Search This Blog

Tuesday, 21 June 2011

उपाय


घर में जूते-चप्पल कहां और कैसे रखें?

परिवार के अच्छे स्वास्थ्य के लिए जरूरी है कि घर में पूरी तरह साफ-सफाई रहे, गंदगी न हो, धुल-मिट्टी न हो। गंदगी के कारण हमारे स्वास्थ्य को तो नुकसान है साथ ही इससे हमारी आर्थिक स्थिति पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है।

वास्तु शास्त्र के अनुसार जिस घर में गंदगी रहती है वहां कई प्रकार की आर्थिक हानि होती हैं और हमेशा पैसों की तंगी बनी रहती है। जब भी हम कहीं बाहर जाते हैं तब हमारे जूते-चप्पलों में गंदगी लग जाती है जिसे लेकर हम घर आ जाते हैं। काफी लोग घर में जूते-चप्पल पहनते हैं जबकि शास्त्रों के अनुसार घर में नंगे पैर ही रहना चाहिए क्योंकि घर में कई स्थान देवी-देवताओं से संबंधित होते हैं उनके आसपास जूते-चप्पल लेकर जाना शुभ नहीं माना जाता है।

जूते-चप्पल घर के बाहर या घर के अंदर ऐसे स्थान पर रखना चाहिए जहां से गंदगी पूरे घर में न फैले। घर के बाहर भी जूते-चप्पलों को व्यवस्थित ढंग से ही रखा जाना चाहिए। बेतरतीब रखे गए जूते-चप्पल वास्तु दोष उत्पन्न करते हैं। अत: इससे बचना चाहिए। यदि घर में चप्पल पहनना ही पड़े तो घर के अंदर की चप्पल दूसरी रखें, जिसे बाहर पहनकर न जाएं।

घर के मंदिर कितनी बड़ी भगवान की मूर्तियां रखें?


प्रतिदिन सुबह-सुबह भगवान की प्रतिमा या चित्र के दर्शन से हमारा पूरा दिन खुशियोंभरा और सुख के साथ बीतता है। इसके साथ ही भगवान की पूजा से हमारे कई जन्मों के पाप स्वत: नष्ट हो जाते हैं और पुण्यों की वृद्धि होती है। सभी के घरों में भगवान के लिए अलग स्थान बनाया जाता है। कहीं-कहीं छोटे-छोटे मंदिर बने होते हैं। घर के मंदिरों के संबंध वास्तु कई महत्वपूर्ण बातें बताई गई हैं।

पूजा घर घर का सबसे पवित्र स्थान होता है। वास्तु के अनुसार यदि पूजा घर का वास्तु ठीक हो तो घर में सुख और समृद्धि बनी रहती है। पूजा घर में कुछ बातों का ध्यान रखकर आप घर की परेशानियों को दूर सकते हैं। आजकल भिन्न-भिन्न प्रकार की धातुओं से मंदिर बनाए जाते हैं लेकिन घर में शुभता की दृष्टि से मंदिर लकड़ी, पत्थर और संगमरमर का होना चाहिए।

वास्तु के अनुसार, घर में पूजा के लिए अंगूठे के आकार की प्रतिमाएं श्रेष्ठ मानी गई हैं। इससे बड़ी मूर्तियों की पूजा घर में नहीं की जानी चाहिए। ज्यादा बड़ी मूर्तियों की पूजा केवल मंदिरों में ही श्रेष्ठ मानी जाती है। घर में पीतल, अष्ठधातु की भी बड़े आकार की मूर्ति नहीं होनी चाहिए।


घर पर झंडा लगाने से बढ़ता है सुख क्योंकि...


झंडे या ध्वजा को विजय और सकारात्मकता ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। इसीलिए पहले के जमाने में जब युद्ध में या किसी अन्य कार्य में  विजय प्राप्त होती थी तो ध्वजा फहराई जाती थी। वास्


तु के अनुसार भी झंडे को शुभता का प्रतीक माना गया है। माना जाता है कि घर पर ध्वजा लगाने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश तो होता ही है साथ ही घर को बुरी नजर भी नहीं लगती है। लेकिन घर के उत्तर-पश्चिम कोने में यदि ध्वजा लगाई जाती है तो उसे वास्तु के दृष्टिकोण से बहुत अधिक शुभ माना जाता है।

