Search This Blog

Showing posts with label वास्तु. Show all posts
Showing posts with label वास्तु. Show all posts

Tuesday, 12 June 2012

वास्तु नियमों का पालन

किराए के घर में भी कर सकते हैं वास्तु नियमों का पालन, जानिए कैसे


किराए के मकान में गृहस्वामी की स्वीकृति के बिना परिवर्तन नहीं किया जा सकता। अक्सर देखने में आता है कि वास्तु नियमों के अनुकूल बने भवन में किराएदार सुखी और संपन्न रहते हैं। कुछ बातों का ध्यान रख किराए के भवन में रहते हुए भी वास्तु के नियमों का पालन किया जा सकता है जैसे-

1- भवन का उत्तर-पूर्व का भाग अधिक खाली रखें।

2- दक्षिण-पश्चिम दिशा के भाग में अधिक भार या सामान रखें।

3- पानी की सप्लाई उत्तर-पूर्व से लें।

4- शयनकक्ष में पलंग का सिरहाना दक्षिण दिशा में रखें और सोते समय सिर दक्षिण दिशा में व पैर उत्तर दिशा में रखें।

5- यदि ऐसा न हो तो पश्चिम दिशा में सिरहाना व सिर कर सकते हैं।

6- भोजन दक्षिण-पूर्व की ओर मुख करके ग्रहण करें।

7- पूजा स्थल उत्तर-पूर्व दिशा में स्थापित करें यदि अन्य दिशा में हो तो पानी ग्रहण करते समय मुख ईशान (उत्तर-पूर्व) कोण की ओर रखें।

Monday, 3 October 2011

वास्तु



इन वास्तु उपायों से भरेगा आपका घर…

अगर आप पैसों की कमी से जूझ रहे हैं|घर में आमदनी से अधिक खर्च आपके लिए अक्सर मानसिक तनाव का कारण बन जाता है तो नीचे लिखे वास्तुप्र्योग अपना कर आप माँ लक्ष्मी की प्रसन्नता प्राप्त कर सकते हैं|

साल में एक दो-बार हवन करें|

घर में अधिक कबाड़ इकठ्ठा न करें|

शाम के समय एक बार पूरे घर की लाइट जरूर जलाएं|इस समय घर में लक्ष्मी का प्रवेश होता है|

सुबह-शाम सामूहिक आरती करें|

महीने में एक या दो बार उपवास करें|

घर में हमेशा चन्दन और कपूर की खुशबु का प्रयोग करें|

जो व्यक्ति श्रेष्ट धन की इच्छा रखते हैं व रात्रि में सताईस हकिक पत्थर लेकर उसके ऊपर लक्ष्मी का चित्र स्थापित करें,तो निश्चय ही उसके घर में अधिक उन्नति होती है|

यदि ग्यारह हकिक पथेर लेकर किसी मंदिर में चदा दें|कहें की अमुक कार्य में विजय होना चाहता हूँ तो निश्चय ही उस कार्य में विजय प्राप्त होती है|

Friday, 23 September 2011

जड़ मूल


 

आइये जाने *जड़ (मूल) माला द्वारा वास्तु-दोष उपचार –पवन तलहन—

घर, भवन और उद्योग में दिशाओं में यदि वास्तु-दोष आ जाये तो, हमारे ऋषियों ने दिशाओं के अनुसार उपाय बताये हैं! —

१–पूर्व में “बेल” की जड़ से बनी माला को रखने पर पूर्व में आये वास्तु-दोष दूर होता है!

२–ईशान्य में वास्तु दोष होने पर “वृद्धमूल” की जड़ से बनी माला ईशान्य में आये दोष को दूर करती है!

३–उत्तरे में वास्तु आने पर “वमनमेठी” की जड़ से बनी माला रखने पर उत्तर दोष समाप्त होता है!

४–वायव्य में आये दोष को दूर करने के लिये “खिरनी” की जड़ से बनी माला का प्रयोग करना चाहिये! ११ बच्छों को दूध पिलाना शुभ होता है!


५–पश्चिम में आये वास्तु-दोष को “रवैत विरैली” की जड़ से बनी माला से दोष दूर होता है!

६– nairrity कोण वास्तु दोष होने पर सफ़ेद “चन्दन” की जड़ से दोष दूर होता है!

७–दक्षिण में आये वास्तुदोष को दूर करने के लिये “अन्नतमूल” की जड़ से बनी माला द्वारा दोष दूर होता है!

