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Thursday, 9 February 2012

रुद्राक्ष

रुद्राक्ष-शिव के आँख के तारे

 का महत्व
रुद्राक्षदेवता             मंत्र
१ मुखीशिव 1-ॐ नमः शिवाय । 2 –ॐ ह्रीं नमः
२ मुखीअर्धनारीश्वर ॐ नमः
३ मुखीअग्निदेव ॐ क्लीं नमः
४ मुखीब्रह्मा,सरस्वती ॐ ह्रीं नमः
५ मुखीकालाग्नि रुद्र ॐ ह्रीं नमः
६ मुखीकार्तिकेय, इन्द्र,इंद्राणी ॐ ह्रीं हुं नमः
७ मुखीनागराज अनंत,सप्तर्षि,सप्तमातृकाएँ ॐ हुं नमः
८ मुखीभैरव,अष्ट विनायक ॐ हुं नमः
९ मुखीमाँ दुर्गा १-ॐ ह्रीं दुं दुर्गायै नमः २-ॐ ह्रीं हुं नमः
१० मुखीविष्णु १-ॐ नमो भवाते वासुदेवाय २-ॐ ह्रीं नमः
११ मुखीएकादश रुद्र १-ॐ तत्पुरुषाय विदमहे महादेवय धीमही तन्नो रुद्रः प्रचोदयात २-ॐ ह्रीं हुं नमः
१२ मुखीसूर्य १-ॐ ह्रीम् घृणिः सूर्यआदित्यः श्रीं २-ॐ क्रौं क्ष्रौं रौं नमः
१३ मुखीकार्तिकेय, इंद्र१-ऐं हुं क्षुं क्लीं कुमाराय नमः २-ॐ ह्रीं नमः
१४ मुखीशिव,हनुमान,आज्ञा चक्र ॐ नमः
१५ मुखीपशुपति ॐ पशुपत्यै नमः
१६ मुखीमहामृत्युंजय ,महाकाल ॐ ह्रौं जूं सः त्र्यंबकम् यजमहे सुगंधिम् पुष्टिवर्धनम उर्वारुकमिव बंधनान् मृत्योर्मुक्षीय सः जूं ह्रौं ॐ
१७ मुखीविश्वकर्मा ,माँ कात्यायनी ॐ विश्वकर्मणे नमः
१८ मुखीमाँ पार्वती ॐ नमो भगवाते नारायणाय
१९ मुखीनारायण ॐ नमो भवाते वासुदेवाय
२० मुखीब्रह्मा ॐ सच्चिदेकं ब्रह्म
२१ मुखीकुबेर ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्य समृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा

