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Monday, 30 January 2012

शनिदेव

-----शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए ये करें उपाय----

---- शनि दिन में शनि चालीसा का पाठ, शनि मंत्रों का जाप एवं हनुमान चालीसा का पाठ करें।
---- इस दिन पीपल के पेड़ पर सात प्रकार का अनाज चढ़ाएं और सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
----- तिल से बने पकवान, उड़द से बने पकवान गरीबों को दान करें।
----- उड़द दाल की खिचड़ी दरिद्रनारायण को दान करें।
------- अमावस्या की रात्रि में 8 बादाम और 8 काजल की डिब्बी काले वस्त्र में बांधकर संदूक में रखें।
----- शनि यंत्र, शनि लॉकेट, काले घोड़े की नाल का छल्ला धारण करें।
----- इस दिन नीलम या कटैला रत्न धारण करें। जो फल प्रदान करता है।
----- काले रंग का श्वान इस दिन से पालें और उसकी सेवा करें।
------शनिवार का व्रत यूं तो आप वर्ष के किसी भी शनिवार के दिन शुरू कर सकते हैं। इस व्रत का पालन करने वाले को शनिवार के दिन प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करके शनिदेव की प्रतिमा की विधि सहित पूजन करनी चाहिए।
-----शनिवार के दिन शनि देव की विशेष पूजा होती है। शहर के हर छोटे बड़े शनि मंदिर में सुबह ही आपको शनि भक्त देखने को मिल जाएंगे।
---- शनि भक्तों को इस दिन शनि मंदिर में जाकर शनि देव को नीले लाजवंती का फूल, तिल, तेल, गु़ड़ अर्पण करना चाहिए। शनि देव के नाम से दीपोत्सर्ग करना चाहिए।
-----शनिवार के दिन शनिदेव की पूजा के पश्चात उनसे अपने अपराधों एवं जाने-अनजाने जो भी आपसे पाप कर्म हुआ हो उसके लिए क्षमा याचना करनी चाहिए।
-----शनि महाराज की पूजा के पश्चात राहु और केतु की पूजा भी करनी चाहिए।
-----इस दिन शनि भक्तों को पीपल में जल देना चाहिए और पीपल में सूत्र बांधकर सात बार परिक्रमा करनी चाहिए।
-----शनिवार के दिन भक्तों को शनि महाराज के नाम से व्रत रखना चाहिए।
---- शनि की शांति के लिए नीलम को तभी पहना जा सकता है।
-----शनिवार को सायंकाल पीपल वृक्ष के चारों ओर 7 बार कच्चा सूत लपेटें, इस समय शनि के किसी मंत्र का जप करते रहें। फिर पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक प्रज्ज्वलित करें तथा ज्ञात अज्ञात अपराधों के लिए क्षमा मांगें।
--------शनिवार को अपने हाथ की नाप का 19 हाथ काला धागा माला बनाकर पहनें।

----शनिश्वर के भक्तों को संध्या काल में शनि मंदिर में जाकर दीप भेंट करना चाहिए और उड़द दाल में खिचड़ी बनाकर शनि महाराज को भोग लगाना चाहिए। शनिदेव का आशीर्वाद लेने के पश्चात आपको प्रसाद स्वरूप खिचड़ी खाना चाहिए।
-----सूर्यपुत्र शनिदेव की प्रसन्नता हेतु इस दिन काली चींटियों को गु़ड़ एवं आटा देना चाहिए।
-----इस दिन काले रंग का वस्त्र धारण करना चाहिए।
----श्रावण मास में शनिवार का व्रत प्रारंभ करना

Saturday, 16 July 2011

कुंडली के किस घर में हो शनि तो क्या उपाय करें?









