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Friday, 12 August 2011

ग्रहों व राशियों का संबंध

ग्रहों व राशियों का संबंध
ग्रहों व राशियों का संबंध
मूल ग्रह सात एवं राशियां बारह हैं | इनको आपस में गुणा करने पर 84 संख्या आती है | इसका मतलब यह हुआ कि चौरासी लाख योनिओं का चक्कर इस अंक से घूमता है | हर सात या आठ वर्षों के बाद ग्रहों का जो प्रभाव पहले मिल चुका होता है, उस की पुनरावृति होती है |
> जन्मकुंडली के दूसरे घर में कोई भी ग्रह नीच नहीं होता |
> जन्मकुंडली के आठवें घर में कोई भी ग्रह उच्च या नीच नहीं होता |
> जन्मकुंडली के पांचवें व ग्यारवें घर में भी कोई ग्रह उच्च या नीच नहीं होता |
> दैवी शक्ति से युक्त चन्द्र मृत्यु को भी शिकस्त दे सकता है |
राशी 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12
राशी
नाम
मेष वृषभ मिथुन कर्क सिंह कन्या तुला वृश्चिक धनु मकर कुंभ मीन
स्वामी मंगल शुक्र बुध चंद्र सूर्य बुध शुक्र मंगल गुरु शनि शनि गुरु
उच्च
ग्रह
सूर्य चंद्र राहु गुरु - बुध
राहु
शनि - केतु मंगल - शुक्र
केतु
नीच
ग्रह
शनि - केतु मंगल - शुक्र केतु सूर्य चंद्र राहु गुरु - बुध
राहु
कारक
ग्रह
सूर्य गुरु मंगल चन्द्र गुरु केतु बुध
शुक्र
मंगल
शनि
गुरु शनि गुरु राहु
भाग्य-
दायक
ग्रह
मंगल चंद्र बुध चंद्र सूर्य राहु शुक्र चंद्र गुरु शनि गुरु राहु
ग्रहफल
ग्रह
मंगल राहु केतु शनि चंद्र गुरु
सूर्य
बुध
केतु
शुक्र मंगल गुरु शनि गुरु
शनि
राहु
राशिफल
ग्रह
राहु - शनि मंगल
शुक्र
केतु
- शनि सूर्य
राहु
गुरु
- शनि बुध
केतु
- बुध

लाल किताब के उपाय कब और कैसे करें

लाल किताब के उपाय कब और कैसे करें
लाल किताब में उपाय करने के अपने नियम हैं | इसलिए लाल किताब में उपाय कब और कैसें करें ये निम्न प्रकार से बतलाया गया है | किसी भी उपाय को करने के लिए मन में श्रद्धा का होना जरूरी है | पूरे मन से किया गया उपाय पूर्ण फल देता है व अधूरे मन से किया गया उपाय निष्फल रहता है | इसलिए आपको सलाह दी जाती है कि आप कोई भी उपाय करें उसे निष्ठापूर्वक पूरे मन से श्रद्धापूर्वक करें | पूरे मन से व श्रद्धा से आप द्वारा किया गया उपाय आपके लिए कल्याणकारी सिद्ध होगा |

1. उपाय सूर्य निकलने के बाद सूर्य छिपने तक दिन के समय करें, रात के समय उपाय करना कई बार अशुभ फल दे सकता है। केवल चन्द्र ग्रहण का उपाय रात को किया जा सकता है ।
2. उपाय शुरू करने के लिए किसी खास दिन सोमवार या मंगलवार आदि, सक्रांति, अमावस्या या पूर्णिमा आदि का कोई विचार नहीं होगा।
3. आप का कोई खून का संबंधी रिश्तेदार जैसे भाई-बहन, माता-पिता, दादा-दादी, पुत्र-पुत्री आदि में से उपाय कर सकता है जो फलदाई होगा।
4. एक दिन में केवल एक ही उपाय करें, एक दिन में दो उपाय करने से शुभ फल नहीं मिलता या किया हुआ उपाय निष्फल हो सकता है।
5. जो परहेज बताए जाये जैसे मांस-मछली न खावें, मदिरा का सेवन न करें, चाल-चलन ठीक रखें, झूठ न बोलें, जूठन न खावें न खिलावें, नियत में खोट न रखें, परस्त्री-परपुरुष से संबंध न करें, आदि का विशेष ध्यान रखें।
6. जो उपाय जिस समय के लिये लिखा है उसी समय तक करें, आगे यह उपाय बंद कर देवें।
7. यदि किसी कारण उपाय बीच में बंद करना पड़ जाय तो जिस दिन उपाय बन्द करना है उससे एक दिन पहले थोड़े से चावल दूध से धोकर सफेद कपड़े में बांध कर पास रख लें और जब दुवारा उपाय शुरू करना हो वह चावल धर्म स्थान में या चलते पानी में या किसी बाग-बगीचे आदि में गिरा कर उपाय फिर शुरू कर दें। ऐसा करने से उपाय अधूरा नहीं माना जाएगा और पूरा फल मिलेगा।
8. हर उपाय 43 दिन या 43 सप्ताह या 43 मास या 43 वर्ष तक करना होता है, उपाय चलते समय बीच में टूट जाए चाहे 39वां दिन क्यों न हो सब निष्फल हो सकता है या शुभ फल में कमी रह सकती है।
9. जन्म कुण्डली में अशुभ ग्रहों का वर्षफल कुण्डली में उपाय अपने जन्मदिन से लेकर 40-43 दिन के भीतर ही करें ।
10. घर में कोई सूतक (बच्चा जन्म हो) या पातक (कोई मर जाय) हो जाय तो 40 दिन उपाय नहीं करने चाहिये ।