Monday, 30 January 2012

रुद्राक्ष

रुद्राक्ष के वर्ण और धारण में अधिकार, रुद्राक्ष के मुख और धारण विधि---पवन तलहन--
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------------------------------ {चेतावनी}--------------------- ------
#######जो लोक २७--दानों से कम रुद्राक्ष के दाने धारण करते हैं,
उनको शिव-दोष लगता है!
तथा किसी भी प्रकार का उपाये करने पर वह व्यक्ति दोष मुक्त नहीं होता!##########
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शिव पुराण---
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रुद्राक्ष धारण की महिमा तथा उसके विविध भेदों का वर्णन---
विद्येश्वर संहिता---अध्याय-- २५
भगवान शिव कहते हैं--महेश्वरी शिवे! मैं तुम्हारे प्रेम वश भक्तों के हित की कामना से रुद्राक्ष की महिमा वर्णन करता हूँ, सुनो!- महेशानि!--
पूर्वकाल की बात है, मैं मन को संयम में रख कर हजारों दिव्य वर्षों तक घोर तपस्या में लगा रहा! एक दिन सहसा मेरा मन क्षुब्ध हो उठा! परमेश्वरी! मैं सम्पूर्ण लोकों का उपकार करने वाला स्वतंत्र परमेश्वर हूँ! अत: उस समय मैंने लीलावश ही अपने दोनों नेत्र खोले, खोलते ही मेरे मनोहर नेत्रपुटों से खुछ जल की बूंदें गिरीं! आंसू की उन बूंदों से वहां रुद्राक्ष वृक्ष पैदा हो गया! भक्तों पर अनुग्रह करने के लिये वे अश्रुबिंदु स्थावरभाव को प्राप्त हो गये! वे रुद्राक्ष मैंने विष्णुभक्त को तथा चारों वर्णों के लोगों को बाँट दिये! भूतपर अपने प्रिय रुद्राक्षों को मैंने गौड़ देश में उत्पन्न किया! मथुरा, अयोध्या, लंका, मलयाचल, सह्यागिरी, काशी तथा एनी देशों में भी उनके अंकुर उगाये! वे उत्तम रुद्राक्ष असह्य पापसमूहों का भेदन करने वाले तथा श्रुतियों के भी प्रेरक हैं! मेरी आज्ञा से ब्रह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र जाती के शुभाक्ष भी हैं! उन ब्राह्मणादि जाती वाले रुद्राक्षों के वर्ण श्वेत, रक्त,पीत तथा कृष्ण जानने चाहिये!
मनुष्य को चाहिये कि वे क्रमश: वर्ण के अनुसार अपनी जातिका ही रुद्राक्ष धारण करें! भोग और मोक्ष की इच्छा वाले चरों वर्णों के लोगों के और विशेषत: शिवभक्तों को शिव-पार्वती की प्रसन्नता के लिये रुद्राक्ष के फलों को अवश्य धारण करना चाहिये! आंवले के फल के बराबर हो, वह श्रेष्ट कहा है! जो बेर के बराबर हो उसे मध्यम श्रेणी का कहा गया है और जो चने के बराबर हो, उसकी गणना निम्नकोटि में की गयी है! इसे बताने का उद्देश्य है भक्तों की हितकामना! पार्वती! तुम भलीभांति प्रेमपूर्वक इस विषय को सुनो!
महेश्वरी! जो रुद्राक्ष बेर के फल के बराबर होता है, वह उतना छोटा होने पर भी लोक में उत्तम फल देने वाला तथा सुख-सौभाग्य की वृद्धि करने वाला होता है! जो रुद्राक्ष आंबले के बराबर होता है, वह समस्त अरिष्टों का विनाश करने वाला होता है! तथा जो गुन्जाफल के समान बहुत छोटा होता है, वह सम्पूर्ण मनोरथों और फलों की सिद्धि करने वाला है! रुद्राक्ष जैसे २ छोटा होता है, वैसे २ ही अधिक फल देने वाला बताया है! एक-एक बड़े रुद्राक्ष से एक-एक छोटे रुद्राक्ष को विद्वानों ने दसगुणा अधिक फल देने वाला बताया है! पापों का नाश करने के लिये रुद्राक्ष-धारण आवश्य बताया गया है! वह निश्चय ही सम्पूर्ण अभीष्ट मनोरथों का साधक है! अत: अवश्य ही उसे धारण करना चाहिये!
