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Saturday, 18 June 2011

गृहो का ग़ोचर फल (Gochar Grah Shubh Bhav Chakram)

गृहो का ग़ोचर फल (Gochar Grah Shubh Bhav Chakram)


गोचर का अर्थ -
गोचर का शाब्दिक अर्थ है ग्रहों का विचरण.सभी नवग्रह अपनी अपनी गति के अनुसार भिन्न भिन्न राशियों में भ्रमण करते है. इसके कारण जो प्रभाव राशियों प़र पड़ता है उसे गोचर विचार कहते है.

गोचर कुंडली और जन्म कुंडली में अंतर -

गोचर कुंडली में गृह की राशी परिवर्तित होती रहती है और भाव भी स्थिर नहीं रहता है अतः यह बदलती रहती है.  जनम कुंडली में  भाव और राशी स्थिर रहते है इसलिए जन्म कुंडली स्थिर रहती है.  इसके अलावा गोचर में चन्द्र लगन की प्रधानता है जबकि जन्म कुंडली में सूर्य, चन्द्र एवं लग्न तीनो का विश्लेषण किया जाता है.

गोचर ज्योतिष का उपयोग -
इसका उपयोग जातक के जीवन में विशेष कालावधि में परिणाम जानने के लिए किया जाता है. यह सत्य एवं शुद्ध फल कहने की एक रीति है . गोचर विचार के बिना जन्म कुंडली का फल कथन पूर्णतया सही नहीं किया जा सकता .

गोचर ग्रहों का द्वादश भावो में फल -

शुभ (Shubh) – Good Results
भाव (Bhav) - House
X - Bad Results





भाव


गोचर गृह


सूर्य

चन्द्र

मंगल

बुध

गुरु

शुक्र

शनि

राहू/
केतु

प्रथम

X

शुभ

X

X

X
 X


X

X

द्वितीय

X

X

X

शुभ

शुभ

शुभ

X

X

तृतीय

शुभ

शुभ

शुभ

X

X

शुभ

शुभ

शुभ

चतुर्थ

X

X

X

शुभ

X

शुभ

X

X

पंचम

X

X

X

X

शुभ

शुभ

XX

X

षष्ठ

शुभ

शुभ

शुभ

शुभ

X

X

शुभ

शुभ

सप्तम

XX

शुभ

X

X

शुभ

X

X

X

अष्टम

X

X

X

शुभ

X

शुभ

X

X

नवं 

X

X

X

X

शुभ

शुभ

X

X

दशम

शुभ

शुभ

X

शुभ

X

X

X

X

एकादश 

शुभ

शुभ

शुभ

शुभ

शुभ

शुभ

शुभ

शुभ

द्वादश

X

X

X

X

X

शुभ

X

X

प्रत्येक गृह के मार्गी , वक्री , उदय, अस्त शीघ्री अथवा मंदी होने का प्रभाव फल कथन प़र पड़ता है. गोचर फल कहते समय जन्म कुंडली का का भी विचार करना चाहिए. उदाहरण के लिए जो गृह जन्म कुंडली में अशुभ भाव में स्थित हो या नीच राशी में हो  वह गृह गोचर में शुभ भाव में स्थित होने प़र भी शुभ फल नहीं करेगा.

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