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Wednesday, 17 August 2011

नव ग्रह


सूर्य देव की शांति हेतु उपाय :

* मंत्र जाप : " ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः " - जप संख्या २८०००

* अर्घ्य दें : नियमित रूप से सूर्य उदय के एक घंटे के अन्दर सूर्य देव को ढाई लीटर पानी में थोडा-सा रोली , अक्षत , केसर ,गुड एवं कुछेक लाल फूल मिलाकर जल दें ।
* टोटका : प्रत्येक रात्रि में भोजन इत्यादि करने के पश्चात एक कागज़ का टुकडा लेकर उसे जला दें, फिर उसे दूध डालकर बुझा दें । ऐसा लगातार तेंतालीस दिनों तक करें । इसका प्रभाव सूर्य देव की शान्ति में एक इंजेक्शन की तरह करता है ।

चंद्र देव की शान्ति हेतु उपाय :
* मंत्र जाप : " ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः " - जप संख्या ४४०००
*टोटका : प्रत्येक रात्रि में सोने के लिए जाने से पहले अपने सिरहाने में पानी से भरा बर्तन रख कर सो जाएँ तथा उसे सुबह उठते ही कीकर के पेड़ के जड़ में ड़ाल दें ।

मंगल देव की शान्ति हेतु उपाय :


* मंत्र जाप : " ॐ क्राम क्रीम् क्रौम सः भौमाय नमः " - जप संख्या ४००००
*टोटका : नियमित रूप से दिन में रेवडी एवं बताशा को पानी में बहायें । साथ ही मीठा रोटी बनाकर उसे कुत्तों को खिलाएं ।

बुध देव के शान्ति हेतु उपाय :

* मंत्र जाप : " ॐ ब्राम ब्रीम ब्रौम सः बुधाय नमः " - जप संख्या ३६०००
* टोटका : छेद वाला सिक्का पानी में बहायें एवं स्टील का छल्ला छोटी उंगली में पहने ।



बृहस्पति देव की शांति हेतु उपाय :


* मंत्र जाप : " ॐ ग्राम ग्रीम ग्रौम सः गुरवे नमः " - जप संख्या ७६०००
* टोटका : प्रत्येक दिन स्नान करने के बाद अपने नाभि में केसर एवं चन्दन मिलाकर लगायें ।

शुक्र देव की शांति हेतु उपाय :

* मंत्र जाप : " ॐ द्राम द्रीम द्रौम सः शुक्राय नमः " - जप संख्या ६४०००
* टोटका : प्रत्येक दिन चींटी को चीनी दें एवं शुध्ध घी , दही एवं कपूर पूजा-स्थानों में चढाएं ।

शनि देव की शांति हेतु उपाय :


* मंत्र जाप : " ॐ प्राम प्रीम प्रौम सः शनये नमः " - जप संख्या ९२०००
* टोटका : प्रत्येक शनिवार को स्नान करने से पहले पूरे शरीर में सरसों का तेल लगाकर ही स्नान किया करें एवं संभव हो तो शनिवार को ही संध्या में हनुमान जी का पूजा अर्चना कर प्रसाद वितरण कर स्वयं भी प्रसाद ग्रहण कर लिया करें ।

राहू देव की शांति हेतु उपाय :

* मंत्र जाप : " ॐ भ्राम भ्रीम भ्रौम सः राहवे नमः " - जप संख्या ७२०००
* टोटका : प्रत्येक दिन सुबह में जौ को दूध से धोकर चलते हुए पानी में बहायें एवं संभव हो तो खोटे सिक्के को पानी में बहायें ।

केतु देव की शांति हेतु उपाय :

* मंत्र जाप : " ॐ स्त्राम स्त्रीम स्त्रौम सः केतवे नमः " - जप संख्या ६८०००
* टोटका : नियमित रूप से काले कुत्ते को रोटी में तेल एवं गुड लगाकर दिन के समय खिलाएं तथा संभव हो तो गणेश जी का पूजा अर्चना करते रहा करें ।
*

Tuesday, 2 August 2011

Remedies to the Planets

Remedy to SUN:
Every Tuesday worship Lord Kumara Swamy between 6am to 8am, at least 10 minutes read or listen Asttotharam of Lord Kumara Swamy.
In a month once perform abhishekam to Kumara Swamy at temple.

Remedy to MOON:
Every Friday worship Goddess Maha Lakshmi between 6am to 8am, at least 10 minutes read or listen Asttotharam of Goddess Maha Lakshmi.
On full moon day perform kunkumaarchana to Goddess Maha Lakshmi.

Remedy to MARS:
Every Monday go to sivalayam and perform archana to Goddess Parvathi Ammavaru between 6am to 8am.
On full moon day perform kunkumaarchana to Goddess Parvathi Ammavaru.

Remedy to MERCURY:
Every Thursday go to any vaishnava temple, between 6am to 8am, perform archana to God and Goddess.
On shukla or krishna ekadasi, distribute curd rice as prasadam to devotees at vaishnava temple.

Remedy to JUPITER:
Every Wednesday go to any vaishnava temple, between 6am to 8am, perform archana to God and Goddess.
On shukla or krishna ekadasi, distribute curd rice as prasadam to devotees at vaishnava temple.

Remedy to VENUS:

Every Satarday go to sivalayam and worship Goddess Parvathi Ammavaru and Lord Eswar at morning between 6am to 8am.
On masa siva ratri do abhishekam to Lord Eswar.