महेश्वरी! लोक में मंगलमय रुद्राक्ष जैसा फल सेने वाला देखा जाता है, वैसे फलदायिनी दूसरी कोई माला नहीं दिखायी देती! देवी! समान आकार-प्रकार वाले, चकने, महबूत, स्थूल, कण्टकयुक्त{ उभरे हुए छोटे-छोटे दानों वाले} और सुन्दर रुद्राक्ष अभिलषित पदार्थों के दाता तथा सदैव भोग और मोक्ष देने वाले हैं! जिसे कीड़ों ने दूषित कर दिया हो, जो टूटा-फूटा हो, जिसमे उभरे हुए दानें न हों, जो व्रणयुक्त हो तथा जो पूरा-पूरा गोल न हो, इन पञ्च प्रकार के रुद्राक्षों को त्याग देना चाहिये! जिस रुद्राक्ष में अपने आप ही डेरा पिरोने के योग्य छिद्र हो गया हो, वही यहाँ उत्तम माना गया है! जिसमे मनुष्य के प्रयत्न से छेड़ किया गया हो, वह मध्यम श्रेणी का होता है! रुद्राक्ष धारण बड़े-बड़े पातकों का नाश करने वाला ही! इस जगत में ग्यारह सौ रुद्राक्ष धारण करके जिस फल को पाता है उसका वर्णन सैंकड़ों वर्षों में नहीं किया जा सकता! भक्तिमान पुरुष साढ़े पांच सौ रुद्राक्ष के दानों का सुन्दर मुकुट बना ले और उसे सिरपर धारण करे! तीन सौ साठ दानों को लंबे सूत्र में पिरोकर एक हार बना ले! वैसे२ तीन हार बनाकर भक्तिपरायण पुरुष उनका यज्ञोपवीत करे और उसे यथास्थान धारण किये रहे!
कितने रुद्राक्ष धारण करने चाहिये, यह बताकर सूतजी बोले!
सिरपर ईशान- मन्त्र से, कान में तत्पुरुष-मन्त्र से तथा गले और हृदय अघोर-मन्त्र से रुद्राक्ष धारण करना चाहिए! विद्वान् पुरुष दोनों हाथों में अघोर-बीज मन्त्र सर रुद्राक्ष धारण करे! उदर पर वामदेव मन्त्र से पंद्रह रुद्राक्षों द्वारा गुंथी हुई माला धारण करे! अथवा अंगों सहित प्रणव का पञ्च बार जप करके रुद्राक्ष की तीन, पांच या सात मालाएं धारण करे! अथवा मूल मन्त्र { नम: शिवाय} से ही समस्त रुद्राक्षों को धारण करे! रुद्राक्षधारी पुरुष अपने खान-पान में मदिरा, मांस, लहसुन, प्याज, सहिजन, लिसोड़ा आदि को त्याग दे! गिरिराजनंदिनी उमे श्वेत रुद्राक्ष केवल ब्राह्मणों को ही धारण करना चाहिये! गहरे लाल रंग का रुद्राक्ष क्षत्रिओं के लिये हित कर बताया गया है! वैश्यों के लिये प्रतिदिन बारंबार पीले रुद्राक्ष धारण करना आवश्यक है और शूद्रों को काले रंग का रुद्राक्ष धारण करना चाहिये--यह वेदोक्त मार्ग है! ब्रह्मचारी, वानप्रस्थ, गृहस्थ और संन्यासी- सब को नियम पूर्वक रुद्राक्ष धारण करना उचित है!
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जैसे आजकल लोग {ज्योतिषी] कहते हैं वैसे नहीं डाले! २७ दानों से कम दाने डालने पर नाश ही होता है! 
२७ दाने डालने का भी एक नियम है, उस नियमके विरुद्ध भी दाने डालने पर दोष ही लगते हैं!
ऊपर कहे अनुसार जप करने और धारण करने पर ही शुभ फल ही प्राप्ति होती है, अन्यथा दोष है लगता है!
यह शास्त्र प्रमाण- 
अष्टोत्तरशतं कार्या चतुष्पन्चाशदेव वा! सप्तविंशतिमाना वा ततो हीनाधमा स्मृता!!
अर्थात- रुद्राक्ष की माला अष्टोत्तर शत १०८ की हो, वा ५२ दाने की हो, अथवा सत्ताईस दाने की हो! इससे हीन अधम कही है! 
मोक्षार्थी पञ्चविंशत्या धनार्थी त्रिंशता जपेत!
