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Thursday, 30 August 2012

हवन के लिए अलग-अलग मन्त्र

हवन के लिए अलग-अलग मन्त्र

ग्रहों की पीडा हेतु पूर्ण साधना के अन्तर्गत सभी ग्रहों को शान्त करने वाला मन्त्र और हवन का पूरा विधान दिया गया है। किसी भी ग्रह के कुपित होने पर भी इसी प्रकार हवन किया जाता है। परन्तु इसमें दो अन्तर होते हैं। ग्रह विशेष के लिए हवन करते समय उस ग्रह को प्रिय वृक्ष की लकडी का प्रयोग करते हैं। इसके साथ ही उस ग्रह से सम्बन्धित मन्त्र ही बोला जाता है। नीचे पहले इन ग्रहों से सम्बन्धित लकडियां और फिर उनके मन्त्र दिए जा रहे हैं-

सूर्य - मदार          चंद्र - पलाश             मंगल - खैर  
बुध - अपमार्ग       गुरू - पीपल             शुक्र - गूलर
शनि - शर्मा           राहु - दूर्वा               केतु - कुशा   
   
सूर्य - ओम ह्नौं ह्नीं ह्नौं स: सूर्याय स्वाहा।
चंद्र - ओम स्त्रौं स्त्रीं स्त्रौं स: सोमाय स्वाहा।
मंगल - ओम क्रौं क्रीं क्रौं स: भोमाय स्वाहा।
बुध - ओम ह्नौं ह्नीं स: बुधाय स्वाहा।
गुरू - ओम ज्ञौं ज्ञीं ज्ञौं स: बृहस्पतयै स्वाहा।
शुक्र - ओम ह्नौं ह्नीं ह्नौं स: शुक्राय स्वाहा।
शनि - ओम षौं षीं षौं स: शनैश्चयराय स्वाहा।
राहु - ओम छौं छीं छौं स: राहवे स्वाहा।
केतु - ओम फौं फीं फौं स: केतवे स्वाहा।

Thursday, 11 August 2011

हवन सामग्री का प्रकार

हवन सामग्री का प्रकार


शान्ति कर्म में तिल, 
 
शुद्ध धृत और समिधा आम,
 
पुष्टि कर्म में शुद्ध घी, बेलपत्र,
 
धूप, समिधा ढाक लक्ष्मी प्राप्ति के लिए धूप,
 
खीर मेवा इत्यादि का हवन करें।
 
समिधा चन्दन व पीपल का आकर्षण व मारण में तेल और सरसों का हवन करें,
 
वशीकरण में सरसों और राई का हवन सामान्य है।
 
शुभ कर्म में जौ, तिल, चावल व अन्य कार्यों में देवदारू और शुद्ध घी सर्व मेवा का हवन श्रेष्ठ है।
 
सफेद चन्दन, आम, बड़, छोंकरा पीपल की लकड़ी होनी चाहिए।

Thursday, 4 August 2011

हवन


 


Thursday, 21 July 2011

हवन में ड़ाले विशेष आहूति


दुर्गा सप्तशती पाठ में हवन करते समय यदि हवन सामग्री पर कुछ विशेष ध्यान दें तो सभी के मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.

जायफल की आहूति ड़ालने से कीर्ति और किशमिश से कार्य की सिद्धि होती है।

आंवले से सुख और केले से आभूषण की प्राप्ति होती है। इस प्रकार फलों से अर्ध्य देकर यथाविधि हवन करें।

खांड, घी, गेंहू, शहद, जौ, तिल, बिल्वपत्र, नारियल, किशमिश और कदंब से हवन करें।

गेंहूं से होम करने से लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।

खीर से परिवार, वृद्धि, चम्पा के पुष्पों से धन और सुख की प्राप्ति होती है।

आवंले से कीर्ति और केले से पुत्र प्राप्ति होती है।

कमल से राज सम्मान और किशमिश से सुख और संपत्ति की प्राप्ति होती है।

खांड, घी, नारियल, शहद, जौं और तिल इनसे तथा फलों से होम करने से मनवांछित वस्तु की प्राप्ति होती है।

व्रत करने वाला मनुष्य इस विधान से होम कर आचार्य को अत्यंत नम्रता के साथ प्रमाण करें और यज्ञ की सिद्धि के लिए उसे दक्षिणा दें।
इस महाव्रत को पहले बताई हुई विधि के अनुसार जो कोई करता है उसके सब मनोरथ सिद्ध हो जाते हैं। नवरात्र व्रत करने से अश्वमेध यज्ञ का फल मिलता है।