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Saturday, 18 June 2011

शुभाशुभ साढ़े साती चक्र

शुभाशुभ साढ़े साती चक्र




राशी 



द्वादश  भाव 
पहले  ढाई   वर्ष 



पहला  भाव
अगले  ढाई  वर्ष



दूसरा  भाव
अंतिम  ढाई वर्ष


मेष 


अति  अशुभ 


सामान्य


शुभ
वृष अशुभ  शुभ शुभ
मिथुन  शुभ  शुभाशुभ अशुभ
कर्क  शुभ  शुभाशुभ अशुभ
सिंह  अशुभ  अशुभ शुभ
कन्या  अशुभ  शुभ अतिशुभ
तुला  शुभ  अतिशुभ अतिअशुभ
वृश्चिक  श्रेष्ठ  कनिष्ठ मध्यम 
धनु  अशुभ  शुभ मध्यम
मकर  शुभ  मध्यम उत्तम
कुम्भ  सामान्य  शुभ शुभ
मीन शुभ  शुभ अशुभ

शनि जब चन्द्रमा से बारहवे , प्रथम अथवा द्वितीय भाव में भमण करता है तो इसे शनि की साढ़े साती कहते है. शनि को एक राशी पार करने में ढाई वर्ष का समय लगता है अतः तीन रशिया पार करने में उसे साढ़े  सात वर्ष लग जाते है. यही समय साढ़े साती के नाम से जाना जाता है. शनि  को बारह राशियों का भ्रमण  करने  में लगभग साढ़े  २९ वर्ष का समय लगता है. अतः किसी के भी जीवन काल में तीन बार शनि की साढ़े साती आ सकती है.
                 साधारणतया सभी यह मानते है की साढ़े साती सभी के लिए अशुभ होती है परन्तु ऐसा नहीं है. साढ़े साती का फल प्रत्येक व्यक्ति की जनम कुंडली पर निर्भर करता है . इसका अनुमान ऊपर दी  हुई तालिका से लगाया जा सकता है .येही कारण है की हर किसी को केवल साढ़े साती अथवा शनि के भय से शनि देव से सम्बंधित वस्तुओ का दान नहीं करना चाहिए. अगर शनि की स्थिति कुंडली में अच्छी है तो साढ़े साती लाभकारी होती है. ऐसी स्थिति में अनजाने में किया हुआ शनि का दान आपको उसके शुभ  प्रभाव और लाभ से वंचित कर सकता है. अतः किसी अच्छे ज्योतिषी से सलाह लेने के उपरांत ही साढ़े साती का कोई उपाय करे.

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