Remedy to SATURN:
Every Friday go to sivalayam and worship Lord Eswar and Goddess Parvathi Ammavaru, between 6am to 8am.
On full moon day perform kunkumaarchana to Goddess Parvathi Ammavaru.

Monday, 25 July 2011

मंत्रों से करें ग्रहों की शांति


हर व्यक्ति के जीवन में कोई न कोई परेशानी अवश्य होती है। इन परेशानियों के कई कारण हो सकते हैं। यदि जन्म कुंडली का अध्ययन किया जाए तो हम पाएंगे कि किसी न किसी अशुभ ग्रह के कारण यह सब परेशानी हमारे जीवन में आती है। इन परेशानियों को समाप्त करने का सबसे आसान उपाय है इन ग्रहों को शांत करने वाले मंत्र। कुंडली के अनुसार जो भी ग्रह अशुभ प्रभाव डाल रहा हो यदि उसके मंत्र का रोज विधि-विधान से जप किया जाए तो उसका अशुभ प्रभाव कम हो जाता है। सभी ग्रहों के मंत्र इस प्रकार हैं-

मंत्र

- सूर्य मंत्र- ऊँ  घृणि सूर्याय नम:।

- चन्द्र मंत्र-ऊँ सों सोमाय नम:।

- मंगल मंत्र-ऊँ  अंगारकाय नम:।

- बुध मंत्र - ऊँ बुं बुधाय नम:।

- गुरु  मंत्र- ऊँ बृं बृहस्पत्ये नम:।

- शुक्र मंत्र- ऊँ शुं शुक्राय नम:।

- शनि मंत्र- ऊँ शं शनैश्चराय नम:।

- राहु मंत्र- ऊँ रां राहवे नम:।

- केतु मंत्र- ऊँ कें केतवे नम:।

Saturday, 23 July 2011

ग्रहों की शांति






ग्रहों की शांति
सूर्य : ग्रहों का राजा सूर्य है। इसके कमजोर होने से व्यक्ति आर्थिक संकट ग्रस्त रहता है। इसकी अशुभता से राज भय, चर्म रोग, तथा नेत्र दृष्टि कमजोर हो सकती है।
अशुभता दूर करने के उपाय
-तांबे के पात्र में जल, कुककुम, लाल पुष्प डालकर प्रात: सूर्य को अघ्र्य दें।
-लाल कपड़े में गेहूं, गुड़, तांबे का बर्तन दान करें।
-आदित्य ह्दय स्तोत्र का पाठ करें।

चंद्रमा : चंद्रमा मन का कारक है। क्षीण रहने से जातक का मन विचलित, तनावग्रस्त, मनोबल में गिरावट देता है।
अशुभता दूर करने के उपाय
-पूर्णिमा का व्रत करें तथा भोजन चंद्र उदय होने के पश्चात करें।
-सोमवार पूर्णिमा को चावल, चीनी, सफेद वस्त्र दान करें।
-श्री सूक्त, लक्ष्मी सूक्त का पाठ करें।
-सोमवार को शिव-पार्वती की मूर्तियों को दूध से स्नान कराएं।
-चंद्र ग्रहण पर सफेद वस्त्र, चांदी, चीनी, दक्षिणा सहित दान करें।

मंगल : मंगल ग्रह सेनापति और भूमिपुत्र है। ऋण, कर्जदारी, चोट, एक्सीडेंट, चोरी तथा लड़ाई-झगड़े से परेशानी देता है।
अशुभता दूर करने के उपाय
-मंगलवार को गेहूं की रोटी पर गुड़, लाल फल, अरहर की भीगी हुई दाल गाय को खिलाएं।
-मंगलवार के दिन सांडों को गुड़ खिलाएं।
-भुने चने तथा गुड़ लाल मुंह वाले बंदरों को खिलाएं।
-अश्विनी नक्षत्र मंगलवार के दिन तांबे के पात्र में शक्कर भरकर दान करें।

बुध ग्रह : अपने साथी ग्रह के फल देता है।
अशुभता दूर करने के उपाय
-बुधवार को उबले मूंग नीबू का रस मिलाकर खाएं।
-चावल एवं मूंग की खिचड़ी बुधवार को भिखारियों को खिलाएं।
-बुधवार को गणेशजी की प्रतिमा पर "? गं गणपतये नम:" मंत्र जपते हुए दूर्वा चढ़ाएं।
-बुधवार को हरी घास, शाक-सब्जी गाय को खिलाएं।

गुरू : शुभ तथा देवताओं के गुरू हैं। निर्बल रहने पर अविद्या, संतान चिंता, दुर्भाग्य, अपमान, अशुभफल तथा धन की तंगी देता है।
अशुभता दूर करने के उपाय
-हर गुरूवार को भीगी चना दाल, गुड़, केला गाय को खिलाएं।
-केले के पेड़ की पूजा करें। गुरू गायत्री मंत्र या "? गुं गुरूवे नम:" का जप करें।
-गुरू-पुष्य योग में कांसे की कटोरी में घृत भरकर दक्षिणा सहित ब्राह्मण को दान करें।
-प्रत्येक गुरूवार को बेसन का लड्डू विष्णु-लक्ष्मी मंदिर में चढ़ाएं।
-गुरूवार को पीले वस्त्र में चने की दाल, कच्ची हल्दी की गांठ, गुड़, दक्षिणा सहित शाम को मंदिर में चढ़ाएं।

