस्पति देव का माना जाता है। मेडिकल एस्ट्रोलॉजी में बृहस्पति का यकृत (रूi1er) पर आधिपत्य माना गया है। यदि जन्म पत्रिका में दुर्बल बृहस्पति छठे भाव में (छठा भाव रोग का भाव है) स्थित हों तो व्यक्ति यकृत की बीमारी से पीç़डत होता है। पीलिया की शिकायत भी जन्मपत्रिका में पीç़डत बृहस्पति के कारण होती है।
एक पीले रंग की कांच की बोतल लेकर उसमें साफ पानी भरकर धूप में रख दें और शाम को उस जल को पी लें। यही प्रयोग रात में करें। पीले रंग की कांच की बोतल में पानी भरकर रात को अपने घर की छत पर रख दें और सुबह इस जल को पी लें। इससे कमजोर ग्रह की स्थिति में सुधार होगा और आपको लाभ मिलेगा।
हरा रंग :
जल चिकित्सा में हरे रंग को राजा माना गया है। यह रंग गर्मी और सर्दी को संतुलित करता है। इसका प्रयोग रोगाणुनाशक के रूप में और विजातीय पदार्थ को शरीर से बाहर निकालने में होता है, जो एलर्जी का कारण बनते हैं। ज्योतिष में हरा रंग बुध ग्रह का रंग है। बुध शरीर की प्रतिरोधक क्षमता, एलर्जी आदि के कारक हैं।
जन्म पत्रिका में बुध यदि कमजोर हो या पूर्ण अस्त हों तो व्यक्ति सर्दी, जुकाम आदि का शिकार जल्दी-जल्दी होता है तथा धूल, पराग आदि आदि कणों से एलर्जी की शिकायत रहती है। एक हरे रंग की कांच की बोतल लेकर उसमें साफ पानी भरकर धूप में रख दें और शाम को उस जल को पी लें। यही प्रयोग रात में करें। हरे रंग की कांच की बोतल में पानी भरकर रात को अपने घर की छत पर रख दें और सुबह इस जल को पी लें। इससे कमजोर ग्रह की स्थिति में सुधार होगा और आपको लाभ मिलेगा।
नीला रंग :
रंग चिकित्सा में नीले रंग से आवेशित जल का प्रयोग स्नायु तंत्र में दुर्बलता, डिप्रेशन (Depression), मिर्गी, कुष्ठ रोगादि के उपचार के लिए प्रयोग किया जाता है। मेडिकल एस्ट्रोलॉजी में शनि को स्नायु तंत्र, मिर्गी आदि का कारक माना गया है। जन्मपत्रिका में शनि यदि पीç़डत अवस्था में हों तो व्यक्ति को स्नायु तंत्र से संबंधित रोगों का सामना करना प़डता है। यदि शनि बलवान हो एवं बुध से संयोग कर लें तो व्यक्ति (Neuro Surgeon) हो सकता है। एक नीले रंग की कांच की बोतल लेकर उसमें साफ पानी भरकर धूप में रख दें और शाम को उस जल को पी लें। यही प्रयोग रात में करें।
नीले रंग की कांच की बोतल में पानी भरकर रात को अपने घर की छत पर रख दें और सुबह इस जल को पी लें। इससे कमजोर ग्रह की स्थिति में सुधार होगा और आपको लाभ मिलेगा।
इस तथ्य से सामान्यजन अनजान हो सकते हैं परन्तु वैदिक काल में ही वैद्यों को ज्योतिष का पर्याप्त ज्ञान होता था। जिस प्रकार आयुर्वेद में ज्योतिष का उल्लेख है, उसी प्रकार ज्योतिष शास्त्र में भी कुछ श्लोकों में आयुर्वेद के नुस्खों का सुंदर प्रयोग किया गया है। आ
धुनिक व्यक्ति, वैदिक कालीन इस तथ्य को जानकर भी इससे अनजान बने हुए हैं। रात्रि में देर से सोना और सुबह देर से उठना, उन्होंने अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया हुआ है। वे यह तो चाहते हैं कि स्वस्थ रहें परन्तु बाल सूर्य की किरणों के अभाव को ब्यूटी पार्लर में जाकर Sauna Bath से पूरा करते हैं। आधुनिकता का एक और उदाहरण ब़डे होटलों में रूपये देकर सूर्य स्नान का आनन्द लिया जाना भी है। हमें समझना होगा, अपने ऋषियों के ज्ञान की पराकाष्ठा को।