कुंडली के पहले घर में शनि हो तो-

जिस व्यक्ति की कुंडली में शनि पहले भाव में हो वह व्यक्ति राजा के समान जीवन जीने वाला होता है। शनि अशुभ है तो व्यक्ति रोगी, गरीब और बुरे काम करने वाला होता है। इसलिए ये उपाय करें

- किसी जरूरतमंद को या ब्राह्मण या साधु-संत को तवा दान करें।

- नशा आदि से दूर रहें।

- बंदरों को चने आदि खिलाएं।

दूसरे भाव में शनि हो तो-

ऐसा व्यक्ति बिगड़े मुंह वाला, लालची, विदेश में धन कमाने वाला होता है। ऐसे लोग ये उपाय करें

- दूध या दही का तिलक करें।

- सांप को दूध पिलाएं।

- भैंस को रोज घास खिलाएं।

तीसरे भाव में शनि हो तो-

व्यक्ति संस्कारवान, आलसी और चतुर होता है। इसके लिए ये उपाय करें-

- घर में किसी अंधेरी जगह पर धन, सोना, रुपए आदि रखें।

- नशा, मांस से दूर रहें।

- बहते पानी में चावल बहाएं।

चतुर्थ भाव में शनि हो तो-

चतुर्थ भाव में  शनि होने से व्यक्ति रोगी, दुखी और धन हीन होने लगता है। इसलिए ये उपाय करने चाहिए

- सांप को दूध पिलाएं

- शनि का दान तेल, उड़द, काले कपड़े का दान करें।

- मछली को चावल खिलाएं।

पांचवें भाव में शनि हो तो-

पांचवे भाव का शनि व्यक्ति को दुखी, पुत्र हीन, मित्र हीन और कम बुद्धि वाला बनाता है। इसलिए ये उपाय करने चाहिए।

- घर के अंधेरे कमरे में हरे मूंग रखें।

- 48 वर्ष की उम्र तक मकान न बनाएं।

- मांस-मदिरा या बादाम का सेवन बिल्कुल ना करें।

छठें भाव में शनि हो तो-

कुंडली के छठे भाव में हो तो वह कामी, अधिक खाने वाला और कुटिल होता है। इसलिए ये उपाय करें-

- एक बर्तन में तेल भरकर उसमें अपना मुंह देखें और पानी में बहा दें।

- सांप को दूध पिलाएं।

- नारियल या बादाम नदी में बहाएं।
कुंडली के सातवें भाव में शनि हो तो-

सातवें भाव का शनि होने पर व्यक्ति रोगी, गरीब, कामी, खराब वेशभूषा वाला होता है।  इसलिए ये उपाय करने चाहिए।

- काली गाय को घास खिलाएं, उसकी सेवा करें।

- बुराइयों एवं अधार्मिक कार्य से बचें।

- किसी बर्तन में शहद भरकर घर में रखें।

आंठवे भाव में शनि हो तो-

व्यक्ति कुष्ट या भगंदर रोग से पीडि़त, दुखी और कम उम्र वाला होता है। इसलिए ऐसे उपाय करने चाहिए

- चांदी पहनें।

- 8 बादाम नदी में बहाएं।

- राहु और शनि की विशेष पूजा कराएं।

कुंडली के नवें भाव में शनि हो तो-

ऐसा व्यक्ति जिसकी कुंडली में नवम भाव में शनि हो वह अधार्मिक, गरीब, पुत्रहीन, दुखी होता है।

- पिली वस्तुओं का दान दें।

- अपने चांदी रखें।

- घर की छत पर घास या लकड़ी बिल्कुल ना रखें।

दसवें भाव में शनि हो तो-

दशम भाव का शनि होने पर व्यक्ति धनी, धार्मिक, राज्यमंत्री या उच्चपद पर आसीन होता है। शनि के इन शुभ प्रभाव बढ़ाने के लिए ऐसे उपाय करें-

- रोज चने की दाल पानी में प्रवाहित करें।

- घर छत पर फालतु वस्तुएं बिल्कुल ना रखें।

- अंधों को रोज खाना खिलाएं।

ग्यारहवें भाव में शनि हो तो-

जिस व्यक्ति की कुंडली में ग्याहरवें भाव में शनि हो वह लंबी आयु वाला, धनी, कल्पनाशील, निरोग, सभी सुख प्राप्त करने वाला होता है। इन शुभ प्रभावों को बढ़ाने के लिए शनि के ये उपाय करें-