वायव्य कोण यानी उत्तर पश्चिम में झंडा या ध्वजा वास्तु के अनुसार जरूर लगाना चाहिए क्योंकि ऐसा माना जाता है कि उत्तर-पश्चिम कोण यानी वायव्य कोण में  राहु का निवास माना गया है। ज्योतिष के अनुसार  राहु को रोग, शोक व दोष का कारक माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि यदि घर के इस कोने में किसी भी तरह का वास्तुदोष हो या ना भी हो तब भी ध्वजा या झंडा लगाने से घर में रहने वाले सदस्यों के रोग, शोक व दोष का नाश होता है और घर की सुख व समृद्धि बढ़ती है।

वास्तु शास्त्र द्वारा मधुमेह का उपचार

वास्तु शास्त्र द्वारा  मधुमेह का उपचार 

http://www.homedesignfind.com/wp-content/uploads/2008/12/vaastu2.jpgवास्तु शास्त्र मनुष्य की सभी प्रकार की समस्याएँ  दूर करने में सक्षम है तो शुगर अर्थात मधुमेह को सफलता क्यों नहीं? यह एक राजसी रोग है जिसका निदान वास्तु में उपलब्ध है.
आधुनिक दौड़ में अपने पीछे की सभ्यता को भी याद रखें जो सटीक व हमारे जीवन में शत प्रतिशत कारगर सिद्ध होती आई है. वास्तु शै रूप में जीवन की एक कला है, क्योंकि हर व्यक्ति का शरीर ऊर्जा का केंद्र होता है . जहाँ भी वह निवास करता है वहां की वस्तुओं की ऊर्जा अपनी होती है और वह मनुष्य की ऊर्जा से तालमेल रखने की कोशिश करती हैं. यदि उस भवन या स्थान की ऊर्जा उसके शरीर की ऊर्जा से ज्यादा संतुलित हो तो उस स्थान से विकास होता है, शरीर से स्वस्थ रहता है, सही निर्णय लेने में समर्थ होता है. 

 सफलता   प्राप्त  करने  में  उत्साह  बढ़ता है ,धन  की वृद्धि  होती है , जिससे  समृध्दी  बढ़ती  है ,यदि  वास्तु  दोष  होनें  से अत्यधिक  मेहनत  करने पर  भी   सफलता नहीं  मिलती , वह  अनेक  व्याधियों  व रोगों से दु:खी  होने  लगता  है,, उसे अपयश तथा हनी उठानी पड़ती है.


    http://images.meredith.com/dlv/images/2008/09/ss_Slide1_tips.jpg
  • बिलकुल स्पष्ट है की घर भवन का दक्षिण पश्चिम कोण में कुआँ, जल बोरिंग या भूमिगत पानी का स्थान मधुमेह बढता है. 
  • दक्षिण पश्चिम कोण में हरियाली बगीचा या छोटे छोटे पौधे भी सुगर का कारण है. 
  • घर, भवन का दक्षिण पश्चिम कोना बड़ा हुआ है, तब भी सुगर होता है.
  • यदि दक्षिण पश्चिम का कोना घर में सबसे छोटा या सिकुड़ा भी हुआ है तो संजो मधुमेह बढेगा इस्सलिये यह भाग सबसे ऊँचा रखे.
  •  दक्षिण पश्चिम भाग में सीवर का गढ़ा होना भी सुगर को निमंत्रण देना है. 
  • ब्रहम स्थान अर्थात घर का मध्य भाग भरी हो तथा घर के मध्य में आधिक लोहे का प्रयोग हो या ब्रहम भाग से सीडियां ऊपर की ओर ता रही हो तक समझ ले की सुगर का घर में आगमन होने जा रहा है. अर्थात दक्षिण पश्चिम भाग यदि आपने सुधर लिया तो काफी हद तक आप आसाद्य रोगों से मुक्त हो जायेंगे .
  • अपने बेडरूम में कभी भी भूल कर खन्ना मत खाएं .
  • अपने बेडरूम में जुटे, चप्पल नए या पुराने बिलकुल भी न रखे .
  • मिटटी के घड़े का पानी का इस्तेमाल करे तथा घड़े में रोज ७ तुलसी के पत्ते दल कर प्रयोग करें .
  • दिन में एक बार अपनी माँ का बना खाना जरुर  खाएं 
  • हर मंगलवार को अपने दोस्तों को मिष्ठान जरुर दें. 
  • रविवार को बागवान सूर्य को जल दे कर बंदरों को गुड खिलें तो आप स्वयं अनुभव करेंगे की सुगर कितनी जल्दी जा रही है. 
  • इशान कोण से साडी लोहे की साडी वस्तुए हटा लें. हल्दी की एक गांठ लेकर एक चमच्च से सिल पत्थर में घिस कर सुबह खली पेट पिने से मधुमेह से मुक्ति हो सकती है.