८–अग्नि कोण में वास्तुदोष होने पर “मजीठ” की जड़ से बनी माला से दोष होता है!
माला को दिशानुसार दिशा में रखना चाहिये!

Saturday, 17 September 2011

वास्तु बिना तोड़ फोड़ के


बिना तोड़-फोड़ के निम्नलिखित उपाय से वास्तुदोष से सरलता पूर्वक छुटकारा पा सकते हैं।

-
अपनी रूचि के अनुसार सुगन्धित फूलों का गुलदस्ता सदैव अपने सिरहाने की ओर कोने में सजाएँ।
 
- शयन कक्ष में जूठे बर्तन न रखे इससे पत्नी का स्वास्थ्य खराब होता है, धन की कभी अनुभव होने लगती है।
- परिवार का कोई सदस्य मानसिक तनाव से ग्रस्त हो तो काले मृग की चर्म बिछाकर सोने से लाभ होता है। किसी भी सदस्य को बुरे स्वप्न आते हो तो गंगा जल सिरहाने रख कर सोएँ।

-
परिवार में कोई रोग ग्रस्त हो तो चांदी के पात्र में शुद्ध केसरयुक्त गंगा जल भरकर सिरहाने रखें।
 
- अगर कोई व्यक्ति मानसिक तनाव से ग्रस्त हो तो कमरे में शुद्ध घी का दीपक जलाकर रखें इसके साथ गुलाब की अगरबत्ती भी जलाएँ।

 
- शयनकक्ष के झाडू न रखें। तेल का कनस्तर, अंगीठी आदि न रखें। व्यर्थ की चिंता बनी रहेगी। यदि कष्ट हो रहा है तो तकिए के नीचे लाल चंदन रख कर सोएँ।



- यदि दुकान में चोरी होती है तो दुकान की चौखट के पास पूजा करके मंगल यंत्र स्थापित करें।
 
- दुकान में मन नहीं लगता तो श्वेत गणपति की मूर्ति विधिवत्‌ पूजा करके मुख्य द्वार के आगे और पीछे स्थापित करना चाहिए। 

 
- यदि दुकान का मुख्य द्वार अशुभ है या दक्षिण पश्चिम या दक्षिण दिशा में है तो 'यमकीलक यंत्र' का पूजन करके स्थापना करें। यदि सरकारी कर्मचारी द्वारा परेशान हैं तो सूर्य यंत्र की विधिवत्‌ पूजा करके दुकान में स्थापना करें।

- सींढ़ियों के नीचे बैठकर महत्वपूर्ण कार्य न करें।

 
- दुकान, फैक्ट्री, कार्यालय आदि स्थानों में वर्ष में एक बार पूजा अवश्य करें।

 
- गुप्त शत्रु परेशान कर रहे हैं तो लाल चाँदी के सर्प बनाकर उनकी आँखों में सुरमा लगाकर पैर के नीचे रख कर सोना चाहिए।

- जबसे आपने मकान लिया है तब से भाग्य साथ नहीं दे रहा है और लगता हैं पुराने मकान में सब कुछ ठीक-ठाक था या अब परेशानियाँ हैं तो घर में पीले रंग के पर्दे लगवाएँ।

 
- सटे भवन में हल्दी के छींटे मारें और गुरु को पीले वस्त्र दान करें।

 
- यदि संतान आज्ञाकारी नहीं है, संतान सुख और संतान का सहयोग प्राप्त हो, इसके लिए सूर्य यंत्र या तांबा वहाँ पर रखें जहाँ भवन का प्रवेश द्वार है। प्राण प्रतिष्ठा करा कर रखें।

Tuesday, 13 September 2011

वास्तुनासर

वास्तुनासर नकारात्मक और सकारात्मक ऊर्जा



यहाँ हम आपको कुछ ऐसी बाते बताने जा रहे है जो है तो बहुत कॉमन लेकिन इनकी और हमारा ध्यान नहीं जा
पाता है और जाने अनजाने में वास्तु दोष उत्पन्न हो जाते है और इस कारण हम अवांछित नुकसान उठाते है |

वास्तु दोष : गरीबी के कारक 
यदि आपको लाख कोशिशों के बाद भी भाग्य का साथ नहीं मिल पा रहा है तो निश्चित ही आपके घर में कोई वास्तु दोष हो सकता है। वास्तु शास्त्र हमारे आसपास मौजूद नकारात्मक और सकारात्मक ऊर्जा के सिद्धांतों पर कार्य करता है। हमारे आसपास फैली नकारात्मक ऊर्जा अधिक सक्रिय हो जाए तो हमें हर कार्य में असफलता का मुंह देखना पड़ सकता है। इसके अलावा धन संबंधी परेशानियां उठानी पड़ सकती हैं।