- घर के अंधेरे हिस्से में 12 बादाम काले कपड़े में बांधकर रखें।

- मांस-मदिरा से दूर रहे।

- शुभ कार्य से पहले पानी का कलश भरकर घर में रखें।

बारहवें भाव में शनि हो तो-

बाहरवें भाव में शनि होने पर व्यक्ति अशांत मन वाला, पतित, बकवादी, कुटिल दृष्टि, निर्दय, निर्लज, खर्च करने वाला होता है। शनि देव के इन अशुभ प्रभावों से बचने के लिए निचे बताए गए उपाय करें-

- भैरव महाराज की पूजा करें।

- मछली को चावल खिलाएं।

- शनिवार को भैरव मंदिर में सरसो का तेल का दीपक लगाएं।


Remedies for Shani's Sade Sati

Remedies for Shani's Sade Sati

Saturn is the most malefic and ferocious planet which is said to produces significant changes at mundane and individual levels on its transition from one sign to another. Astrologers suggest some easy remedies to doctor the adversities due to these malefic effects of Saturn’s transits for you.
  1. Donate black cloth, Urad pulse, black leather shoes, black sesame seeds, mustard oil or iron.
  2. Keep fast on Saturdays and perform pooja of Lord Shani on Saturdays.
  3. Recite Maha-mrityunjaya Japa for 125000 times for mental peace, family happiness, finance, profession & health.
  4. Wear an iron ring made of horse-shoe or nail from a boat in middle finger of right hand in waxing moon on Saturday in the evening half an hour before sun set.Before wearing the ring, clean it in fresh milk and Ganga water, light incense stick, perform pooja and Recited following Mantra for 23000 times: "Om San Sanesvaray Namh"
  5. The evil effect of Saturn is rectified by doing service for elders especially parents.
  6. Astrologers suggest wearing Blue Sapphire or Neelam to minimize the effect of Saturn.
  7. Light a lamp filled with oil of black sesame seeds or mustard seeds under the Peepal tree on Saturdays.
  8. Read the Shani-Strota.
  9. Worship lord Hanuman.
Remember …"Sade-Sati" is not always bad to all people it might be beneficial for those people whose Saturn is favorable!!!

Friday, 15 July 2011

श्री शनि कृपा महायन्त्र

श्री शनि कृपा महायंत्र में सिद्ध शनि मानवाकार यन्त्र, नीलम रत्न  का उपरत्न काका नीली, काले हकीक, सात मुखी रुद्राक्ष, घोड़े की नाल, काला आसन व काले हकीक की माला शामिल हैं जो शनि को अति प्रिय हैं व इसे धारण करने वाले पर शनि की शुभ दृष्टि बनी रहती है| इसे शनि के प्रिय शुभ मुहूर्त व नक्षत्रों में सिद्ध किया गया है| अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें -



 

Monday, 11 July 2011

शनि के लिए उपाय

शुभ शनि के लिए उपाय


शुभ तथा सम शनि ग्रह के प्रभाव में वृद्धि करने के लिए निम्नलिखित उपाय करें।
१. शनिवार को नीलम रत्न धारण करें। नीलम रत्न चांदी अथवा लोहे की अंगूठी में मध्यमा अंगुली में धारण करना चाहिए। अंगूठी इस प्रकार बनवाएं कि नीलम नीचे से आपकी त्वचा को छूता रहे। नीलम धारण करने से पहले नीलम की अंगूठी अथवा लॉकेट को गंगा जल अथवा कच्चे दूध से धोकर सामने रखकर धूप-दीप आदि दिखाएं और १०८ बार इस मंत्र का जाप करें: क्क शं शनैश्चराय नमः। १०८ बार शिवजी के मंत्र क्क नमः शिवाय का जाप कर लेना भी बहुत लाभदायक माना गया है।

२. शनिवार को नीले वस्त्र धारण करें।

३. घर में नीली चद्दरों तथा पर्दों आदि का प्रयोग करें।

४. शनि ग्रह से संबंधित वस्तुओं का व्यापार करें। शनि ग्रह से संबंधित वस्तुएं हैं :- लोहा, काली उड़द, काला तिल, कुलथी, तेल, भैंस काला कुत्ता, काला घोड़ा, काला कपड़ा, तथा लोहे से बने बर्तन व मशीनरी आदि।