शुक्र : ऎश्वर्यदायक ग्रह है। शुक्र निर्बल होने से यौन रोग, धातु क्षीणता, कुरूपता, ऎश्वर्य के साधनों की कमी देता है।
अशुभता दूर करने के उपाय
-प्रत्येक शुक्रवार को खीर चीनी मिलाकर गाय को खिलाएं।
-पूर्णिमा, शुक्रवार को गन्ने के रस से भगवान शिव का अभिषेक करें।
-महिला आश्रम में सिलाई या बुनाई मशीन शुक्रवार को दान करें।
-शुक्र को सुबह सफेद वस्त्र में चावल, चीनी, मीठा फल, मिठाई, दक्षिणा सहित ब्राह्मण की कन्या को दें।
-सुहागिन स्त्री को बिंदी, लाल चूडियां, सिंदूर आदि सुहाग चीजे दान करें तथा कुंवारी कन्या को भोजन कराकर तिलक लगाएं।

शनि : शनि कर्म का कारक ग्रह है। जैसा कर्म वैसा फल देना शनि का कार्य है। इसकी ढैया, साढ़ेसाती विशेष प्रभावित करते हैं। अकस्मात संकट, दुख आदि स्थिति शनि के निर्बल होने पर बनती है।
अशुभता दूर करने के उपाय
-शनि स्तोत्र सूर्यास्त के बाद नियमित रूप से पढ़ें।
-घोड़े के नाल का छल्ला या नौका के कील का छल्ला दाएं हाथ की मध्यमा अंगुली में शनिवार को प्रदोष काल में धारण करें।
-शनिवार शाम पीपल पेड़ के नीचे सरसों तेल का दीपक जलाएं। धूप, अगरबत्ती करें पीपल की परिक्रमा करें।
-स्टील की कटोरी में तेल भरकर उसमें अपनी परछाई देखकर दान करें तथा शनि की प्रतिमा का सरसों तेल से स्नान कराएं।
-काले वस्त्र में, काले तिल, काली उड़द दाल, सरसों तेल दान करें।

-नोरतन बाफना



















































































Thursday, 21 July 2011

आहार एवं सुगंध


किसी भी ग्रह की प्रतिकूलता व्यक्ति को अशांत बना देती है। ग्रह संबंधी आहार या सुगंध का प्रयोग
करके आप प्रतिकूल ग्रह को अनुकूल बना सकते हैं। शास्त्रों में ग्रहों की प्रकृति के अनुसार उनके आहार और सुगंधों का उल्लेख मिलता है। इनमें नौ ग्रहों के अलग-अलग आहार और सुगंध हैं। जिनका प्रयोग करके हम ग्रहजनित दोषों के प्रभाव में कमी ला सकते हैं।

ग्रह संबंधी आहार और सुगंध

-सूर्य की अनुकूलता के लिए आप अपने आहार में केसर, गेहूं, आम, चिकने पदार्थ तथा शहद का उपयोग कर लें। केसर तथा गुलाब के इत्र के उपयोग से भी सूर्य की अनुकूलता प्राप्त होती है।

-चंद्रमा की अनुकूलता के लिए गन्ना, सफेद गुड़, शक्कर, दूध या दूध से बने पदार्थ या सफेद रंग की मिठाई का सेवन करें। चमेली तथा रातरानी का परफ्यूम या इत्र चंद्र संबंधी पीड़ा को शांत करता है।

-मंगल की पीड़ा को कम करने के लिए आप अपने आहार में मूंग, मसूर की दाल, प्याज, गुड़, अचार, जौ या सरसों का उपयोग करें। लाल चंदन के इत्र या तेल के प्रयोग से भी मंगल प्रसन्न होते हैं।

-बुध को इलायची सर्वाधिक प्रिय है। मटर, ज्वार, मोठ, कुलथी, हरी दालें, मूंग, हरी सब्जियां बुध के दोष को कम करती हैं। चंपा के इत्र या तेल के प्रयोग से बुध प्रसन्न होते हैं।

-बृहस्पति की कृपा के लिए चने की दाल, बेसन, मक्का, केला, हल्दी, सेंधा नमक, पीली दालों का प्रयोग कर लें। पीले फूल, केसर या केवड़े का दूध प्रयोग करने से बृहस्पति की कृपा प्राप्त होगी।

-शुक्र की कृपा प्राप्ति के लिए त्रिफला, दालचीनी, कमल गट्टे, मिश्री, मूली या सफेद शलजम का उपयोग आहार में करते रहें। सफेद फूल, चंदन या कपूर की सुगंध शुभ फलदायी है। चंदन के तेल में कपूर डालकर उपयोग करना भी श्रेष्ठ रहता है

-शनि की कृपा प्राप्त करने के लिए तिल, उड़द की दाल, काली मिर्ची, अलसी एवं मूंगफली का तेल, अचार, लौंग, तेजपत्ता तथा काले नमक का उपयोग आहार में करें। कस्तूरी, लोबान तथा सौंफ की सुगंध शनि को अति पसंद है।

-राहु एवं केतु की पीड़ा से बचने के लिए उड़द, तिल तथा सरसों का प्रयोग लाभदायक होता है। काली गाय का घी, कस्तूरी की सुगंध इन्हें प्रिय है।

-रविवार को उड़द, सोमवार को खीर या दूध, मंगलवार को चूरमा या हलुवा, बुध को हरी सब्जी, गुरूवार को पीले चने की दाल या बेसन का प्रयोग, शुक्रवार को मीठा दही, शनि को चने का सेवन करने से सभी ग्रहों की शांति होती है।

