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Friday, 16 September 2011

शिवलिंग

विभिन्न शिवलिंग की पुजा (Shiva Ling of Many Type)


शिव जी की पूजा का जो महात्म्य है। लेकिन इससे भी अधिक महत्व शिवलिंग की पूजा का बताया गया है। शास्त्रों के अनुसार मृत्युलोक में भगवान शिव मानव कल्याण के लिए विभिन्न रूप धारण कर प्रत्येक रूप में मानव कल्याण का कार्य करते हैं। इनकी पूजा सरल व सुगम होने की वजह से सभी स्त्री-पुरुष तन-मन-धन से इस माह में इनकी पूजा करते हैं। पर अगर आपको अपनी पूजा का फल तुरंत चाहिए और आप भगवान की कृपा पाना चाहते हैं, तो विभिन्न अभिलाषाओं के लिए अलग पदार्थों से बने शिवलिंग की पूजा करना श्रेयस्कर माना गया है।


अगर साधक को प्रॉपर्टी की कामना हो, तो उसे फूलों से बने शिवलिंग की पूजा करनी चाहिए।

अगर साधक चाहता है कि उसका व उसके परिवार का स्वास्थ्य अच्छा रहे, तो उसे जौ, गेहूं, चावल का समान भागों में मिला आटे से शिवलिंग बनाकर उसकी पूजा करनी चाहिए।

इसी प्रकार अगर साधक की यह कामना है कि वह जहां जाए, वहां लोगों से उसके संबंध मधुर रहें और उसकी बात भी सब माने, तो उसे सोंठ, मिर्च, पीपल का चूर्ण, नमक समभाग में लेकर शिवलिंग बनाकर उसकी पूजा करने से लाभ होगा।

अगर साधक अपनी सारी अभिलाषाओं की पूर्ति करना चाहता है, तो तिल के शिवलिंग बनाकर पूजा करना ठीक रहेगा।

प्रेम संबंधों में सफलता के लिए गुड़ की डली के शिवलिंग बनाकर पूजा करें, तो लाभ होगा।

वंश वृद्धि के लिए बांस के अंकुर को शिवलिंग बनाकर उसकी पूजा करने से लाभ होगा।

रजत पत्र के शिवलिंग भी धन-धान्य बढ़ाते हैं

Saturday, 3 September 2011

विभिन्न शिवलिंग



शिव जी की पूजा का जो महात्म्य है। लेकिन इससे भी अधिक महत्व शिवलिंग की पूजा का बताया गया है। शास्त्रों के अनुसार मृत्युलोक में भगवान शिव मानव कल्याण के लिए विभिन्न रूप धारण कर प्रत्येक रूप में मानव कल्याण का कार्य करते हैं। इनकी पूजा सरल व सुगम होने की वजह से सभी स्त्री-पुरुष तन-मन-धन से इस माह में इनकी पूजा करते हैं। पर अगर आपको अपनी पूजा का फल तुरंत चाहिए और आप भगवान की कृपा पाना चाहते हैं, तो विभिन्न अभिलाषाओं के लिए अलग पदार्थों से बने शिवलिंग की पूजा करना श्रेयस्कर माना गया है।


अगर साधक को प्रॉपर्टी की कामना हो, तो उसे फूलों से बने शिवलिंग की पूजा करनी चाहिए।

अगर साधक चाहता है कि उसका व उसके परिवार का स्वास्थ्य अच्छा रहे, तो उसे जौ, गेहूं, चावल का समान भागों में मिला आटे से शिवलिंग बनाकर उसकी पूजा करनी चाहिए।

इसी प्रकार अगर साधक की यह कामना है कि वह जहां जाए, वहां लोगों से उसके संबंध मधुर रहें और उसकी बात भी सब माने, तो उसे सोंठ, मिर्च, पीपल का चूर्ण, नमक समभाग में लेकर शिवलिंग बनाकर उसकी पूजा करने से लाभ होगा।