वास्तु शास्त्र और ज्योतिष के अनुसार घर में कहीं भी पानी की बर्बादी होना अशुभ माना जाता है। यदि किसी व्यक्ति के घर में नल टपकता है, दीवारों पर सीलन हो रही है, घर में कई स्थानों पर हमेशा गीला रहता है, घर के आसपास गंदा पानी जमा है तो यह सभी बातें यही इशारा करती है कि आपके घर में आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है। ज्योतिष के अनुसार भी ऐसी परिस्थितियां कुंडली में चंद्र के खराब होने के कारण बनती हैं। चंद्र खराब होने पर आर्थिक तंगी आने की पूरी संभावनाएं होती हैं। पानी और चंद्र का सीधा संबंध माना जाता है। अत: घर में जल का अपव्यय होना चंद्र के अशुभ प्रभाव को बढ़ा देता है। इस प्रकार की परिस्थितियां निश्चित ही आपके परिवार के लिए अशुभ हैं। अत: इनसे बचने का प्रयास करें।

वास्तु दोष दूर करने के उपाय :अमीरी के कारक
सभी चाहते हैं कि उनके घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहे। इसके लिए वे कई प्रकार के उपाय भी अपनाते हैं। इन उपायों में धर्म, ज्योतिष और वास्तु से जुड़ी बातें भी शामिल होती हैं। घर में समृद्धि बनाए रखने के लिए सामान्यत: सभी के दरवाजों पर श्रीगणेश या उनका प्रतीक चिन्ह अवश्य होता है। गणेशजी के साथ ही स्वस्तिक और ऊँ बनाने से निश्चित ही सकारात्मक फल प्राप्त होते हैं।

घर के मुख्य द्वार या दरवाजे पर गणेश की चित्र या प्रतिमा लगाना शुरू माना जाता है। प्रथम पूज्य गणेश के नाम के साथ ही हर शुभ कार्य का शुभारंभ होता है। अत: मुख्य दरवाजे पर गणेशजी का होना घर-परिवार के लिए शुभ फल देने वाला होता है। वास्तु के अनुसार गणेशजी को दरवाजे के बीच में ऊपर की ओर लगाना चाहिए। इसके साथ ही प्रतिदिन दरवाजे पर गणेशजी को सिंदूर चढ़ाएं और गणेशजी के दाएं ओर स्वस्तिक तथा बाएं ओर ऊँ का चिन्ह बनाएं।

ऐसा करने पर बहुत जल्द आपको सकारात्मक परिणाम प्राप्त होंगे। आपके परिवार में सभी सदस्यों को सफलाएं मिलेगी। रुके हुए कार्य समय पर पूर्ण होने लगेंगे। आपके भाग्योदय में आ रही बाधाएं हटने लगेंगी।

Wednesday, 24 August 2011

वास्तु दोष मुक्ति उपाय




आम व्यक्ति वास्तु दुवारा अपने ऑफिस वा अपने घर के वास्तु दोष को नहीं भाप पता इसलिए सरल भाषा दुवारा वास्तु की कुछ महत्वपूर्ण बातो को आपके सामने बता रहा हु | जिससे आप अपने घर में वास्तु दोषों  से  मुक्ति पा सके वास्तु में आठ  दिशाए है  :-
(1) East(पूर्व)
(2) North(उत्तर)
(3) North East(ईशान कोर्ण )
(4) West(पशिचम)
(5) North West(वायव्य कोर्ण )
(6) South(दक्षिण)
(7) South West(नेत्रेत्य कोर्ण )
(8) South East(आग्नेय कोर्ण )
वास्तु मै  इन  आठ  दिशाओ  का  वर्णन  वा कार्य  बहुत  महत्वपूर्ण है  हर  दिशा का  अपना  महत्व  वा कार्य  है |
(1) East(पूर्व):-पूर्व दिशा का प्रतिनिधि गृह  सूर्य  है  यदि  इस दिशा में  दोष हो  तो  वंश  विर्धि  में  बाधक  होता  है  पूर्व  स्थान  खुला  वा हल्का  होना  चाहिए  पूर्व  दिशा में  खिडकिया  वा मुक्य  दुवार अच्छा  होता  है  वा दरवाजे  खिडकिया  ज्यादा  खुला  रखे विद्याथियो  के लिए पड़ते  समय  मुख  पूर्व  दिशा की और  रखे  वा  खाना  भी  पूर्व  दिशा की और  मुख  करके  खाना  चाहिए  यदि  इस  स्थान  पर  दोष हो तो  पूर्व  दिशा में एक बड़ा शीशा लगाए,सूर्य  देवता  का  चित्र  वा सूर्य  यन्त्र  लगाये  सुबह  सूर्य  को ज़ल  दे  वा मंत्र  का  जाप  करे  :-ॐ ह्रम ह्रीम ह्रौम सः सूर्याय नमः  |