-रेखा सिंह

Tuesday, 19 July 2011

NAV GRIHA VATIKA


navagraha plants are 

-
1. Sun - Arka - Calotropis procera


2. Moon -Palasha - Butea monosperma


3. Mars - Kadira - Acacia catechu


4. Mercury- Apamarga -Achyranthes Aspera


5. Jupitar - Ashwatha - Ficus religiosa


6. Venus -Udumbara - Ficus racemosa


7. Saturn - Shami - Acacia ferugenia


8. Rahu - Kusha grass - Desmostachya bipinnata


9.Kethu - Durva grass - Cynodon dactylon 


Friday, 15 July 2011

नौ-ग्रहों की शांति हेतु कुछ विशिस्ट उपाय *


सूर्य देव की शांति हेतु उपाय :
* मंत्र जाप : " ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः " - जप संख्या २८०००

* अर्घ्य दें : नियमित रूप से सूर्य उदय के एक घंटे के अन्दर सूर्य देव को ढाई लीटर पानी में थोडा-सा रोली , अक्षत , केसर ,गुड एवं कुछेक लाल फूल मिलाकर जल दें ।
* टोटका : प्रत्येक रात्रि में भोजन इत्यादि करने के पश्चात एक कागज़ का टुकडा लेकर उसे जला दें, फिर उसे दूध डालकर बुझा दें । ऐसा लगातार तेंतालीस दिनों तक करें । इसका प्रभाव सूर्य देव की शान्ति में एक इंजेक्शन की तरह करता है ।

चंद्र देव की शान्ति हेतु उपाय :
* मंत्र जाप : " ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः " - जप संख्या ४४०००
*टोटका : प्रत्येक रात्रि में सोने के लिए जाने से पहले अपने सिरहाने में पानी से भरा बर्तन रख कर सो जाएँ तथा उसे सुबह उठते ही कीकर के पेड़ के जड़ में ड़ाल दें ।

मंगल देव की शान्ति हेतु उपाय :


* मंत्र जाप : " ॐ क्राम क्रीम् क्रौम सः भौमाय नमः " - जप संख्या ४००००
*टोटका : नियमित रूप से दिन में रेवडी एवं बताशा को पानी में बहायें । साथ ही मीठा रोटी बनाकर उसे कुत्तों को खिलाएं ।

बुध देव के शान्ति हेतु उपाय :


* मंत्र जाप : " ॐ ब्राम ब्रीम ब्रौम सः बुधाय नमः " - जप संख्या ३६०००
* टोटका : छेद वाला सिक्का पानी में बहायें एवं स्टील का छल्ला छोटी उंगली में पहने ।



बृहस्पति देव की शांति हेतु उपाय :


* मंत्र जाप : " ॐ ग्राम ग्रीम ग्रौम सः गुरवे नमः " - जप संख्या ७६०००
* टोटका : प्रत्येक दिन स्नान करने के बाद अपने नाभि में केसर एवं चन्दन मिलाकर लगायें ।

शुक्र देव की शांति हेतु उपाय :

* मंत्र जाप : " ॐ द्राम द्रीम द्रौम सः शुक्राय नमः " - जप संख्या ६४०००
* टोटका : प्रत्येक दिन चींटी को चीनी दें एवं शुध्ध घी , दही एवं कपूर पूजा-स्थानों में चढाएं ।

शनि देव की शांति हेतु उपाय :


* मंत्र जाप : " ॐ प्राम प्रीम प्रौम सः शनये नमः " - जप संख्या ९२०००
* टोटका : प्रत्येक शनिवार को स्नान करने से पहले पूरे शरीर में सरसों का तेल लगाकर ही स्नान किया करें एवं संभव हो तो शनिवार को ही संध्या में हनुमान जी का पूजा अर्चना कर प्रसाद वितरण कर स्वयं भी प्रसाद ग्रहण कर लिया करें ।

राहू देव की शांति हेतु उपाय :

* मंत्र जाप : " ॐ भ्राम भ्रीम भ्रौम सः राहवे नमः " - जप संख्या ७२०००
* टोटका : प्रत्येक दिन सुबह में जौ को दूध से धोकर चलते हुए पानी में बहायें एवं संभव हो तो खोटे सिक्के को पानी में बहायें ।

केतु देव की शांति हेतु उपाय :

* मंत्र जाप : " ॐ स्त्राम स्त्रीम स्त्रौम सः केतवे नमः " - जप संख्या ६८०००
* टोटका : नियमित रूप से काले कुत्ते को रोटी में तेल एवं गुड लगाकर दिन के समय खिलाएं तथा संभव हो तो गणेश जी का पूजा अर्चना करते रहा करें ।

नवग्रह एवं दान




नवग्रह एवं दान


कुंडली (जातक/ जन्म पत्री) में यदि कोई ग्रह कमजोर है या अशुभ भाव का स्वामी हो एवं अन्य भाव को देख कर अपना अशुभ प्रभाव दे रहा हो तो उस ग्रह को शांत करना आवश्यक होता हैं जिस्से ग्रह अपना प्रतिकूल प्रभाव के स्थान पर अनुकूल प्रभाव प्रदान करें।