वास्तुदोष दूर करें और हो जाएगी शादी

वास्तुदोष दूर करें और हो जाएगी शादी


क्या विवाह योग्य युवाओं का विवाह नहीं हो रहा है? यदि उनका ज्योतिष और व्यवहारिक पक्ष दोनों उत्तम है फिर भी विवाह में अड़चन आ रही है तो कहीं वास्तुदोष तो कारण नहीं है?

यहां वास्तु संबंधी कुछ उपाय बताए जा रहे हैं जिनका प्रयोग करने पर शीघ्र विवाह के योग बन सकते हैं-

- विवाह योग्य युवाओं का कमरा उत्तर दिशा या उत्तर-पूर्व दिशा या उत्तर पश्चिम दिशा में होना चाहिए।

- सोते समय युवाओं को पैर उत्तर की ओर तथा सिर दक्षिण की ओर रखना चाहिए।

- अविवाहितों के कमरे का रंग गुलाबी, पीला या सफेद होना चाहिए।

- युवाओं के कमरे में एक से अधिक दरवाजे होने चाहिए।

- विवाह योग्य लड़के-लड़कियां अधूरे बने कमरे में बिलकुल ना रहें।

- लड़के-लड़कियों के कमरे में काले रंग की कोई वस्तु ना रखें।

- कमरे में बीम लटका हुआ दिखाई नहीं देना चाहिए।

- कमरे की पूर्व-उत्तर दिशा में पानी का फव्वारा रखें।

- कक्ष की उत्तर दिशा में क्रिस्टल बॉल, कांच की प्लेट रखें।

- मांगलिक व्यक्ति को अपने कक्ष के दरवाजे का रंग लाल या गुलाबी रखना चाहिए। क्योंकि लाल रंग मंगलदेव का पसंदीदा रंग है।

- विवाह योग्य व्यक्ति का कमरा दक्षिण या दक्षिण पश्चिम दिशा में नहीं होना चाहिए।

- कमरे में कोई भी खाली बर्तन ना रखे।

- अविवाहित व्यक्ति के पलंग के नीचे कोई भी भारी वस्तु या लोहे की वस्तु कतई ना रखें।

वास्तु संबंधी अन्य जिज्ञाओं को शांत करने के लिए यहां दिए गए रिलेटेट आर्टिकल्स, पाठकों की पसंद वाले  आर्टिकल्स या अभी-अभी वाले टेग पर क्लिक करें।

इन 5 टिप्स से दूर हो जाएंगे घर के बहुत से दोष

अधिकांश लोगों के यहां घर बनवाते समय यदि कुछ वास्तुदोष रह जाते हैं। ऐसे में इन दोषों को दूर करने के लिए घर को तुड़वाने की जरूरत रहती है लेकिन कुछ छोटी-छोटी टिप्स हैं जिन्हें अपनाने से कई वास्तु दोषों का प्रभाव खत्म हो जाता है।

वास्तु दोष दूर होने के बाद घर में सुख-समृद्धि बढऩे लगती है और परिवार के सभी सदस्यों का मन प्रसन्न रहता है।

- यदि आपके घर की छत पर व्यर्थ का सामान पड़ा हो तो उसे वहां से हटा दें।

- प्लास्टर आदि उखड़ गया हो तो उसकी तत्काल मरम्मत करवा दें।

- यदि आपकी रसोई के गेट के ठीक सामने बाथरूम का गेट हो तो यह नकारात्मक ऊर्जा देगा। इस दोष से बचने के लिए बाथरूम तथा रसोई के बीच में एक कपड़े का पर्दा या किसी अन्य प्रकार का पार्टीशन खड़ा कर सकते हैं ताकि रसोई से बाथरूम दिखाई न दे।

- यदि घर के दरवाजे व खिड़कियां खुलने व बंद होने पर आवाज करते हैं तो उनकी आवश्यक मरम्मत करवाएं।

- आग्नेय कोण में रसोई न होने पर गैस चूल्हे को रसोई के आग्नेय कोण में रखकर दोष का निवारण कर सकते हैं। और यह भी नहीं सकते तो आग्नेय कोण में एक जीरो वाट का बल्ब जलाकर भी इस दोष से बचा जा सकता है।

No comments:

Post a Comment