(2) North(उत्तर):-उत्तर दिशा के स्वामी कुबेर वा लक्ष्मीजी है उतर दिशा माँ का स्थान होता है | यदि आपके घर पर उतर दिशा में यदि दोष है तो माता को कष्ट वा धन की हानि होती रहती है यह भाग कटा नहीं होना चाहिए यदि कटा हो तो एक शीशा उत्तरी दिवार पर लागये | उत्तरी दीवार पर तोते का चित्र लागये बच्चो की पढाई में जादू का काम करगी यदि धन की हानि हो रही हो तो माता लक्ष्मीजी का चित्र लगा सकते है | इस दिशा पर भी ज्यादा वजन नहीं रकना चाहिए इस दिशा को हल्का रखना चाहिए | यदि उतर दिशा में दोष है तो बुध यन्त्र,लक्ष्मी यन्त्र वा कुबेर यन्त्र किसी को भी लगा सकते है | इस मंत्र का जाप करे :-ॐ ब्राम ब्रीम ब्रोम सः बुधाय नमः का जाप करे |     
   
(3) North East(ईशान दिशा):-ईशान दिशा का स्वामी गृह गुरु है | इस स्थान पर स्नानघर होना चाहिए पानी का बहाव इसी दिशा मै उत्तम होता है वा आपके घर का मंदिर इसी दिशा में सर्वोपरी होता है इस स्थान को साफ़ सुथरा रखे गन्दा ना होने दे यदि यह स्थान दूषित हो तो ज़ल का मटका इस दिशा पर रखे वा ऋषि मुनियों का चित्र इस दिशा पर लागवे | इस मंत्र का जाप करे:- ॐ ग्राम ग्रीम ग्रोम सः गुरुवे नमः का जाप करे |  

(4) West(पशिचम):-पशिचम दिशा का स्वामी गृह शनि है | इस स्थान पर गमले ,बगीचे वा पेड़ पोधे लगा सकते है इस स्थान को जितना भरी रखेगे उतना अच्छा फल प्राप्त होगा यहाँ पर जमीन के नीछे का पानी का स्रोत वा फव्वारा लगा सकते है | भारी सामान रख सकते है वा इस दिशा में दोष हो तो शनि यन्त्र और इस मंत्र का जाप कर सकते है ॐ प्राम प्रीम प्रोम सः शनिश्चार्ये नमः का जाप कर सकते है |         
 
(5) North West(वायव्य कोर्ण ) :-वायव्य दिशा का स्वामी चन्द्रमा है | इस स्थान पर पानी की टंकी को रखना चाहिए इस स्थान पर मछली घर रख सकते है वा पानी का छोटा फव्वारा भी लगा सकते है इस दिशा में दोष हो तो घुटने और कोहनी से सम्बंधित परेशानिया होती है दोष को शांत करने के लिए  शवेत गणपति लागये वा चन्द्र यन्त्र लागये वा इस मंत्र का जाप करे :-"ॐ श्रम श्रीम श्रौम सः चन्द्रमसे नमः " का जाप करे |

(6) South(दक्षिण) :-दक्षिण दिशा का स्वामी मंगल गृह है | इस दिशा मै कुछ भी भारी सामान रख सकते है जेसे अलमारी,फीरिज वा गमले लगा सकते है | इस दिशा मै मुख्यदुआर ना बनाये | यदि इस दिशा में दोष हो तो हनुमान जी की तस्वीर दक्षिण दिशा में लगा देना वा इस मंत्र का जाप करे :-ॐ क्रम क्रीम क्रौम सः भौमाय नमः |