किसी भी ग्रह के प्रभाव को अनुकूल बनाने का सरल उपाय हैं उस ग्रह से संबंधिक वस्तु विशेष का जल प्रवाह या दान करना, जिस्से ग्रह के अशुभ प्रभाव को कम किया जासके।

ग्रह:- सूर्य
वार:- रविवार
सूर्य ग्रह कि शांति हेतु गेहूँ, ताँबा, घी, गुड़, माणिक्य, लाल कपड़ा, मसूरकी दाल, कनेर या कमल के फूल, गौ दान करने से शुभ फल कि प्राप्ति होती हैं
ग्रह:- चंद्र
वार:- सोमवार
चंद्र ग्रह कि शांति हेतु मोती, चाँदी, चावल, चीनी, जल से भरा हुवा कलश, सफेद कपड़ा, दही, शंख, सफेद फूल, साँड आदि का दान करने से शुभ फल कि प्राप्ति होती हैं
ग्रह:- मंगल
वार:- मंगलवार
मंगल ग्रह कि शांति हेतु मूंगा, मसूर, घी, गुड़, लाल कपड़ा, रक्त चंदन, गेहूँ, केसर, ताँबा, लाल फूल का दान करने से शुभ फल कि प्राप्ति होती हैं
ग्रह:- बुध
वार:- बुधवार
बुध ग्रह कि शांति हेतु हरे पन्ना, मूँग, घी, हरा कपड़ा, चाँदी, फूल, काँसे का बर्तन, कपूर का दान करने से शुभ फल कि प्राप्ति होती हैं
ग्रह:- बृहस्पति (गुरु)
वार:- गुरुवार
बृहस्पति ग्रह कि शांति हेतु पुखराज, चने की दाल, हल्दी, पीला कपड़ा, गुड़, केसर, पीला फूल, घी और सोने की वस्तुओं का दान करने से शुभ फल कि प्राप्ति होती हैं
ग्रह:- शुक्र
वार:- शुक्रवार
शुक्र ग्रह कि शांति हेतु श्वेत रत्न, चाँदी, चावल, दूध, सफेद कपड़ा, घी, सफेद फूल, धूप, अगरबत्ती, इत्र, सफेद चंदन दान करने से शुभ फल कि प्राप्ति होती हैं
ग्रह:- शनि
वार:- शनिवार
शनि ग्रह कि शांति हेतु निलम, काला कपड़ा, साबुत उड़द, लोहा, यथा संभव दक्षिणा, तेल, काला पुष्प, काले तिल, चमड़ा, काले कंबल का दान करने से शुभ फल कि प्राप्ति होती हैं
ग्रह:- राहु
वार:- शनिवार
राहु ग्रह कि शांति हेतु काला एवं नीला कपड़ा, गोमेद, कंबल, साबूत सरसों (राई), ऊनी कपड़ा, काले तिल व तेल का दान करने से शुभ फल कि प्राप्ति होती हैं
ग्रह:- केतु
वार:- मंगलवार
केतु कि शांति हेतु सात प्रकार के वैदूर्य, अनाज, काजल, झंडा, ऊनी कपड़ा, तिल आदि का दान करने से शुभ फल कि प्राप्ति होती हैं
  • कृप्या दान अपनी श्रद्धा एवं क्षमता के अनुसार एक या अधिक वस्तुओं का कर सकते हैं।
  • दान ग्रहों के तय वार के अनुशार हि करें।
  • किसी गरीब या जरुरतमंद व्यक्ति को दान करना चाहिए।
  • अपने द्वारा दान का बखान या दिखावा करने हेतु दान करने से पुण्य कम हो जाता हैं।


जप मंत्र

जप मंत्र
1. ओम ब्रह्मा मुरारिस्त्रिपुरान्तकारी भानुःशशि भूमिसुतो बुधश्च ।
2. गुरूश्च शुक्रः शनिराहुकेतवः सर्वेग्रहाः शान्तिकरा भवन्तु ।
3. ओम सर्वे ग्रहाः शान्तिकरा भवन्तु ।
4. ओम सर्वेभ्यो ग्रहेभ्यो नमः

ग्रहों के लिए दान-वस्तुएँ

सूर्यः गेहूँ, जौ, गुड़, ताँबा, रक्त-वस्त्र, कमल, चन्दन, मूंगा।
चन्द्रमाः चावल, श्वेत-वस्त्र, चाँदी, शङ्ख, चन्दन, पुष्प, चीनी, मिश्री, घी, दही, मोती।
मंगलः ताँबा, सीसा, गेहूँ, रक्त-वस्त्र, चन्दन, पुष्प, गुड़, मसूर-दाल, मूंगा।
बुधः काँस, हाथी-दाँत, हरा-वस्त्र, पन्ना, सोना, कपूर, जौ, घी, षट्-रस भोजन।
गुरुः पीला-वस्त्र, सोना, पुस्तक, मधु, शक्कर, छाता।
शुक्रः सोना, चाँदी, चावल, घी, श्वेत-वस्त्र, चन्दन, दही, सुगन्धित वस्तु, मिश्री।
शनिः काला वस्त्र, लोहा, काली उड़द, नीलम, सरसों-तैल, कुलथी, काले-पुष्प।
राहुः अभ्रक, काला तिल, काला वस्त्र, कम्बल, तैल।
केतुः काला तिल, काला वस्त्र, ध्वजा, सप्त-धान्य, कम्बल, तैल।