अगर साधक अपनी सारी अभिलाषाओं की पूर्ति करना चाहता है, तो तिल के शिवलिंग बनाकर पूजा करना ठीक रहेगा।

प्रेम संबंधों में सफलता के लिए गुड़ की डली के शिवलिंग बनाकर पूजा करें, तो लाभ होगा।

वंश वृद्धि के लिए बांस के अंकुर को शिवलिंग बनाकर उसकी पूजा करने से लाभ होगा।

रजत पत्र के शिवलिंग भी धन-धान्य बढ़ाते हैं

Saturday, 6 August 2011

पारद शिवलिंग

पारद शिवलिंग पूजन विधि एवं साधना
घर में पारद शिवलिंग सौभाग्य, शान्ति, स्वास्थ्य एवं सुरक्षा के लिए अत्यधिक सौभाग्यशाली है। दुकान, ऑफिस व फैक्टरी में व्यापारी को बढाऩे के लिए पारद शिवलिंग का पूजन एक अचूक उपाय है। शिवलिंग के मात्र दर्शन ही सौभाग्यशाली होता है। इसके लिए किसी प्राणप्रतिष्ठा की आवश्कता नहीं हैं। पर इसके ज्यादा लाभ उठाने के लिए पूजन विधिक्त की जानी चाहिए।
       पूजन की विधि यहाँ पर दी जा रही है।
  • सर्वप्रथम शिवलिंग को सफेद कपड़े पर आसन पर रखें।
  • स्वयं पूर्व-उत्तर दिशा की ओर मुँह करके बैठ जाए।
  • अपने आसपास जल, गंगाजल, रोली, मोली, चावल, दूध और हल्दी, चन्दन रख लें।
  • सबसे पहले पारद शिवलिंग के दाहिनी तरफ दीपक जला कर रखो।
  • थोडा सा जल हाथ में लेकर तीन बार निम्न मन्त्र का उच्चारण करके पी लें।

प्रथम बार    ॐ मुत्युभजाय नम:
दूसरी बार    ॐ नीलकण्ठाय: नम:
तीसरी बार    ॐ रूद्राय नम:
चौथी बार    ॐशिवाय नम:
  • हाथ में फूल और चावल लेकर शिवजी का ध्यान करें और मन में ''ॐ नम: शिवाय`` का 5 बार स्मरण करें और चावल और फूल को शिवलिंग पर चढ़ा दें।
  • इसके बाद ॐ नम: शिवाय का निरन्तर उच्चारण करते रहे।
  • फिर हाथ में चावल और पुष्प लेकर ''ॐ पार्वत्यै नम:`` मंत्र का उच्चारण कर माता पार्वती का ध्यान कर चावल पारा शिवलिंग पर चढ़ा दें।
  • इसके बाद ॐ नम: शिवाय का निरन्तर उच्चारण करें।
  • फिर मोली को और इसके बाद बनेऊ को पारद शिवलिंग पर चढ़ा दें।
  • इसके पश्चात हल्दी और चन्दन का तिलक लगा दे।
  • चावल अर्पण करे इसके बाद पुष्प चढ़ा दें।
  • मीठे का भोग लगा दे।
  • भांग, धतूरा और बेलपत्र शिवलिंग पर चढ़ा दें।
  • फिर अन्तिम में शिव की आरती करे और प्रसाद आदि ले लो।
जो व्यक्ति इस प्रकार से पारद शिवलिंग का पूजन करता है इसे शिव की कृपा से सुख समृद्धि आदि की प्राप्ति होती है।