(7) South West(नेत्रेत्य कोर्ण) :-इस दिशा का स्वामी राहु है इस दिशा हमेशा सूखा रखे | यदि इस स्थान पर दोष हो तो मानसिक परेशानिया,कोई कार्य ना बनना ,पेरों से सम्बंधित रोग हो सकते है | इस दिशा में स्टोर रूम बना सकते है वा ज्यादा हलचल नहीं होनी चाहिए भारी सामान रख सकते है | यदि आप इन परेशानियों से ग्रस्त है तो राहु यन्त्र लगवाये वा इस मंत्र का जाप करे :-ॐ भ्रम भ्रीम भ्रौम सः रहावे नमः का जाप करे |

(8) South East(आग्नेय कोर्ण ) :-इस दिशा का स्वामी शुक्र है इस दिशा मै रसोई घर होना चाहिए क्योकि इस दिशा में अग्नि का वास होता है | यदि इस दिशा में दोष हो तो स्वास्थ्य सम्बन्धी बिमारिय लग सकती है शारीर कमजोर हो सकता है | इस दिशा में दोष हो तो इस दिशा में हवन करवाए वा अग्नि की तस्वीर लागये नहीं तो शुक्र यन्त्र की स्थापना करे वा मंत्र का जाप करे :- ॐ द्राम द्रीम द्रौम सः शुक्राय नमः  मंत्र का जप करे |                  

Saturday, 20 August 2011

वास्तु


व्यक्ति जीवन में संघर्ष करता है सफलता प्राप्त करने हेतु और अपनी जिम्मेदारी को भली भांति पूरा करने हेतु..उसमे जीवन यात्रा में कई ऐसे पड़ाव आते है जब व्यक्ति बहुत ही असहाय हो जाता है.....और यदि कुछ छोटी छोटी बातो का ध्यान दे दिया जाये तो शयद यह जीवन यात्रा बहुत ही सहज और रोचक हो जाये तो आइये आज कुछ ऐसे ही सरल उपाय...जिनसे मिलेगा जीवन में लाभ-

- भोजन यथासंभव आग्नेय कोण में पूर्व की ओर मुंह करके बनाये |


- मुकदमे आदि से संबंधित कागजात धन रखने के स्थान पर न रखें |


- पूजा कक्ष में, धूप, अगरबत्ती व हवन कुंड हमेशा दक्षिण पूर्व में रखें।


- सम्पूर्ण भवन में व प्रवेश द्वार पर जल या गंगाजल से नित्य सिंचन करे |


- रात्रिकाल में शयन से पूर्व कुछ समय अपने इष्टदेव का ध्यान अवश्य करे |

Tuesday, 16 August 2011

सुख-समृद्धि के अचूक उपाय

वास्तु: सुख-समृद्धि के अचूक उपाय

यूं तो पूर्णत: वास्तु सम्मत भवन बनाना काफी कठिन होता है। भवन बनवाते समय कहीं न कहीं त्रुटि हो ही जाती है। इन समस्याओं का समाधान सामान्य उपाय कर किया जा सकता है जिससे घर में भी सुख-शांति बनी रहती है। यह सामान्य उपाय इस प्रकार हैं-

1- सुख-समृद्धि व मन की प्रसन्नता के लिए बैठक कक्ष में फूलों का गुलदस्ता रखें। शयनकक्ष में खिड़की के पास भी गुलदस्ता रखना चाहिए।


2- घर में कभी भी कंटीली झाडिय़ां या पौधे न रखें। इन्हें लगाने से समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है

।
3- ऐसे पुष्प या पौधे को सजावट में न ले जिससे दूध झरता हो। शुभता की दृष्टि से ये अशुभ होते हैं।


4- शयनकक्ष में झूठे बर्तन नहीं रखना चाहिए। आलस्य के कारण ऐसा करने पर रोग व दरिद्रता आती है।


5- रात में बुरे सपने आते हों तो जल से भरा तांबे का बर्तन सिरहाने रखकर सोएं।


6- यदि गृहस्थ जीवन में समस्याएं हों तो कमरे में शुद्ध घी का दीपक प्रतिदिन जलाना चाहिए।


7- यदि शत्रु पक्ष से पीडि़त हो तो पलंग के नीचे लोहे का दण्ड रखें।


8- पवित्र स्थान या पूजा स्थल ईशान कोण(पूर्व-उत्तर) में ही बनवाएं। इससे घर में सुख-समृद्धि आएगी।


9- टी.वी. या अन्य अग्नि संबंधी उपकरण सदैव आग्नेय कोण में रखें।


10- शयन कक्ष में नशीले पदार्थों का सेवन नहीं करें। ऐसा करने से घर में क्लेश होता है। 


