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Thursday, 2 February 2012

यन्त्र

विघ्न हटाने का तावीज
इस यन्त्र को सिद्धयोग, दीपावली या होली के दिन अनार की कलम से, अष्टगंध स्याही से भोजपत्र पर लिखकर धूप-दीप, नैवेद्य से पूजन करें। फिर स्वर्ण के तावीज में डालकर, दाहिनी भुजा में काले धागे से बांध लें। यह सर्व प्रकार की विघ्न-बाधाओं को हटा अत्यंत शुभ देने वाला है।

Monday, 10 October 2011

सर्व-सिद्धि-दायक शाबरी ‘यन्त्र

सर्व-सिद्धि-दायक शाबरी ‘यन्त्र’

सर्व-सिद्धि-दायक शाबरी ‘यन्त्र’ की प्रतिष्ठा
‘शाबर-मन्त्रों की पूर्ण सफलता के लिये ‘शाबरी-यन्त्र’ को सिद्ध करना चाहिए। इसके लिये अपने सामने लकड़ी का एक पाटा रखें। पाटे पर पीला रेशमी वस्त्र बिछाए। रेशमी वस्त्र पर ३ या ५ मुट्ठी अक्षत रखें। अक्षत के सामने कागज पर छपा हुआ या धातु पर उत्कीर्ण सर्व-सिद्धि-दायक ‘शाबर-यन्त्र’ रखें। यन्त्र पर चन्दन, रोली लगाए, यन्त्र के सम्मुख दीप जलाए और अगर-बत्ती-धूपादि से सुगन्धित करे। पुष्प और बिल्व-पत्रादि चढ़ाए। तब ‘गणपति, और ‘गुरु’ का स्मरण कर ‘यन्त्र के सम्मुख हाथ जोड़कर निम्न मन्त्र पढ़े-
“ॐ ह्राङ्क ह्रीङ्क क्लीङ्क ह्रौङ्क ब्ल्युङ्क ह्रौङ्क हुँः।”
उक्त मन्त्र पढ़ने के बाद निम्न मन्त्र जपें-
“ॐ नमो महा-शाबरी शक्ति, मम अनिष्ट निवारय-निवारय। मम कार्य-सिद्धि कुरु-कुरु स्वाहा।”
जप के बाद यन्त्र को प्रणाम कर स्वच्छ वस्त्र आदि में अपने पास रखें।
लाभ- इससे सभी कार्य शीघ्र सिद्ध होंगे। संकटों का निवारण होगा। दुःख-दारिद्रय की निवृत्ति होगी और धन की प्राप्ति होगी। यन्त्र जहाँ भी होगा या स्थापित होगा, वहाँ की सभी प्रकार की अला-बला, भूतादिक उपद्रव नष्ट हो जाते हैं।

Friday, 23 September 2011

ganesh yantra


Saturday, 3 September 2011

दूकान की बिक्री यन्त्र

दूकान की बिक्री

दूकान की बिक्री अधिक हो-१॰ “श्री शुक्ले महा-शुक्ले कमल-दल निवासे श्री महालक्ष्मी नमो नमः। लक्ष्मी माई, सत्त की सवाई। आओ, चेतो, करो भलाई। ना करो, तो सात समुद्रों की दुहाई। ऋद्धि-सिद्धि खावोगी, तो नौ नाथ चौरासी सिद्धों की दुहाई।”
विधि- घर से नहा-धोकर दुकान पर जाकर अगर-बत्ती जलाकर उसी से लक्ष्मी जी के चित्र की आरती करके, गद्दी पर बैठकर, १ माला उक्त मन्त्र की जपकर दुकान का लेन-देन प्रारम्भ करें। आशातीत लाभ होगा।
२॰ “भँवरवीर, तू चेला मेरा। खोल दुकान कहा कर मेरा।
उठे जो डण्डी बिके जो माल, भँवरवीर सोखे नहिं जाए।।”
विधि- १॰ किसीशुभ रविवार से उक्त मन्त्र की १० माला प्रतिदिन के नियम से दस दिनों में १०० माला जप कर लें। केवल रविवार के ही दिन इस मन्त्र का प्रयोग किया जाता है। प्रातः स्नान करके दुकान पर जाएँ। एक हाथ में थोड़े-से काले उड़द ले लें। फिर ११ बार मन्त्र पढ़कर, उन पर फूँक मारकर दुकान में चारों ओर बिखेर दें। सोमवार को प्रातः उन उड़दों को समेट कर किसी चौराहे पर, बिना किसी के टोके, डाल आएँ। इस प्रकार चार रविवार तक लगातार, बिना नागा किए, यह प्रयोग करें।
२॰ इसके साथ यन्त्र का भी निर्माण किया जाता है। इसे लाल स्याही अथवा लाल चन्दन से लिखना है। बीच में सम्बन्धित व्यक्ति का नाम लिखें। तिल्ली के तेल में बत्ती बनाकर दीपक जलाए। १०८ बार मन्त्र जपने तक यह दीपक जलता रहे। रविवार के दिन काले उड़द के दानों पर सिन्दूर लगाकर उक्त मन्त्र से अभिमन्त्रित करे। फिर उन्हें दूकान में बिखेर दें।