नव ग्रह foods

---------------------रविवार को चना
,------------------- सोमवार को खीर अथवा दूध,
--------------------मंगलवार को चूरमा तथा हलवा
,------------------- बुधवार को हरी सब्जी,
--------------------गुरूवार को चने की दाल अथवा बेसन का प्रयोग,
--------------------शुक्रवार को मीठा दही और
--------------------शनिवार को उड़द का सेवन करने से सभी ग्रह प्रसन्न रहते हैं।

नवग्रह सुगंध द्वारा शांति


सुगंध द्वारा ग्रह शांति इस प्रकार हैं-

सूर्य: --------- केसर तथा गुलाब का इत्र या सुगंध का उपयोग करने से सूर्य प्रसन्न होते हैं।

चंद्र: ---------- चमेली और रातरानी का इत्र या सुगंध चंद्रमा की पीड़ा को कम करते हैं।

मंगल: --------- लाल चंदन का इत्र, तेल अथवा सुगंध मंगल को प्रसन्न करते हैं।

बुध: ------------- इलायची तथा चंपा की सुगंध बुध को प्रिय होती है- चंपा का इत्र तथा तेल का प्रयोग बुध की दृष्टि से उत्तम है।

गुरू: ------------- पीले फूलों की सुगंध, केसर और केवड़े का इत्र गुरू की कृपा प्राप्ति के लिए उत्तम है।

शुक्र: ------------ सफेद फूल, चंदन और कपूर की सुगंध लाभकारी होती है। चंपा, चमेली और गुलाब की तीक्ष्ण खुशबू से शुक्र नाराज हो जाते हैं।हल्की खुशबू के परफ्यूम ही काम में लेने चाहिए। 
  



शनि: ------------कस्तुरी, लोबान तथा सौंफ की सुगंध शनि देव को पसंद है।

राहु और केतु: ----काली गाय का घी व कस्तुरी का इत्र इन्हें पसंद है।

नवग्रह अनुकंपा के उपाय


ग्रहों की शांति का सर्वोत्तम उपाय क्या हो?
इस विषय में ज्योतिष में अनेक सिद्धांत प्रचलित हैं। मंत्र-तंत्र-यंत्र, टोटके, दान-पुण्य, रंग और अनेक प्रकार के कर्मकांडों के माध्यम से ग्रह शांति की जाती है। प्राय: सभी की कुंडली मे कहीं न कहीं अनिष्ट ग्रह विराजते ही हैं। आहार और सुगंध के माध्यम से ग्रह शांति की जा सकती है। ग्रहों की प्रकृति के अनुसार आहार और सुगंध का इस्तेमाल किया जाए, तो ग्रहों के प्रकोप में न्यूनता लाई जा सकती है। आहार और सुगंध द्वारा ग्रह शांति इस प्रकार हैं-

सूर्य: सूर्य की अनुकूलता प्राप्त करने के लिए जातक को अपने आहार में गेहूं, आम, गुड़ आदि का उपयोग करना चाहिए। केसर तथा गुलाब का इत्र या सुगंध का उपयोग करने से सूर्य प्रसन्न होते हैं।

चंद्र: चंद्रमा मन का कारक है। मन की प्रसन्नता जीवन को सुखी व स्वस्थ बना देती है। चंद्रमा की अनुकूलता के लिए गन्ना, शक्कर, दूध और दूध से बने पदार्थ, नमक, आइसक्रीम और मिठाइयों को अपने आहार में शामिल करना चाहिए। इसके अतिरिक्त चमेली और रातरानी का इत्र या सुगंध चंद्रमा की पीड़ा को कम करते हैं।

मंगल: मंगल की पीड़ा को कम करने के लिए जातक को अपने आहार में गुड़, मसूर की दाल, अनार, चाय, कॉफी, जौ और शहद का उपयोग करना चाहिए। लाल चंदन का इत्र, तेल अथवा सुगंध मंगल को प्रसन्न करते हैं।

बुध: बुध को इलायची सर्वाधिक प्रिय है। इलायची तथा चंपा की सुगंध बुध को प्रिय होती है। मटर, ज्वार, कुलपी, हरी दालें, मूंग, हरी सब्जियां आहार में लेनी चाहिए। चंपा का इत्र तथा तेल का प्रयोग बुध की दृष्टि से उत्तम है।

गुरू: बृहस्पति की कृपा प्राप्ति के लिए चना, चना दाल, बेसन, मक्का, केला, हल्दी, सैंधा नमक, पीले दालें और फलों को सम्मिलित करना चाहिए। पीले फूलों की सुगंध, केसर और केवड़े का इत्र गुरू की कृपा प्राप्ति के लिए उत्तम है।

शुक्र: शुक्र की कृपा प्राप्ति के लिए त्रिफला, दाल चीनी, कमलगट्टा, मिश्री, मूली और सफेद शलजम का प्रयोग करना चाहिए। सफेद फूल, चंदन और कपूर की सुगंध लाभकारी होती है। चंपा, चमेली और गुलाब की तीक्ष्ण खुशबू से शुक्र नाराज हो जाते हैं। हल्की खुशबू के परफ्यूम ही काम में लेने चाहिए।
शनि: शनि की कृपा प्राप्त करने के लिए तिल, उड़द, कालीमिर्च, मूंगफली का तेल, आचार, लौंग, तेजपत्ता तथा काले नमक का उपयोग करना चाहिए। कस्तुरी, लोबान तथा सौंफ की सुगंध शनि देव को पसंद है।