वास्तु

घर का वास्तु हमारे जीवन पर व्यापक असर डालता है। वास्तु में की गई छोटी-छोटी गलतियों के कारण कई बार गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। कुछ सामान्य वास्तु नियमों का पालन कर हम वास्तु दोष से होने वाली दुष्प्रभाव से बच सकते हैं। इसके लिए इन बातों का ध्यान रखना आवश्यक है-
1- जब भी पानी पीएं, अपना मुख उत्तर-पूर्व की ओर रखें।
2- भोजन करते समय थाली दक्षिण-पूर्व की ओर रखें और पूर्वाभिमुख होकर भोजन करें।
3- सोते समय दक्षिण-पश्चिम कोण में दक्षिण की ओर सिरहाना करके सोएं।
4- पूजा करते समय मुख उत्तर-पूर्व या उत्तर-पश्चिम की ओर करके बैठें।
5- उन्नति के लिए लक्ष्मी, गणेश, कुबेर, स्वास्तिक, ऊं आदि मांगलिक चिह्न मुख्यद्वार के ऊपर स्थापित करें।
6- यदि ट्यूबवैल उत्तर-पूर्व में नहीं है तो अवश्य लगवाएं।
7- पूजा स्थल सदैव उत्तर-पूर्व (ईशान) कोण में रखें।

Tuesday, 9 August 2011

वास्तु: हल्दी,नमक,धनिया,लाएं घर में बरकत


क्या आपको मालूम हें कि भारत वर्ष के कई राज्यों में अब भी यह परंपरा है कि अपनी बेटी कि शादी के समय विदाई करते समय बेटी को चाहे ओर कुछ भी दिया हो लेकिन नमक साबुत या थैली वाला अवश्य देंगे.                         
  
यह तो बात नमक के व्यवहार की थी. लेकिन आज विषय हमारा घर के वास्तु से सम्बंधित है. नमक के बाद
हल्दी कितनी शुभ मानी जाती है यह सबको पता है कहने या लिखने की आवश्यकता नहीं.हल्दी की गांठे साक्षात गणपति का स्वरुप मानी जाती है.
लक्ष्मी मां का आसान कमाल हैं कमलगट्टा उसी लक्ष्मी को आवाहन कर के स्थिर करने का आसान है.
कहावत हें कि धना को धना अर्थात धनिया (खड़ा धनिया) धन को आकर्षित करने वाला धनिया आयुर्वेद में भी अनेक रोगों का नाश करता है.

इसलिए वास्तु शास्त्र तथा हमारे पूज्यनीय मार्गदर्शक सद्ग्रन्थ सब का यही एक मत रहा है कि घर में १- नमक, २ – कमलगट्टा, ३ – हल्दी(साबुत), ४–साबुत-धनिया यह चार वस्तुए हमें चार प्रकार के सुख धर्म,अर्थ,काम ओर मोक्ष प्रदान करती है. जहाँ ये चार पदार्थ होंगे वहाँ शान्ति बनी रहेगी धन,पुत्र, भूमि आदि सभी सुख उस घर में स्थायी रूप से निवास करते है.

इन चार वस्तुओ को हम अपने घरों में थोड़ी-थोड़ी मात्रा में नमक साबुत,धनिया तथा हल्दी की कम से कम ५ पांच गाँठ ओर कमलगट्टे कम से कम ११ नग होने चाहिये.अच्छी तरह से साफ़ कर के छोटी-छोटी पोलिथिन में अलग-अलग डाल कर बंद कर के किसी बड़ी पोलिथिन में डाल कर अपने घर के ईशानकोण में किसी सुरक्षित स्थान पर रख दे.

 इसे केवल पूर्णिमा के दिन ही रखें. इन्हें समय समय पर चार या छह माह बाद चैक कर ले यदि कोई वास्तु खराब होने लगे तो उसे जल प्रवाह कर नया रख दे. इसके करने से आपका घर पूर्णतया माता लक्ष्मी का निवास बन जायगा. बरकत कभी भी खत्म नहीं होगी.रोग, शत्रु आदि कोसों दूर ही रहेंगे.


वास्तु का यह अदभुत प्रयोग करे और अपने घर में स्थायी सुख का स्थान सुरक्षित कर लें.
आपके विचारों की मै उत्सुकता से प्रतीक्षा कर रहा हूं..........