शाबरी ‘यन्त्र

सर्व-सिद्धि-दायक शाबरी ‘यन्त्र’

सर्व-सिद्धि-दायक शाबरी ‘यन्त्र’ की प्रतिष्ठा
‘शाबर-मन्त्रों की पूर्ण सफलता के लिये ‘शाबरी-यन्त्र’ को सिद्ध करना चाहिए। इसके लिये अपने सामने लकड़ी का एक पाटा रखें। पाटे पर पीला रेशमी वस्त्र बिछाए। रेशमी वस्त्र पर ३ या ५ मुट्ठी अक्षत रखें। अक्षत के सामने कागज पर छपा हुआ या धातु पर उत्कीर्ण सर्व-सिद्धि-दायक ‘शाबर-यन्त्र’ रखें। यन्त्र पर चन्दन, रोली लगाए, यन्त्र के सम्मुख दीप जलाए और अगर-बत्ती-धूपादि से सुगन्धित करे। पुष्प और बिल्व-पत्रादि चढ़ाए। तब ‘गणपति, और ‘गुरु’ का स्मरण कर ‘यन्त्र के सम्मुख हाथ जोड़कर निम्न मन्त्र पढ़े-
“ॐ ह्राङ्क ह्रीङ्क क्लीङ्क ह्रौङ्क ब्ल्युङ्क ह्रौङ्क हुँः।”
उक्त मन्त्र पढ़ने के बाद निम्न मन्त्र जपें-
“ॐ नमो महा-शाबरी शक्ति, मम अनिष्ट निवारय-निवारय। मम कार्य-सिद्धि कुरु-कुरु स्वाहा।”
जप के बाद यन्त्र को प्रणाम कर स्वच्छ वस्त्र आदि में अपने पास रखें।
लाभ- इससे सभी कार्य शीघ्र सिद्ध होंगे। संकटों का निवारण होगा। दुःख-दारिद्रय की निवृत्ति होगी और धन की प्राप्ति होगी। यन्त्र जहाँ भी होगा या स्थापित होगा, वहाँ की सभी प्रकार की अला-बला, भूतादिक उपद्रव नष्ट हो जाते हैं।

Saturday, 23 July 2011

यन्त्र


 
बुध यंत्र
शुक्र यंत्र
चंद्रमा यंत्र
     
गुरु यंत्र
सूर्य यंत्र
मंगल यंत्र
     
केतु यंत्र
शनि यंत्र
राहु यंत्र
     
   
   
     

Friday, 15 July 2011

वास्तुदोष मूल निवारक

वास्तुदोष मूल निवारक
        वास्तुदोष निवारक यन्त्र :- वास्तु दोषों के विभिन्न  दिशाओं में होने से उससे सम्बन्धित यन्त्र उपयोग में लाकर उन दोषों का निवारण किया जा सकता है। इस बात का पूरा ध्यान रखना चाहिए कि यन्त्र जानकर व्यक्ति द्वारा विधि पूर्वक बनाये गये  हों व उनकी शुद्धि भी कर ली गई हो। यन्त्र का उपयोग किसी भी जानकर वास्तुशास्त्री से सलाह लेकर विधि पूर्वक करना चाहिए।
मुख्य यन्त्र :-

  पूर्व में दोष होने पर    -    सूर्य यन्त्र पूर्व की तरफ स्थापित करें।

  पश्चिम में दोष होने पर    -    वरूण यन्त्र या चन्द्र यन्त्र पूजा में रखें।

  दक्षिण में दोष होने पर    -    मंगल यन्त्र पूजा में रखें।


  उत्तर में दोष होने पर    -    बुध यन्त्र पूजा में रखें।

  ईशान में दोष होने पर    -    ईशान में प्रकाश डालें व तुलसी का पौधा रखें। पूजा में
                                      गुरू यन्त्र रखें।

  आग्नेय में दोष होने पर    -    प्रवेश द्वार पर सिद्ध गणपति की स्थापना एवं शुक्र यन्त्र
                                        पूजा में रखें।

  नैरूत में दोष होने पर    -    राहु यन्त्र पूजा में स्थापित करें।

  वायव्य में दोष होने पर    -    चन्द्र यन्त्र पूजा में रखें।

 उपरोक्त के अलावा अन्य भी कई यन्त्र हैं, जैसे व्यापार वृद्धि यन्त्र, वास्तुदोष नाशक यन्त्र, श्री यन्त्र इत्यादि। वास्तुदोष नाशक यन्त्र को द्वार पर लगाया जा सकता है। भूमि पूजन के समय भी चांदी के सर्प के साथ वास्तु यन्त्र गाड़ा जाना बहुत फलदायक होता है।