पुष्टियर्थी पञ्चविंशत्या पञ्चदश्याभिचारके!! 
सप्त विंशतिरुद्राक्षमालया देहसंस्थाया!
यत्करोति नर: पुण्यं सर्व कोटि गुणं भवेत्!!
यो ददाति द्वेजेभ्यश्च रुद्राक्षं भुवि सम्मुखं !
तस्य प्रीतो भवेद्रुद्र: स्वपदं च प्रयच्छति!!
रुद्राक्षान कंठदेशे दशन परिमितान्मस्तके विंशती द्वे षट कर्णप्रदेशे करयुगलकृते द्वादश द्वादशैव!
बाह्वोरिन्दों: कलाभिर्नयनयुगकृते एकमेकं शिखायां वक्षस्यष्टाधिकं य: कलयति शतकं स स्वयं नीलकंठ:!!
अर्थात
मोक्ष वा पुष्टि का अभिलाषी रुद्राक्ष के पच्च्चीस दानों से, धन का अभिलाषी ३० दानों से, किसी को मारने का अभिलाषी १५ दानों से जप करे! जो मनुष्य रुद्राक्ष के २७ दानों की माला को धारण करके पूजन करता है उसे कोटिगुना फल मिलता है! जो मनुष्य शिव के सम्मुख ब्राह्मण को रुद्राक्ष देता है उस पर रूद्र प्रसन्न होते हैं तथा उसे अपने पद को प्राप्त कराते हैं!
धारण--
कंठ में ३२, मस्तक पर ४०, दोनों हाहों में १२-१२, दोनों भुजाओं पर १६-१६, दोनों नेत्रों पर ४-४, शिखा में १ और छाती पर १०८ रुद्राक्षों को धारण करता है वह स्वयं नीलकंठ [शिव रूप] है! इस प्रकार ही रुद्राक्ष धारण करने पर फल प्राप्त होता है!
जैसे आजकल लोग {ज्योतिषी] कहते हैं वैसे नहीं डाले! २७ दानों से कम दाने डालने पर नाश ही होता है!
२७ दाने डालने का भी एक नियम है, उस नियमके विरुद्ध भी दाने डालने पर दोष ही लगते हैं!
ऊपर कहे अनुसार जप करने और धारण करने पर ही शुभ फल ही प्राप्ति होती है, अन्यथा दोष है लगता है!
यह शास्त्र प्रमाण-
जो लोक २७--दानों से कम रुद्राक्ष के दाने धारण करते हैं उनको शिव-दोष लगता है! तथा किसी भी प्रकार का उपाये करने पर वह व्यक्ति दोष मुक्त नहीं होता!
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रुद्राक्ष के वर्ण और धारण में अधिकार, रुद्राक्ष के मुख और धारण विधि---
************************************************************रुद्राक्ष के वर्ण और धारण में अधिकार, रुद्राक्ष के मुख और धारण विधि---
रुद्राक्ष चार वर्ण होता है--श्वेत,रक्त, पीत और कृष्ण! इसी वर्ण भेद से रुद्राक्ष धारण करने की विधि है- ब्राह्मण को श्वेत, क्षत्रिय को रक्त, वैश्य को पीट और शूद्र को कृष्ण वर्ण का रुद्राक्ष धारण करने की विधि है!
" सर्वाश्रमाणांवर्णानां स्त्रीशूद्राणां
शिवाज्ञया धार्या: सदैव रुद्राक्षा:"
सभी आश्रमों एवं वर्णों तथा स्त्री और शूद्र को सदैव रुद्राक्ष धारण करना चाहिये, यह शिव आज्ञा है!
रुद्राक्ष के मुख और धारण-विधि--
शास्त्रों में रुद्राक्ष एक मुख से चौदह मुख तक का वर्णन प्रशस्त है! रुद्राक्ष दो जाति के होते हैं! रुद्राक्ष और भद्राक्ष!
रुद्राक्ष के मध्य में भद्राक्षका धारण करना भी महान फलदायक होता है!
रुद्राक्ष में स्वयं छिद्र होता है! जिस रुद्राक्ष में स्वयं छिद्र होता है, वह उत्तम होता है, पुरुष-प्रयत्न से किया गया छिद्र मध्यम कोटि का माना गया है!
१-एक मुखी रुद्राक्ष के विशिष्ट महत्त्व का वर्णन इस प्रकार किया गया है!
एक मुखी रुद्राक्ष साक्षात शिव तथा परतत्व [परब्रह्म] स्वरुप है और परतत्व-प्रकाशक भी है और ब्रह्महत्या का नाद करने वाला है, इसको धारण करने का मन्त्र यह है-" ॐ ह्रीं नम:"