५. साबुत माल की दाल घर में बनाएं।

६. शनिवार को काले घोड़े की नाल की अंगूठी अथवा कड़ा धारण करें।

७. अपने इष्टदेव के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाएं।

८. २७ शनिवार सरसों के तेल की मालिश करें।

९. चारपाई अथवा बेड के चारों पायों में लोहे का एक-एक कील लगााएं।

१०. मकान के चारों कोनों में लोहे का एक-एक कील लगाएं।

११. दस मुखी, ग्यारह मुखी, अथवा तेरह मुखी रुद्राक्ष धारण करें।

१२. शिंगणापुर शनिदेव का एक बार दर्शन अवश्य करें।

१३. गीदड़ सिंही अपने घर में रखें।

१४. घर में काला कुत्ता पालें।

१५. शनि ग्रह के प्रभाव में वृद्धि करने के लिए हत्था जोड़ी की जड़ धारण की जाती है। इसे आप शनि की होरा में शनिवार के दिन उखाड़ कर लाएं और सुखाने के उपरान्त शनिवार के दिन स्वच्छ वस्त्र में बांध कर ताबीज के रूप में धारण करें।

अशुभ शनि की पहचान

जन्मकुंडली में शनि ग्रह अशुभ प्रभाव में होने पर व्यक्ति को निर्धन, आलसी, दुःखी, कम शक्तिवान, व्यापार में हानि उठाने वाला, नशीले पदार्थों का सेवन करने वाला, अल्पायु निराशावादी, जुआरी, कान का रोगी, कब्ज का रोगी, जोड़ों के दर्द से पीड़ित, वहमी, उदासीन, नास्तिक, बेईमान, तिरस्कृत, कपटी, अधार्मिक तथा मुकदमें व चुनावों में पराजित होने वाला बनाता है।

अशुभ शनि के लिए उपाय
शनि ग्रह के अशुभ प्रभावों को दूर करने के लिए निम्नलिखित उपाय करने चाहिएं :
१. शनि ग्रह के तांत्रिक मंत्र का प्रतिदिन १०८ बार पाठ करें। मंत्र है क्क प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः। शनि मन्त्र के अनुष्ठान की मन्त्र जाप संख्या है २३,००० है।

२. शनि ग्रह का यंत्र गले में धारण करें।

३. शनि ग्रह का यंत्र अपने पूजास्थल अथवा घर के मुख्य द्वार पर स्थापित करें।

४. शनि ग्रह की वस्तुओं का दान करें। शनि ग्रह की वस्तुएं हैं काला उड़द, तेल, नीलम, काले तिल, कुलथी, लोहा तथा लोहे से बनी वस्तुएं, काला कपड़ा, सुरमा आदि।

५. शनिवार को कीड़े-मकोड़ों को काले तिल डालें।

६. शनिवार को काली माह (काले उड़द) की दाल पीस कर उसके आटे की गोलियां बनाकर मछलियों को खिलाएं।

७. शनिवार को श्मशान घाट में लकड़ी दान करें।
८. सात शनिवार सरसों का तेल सारे शरीर में लगाकर और मालिश करके साबुन लगााकर नहाएं।

