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Thursday, 16 February 2012

ग्रह शांति

ग्रह शांति के अचूक 50 सूत्र

  1. ॐ नमः जय स्वाहा – दिन में कम से कम एक बार बोलने से सभी कार्य बनते है.
  2. प्रत्येक को अपने घर में कल्पवृक्ष,कामधेनु व चिंतामणि रत्ना का चित्र रखना चाहिए
  3. व्रतियों, महाव्रतियों को आहार करना चाहिए
  4. साकार परमात्मा की उपासना करना चाहिए
  5. प्रतिदिन दान करना चाहिए
  6. अतिथि सेवा
  7. दिन में ब्रहमचर्य का पालन
  8. अवस्त्र स्नान नहीं करना
  9. माता – पिता का आदर करना
  10. कुटुम्बी जनों से बैर न करना
  11. अपनों से बड़ों का आशीर्वाद लेना
  12. व्यसनों का त्याग करना
  13. प्रसन्नचित होकर भोजन करना
  14. सूर्य की ओर मल का त्याग न करना
  15. ऋण चुकाया जाना चाहिए
  16. झूठे बर्तन रात्रि में नहीं छोड़ना चाहिए
  17. टूटे बर्तन, टूटा दर्पण घर में नहीं रखना चाहिए
  18. पिता को दुखी करके धन नहीं लेना
  19. सभी के सुखी जीवन की कामना करना
  20. कृतघ्नी व्यक्ति की कभी दोस्ती न करना
  21. जानवरों को भिजन देना
  22. असहाय की सेवा करना
  23. विकलांगों पर दया करना
  24. अपने माकन में कहीं कच्ची जगह छोड़ देना चाहिए
  25. नैऋत्य कोण में घर के दरवाजे वाले घर का त्याग कर देना चाहिए
  26. घर में कोई छेद न हो
  27. लोभ में आकर चोरी का पात्र धारण न करें
  28. बुआ, बहन, बेटी आदि के लिए उपहार देना चाहिए
    अबला, कन्या, विधवा पर हाथ न उठाएं
    सम्बन्धी से मित्रता का व्यवहार रखें, दुश्मनी न करें
    जहाँ कहीं भी रहते है उस परिवेश में प्रेम पूर्वक व्यवहार करें, उपेक्षा न करें
    व्यक्ति सफाई से रहे
    नाक व कान छिदवाना चाहिए
    कपडे व्यवस्थित पहने
    शाकाहारी वस्तुओं का उपयोग करें
    अपशब्दों का प्रयोग न करें
    सुबह उठते सबसे पहले अपने हाथों की हथेली देखें
    हथेली और तलवे सोने से पहले साफ़ करके सोना चाहिए
    खड़े खड़े पानी न पीयें
    भोजन बनाते बनाते भोजन न करें
    जिस माकन में दरवाजे आवाज़ करते हैं उस घर में न रहे,उसमे तेल लगाकर रहे
    अलमारी व पलंग हिलते न हो
    बीम के नीचे शयन व आसन न हो
    भगवन व गुरु को पीठ देकर बैठने वाले व्यक्ति के गृह दोष निवारण का उपाय कारगर नहीं होता
    धर्मग्रन्थ को अपने से नीचा आसन न दें
    अक्षरों पर पैर नहीं रखना चाहिए
    बंद घडी, टूटी केसेट, सी डी, आदि को घर में नहीं रखना चाहिए
    ईशान दिशा में शौचालय नहीं होना चाहिए
    नैऋत्य कोण में यदि कर्मचारी अथवा अतिथियों का वास है और अग्नि कोण में जल का प्रवास हो तो द्वन्द ही होगा