२-द्विमुखी रुद्राक्ष साक्षात अर्धनारीश्वर है, इसको धारण करने से शिव-पार्वती प्रसन्न हो जाते हैं! " ॐ नम:" इस मन्त्र से द्विमुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिये!
३-त्रिमुखी रुद्राक्ष अग्नियों [ गार्हपत्य, आहवनीय और दक्षिणाग्नि] का स्वरूप है! तीन मुख वाले रुद्राक्ष को धारण करने से ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है! "ॐ क्लीं नम:" यह त्रिमुखी रुद्राक्ष धारण करने का मन्त्र है!
४-चतुर्मुखी रुद्राक्ष साक्षात ब्रह्मा जी स्वरुप है! इसको धारण करने का मन्त्र " ॐ ह्रीं नम:" है!
५-पंचमुखी र्द्राक्ष पंचदेवों [विष्णु, शिव, गणेश, सूर्य और देवी]का स्वरुप है! इसके धरा करने पर नर ह्त्या के पाप से प्राणी मुक्त हो जाता है! " ॐ ह्रीं नम:" मन्त्र से धारण करना चाहिय्र!
६-छ:मुखी रुद्राक्ष साक्षात कार्तिकेय है! इसके धारण करने से श्री एवं आरोग्य की प्राप्ति होती है! "ॐ ह्रीं नम:" इस मन्त्र से इसे धारण करना चाहिये!
७-सप्त मुखी रुद्राक्ष अनंग नामवाला है! इसके धारण करने से स्वर्णस्तेयी स्वर्ण चोरी के पाप से मुक्त हो जाता है! "ॐ हुं नम:" यह धारण करने का मन्त्र है!
८-अष्टमुखी रुद्राक्ष साक्षात विनायक है और इसके धारण करने से पञ्च पातकों का विनाशोता है! "ॐ हुं नम:" इस मंत्रसे धारण करने से परमपद की प्राप्ति होती है!
९-नवमुखी रुद्राक्ष नव दुर्गा का प्रतीक है! उसको " ॐ ह्रीं हुं नम:" इस मन्त्र से बायें भुजदंड पर धारण करने से नव शक्तियां प्रसन्न होती हैं!
१०-दशमुखी रुद्राक्ष साक्षात भगवान जनार्दन है! "ॐ ह्रीं नम:" इस मंत्रसे धारण करने पर साधक की पूर्णायु होती है और शान्ति प्राप्त करता है!
११--एकादश मुखी रुद्राक्ष " ॐ ह्रीं हुं नम:" इस मन्त्र से धारण करना चाहिये! धारक साक्षात रुद्ररूप होकर सर्वत्र विजयी होता है!
१२-द्वादश मुखी रुद्राक्ष साक्षात महाविष्णु का स्वरुप है! "ॐ क्रौं क्षौं रौं नम:" मन्त्र से धारण करने से साक्षात विष्णु को ही धारण करता है! इसे कान में धारण करे! इससे अश्वमेधादि का फल प्राप्त होता है!
१३-त्रयोदश रुद्राक्ष धारण करने से सम्पूर्ण कामनाओं की पूर्ति पूर्वक कामदेव प्रसन्न हो जाते हैं! " ॐ ह्रीं नम:" मन्त्र से धारण करना चाहिये!
१४-चतुर्दश मुखी रुद्राक्ष रूद्र की अक्षि से उत्पन्न हुआ, वह भगवान का नेत्र-स्वरुप है! "ॐ नम:" इस मन्त्र से धारण करने पर यह रुद्राक्ष सभी व्याधियों को हर लेता है!
रुद्राक्ष धारण करने में वर्जित पदार्थ----
रुद्राक्ष धारण करने वाले को निम्नलिखित पदार्थों का वर्जन [त्याग] करना चाहिये!
मद्य, मांस, लहसुन, प्याज, सहजन, लिसोड़ा और विडवराह ग्राम्यसूकर] इन पदार्थों का परित्याग करना चाहिये!
रुद्राक्ष को मन्त्रपूर्वक ही धारण करे! बिना मंत्रोच्चारण के रुद्राक्ष धारण करने वाला नरक में तबतक रहता है, जबतक चौदह इन्द्रोंका राज्य रहता है!
रुद्राक्ष को शुभ मुहूर्त में धारण करे!
ग्रहण में, विषुव संक्रांति [ मेषार्क तथा तुलार्क] के दिन कर्क-संक्रांति और मकर-संक्रांति, अमावास्या, पूर्णिमा एवं पूर्णा तिथि को रुद्राक्ष धारण करने से सद्य: सम्पूर्ण पापों से निवृत्ति हो जाति है!