९. शनिवार को शनि ग्रह की वस्तुएं न दान में लें और न ही बाजार से खरीदें।

१०. सात शनिवार को सात बादाम तथा काले उड़द की दाल धर्म स्थान में दान करें।

११. शराब तथा सिगरेट का प्रयोग न करें।

१२. सपेरे को सांप को दूध पिलाने के लिए पैसे दान करें।

१३. शनिवार को व्रत करें। व्रत की विधि इस प्रकार है :
(क) शनिवार को व्रत किसी भी मास के शुक्ल पक्ष के प्रथम शनिवार से शुरु करें।
(ख) शनि ग्रह का व्रत प्रत्येक शनिवार को ही रखें।
(ग) शनि ग्रह के व्रतों की संख्या कम-से-कम १८ होनी चाहिए। तथापि पूर्ण लाभ के लिए लगातार एक वर्ष तक व्रत रखें।
(घ) भोजन के रूप में उड़द के आटे का बना भोजन, तेल में पकी वस्तु शनिदेव को भोग लगााकर या काले कुत्ते या गरीब को देकर रोज वस्तु का सेवन करें।
(ड़) भोजन का सेवन शनि का दान देने के पश्चात्‌ ही करें। शनि ग्रह के दान में काले उड़द, सरसों का तेल, तिल, कुलथी, लोहा या लोहे से बनी कोई वस्तु, नीलम रत्न या उसका उपरत्न, भैंस, काले कपड़े सम्मिलित हैं। यह दान दोपहर को या सांयकाल के समय किसी गरीब भिखारी को दें।
(च) भोजन से पूर्व एक बर्तन में भोजन तथा काले तिल या लौंग मिलाकर पश्चिम की ओर मुंह करके पीपल के पेड़ की जड़ में डाल दें।
(छ) व्रत के दिन नमक वर्जित है।
(ज) व्रत के दिन शनि के बीज मंत्र का २३,००० जाप करें या कम-से-कम ८ माला जाप करें।
(झ) व्रत के दिन सिर पर भष्म का तिलक करें तथा काले रंग के कपड़े पहनें।
(ञ) जब व्रत का अन्तिम शनिवार हो तो शनि मंत्र से हवन कराकर भिखारियों या गरीब व्यक्तियों को दान दें।

१४. घर में रोटी बनाकर काली गाय या काले कुत्ते को खिलाएं।


शुभ शनि के लिए उपाय

शुभ शनि के लिए उपाय
 
शुभ तथा सम शनि ग्रह के प्रभाव में वृद्धि करने के लिए निम्नलिखित उपाय करें।
१. शनिवार को नीलम रत्न धारण करें। नीलम रत्न चांदी अथवा लोहे की अंगूठी में मध्यमा अंगुली में धारण करना चाहिए। अंगूठी इस प्रकार बनवाएं कि नीलम नीचे से आपकी त्वचा को छूता रहे। नीलम धारण करने से पहले नीलम की अंगूठी अथवा लॉकेट को गंगा जल अथवा कच्चे दूध से धोकर सामने रखकर धूप-दीप आदि दिखाएं और १०८ बार इस मंत्र का जाप करें: क्क शं शनैश्चराय नमः। १०८ बार शिवजी के मंत्र क्क नमः शिवाय का जाप कर लेना भी बहुत लाभदायक माना गया है।

२. शनिवार को नीले वस्त्र धारण करें।

३. घर में नीली चद्दरों तथा पर्दों आदि का प्रयोग करें।

४. शनि ग्रह से संबंधित वस्तुओं का व्यापार करें। शनि ग्रह से संबंधित वस्तुएं हैं :- लोहा, काली उड़द, काला तिल, कुलथी, तेल, भैंस काला कुत्ता, काला घोड़ा, काला कपड़ा, तथा लोहे से बने बर्तन व मशीनरी आदि।

५. साबुत माल की दाल घर में बनाएं।

६. शनिवार को काले घोड़े की नाल की अंगूठी अथवा कड़ा धारण करें।

७. अपने इष्टदेव के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाएं।

८. २७ शनिवार सरसों के तेल की मालिश करें।

९. चारपाई अथवा बेड के चारों पायों में लोहे का एक-एक कील लगााएं।

१०. मकान के चारों कोनों में लोहे का एक-एक कील लगाएं।

११. दस मुखी, ग्यारह मुखी, अथवा तेरह मुखी रुद्राक्ष धारण करें।

१२. शिंगणापुर शनिदेव का एक बार दर्शन अवश्य करें।

१३. गीदड़ सिंही अपने घर में रखें।

१४. घर में काला कुत्ता पालें।

१५. शनि ग्रह के प्रभाव में वृद्धि करने के लिए हत्था जोड़ी की जड़ धारण की जाती है। इसे आप शनि की होरा में शनिवार के दिन उखाड़ कर लाएं और सुखाने के उपरान्त शनिवार के दिन स्वच्छ वस्त्र में बांध कर ताबीज के रूप में धारण करें।