राहु और केतु: राहु और केतु की पीड़ा से बचने के लिए उड़द, तिल और सरसों का प्रयोग लाभदायक रहता है। काली गाय का घी व कस्तुरी का इत्र इन्हें पसंद है। रविवार को चना, सोमवार को खीर अथवा दूध, मंगलवार को चूरमा तथा हलवा, बुधवार को हरी सब्जी, गुरूवार को चने की दाल अथवा बेसन का प्रयोग, शुक्रवार को मीठा दही और शनिवार को उड़द का सेवन करने से सभी ग्रह प्रसन्न रहते हैं।

* नवग्रह शांति के अचूक उपाय *




प्रयोग विधि :-
निम्न सामग्री को लेकर लगभग 8-10 लीटर पानी में डालकर खूब उबाल लें (लगभग १ घंटा ) । फिर इस पानी को रात भर ठंडा होने के लिए छोड़ दे । अगले दिन जब आप स्नान करने जाएँ तो इस liquid को छान कर किसी बर्तन में लगभग 2 ग्लास के आसपास निकाल कर ले जाये फिर जब आपका स्नान समाप्त हो जाये तो अंत में लगभग एक बाल्टी सादा पानी में इस liquid को मिलाकर खूब अच्छी तरह से स्नान करे , फिर देखें इसका चमत्कार !


सामग्री :-१) कच्चा चावल (अरवा चावल ) :- १०० ग्राम
२) सरसों :- १०० ग्राम
३) नागरमोथा :- १०० ग्राम
४) सुखा आंवला :- १०० ग्राम
५) हल्दी (गाँठ वाली ) :- ५० ग्राम
६) ढुबी (दूब घास ) :- १०० ग्राम लगभग
७) तुलसी पत्र :- ५१ से १०८ पत्ता
८) बेलपत्र :- ५१ से १०८ पत्ता ( ३-३ पत्तों वाला )



लाभ :-
* कोई भी इंसान कितना ही tension में क्यों न हो ?कोई भी कार्य यदि विफल हो रहा हो !उपरोक्त प्रयोग प्रतेक मनुष्य को शारीरिक , मानसिक एवं आर्थिक रूप में तुंरत लाभ प्रदान करता है ।
*यदि किसी भी ग्रह का कोई विशिस्ट अनुष्ठान करने का कोई सलाह दिए हो और उसे करने में आप असमर्थता अनुभव कर रहे हो तो भी ऊपर लिखे प्रयोग कर आप तुंरत लाभान्वित हो सकते है -- आचार्य रंजन



नवरत्न एवं उसके समतुल्य प्रभाव प्रदान करने वाले वनस्पतियाँ ** -


ग्रह - रत्न - वनस्पति - दिन
सूर्य - मानिक (Ruby) - बेल का जड़ - रविवार
चंद्रमा - मोती (Pearl) - खिरनी का जड़ - सोमवार
मंगल - मूंगा (Coral) - अनंतमूल का जड़ - मंगलवार
बुध - पन्ना(Emarald) - विधारा का जड़ - बुधवार
बृहस्पति - पुखराज(Topaz) - केला का जड़ - गुरुवार
शुक्र - हीरा (Diamond) - शर्पुन्खा का जड़ - शुक्रवार
शनि - नीलम (Blue Shapphire) - बिच्छु का जड़ - शनिवार
राहू - गोमेदGomed ) - श्वेत चन्दन का जड़ - शनिवार
केतु - लहसुनिया (Cats Eye) - अश्वगंधा का जड़ - बुधवार

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Planets and Diseases

Planets and Diseases

PlanetsDiseases
MarsConstipation, Flatulence, Liver trouble, Blind piles, Skin disease, etc
MercuryNervous diseases, ulcers, acidity, blood pressure, irritation etc
VenusBronchial problems, Whooping cough, asthma, dyspepsia, sexual diseases, delirium, obsession, procreative problems etc.
SaturnNervous and mental disorder, neurosis, neuralgia, sciatica, rheumatism, excretory diseases
JupiterHepatitis, biliousness, celic palpitation, toothache, insomnia
RahuHyper acidity, burning sensation, trouble from vayu(gas), brain disorder, sexual excesses and alcoholism
KetuSkin diseases, nervous debility, Small pox, urinary problems etc.

Herbs and Its Planetary Configurations

HerbPlanetary Configuration
Sindhula (Nichinda)
Chartetree : vitex trifolia
Saturn + Mars
KalmeghSaturn+Mars+Moon
GurmarRahu
BrahmiMars+Weak Moon
Anant MulWeak Mars
ArjunaMars+Sun
Jenosia AshokaJupiter+Mars
BilvaSun+Mercury
NimbaMars
ChirayataMars+Saturn
Bahera BibhitakiWeak Venus
AmlabiVenus+Mercury+Moon
TerminaliaSun+Mars+Mercury+Jupiter
AshwagandhaKetu+Mercury

The creepers and plants used to counterbalance the negative influences of astral positions are believed to grow under the direct influences of the Planets. Accordingly they have the power to fight against the harmful effects of the planets on human lives.
Ayurveda is intimately bound up with Astrology and with the planetary rulerships of herbs, gems and other natural items. The skillful use of the correct remedy, or determined by its planetary rulership, can neutralise the effects of malefic planets on our health and genral well-being.

havan as samidha

Indeed, havan is a scientific method to cure disease though inhalation of the vapour and smoke emanating through the havan. Plants were classified into 9 groups to match the 9 planets for offering into the havan as samidha. Table  shows the classification as given in Garuda Purana.