Tuesday, 14 February 2012

आयुर्वेदिक दोहे

आयुर्वेदिक दोहे

1.जहाँ कहीं भी आपको,काँटा कोइ लग जाय।
दूधी पीस लगाइये, काँटा बाहर आय।।
2.मिश्री कत्था तनिक सा, चूसें मुँह में डाल।
मुँह में छाले हों अगर,दूर होंय तत्काल।।
3.पौदीना औ इलायची, लीजै दो-दो ग्राम।
खायें उसे उबाल कर, उल्टी से आराम।।
4.छिलका लेंय इलायची, दो या तीन गिराम।
सिर दर्द मुँह सूजना, लगा होय आराम।।
5.अण्डी पत्ता वृंत पर, चूना तनिक मिलाय।
बार-बार तिल पर घिसे, तिल बाहर आ जाय।।
6.गाजर का रस पीजिये, आवश्कतानुसार।
सभी जगह उपलब्ध यह, दूर करे अतिसार।।
7.खट्टा दाड़िम रस, दही, गाजर शाक पकाय।
दूर करेगा अर्श को, जो भी इसको खाय।।
8.रस अनार की कली का, नाक बूँद दो डाल।
खून बहे जो नाक से, बंद होय तत्काल।।
9.भून मुनक्का शुद्ध घी, सैंधा नमक मिलाय।
चक्कर आना बंद हों, जो भी इसको खाय।।
10.मूली की शाखों का रस,ले निकाल सौ ग्राम।
तीन बार दिन में पियें, पथरी से आराम।।
11.दो चम्मच रस प्याज की,मिश्री सँग पी जाय।
पथरी केवल बीस दिन,में गल बाहर जाय।।
12.आधा कप अंगूर रस, केसर जरा मिलाय।
पथरी से आराम हो, रोगी प्रतिदिन खाय।।
13.सदा करेला रस पिये,सुबहा हो औ शाम।
दो चम्मच की मात्रा, पथरी से आराम।।
14.एक डेढ़ अनुपात कप, पालक रस चौलाई।
चीनी सँग लें बीस दिन, पथरी दे न दिखाय।।
15.खीरे का रस लीजिये,कुछ दिन तीस ग्राम।
लगातार सेवन करें, पथरी से आराम।।
16.बैगन भुर्ता बीज बिन,पन्द्रह दिन गर खाय।
गल-गल करके आपकी,पथरी बाहर आय।।
17.लेकर कुलथी दाल को,पतली मगर बनाय।
इसको नियमित खाय तो,पथरी बाहर आय।।
(आयुर्वेदिक पुस्तकों के आधार पर दिनेशजी ने इन दोहों की रचना की है, भेजने वाले डा.ओपी वर्मा)

Monday, 17 October 2011

गुलाब से

गुलाब से होती हैं मुरादें पूरी...


फूलों में गुलाब सौन्दर्यता का प्रतीक माना जाता है। गुलाब प्रेम का इजहार करने में प्रथम सोपान है। यह पुष्प देखने में खूबसूरत तथा मोहक सुगन्ध वाले होते है। इसलिये मन्दिरों में भगवान का श्रृंगार करने में इनका विशेष प्रयोग किया जाता है। घर के पूजा पाठ में भी इनका प्रयोग होता है। यदि कोई जातक अपनी मनोकामना पूर्ण करना चाहता है। तो उसके लिये गुलाब का फूल एक वरदान साबित हो सकता है।

1- किसी भी शुक्ल पक्ष के प्रथम मंगलवार को ताजे गुलाब के फूल बजरंगबली पर 11 की संख्या में चढ़ायें। ऐसा लगातार 11 मंगलवार तक करने पर बजरंगबली प्रसन्न होकर साधक की मनोकामना पूर्ण करते है।

2- मंगलवार की सुबह स्नानादि से निवृत्त होकर सिन्दूरी वस्त्र धारण करें तत्पश्चात हनुमान जी के मन्दिर में जाकर 11 गुलाब के फूल उनकी मूर्ति पर चढ़ायें। घी का दीपक जलाकर बजरंगबली के शरीर में थोड़ा सा सिन्दूर लगायें तथा मन ही मन हनुमान जी से प्रार्थना करे कि हे प्रभु मेरी मनोकामना पूर्ण कर मुझ पर कृपादृष्टि बनायें रखें। उसके बाद निम्न मन्त्र की एक माला जाप करें।

ऊँ ऐं हनुमते रामदूताय नमः।


3-
जिस व्यक्ति के कार्यों में बाधायें आती हो, कार्य होते रूक जाते हों, ऐसे जातक को गुलाब का यह उपाय करना लाभप्रद साबित होगा। पूर्णिमा के दिन 3 गुलाब और 3 बेला अथवा चमेली के पुष्प सुबह स्नानादि से निवृत्त होकर किसी नदी में विसर्जित करना चाहिए। इस प्रयोग को 5 पूर्णिमा लगातार करने पर अच्छे परिणाम मिलने प्रारम्भ हो जायेंगे।

4-वैसे तो घर में वास्तु के अनुसार कांटेदार वृक्ष लगाना अशुभ माना जाता है। परन्तु गुलाब का पौधा इसका अपवाद है। गृह में पूर्व की दिशा में गुलाब का पौधा लगाने से नकारात्मक उर्जा दूर होकर सकारात्मक उर्जा का प्रवेश करती है। बेडरूम में यदि गुलाब के फूल रखें जाये तो वैवाहिक जीवन में परस्पर प्रेम बना रहता है।