Friday, 19 August 2011

रुद्राक्ष

ये रुद्राक्ष को धारण करने से महापुण्य होता है इसमें तनिक भी संदेह नहीं है, रुद्राक्षों के दिव्य तेज से आप कैसे दुखों से मुक्ति पा कर सुखमय जीवन जीते हुये शिव कृपा पा सकते हैं  
 विद्या बुद्धि एवं सफलता प्राप्ति हेतु रुद्राक्ष 
विद्या,ज्ञान व बुद्धि की प्राप्ति के लिए तीन मुखी व छ: मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए, इसे धारण करने से तीब्र बुद्धि होती है व अद्भुत स्मरण शक्ति प्राप्त होती है, जो पढाई में कमजोर हों वे इसे अवश्य धारण करें,बहुत ज्यादा लाभ मिलेगा, तीन मुखी या छ: मुखी रुद्राक्ष धारण, करने से रचनात्मक कार्यों में भी बहुत लाभ मिलता है, जैसे यदि आप फैशन डिजाइनर हो, सौन्दर्य जगत से जुड़े हो, लेखक या सम्पादक हों, चित्रकार या अनुसंधानकर्ता हों तो ये रुद्राक्ष आपको बहुत लाभ प्रदान करेंगे,
  रोजगार,व्यक्तित्व विकास एवं इन्टरवियू में सफलता हेतु रुद्राक्ष
यदि आप अपना चौमुखी विकास करना चाहते हों तो या रोजगार पाना चाहते हों तो नौ मुखी, चार मुखी या फिर तीन मुखी रुद्राक्ष धारण करें, इसे धारण करने से सहनशीलता,बीरता,साहस,कर्मठता में बृद्धि होती है, इसका सबसे बड़ा गुण ये भी है की ये रुद्राक्ष संकल्प शक्ति में बृद्धि करते हैं जिससे आप अपने लक्ष्य तक जरूर पहुंचते ही है, बेरोजगार या नौकरी की तलाश कर रहे व्यक्ति को इससे उत्तम रोजगार प्राप्त होता है, यदि आप बार बार इन्टरवियू में असफल हो रहे हों तो इनमेंसे कोई एक रुद्राक्ष तुरंत धारण करेने से लाभ मिलेगा, यदि आप जीवन में आगे की बजाय पीछे की और जा रहे हों तो इन रुद्राक्षों को धारण करने से उन्नति अवश्य मिलेगी
सामाजिक,पारिवारिक समस्याओं एवं विवाह सम्बन्धी समस्याओं के लिए रुद्राक्ष
यदि आपका विवाह नहीं हो पा रहा है या विवाह के बाद गृहस्थी सुखी नहीं है, आपके सम्बन्ध अपने रिश्ते नाते वालों के साथ ठीक नहीं हैं या समाज में शत्रु ही शरु हो गए हों, तो आपको दो मुखी रुद्राक्ष या गौरी शंकर रुद्राक्ष धारण करना चाहिए,इसे धारण करने से घर में होने वाले परस्पर झगड़ों से मुक्ति पाई जा सकती है, ये रुद्राक्ष पति-पत्नी, पिता-पुत्र, भाई-बहन,गुरु शिष्य अथवा मित्रों आदि के साथ के मतभेदों को दूर करता है, लड़के लड़कियों के विवाह में अनावश्यक विलम्ब हो रहा हो तो इसे जरूर धारण करवाएं लाभ मिलेगा, आप मंगलबार के दिन इनमे से कोई भी रुद्राक्ष धारण करें
 दुर्घटना से बचाव, बुरी नजर, जादू-टोनों, बुरे ग्रहों से बचाव व अपनी सुरक्षा हेतु रुद्राक्ष 
यदि आप अपनी सुरक्षा को ले कर बहुत चिंतित हों,  वाहन चलने से घबराते हों, बार-बार दुर्घटनाएं होती हों, कुंडली हमेशा ही कोई नीच ग्रह या बाधा बनी रहती हो, भाग्य आपका साथ न दे रहा हो, जादू-टोनों से या फिर बुरी नजर से परेशान हों, भूत प्रेत अथवा सांप चूहे छिपकली से डर लगता हो, तो आपको ग्यारह मुखी या फिर दस मुखी रुद्राक्ष धारण काना चाहिए, यदि घर में बुरे साए का वास हो जो आपको परेशान करता हो तो सभी पारिवारिक सदस्य इसे धारण करें, यदि आप पवित्रता से रख सकते हैं तो वाहन अथवा तिजोरी की चाबी में छल्ले के रूप में भी आप इसका प्रयोग कर सकते हैं
 प्रेम प्राप्ति अथवा आकर्षण हेतु रुद्राक्ष
यदि आप किसी से प्रेम करते है और चाहते है की आपका प्रेम परिणित हो अथवा आप आकर्षण प्राप्त करना चाहते हों, तो छ: मुखी या तेरह मुखी रुद्राक्ष धारण करें, आप थियेटर या मंच से जुड़े हुये हों, धर्माचार्य हों या शिक्षक हों, मार्केटिंग या प्रचार माधयमों जैसे टीवी रेडिओ फिल्म आदि से जुड़े हैं तो आप ये रुद्राक्ष धारण कर लाभ पा सकते हैं, आपका प्रेम सम्बन्ध यदि टूट गया है, या आपके जीवन में कोई है जिसे आप खोना नहीं चाहते तो ये रुद्राक्ष फायदेमंद रहेगा
अखंड धन लाभ एवं कार्य व्यवसाय, व्यापार से लाभ प्राप्त करने हेतु रुद्राक्ष
यदि आप व्यापारी हैं कोई व्यवसाय करते हैं, कोई कंपनी चलाते है, या कोई निजी व्यवसाय करते है जिससे आपको धन लाभ की आकांक्षा है, तो आप सातमुखी, ग्यारह मुखी,गणेश रुद्राक्ष अथवा लक्ष्मी रुद्राक्ष धारण कर सकते हैं, इन रुद्राक्षों को धारण करने से गरीवी का नाश होता है, जिस व्यवसाय में आप हैं उसी से आपको लाभ मिलने लगता है, आपका यश, मान, प्रतिष्ठा ऐसी बढती है की हर ओर से धन ही धन आने लगता है,आपके जीवन के सुखों में ओर अधिक बृद्धि होती है
रोगमुक्ति, स्वास्थ्य व लम्बी आयु हेतु रुद्राक्ष
यदि आप सदा तरह-तरह के रोगों से ही घिरे रहते हों, बीमारियाँ आपका पीछा ही नहीं छोड़ रही हों, यदि आप मानसिक रूप से भी परेशान ही रहते हों, चिंताएं खाए जा रही हों, कुंडली या क्रूर ग्रह अकाल मृत्यु का संकेत दे रहे हों तो आपको चौदह मुखी या आठ मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए, अकाल मृत्यु को टालने की इनमें अभूतपूर्व क्षमता है, रोग नाश के साथ-साथ जीवन की विकट परिस्थितियों में उचित निर्णय लेने की क्षमता भी प्रदान करता है
समाजसेवा, शासन-प्रशासन, सत्ता  या राजनीती में सफलता हेतु रुद्राक्ष
 यदि आप समाज सेवी हैं और अपने कार्यों को तीब्रता से करना चाहते हैं, शासन प्रशासन में अपनी पकड मजबूत करना चाहते हैं, आप युवा नेता या गहरे राजनीतिज्ञ हैं और अपने क्षेत्र के मुकाम को हासिल करना चाहते हैं, तो आपको बारह मुखी या सात मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए, इससे व्यक्ति की कीर्ति, यश, सूर्य के सामान चमकने लगती है, इसे धारण करने से बाणी में चातुर्य आता है संबोधन में आकर्षण पैदा होता है, आप अपनी गहरी छाप सब पर छोड़ सकते हैं
मुसीबत से या कोर्ट कचहरी मुकद्दमों से शीघ्र मुक्ति हेतु रुद्राक्ष
यदि आप पर कोई मुसीबत आन पड़ी हो कोई रास्ता न सूझ रहा हो या आप कोर्ट कचहरी के मामलों में फँस गए हों, आपका धैर्य जबाब देने लगा हो, जीवन केवल संघर्ष ही रह गया हो, अक्सर हर जगह अपमानित ही महसूस करते हों, तो आपको सात मुखी, पंचमुखी अथवा ग्यारह मुखी रुद्राक्ष धारण करने चाहियें, समस्याओं के मध्य से भी तुरंत हल निकाल आएगा