Samidha for Planets
Planet
Vernacular Name
Latin Name
sun
ArK (Niaoar)
Calotropis procera
Moon
Palash (Dhak)
Butea monosperma
Mars
Khadir (Khair)
Acacia catechu
Mercury
Apamarg (LaQira)
Achyranthus aspera
Jupiter
Pipal
Ficus religiosa
Venus
Audumbar (gular)
Ficus glomerata
Saturn
Shami
Prosopis cineraria
Rahu
Durva
Cynadon dactylon
Ketu
Kusha
Desmostachya biptnoata

Herbal & Elemental Associations for Each Astrological Sign

Each Astrological Sign has its own associated element, herbs, colors, and stones. Try using them in your spells (or own personal altar or garden) to create a favorable environment for a particular person's (or your own) astrological sign!

ARIES
Element: Fire
Herbs: Arnica, bayberry, honeysuckle, hops, geranium, peppermint, witch hazel, rhubarb.
Stone: Diamond
Color: Red

TAURUS
Element: Earth
Herbs: Alder, brambles, cloves, columbine, daisy, elder, foxglove, mint, poppy, rose, violet.
Stone: Emerald
Colors: Pale blue, green, pink

GEMINI
Element: Air
Herbs: Aniseed, azalea, balm, caraway, fern, lavender, lily-of-the-valley, myrtle.
Stone: Agate
Colors: All bright colors, esp. yellow

CANCER
Element: Water
Herbs: Geranium, honeysuckle, lilies, saxifrage, water lilies, white poppy, white rose.
Stone: Pearl
Colors: Pale blue, silver, smoky gray

LEO
Element: Fire
Herbs: Almond, celandine, juniper, laurel, marigold, passion flower, peppermint, rosemary, rue, saffron, sunflower
Stone: Ruby
Colors: Red, orange, yellow

VIRGO
Element: Earth
Herbs: All those ruled by Gemini, esp. bright blue and yellow flowers.
Stone: Sardonyx
Colors: Brown, dark gray, navy blue

LIBRA
Element: Air
Herbs: All herbs & flowers associated with Taurus except for the red and pink flowers.
Stone: Sapphire
Colors: Pale blue, green, pink

SCORPIO
Element: Water
Herbs: All associated with Aries, esp. dark red flowers, figwort, peppermint, and wild thistle.
Stone: Opal
Colors: Maroon, dark red.

SAGITTARIUS
Element: Fire
Herbs: Balm, borage, cinnamon, dandelion, mosses, mulberry, sage, thistles.
Stone: Topaz
Colors: Dark blue, royal purple

CAPRICORN
Element: Earth
Herbs: Amaranthus, belladonna, comfrey, hemlock, pansy, quince, wolfsbane.
Stones: Amethyst, turquoise
Colors: Black, dark brown, dark green, gray

AQUARIUS
Element: Air
Herbs: All herbs associated with Taurus and Capricorn, esp. elder, goldenrod, orchids, and sorrel.
Stones: Amethyst, aquamarine
Color: Electric blue

PISCES
Element: Water
Herbs: All herbs associated with Cancer and Sagittarius, and dandelions, lichens, mosses, water lilies, pinks, and sage.
Stone: Moonstone
Color: Sea-green


नव ग्रह, मंत्र



 
Sun Sunday “Om Suryaya Namaha”
Or
“Om Bhur Bhuva Swaha Tat Savitur Varenyam Bhargo Devasya Dhimahe Dhiyo Yonah prachodayat”
Moon Monday “Om Chandraya Namaha”
Mars Tuesday “Om Mangalaya Namaha”
Or
“Om Angarakaya Namaha”
Mercury Wednesday “Om Budhaya Namaha”
Jupiter Thursday “Om Guruve Namaha”
Venus Friday “Om Shukraya Namaha”
Saturn Saturday “Om Shaneshcharaya Namaha”
Rahu   “Om Rahave Namaha”
Ketu   “Om Ketave Namaha”

Thursday, 14 July 2011

herbs नव ग्रह

HerbPlanetary Configuration
Sindhula (Nichinda)
Chastetree: Vitex Trifolia
Saturn + Mars
Kalmegh
The Creat: Andrographis Paniculata
Saturn + Mars + Moon
Gurmar
Gymnema Sylvestre
Rahu
Bramhi
Indian Pennywort: Bacopa Monnieri
Mars + Weak Moon
Ananta Mul
Hemidesmus lndicus
Weak Mars
Arjuna
Arjuna: Terminalia Arjuna
Mars + Sun
Jenosia Ashoka
Ashoka: Saraca Indica
Jupiter + Mars
Bilva
Bael: Aegle Marmelos
Sun + Mercury
Nimba
Azadirachta Indica
Mars
Chirayata
Indian Gentian: Gentiana Chirata
Mars + Saturn
Bahera Bibhitaki
Terminalia Belerica
Weak Venus
Amlaki
Indian Gooseberry: Emblica Officinalis
Venus + Mercury + Moon
Terminalia Sun + Mars + Mercury + Jupiter
Aswagandha
Winter Cherry: Withania Somnifera
Ketu + Mercury
Makaradwaja
rejuvenative alchemical compound
For all nine stars
The creepers and plants used to counterbalance the negative influences of astral positions are believed to grow under the direct influences of the planets. Accordingly they have the power to fight against the harmful effects of the planets on human lives.