शनि की साढ़ेसाती व ढ़ैया के उपाय

शनि की साढ़ेसाती व ढ़ैया के उपाय


व्रत
शनिवार का व्रत रखें। व्रत के दिन शनिदेव की पूजा (कवच, स्तोत्र, मन्त्र जप) करें। शनिवार व्रतकथा पढ़ना भी लाभकारी रहता है। व्रत में दिन में दूध, लस्सी तथा फलों के रस ग्रहण करें, सांयकाल हनुमान जी या भैरव जी का दर्शन करें। काले उड़द की खिचड़ी (काला नमक मिला सकते हैं) या उड़द की दाल का मीठा हलवा ग्रहण करें।


दान
शनि की प्रसन्नता के लिए उड़द, तेल, इन्द्रनील (नीलम), तिल, कुलथी, भैंस, लोह, दक्षिणा और श्याम वस्त्र दान करें।
 
रत्न/धातु
शनिवार के दिन काले घोड़े की नाल या नाव की सतह की कील का बना छल्ला मध्यमा में धारण करें।
 
मन्त्र
(क) महामृत्युंजय मंत्र का सवा लाख जप (नित्य १० माला, १२५ दिन) करें-
 
ऊँ त्रयम्बकम्‌ यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्द्धनं
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योमुर्क्षिय मामृतात्‌।




(ख) शनि के निम्नदत्त मंत्र का २१ दिन में २३ हजार जप करें -
ऊँ शत्रोदेवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये।
शंयोभिरत्रवन्तु नः। ऊँ शं शनैश्चराय नमः।

 
(ग) पौराणिक शनि मंत्र  :
ऊँ नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्‌।
छायामार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्‌।

स्तोत्र
शनि के निम्नलिखित स्तोत्र का ११ बार पाठ करें या दशरथ कृत शनि स्तोत्र का पाठ करें।
 
कोणरथः पिंगलो बभ्रुः कृष्णो रौद्रोन्तको यमः
सौरिः शनिश्चरो मन्दः पिप्पलादेन संस्तुतः॥
तानि शनि-नमानि जपेदश्वत्थसत्रियौ।
शनैश्चरकृता पीडा न कदाचिद् भविष्यति॥

साढ़साती पीड़ानाशक स्तोत्र - पिप्पलाद उवाच -
नमस्ते कोणसंस्थय पिड्.गलाय नमोस्तुते।
नमस्ते बभ्रुरूपाय कृष्णाय च नमोस्तु ते॥
नमस्ते रौद्रदेहाय नमस्ते चान्तकाय च।
नमस्ते यमसंज्ञाय नमस्ते सौरये विभो॥
नमस्ते यंमदसंज्ञाय शनैश्वर नमोस्तुते॥
प्रसादं कुरु देवेश दीनस्य प्रणतस्य च॥

 
औषधि
प्रति शनिवार सुरमा, काले तिल, सौंफ, नागरमोथा और लोध मिले हुए जल से स्नान करें।
 
अन्य उपाय
(क) शनिवार को सांयकाल पीपल वृक्ष के चारों ओर ७ बार कच्चा सूत लपेटें, इस समय शनि के किसी मंत्र का जप करते रहें। फिर पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक प्रज्वलित करें, तथा ज्ञात अज्ञात अपराधों के लिए क्षमा मँIगें।
(ख) शनिवार को अपने हाथ की नाप का १९ हाथ काला धागा माला बनाकर पहनें।
(ग) टोटका - शनिवार के दिन उड्रद, तिल, तेल, गुड़ लिकी लड्डू बना लें और जहाँ हल न चला हो वहां गाड़ दें।
(घ) शनि की शान्ति के लिए बिच्छू की जड़ शनिवार को काले डोरे में लपेट कर धारण करें।

Wednesday, 6 July 2011

शनिदेव के प्रकोप से बचने के उपाय



- श्री हनुमान का पूजन करें।

- शनिवार को शनि की विशेष आराधना करें।

- महामृत्युंजय-जप करना चाहिए।

- नीलम धारण करने से भी शनि का प्रकोप शांत होता है।

- ब्राह्मण को काला वस्त्र, उड़द, भैंस, लोहा, तिल, तेल, नीलम, काली गौ, जूता, कस्तूरी और सोना दान देना चाहिए।

- शनि को न्याय का देवता बताया गया है अत: किसी का बुरा ना करें।

- नि:सहायों और गरीबों की मदद करें।

- धार्मिक आचरण करें, बुराइयों से बचें।