 
 

रुद्राक्ष




रुद्राक्ष

रुद्राक्ष को भगवान शिव का प्रतिक मानाजाता है. रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के अश्रु से हुइथी इस लिये इसे रुद्राक्ष कह जाता है.

रुद्राक्ष शब्द "रुद्र+अक्ष" - रुद्र = शिव

अक्ष = आशु/अश्रु

रूद्राक्ष : 1 मुखी

भगवान : शिव
ग्रह : सूरज
लाभ : विद्वानो के मत से एक मुखी रुद्राक्ष धारण करने से आंतरिक चेतना प्रबुद्ध होती है एवं मानसिक शक्ति क विकास होत है. धारण करता को सभी सांसारिक सुखो कि प्राप्ति होती है.

रूद्राक्ष : 2 मुखी

भगवान : अर्धनारीश्वर
ग्रह : चंद्रमा
लाभ : विद्वानो के मत से दो मुखी रुद्राक्ष धारण करने से गुरु-शिष्य, माता-पिता, बच्चे, पति-पत्नी एवं  अन्य रिस्तो के मध्य एकता बनाए रखने सहायक सिद्ध होता है

रूद्राक्ष : 3 मुखी

भगवान : अग्नि
ग्रह : मंगल
लाभ : विद्वानो के मत से तीन मुखी रुद्राक्ष धारण करने से खरब विचार धारा (कुमति) ओर सर्व प्रकार के भय और पीडा दुर होति है

रूद्राक्ष : 5 मुखी

भगवान : कालाग्नि रुद्र
ग्रह : बृहस्पति
लाभ : विद्वानो के मत से पांच मुखी रुद्राक्ष धारण करने से स्वास्थ्य लाभ और शांति कि प्राप्ति होती है.

रूद्राक्ष : 6 मुखी

भगवान : कार्तिकेय
ग्रह : शुक्र
लाभ : विद्वानो के मत से छ मुखी रुद्राक्ष धारण करने से सांसारिक दुखों से रक्षा होति है ज्ञान और बुद्धि कि प्राप्ति होती है. एवं प्यार, संगीत और व्यक्तिगत संबंधों की सराहना करता है.

रूद्राक्ष : 7 मुखी

भगवान : महालक्ष्मी
ग्रह : शनि
लाभ : विद्वानो के मत से सात मुखी रुद्राक्ष धारण करने से व्यापार ओर आदमी वृद्धि होति है. समस्त प्रकार के भौतिक सुखो कि प्राप्ति होति है

रूद्राक्ष : 8 मुखी

भगवान : गणेश
ग्रह : राहू
लाभ : विद्वानो के मत से आठ मुखी रुद्राक्ष धारण करने से रिद्धि- सिद्धि कि प्राप्ति होति है ओर समस्त प्रकार के शत्रु पर विजय प्राप्त कर समस्त बाधा दुर होति है

रूद्राक्ष : 9 मुखी

भगवान : दुर्गा
ग्रह : केतु
लाभ : विद्वानो के मत से नव मुखी रुद्राक्ष धारण करने से उर्जा शक्ति मे इजफा होत है एवं जीवन मे सफलता प्राप्त कर गतिशीलता कि प्राप्ति होति है.