भगवान पारदेश्वर का महाअभिषेक
उत्तर की और मुँह करके शिव का पूजन करें, शिवजी के आगे पूरब को न बैंठें, बल्कि उत्तर को ही बैंठें। चम्पा और केतकी के फूल छोड़कर सब फूल शिवजी के ऊपर चढ़ाये जा सकते हैं। व्यापार-वृद्धि, आकस्मिक धन के लिए यह कुबेर प्रयोग सम्पम्न होता है। शुक्रवार के दिन किसी स्वच्छ पात्र में पारद-पारस गुटिकास्थापित कर दें, फिर एक सौ आठ कमल के ताजे पुष्प पहले से ही मंगा कर पास रख लें फिर एक कमल का पुष्प हाथ में लें और निम्न मंत्र का ग्यारह बार उच्चारण कर, कमल का पुष्प पारद-पारस गुटिका पर चढ़ा दें। प्रयोग सम्पन्न होने पर उन कमल की पंखुड़ियों को पूरे घर में बिखरे दें। अभाववश कमल के पुष्प की जगह गुलाब का पुष्प भी प्रयोग में लाया जा सकता है। मंत्र इस प्रकार है -
                                                                  ॐ ऐं ऐं श्रीं श्रीं हीं हीं ॐ
    इस प्रकार श्रावणमास में यह प्रयोग सात दिन तक करने पर व्यापार में आश्चर्यजनक वृद्धि होने लगती है और जीवन में आकस्मिक एवं अतुलनीय धन प्राप्त होता है। इस अभिषेक से प्राप्त जल अनेक बीमारियों को नष्ट करने वाला होता


शिवलिंग

शिवलिंग के प्रकार व लाभ
  1. '' गन्धलिंग `` दो भाग कस्तुरी, चार भाग चन्दन और तीन भाग कुंकम से बनाए जाते हैं शिव-सायुज्यार्थ इसकी अर्चना की जाती है।
  2. शर्करामयलिंग - सुखप्रद है।
  3. सोंढ, मिर्च पीपल के चूर्ण में नमक मिलाकर जो शिवलिंग बनाया जाता है। उसका प्रयोग व वशीकरण आदि अभिचार में किया जाता है।
  4. यज्ञकुण्ड से ली गई भस्म से जो शिवलिंग बनता है उसका पूजन अभीष्ट  देने वाला होता है।
  5. बाँस के अंकुर को शिवलिंग के समान काटकर पूजा करने से पंथ वृद्धि होती है।
  6. दही को कपडे में बांधकर निचोड़ देने के पश्चात उससे जो शिवलिंग बनता है उसका पूजन लक्ष्मी और सुख देने वाला होता है।
  7. गुड़ में अन्न चिपकाकर शिवलिंग बनाकर पूजा करने से कृषि उत्पादन अधिक होता है।
  8. किसी भी फल को शिवलिंग के समान रखकर उसकी पूजा करने से फलवाटिका में अधिक फल होता हैं।
  9. दुर्वा को शिवलिंगाकार गूंथकर उसकी पूजा करने से अकाल-मृत्यु का भय दूर होता है।
  10. मोती के बने शिवलिंग का पूजन स्त्री की भाग्य वृद्धि करता है।
  11. स्वर्ण निर्मित शिवलिंग समृद्धि का वर्द्धन करता है।
  12. चांदी का शिवलिंग धन-धान्य बढ़ाता है।
  13. पीपल का शिवलिंग दरिद्रता का निवारण करता है।
  14. लहसुनिया का शिवलिंग शत्रुओं का नाशक होता है, विजयदाता है।

Saturday, 30 July 2011

एक मात्र प्राचिन दुर्लभ सफेद जनेऊधारी शिवलिंग




ज्योतिषाचार्य पंडित कात्तु दीक्षित के अनुसार सफेद जेनऊधारी शिवलिंग की पूजा करने से त्वरीत फल की प्राप्ति होती है। पंडित वासु महाराज भी इस बात को स्वीकारते है कि विधि विधान से शिव भक्त भगवान भोलेनाथ की उपासना करे तो सबसे जल्दी प्रसन्न होने वाले देवताओं में भगवान भोलेनाथ का नाम अव्वल नम्बर पर आता है। ताप्ती सूर्यपुत्री होने के कारण धरती पर सबसे पहले अवतरीत हुई थी इस कारण भी सबसे अधिक तपस्या ताप्ती - तपती - तापी के नाम पूज्यनीय नदी के निर्मल जल की बहती धारा में की जाती है।