रूद्राक्ष : 10 मुखी

भगवान : विष्णु
ग्रह : कोई नहीं
लाभ : विद्वानो के मत से दश मुखी रुद्राक्ष धारण करने से शरीर कि रक्षा होति है

रूद्राक्ष : 11 मुखी

भगवान : हनुमान
ग्रह : कोई नहीं
लाभ : विद्वानो के मत से एकादश मुखी रुद्राक्ष धारण करने से ताकत, वाक शक्ति, साहसी जीवन, उत्तम ज्ञान एवं दुर्घटना में मृत्यु से बचाता है. ध्यान ओर योगाभयास मे सहायक होत है

रूद्राक्ष : 12 मुखी

भगवान : सूरज
ग्रह : कोई नहीं
लाभ : विद्वानो के मत से द्वादश मुखी रुद्राक्ष धारण करने से व्यक्ति सूरज के समान तेज ओर गुणवत्ता प्राप्त होति है एवं चिंता, शक और डर को दुर करता है ओर आत्म शक्ति का विकास होता है

Thursday, 18 August 2011

रुद्राक्ष धारण

आपकी ग्रह-राशि-नक्षत्र के  अनुसार रुद्राक्ष धारण करें


ग्रह  
राषि
नक्षत्र
लाभकारी रुद्राक्ष
मंगल  
मेष+वृश्चिक
मृगषिरा-चित्रा-धनिष्ठा
३ मुखी
शुक्र  
वृषभ+तुला
भरणी-पू॰फाल्गुनी-पू॰षाढ़ा
६ मुखी,१३ मुखी,१५ मुखी
बुध  
मिथुन+कन्या
आष्लेषा-ज्येष्ठा-रेवती
४ मुखी
चन्द्र  
कर्क
रोहिणी-हस्त-श्रवण
२ मुखी, गौरी-शंकर रुद्राक्ष
सूर्य   
सिंह
कृत्तिका-उ॰फाल्गुनी-उ॰षाढ़ा
 मुखी, १२ मुखी
गुरु  
धनु-मीन
पुनर्वसु-विषाखा-पू॰भाद्रपद
५ मुखी
शनि  
मकर-कुंभ
पुष्य-अनुराधा-उ॰भाद्रपद
७ मुखी, १४ मुखी
राहु  
-
आर्द्रा-स्वाति-षतभिषा
८ मुखी, १८ मुखी
केतु   
-
अष्विनी-मघा-मूल
९ मुखी,१७ मुखी
  

नवग्रह दोष निवारणार्थ
१० मुखी, २१ मुखी
विषेष : १० मुखी और ११ मुखी किसी एक ग्रह का प्रतिनिधित्व नहीं करते।बल्कि नवग्रहों के दोष निवारणार्थ प्रयोग मे लाय जाते हैं ।

रुद्राक्ष


रुद्राक्ष
देवता             
मंत्र
१ मुखी
शिव
1-ॐ नमः शिवाय । 2 –ॐ ह्रीं नमः
२ मुखी
अर्धनारीश्वर
ॐ नमः
३ मुखी
अग्निदेव
ॐ क्लीं नमः
४ मुखी
ब्रह्मा,सरस्वती
ॐ ह्रीं नमः
५ मुखी
कालाग्नि रुद्र
ॐ ह्रीं नमः
६ मुखी
कार्तिकेय, इन्द्र,इंद्राणी
ॐ ह्रीं हुं नमः
७ मुखी
नागराज अनंत,सप्तर्षि,सप्तमातृकाएँ
ॐ हुं नमः
८ मुखी
भैरव,अष्ट विनायक
ॐ हुं नमः
९ मुखी
माँ दुर्गा
१-ॐ ह्रीं दुं दुर्गायै नमः २-ॐ ह्रीं हुं नमः
१० मुखी
विष्णु
१-ॐ नमो भवाते वासुदेवाय २-ॐ ह्रीं नमः
११ मुखी
एकादश रुद्र
१-ॐ तत्पुरुषाय विदमहे महादेवय धीमही तन्नो रुद्रः प्रचोदयात २-ॐ ह्रीं हुं नमः  
१२ मुखी
सूर्य
१-ॐ ह्रीम् घृणिः सूर्यआदित्यः श्रीं २-ॐ क्रौं क्ष्रौं रौं नमः
१३ मुखी
कार्तिकेय, इंद्र
१-ऐं हुं क्षुं क्लीं कुमाराय नमः २-ॐ ह्रीं नमः
१४ मुखी
शिव,हनुमान,आज्ञा चक्र
ॐ नमः
१५ मुखी
पशुपति
ॐ पशुपत्यै नमः
१६ मुखी
महामृत्युंजय ,महाकाल
ॐ ह्रौं जूं सः त्र्यंबकम् यजमहे सुगंधिम् पुष्टिवर्धनम उर्वारुकमिव बंधनान् मृत्योर्मुक्षीय सः जूं ह्रौं ॐ
१७ मुखी
विश्वकर्मा ,माँ कात्यायनी
ॐ विश्वकर्मणे नमः
१८ मुखी
माँ पार्वती
ॐ नमो भगवाते नारायणाय
१९ मुखी
नारायण
ॐ नमो भवाते वासुदेवाय
२० मुखी
ब्रह्मा
ॐ सच्चिदेकं ब्रह्म
२१ मुखी
कुबेर
ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्य समृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा