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Monday, 29 August 2011

Plants associated with the Planets:

Plants associated with the Planets:
THE SUN :
Food-stuffs-Rice, honey and aromatic herbs, as used for flavouring.

Flowers - Marigold, sunflower, peonies, etc.

Trees-The bay, walnut and palm.

THE MOON :
Food-stuffs-Cabbage, melons, cucumbers, pumpkins, turnips, mushrooms, lettuce, watercress.
Flowers-Mostly night-growing varieties.

Trees-Traditionally, those which are mostly rich in sap, e.g. Maple and Sycamore.

MERCURY :
Food-stuffs-Many seed-bearing plants; carrots, parsley, the majority of nuts.
Flowers-The wilder varieties.
Trees-Hazel, walnut, and other nut-bearing trees.

VENUS :
Food-stuffs-Gooseberry and other berries, wheat, and most of the spices.
Flowers-Daffodil, goldenrod, violet, rose, lily, etc.
Trees-Apple, pear, peach, fig, almond, ash, cypress and most of the vines.

Mars :
Food-stuffs-Practically all the "hot" foods, such as ginger, and peppers, and those of strong taste such as the onion, garlic, etc. Hops are also under Mars.
Flowers-The unusual and rather coarser bright flowers.
Trees-Holly, fir (?) and all thorn-bearing trees, or bushes.

JUPITER :
Food-stuff-Vegetables such as sage, leeks; asparagus; rhubarb; mints; and fruits such as strawberries and the currants.
Flowers-The daisies and similar flowers.
Trees-Lime, birch, mulberry, ash, oak, birch.

SATURN :
Food-stuffs-Most vegetables, such as potatoes, etc.; parsnips, spinach and barley.
Flowers-Very few known to be associated, but the various bushes when in flower are thought to be so placed

Trees-Pine, yew, willow, elm.

URANUS and NEPTUNE are similar to Venus and the Moon, respectively.

Wednesday, 10 August 2011

वृक्षों


    
वृक्षों कि हमारे जीवन मे महत्व सम्बंधि इस आलेख मे,हम यह बताना चाहेगे कि वृक्षों के पत्तों का भी सुख-शांति तथा धन-लाभ मे विशेष योगदान होता है।


विवरण                                             नक्षत्र मे                                       लाभ
  1. बेलपत्र लाकर जेब मे या अलमारी में रखें।     (रोहिणी नक्षत्र में)                            दरिद्रता दूर होती है।
  2. आम के पत्ते लाकर खेत में दबा दे।                 (आद्रा नक्षत्र में)                               फसल में वृद्धि
  3. बहडे के पत्ते लाकर अलमारी या गल्ले में रखे। (अ‍ॅश्लेशा नक्षत्र में)                           आय में वृद्धि 
  4. नींबू के पत्ते लाकर अपने पास रखें।                 (अनुराधा नक्षत्र में)                       व्यापार में सफलता 
  5. अंगूर के पत्तों को लाकर पास रखें।                   (श्रवण नक्षत्र में)                           श्रोताओं को प्रभावित करने की क्षमता बढती है।
  6. करंज के पत्ते लाकर पास रखें।                         (पूर्वा फाल्गुनी में)                         कोर्ट कचहरी के कार्य में सफलता  
  7. बरगद के पत्ते लाकर अलमारी में रखे               (पुष्य नक्षत्र में)                            धन - संपत्ति में वृद्धि  
  8. बरगद के पत्ते लाकर अनाज में रखे।                (अ‍ॅश्लेशा नक्षत्र में)                        अनाज का

वृक्षों के महत्व

वृक्षों के महत्व को ध्यान में रखकर , किसी भी शुभ दिन साल में दो बार वृक्षारोंपण पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
वृक्षों को हमारे घर में स्थित बगीचे में लगाने से विभिन्न प्रकार के वास्तुदोष दूर हो जाते है तथा व्यक्ति व परिवार निरोगी रह सकता है। किन्तु वास्तु के नियामों के अनुसार कौन सा वृक्ष लगाना चाहिए, या कौन सा नहीं, इसकी जानकारी होना आवश्यक है।

1-  घर में या आसपास दूधवाले (आर्क/शवेतार्क) कांटेदार वृक्ष नहीं होना चाहिए।

2- नागकेसर, अशोक, नीम, मौलश्री या शाल के वृक्ष शुभ होते है। इसी प्रकार अनार, चमेली, गुलाब, केतकी, केसर, चंदन, महुआ, दालचीनी, नागर या नारियल के पौधे शुभ होते है।

3- अष्टमी के दिन अशोक के पेड की पूजा की जाती है।

4- वटसावित्री के दिन बरगद के वृक्ष की पूजा की जाती है।

5- कार्तिक मास के दिन आवले के वृक्ष की पूजा की जाती है। आंवलों के वृक्ष में भगवान विष्णु का निवास स्थान माना गया है।

6- तुलसी जी के पेड की पूजा नित्य – प्रतिदिन करना चाहिए।

7- ”ऋषि वराहमिहिर” शास्त्र के अनुसार घर में या आसपास, औषधि – युक्त पेड/पौघें, सुगन्धित व सुन्दर फूल वाले पेड – पौधे लगाने से लक्ष्मीजी प्रसन्न होती है।
 
8- घर के आसपास के पेडो की छाया घर पर नहीं पडना चाहिए।
 
9- घर में यदि पीपल या बिल्व वृक्ष स्वयं ऊग आये हो तो उन्हें काटना शुभ नहीं होता है। पीपल के वृक्ष पीपल के वृक्ष कि पूजा करके व प्रार्थना करके घर से जडसहित निकालकर मंदिर में स्थापित कर देना चाहिए।
 
10- बिल्ववृक्ष के पेड को भी मंदिर में स्थापित कर देना चाहिए या फिर संभव हो तो उचित पूजा – अर्चना व देखभाल करते रहना चाहिए।
 
11- दूध देने वाले पौधे घर के बाहर हो सकते है। यदि आंकडे का वृक्ष स्वयं ऊग आता है तो उसकी पूजा करने से लाभ होता है।
 
12 – पूर्व – दक्षिण व दक्षिण – पश्चिम दिशाओ में पेडो को नहीं लगाना चाहिए। यजुर्वेद में कहा गया है कि पेडो को  नक्षत्र के अनुसार पूजन करना लाभदायक रहता है। जैसे गूलर, पीपल, नागचंपा, शमी, बड (बरगद) आदि वृक्ष नक्षत्रों के आराध्य वृक्ष है और इनकी नियम से उपासना करने से निश्चित लाभ मिलता है।
 
13- शास्त्रों के अनुसार रत्नों द्वारा जिस तरह ग्रह व नक्षत्र की अशुभता को दूर किया जाता है उसी तरह वनस्पतियों के पूजन से भी इसी प्रकार ग्रह शांति की जा सकती है।
 
14- भील व गौड जाति के आदिवासी लोग अपनी रक्षा हेतु वृक्षों की जडो या तने को अपने साथ रखते है।
 
15- वनस्पतियों को प्रयोग से पहले प्रार्थना करके व सिद्ध करके ही धारण करना चाहिए।
 
16- ग्रहों के अनुसार उपयुक्त वनस्पति कि लकड़ी द्वारा हवन करके हवन का धुँआ पूरे घर में घुमाना चाहिये जिससे ग्रह की अशुभता कम होती है।
 
17- शनि देवता को प्रसन्न करने के लिये – पीपल, खजूर, आक, कीक, अमलतास, आदि पौधों को रोपकर व उनकी उचित देखभाल करना उत्तम माना गया है।
 
18- आम, पीपल, अर्जुन आदि पौधे कर्म क्षेत्र की बाधाएं दूर करते है। रोजगार में आने वाली परेशनियों को दूर करने के लिए इन पौधों  की लगाकर देखभाल करना चाहिए।
 
19- घर में या आसपास हरियाली होना घर की सुख, समृद्धि व शांति हेतु अति आवश्यक है। हरियाली से बुध ग्रह प्रसन्न होते है अतः बुध ग्रह की प्रसन्नता हेतु गाय को हरी घास या हरी सब्जी खिलाना अति – शुभ होता है।

आराध्य वृक्ष एवं पौधे

आराध्य वृक्ष एवं पौधे
ग्रह उपयुक्त वृक्ष
सूर्य                                    मंदार
चन्द्र                                 पलाश
मंगल                                  खेर
बुध                                   अपामार्ग
गुरु                                       पीपल
शुक्र                                     गूलर
शनि                                     शमी, पीपल
राहु                                       दूर्वा/चन्दन
वृक्षों की पूजा अर्चना व उनसे लाभ
खेर का पेड -                                मानसिक शांति/धैर्य
आंवला का पेड -                         वंश वृद्धि/सौभाग्य वृद्धि
जामुन का पेड -                          शारीरिक सुख/रोग प्रतिरोधक क्षमता की वृद्धि
कदंम का पेड -                           बाधाएं दूर/प्रगति
आम/अशोक   –                        मानसिक बल/स्वास्थय
सुपारी का पेड -                          गृह कलह से शांति/पारिवारिक प्रेम
बिल्व पत्री का पेड -                    समद्धि में वृद्धि।
नीम का पेड -                            व्यक्तित्व के प्रभाव में वृद्धि
पलाश का पेड -                          संतान सुख में वृद्धि व नवीन कार्य में सफलता
बाँस का वृक्ष -                            विवेक का विकास

Monday, 8 August 2011

पेड़-पौधों के टोटके

पेड़-पौधों के टोटके

हमारे आसपास पाए जाने वाले विभिन्न पेड़-पौधों के पत्तों, फलों आदि का टोटकों के रूप में उपयोग भी हमारी सुख-समृद्धि की वृद्धि में सहायक हो सकता है। यहां कुछ ऐसे ही सहज और सरल उपायों का उल्लेख प्रस्तुत है, जिन्हें अपना कर पाठकगण लाभ उठा सकते हैं।

विल्व पत्र : अश्विनी नक्षत्र वाले दिन एक रंग वाली गाय के दूध में बेल के पत्ते डालकर वह दूघ निःसंतान स्त्री को पिलाने से उसे संतान की प्राप्ति होती है।

अपामार्ग की जड़ : अश्विनी नक्षत्र में अपामार्ग की जड़ लाकर इसे तावीज में रखकर किसी सभा में जाएं, सभा के लोग वशीभूत होंगे।

नागर बेल का पत्ता : यदि घर में किसी वस्तु की चोरी हो गई हो, तो भरणी नक्षत्र में नागर बेल का पत्ता लाकर उस पर कत्था लगाकर व
सुपारी डालकर चोरी वाले स्थान पर रखें, चोरी की गई वस्तु का पला चला जाएगा।

संखाहुली की जड़ : भरणी नक्षत्र में संखाहुली की जड़ लाकर तावीज में पहनें तो विपरीत लिंग वाले प्राणी आपसे प्रभावित होंगे।

आक की जड़ : कोर्ट कचहरी के मामलों में विजय हेतु आर्द्रा नक्षत्र में आक की जड़ लाकर तावीज की तरह गले में बांधें।

दूधी की जड़ : सुख की प्राप्ति के लिए पुनर्वसु नक्षत्र में दूधी की जड़ लाकर शरीर में लगाएं।

शंख पुष्पी : पुष्य नक्षत्र में शंखपुष्पी लाकर चांदी की डिविया में रखकर तिजोरी में रखें, धन की वृद्धि होगी।

बरगद का पत्ता : अश्लेषा नक्षत्र में बरगद का पत्ता लाकर अन्न भंडार में रखें, भंडार भरा रहेगा।

धतूरे की जड़ : अश्लेषा नक्षत्र में धतूरे की जड़ लाकर घर में रखें, घर में सर्प नहीं आएगा और आएगा भी तो कोई नुकसान नहीं पहुंचाएगा।

बेहड़े का पत्ता : पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में बेहड़े का पत्ता लाकर घर में रखें, घर ऊपरी हवाओं के प्रभाव से मुक्त रहेगा।

नीबू की जड़ : उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में नीबू की जड़ लाकर उसे गाय के दूध में मिलाकर निःसंतान स्त्री को पिलाएं, उसे पुत्र की प्राप्ति होगी।

चंपा की जड़ : हस्त नक्षत्र में चंपा की जड़ लाकर बच्चे के गले में बांधें, बच्चे की प्रेत बाधा तथा नजर दोष से रक्षा होगी।

चमेली की जड़ : अनुराधा नक्षत्र में चमेली की जड़ गले में बांधें, शत्रु भी मित्र हो जाएंगे।

काले एरंड की जड़ : श्रवण नक्षत्र में एरंड की जड़ लाकर निःसंतान स्त्री के गले में बांधें, उसे संतान की प्राप्ति होगी।

तुलसी की जड़ : पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र में तुलसी की जड़ लाकर मस्तिष्क पर रखें, अग्निभय से मुक्ति मिलेगी।

पेड़-पौधों से करें चिकित्सा

पेड़-पौधों से करें चिकित्सा
सेहत डेस्क








नीम : नीम की 10-12 पत्तियों को पीसकर सुबह खाली पेट पीने से गर्मी की घमौरियों व चर्मरोग का शमन होता है। नीम की पत्तियों को पानी में उबालकर सिर धोने से बाल झड़ना रुक जाता है व जुएँ, लीख मर जाते हैं।
तुलसी : तुलसी के 8-10 पत्तों को पीसकर चीनी में मिलाकर पीने से लू नहीं लगती है। अगर लू लग गई है तो आराम मिल जाता है। रोज प्रातः खाली पेट तुलसी के चार पत्ते नियमित खाने से बीमारी नहीं होती है।
बबूल : बबूल की पत्तियों को उबालकर उस पानी को कुल्ला करने से दाँत व मसूड़े मजबूत होते हैं। बबूल की पत्तियों का रस निकालकर सरसों के तेल में मिलाकर लगाने से गर्मी के फोड़े-फुंसी में आराम मिलता है।
बड़ : बड़ के दूध में एक नींबू का रस मिलाकर सिर में आधे घंटे तक लगा रहने दें। फिर सिर को गुनगुने पानी से धो लें। इससे बालों का झड़ना बंद हो जाता है व बाल तेजी से बढ़ते हैं।
बेर : बेर की पत्तियों व नीम की पत्तियों को बारीक पीसकर उसमें नींबू का रस मिलाकर बालों में लगा लें व दो घंटे बाद बालों को धो लें। इसका एक माह तक प्रयोग करने से नए बाल उग आते हैं व बाल झड़ना बंद हो जाते हैं।




बेलफल : बेलफल के गूदे को शकर में मिलाकर तीन दिन नियमित डेढ़ से 2 कप पीने से अतिसार में लाभ होता है।
मेहँदी : मेहँदी की पत्तियों को पीसकर रात को सोते समय पैर के तलवों व नाखूनों पर लगाने से शरीर की गर्मी शांत होती है व लू लगने का भय नहीं रहता। मेहँदी हर हफ्ते बालों में लगाने से सिर की गर्मी शांत हो जाती है।
चमेली : अगर आपके मुँह में छाले हो गए हों तो तीन दिन नियम से चमेली की पाँच पत्ती चबाने से आराम मिलता है। अगर मुँह से दुर्गंध आ रही हो तो चमेली की पत्तियों को उबालकर उसमें आधे नींबू का रस निचोड़कर कुल्ला करने से दुर्गंध दूर हो जाती है। 
पान : पान के पत्ते में मिश्री के कुछ दाने रखकर खाने से सूखी खाँसी ठीक हो जाती है।



पुदीना : पुदीने की पत्तियों को पीसकर उसके रस में आधा नींबू व चुटकीभर काला नमक मिलाकर पीने से पेट का अफरा व अपच खत्म हो जाता है। इसकी पत्तियों को खाने से मुँह की दुर्गंध खत्म हो जाती है।
नींबू : नींबू के रस में चीनी डालकर शर्बत बना लें। इसे कई बार थोड़ा-थोड़ा हैजे के रोगी को दें। इससे लाभ मिलता है। नींबू के रस में मूली व अदरक के टुकड़े करके डालें व नमक तथा कालीमिर्च लगाकर पीलिया के रोगी को रोज दें।
शहतूत : शहतूत की पत्तियों को उबालकर उसमें एक चुटकी सेंधा नमक डालकर गरारे करने से टॉन्सिल्स की सूजन में आराम मिलता है व गले की खराश दूर हो जाती है। शहतूत के रस में थोड़ी चीनी मिलाकर पीने से पेट की जलन व पेडू की गर्मी में आराम मिलता है।
अनार : अनार की छाल का काढ़ा बना लें। एक कप काढ़े में आधा चम्मच सौंठ का चूर्ण डालकर सुबह-शाम पीने से खूनी दस्त व खूनी बवासीर में आराम मिलता है। इसके दानों का रस पीने से हिचकी बंद हो जाती है और घबराहट मिट जाती है।
अंजीर : सफेद दाग शुरू होते ही अंजीर के पत्तों व इसकी जड़ को घिसकर लेप लगाने से सफेद दाग का बढ़ना बंद हो जाता है व धीरे-धीरे दाग मिट जाते हैं। एक अंजीर के चार टुकड़े खाने से कफ वाली खाँसी ठीक हो जाती है।

Saturday, 6 August 2011

पेड़-पौधों के टोटके

हमारे आसपास पाए जाने वाले विभिन्न पेड़-पौधों के पत्तों, फलों आदि का टोटकों के रूप में उपयोग भी हमारी सुख-समृद्धि की वृद्धि में सहायक हो सकता है। यहां कुछ ऐसे ही सहज और सरल उपायों का उल्लेख प्रस्तुत है, जिन्हें अपना कर पाठकगण लाभ उठा सकते हैं।
विल्व पत्र : अश्विनी नक्षत्र वाले दिन एक रंग वाली गाय के दूध में बेल के पत्ते डालकर वह दूघ निःसंतान स्त्री को पिलाने से उसे संतान की प्राप्ति होती है।


अपामार्ग की जड़ : अश्विनी नक्षत्र में अपामार्ग की जड़ लाकर इसे तावीज में रखकर किसी सभा में जाएं, सभा के लोग वशीभूत होंगे।


नागर बेल का पत्ता : यदि घर में किसी वस्तु की चोरी हो गई हो, तो भरणी नक्षत्र में नागर बेल का पत्ता लाकर उस पर कत्था लगाकर व सुपारी डालकर चोरी वाले स्थान पर रखें, चोरी की गई वस्तु का पला चला जाएगा।


संखाहुली की जड़ : भरणी नक्षत्र में संखाहुली की जड़ लाकर तावीज में पहनें तो विपरीत लिंग वाले प्राणी आपसे प्रभावित होंगे

।
आक की जड़ : कोर्ट कचहरी के मामलों में विजय हेतु आर्द्रा नक्षत्र में आक की जड़ लाकर तावीज की तरह गले में बांधें।


दूधी की जड़ : सुख की प्राप्ति के लिए पुनर्वसु नक्षत्र में दूधी की जड़ लाकर शरीर में लगाएं।


शंख पुष्पी : पुष्य नक्षत्र में शंखपुष्पी लाकर चांदी की डिविया में रखकर तिजोरी में रखें, धन की वृद्धि होगी।


बरगद का पत्ता : अश्लेषा नक्षत्र में बरगद का पत्ता लाकर अन्न भंडार में रखें, भंडार भरा रहेगा।


धतूरे की जड़ : अश्लेषा नक्षत्र में धतूरे की जड़ लाकर घर में रखें, घर में सर्प नहीं आएगा और आएगा भी तो कोई नुकसान नहीं पहुंचाएगा।


बेहड़े का पत्ता : पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में बेहड़े का पत्ता लाकर घर में रखें, घर ऊपरी हवाओं के प्रभाव से मुक्त रहेगा।


नीबू की जड़ : उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में नीबू की जड़ लाकर उसे गाय के दूध में मिलाकर निःसंतान स्त्री को पिलाएं, उसे पुत्र की प्राप्ति होगी।


चंपा की जड़ : हस्त नक्षत्र में चंपा की जड़ लाकर बच्चे के गले में बांधें, बच्चे की प्रेत बाधा तथा नजर दोष से रक्षा होगी।


चमेली की जड़ : अनुराधा नक्षत्र में चमेली की जड़ गले में बांधें, शत्रु भी मित्र हो जाएंगे।


काले एरंड की जड़ : श्रवण नक्षत्र में एरंड की जड़ लाकर निःसंतान स्त्री के गले में बांधें, उसे संतान की प्राप्ति होगी।


तुलसी की जड़ : पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र में तुलसी की जड़ लाकर मस्तिष्क पर रखें, अग्निभय से मुक्ति मिलेगी।

Monday, 1 August 2011

वास्तु के अनुसार

घर के उत्तर दिशा में अशोक,अनार, आवंला
व दक्षिण में गूलर,जामून
,पूर्व में बरगद,सफेद ओक व
पश्चिम में पीपल, अमलतास,बेल,मौलश्री के पेड़ लगाना चाहिए।
वायव्य दिशा में सात नीम के पेड़
,ईशान दिशा में तुलसी,केला,नारियल के पेड़ लगा सकते है।
आग्नेय व नैऋत्य कोण पर वृक्षारोपण शुभ नहीं मानते।

Saturday, 30 July 2011

कामना सिद्धि के लिए पौधे रोपें



श्रावण कृष्ण अमावस्या को हरियाली अमावस्या के रूप में मनाया जाता है। यह त्योहर सावन में प्रकृति पर आई बहार की खुशियों का जश्न है। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को प्रकृति के करीब लाना है। गांवों में इस दिन मेले लगाए जाते हैं तो कहीं दंगल का आयोजन भी किया जाता है।

कुछ स्थानों पर इस दिन पीपल के वृक्ष की पूजा कर उसके फेरे लगाने तथा मालपुए का भोग लगाने की परंपरा है। ऐसी भी मान्यता है कि इस दिन हर व्यक्ति को एक पौधा अवश्य रोपना चाहिए। इस बार यह त्योहार 30 जुलाई शनिवार को आ रहा है।

कामना सिद्धि हेतु कौन-सा वृक्ष लगाएं :


लक्ष्मी प्राप्ति के लिए : तुलसी, आंवला, केला, बिल्वपत्र का वृक्ष।

आरोग्य प्राप्ति के लिए : ब्राह्मी, पलाश, अर्जुन, आंवला, सूरजमुखी, तुलसी।

सौभाग्य प्राप्ति हेतु : अशोक, अर्जुन, नारियल, बड़ (वट) का वृक्ष।

संतान प्राप्ति हेतु : पीपल, नीम, बिल्व, नागकेशर, गु़ड़हल, अश्वगंधा।

मेधा वृद्धि प्राप्ति हेतु : आंकड़ा, शंखपुष्पी, पलाश, ब्राह्मी, तुलसी।

सुख प्राप्ति के लिए : नीम, कदम्ब, घने छायादार वृक्ष।

आनंद प्राप्ति के लिए : हरसिंगार (पारिजात) रातरानी, मोगरा, गुलाब।

Friday, 22 July 2011

Planetary Vegetation And Herbs

Planetary Vegetation and Herbs. According to Alan Leo, herbs are classified according to planetary influences as follows:
Sun: Almond, angelica, ash tree, bay tree, celandine, centaury, chamomile, corn hornwort, eyebright, frankincense and other aromatic herbs, heart trefoil, juniper, male peony, poppy, marigold, mistletoe, olive, pimpernel, rice, rosemary, rue, saffron, St. John's wort, sun dew, tormentil, turnsole, vine, wiper's bugloss; also bay, citrus, and walnut trees.

Moon: Adder's tongue, cabbage, chickweed, clary, coral-wort, cuckoo flowers, cucumber, dog-tooth, duck's meat, gourd, hyssop, iris, lettuce, melon, mercury, moonwort, mouse-car, mushrooms, pearlwort, privet, pumpkin, purslain, rattle grass, rosemary, seaweed, spunk, turnips, wallflowers, water arrowhead, watercress, water lily, water violet, white lily, white poppy, white rose, white saxifrage, whitlow grass, wild wallflower, willow, winter green, and all night blooming plants; also maple, olive, palm, and other trees rich in sap.

Mercury: Azaleas, bitter sweet, calamint, caraway, carrots, cascara, coraline, dill, elecampane, endive, fennel, hare's foot, hazel, horehound, hound's tongue, lavender, lily of the valley, liquorice, male fern, mandrake, majoram, mulberry, myrtle, olive spurger parsley, pellitory, southernwood, star-wort, trefoil, valerian, wild carrots, winter savory; also hazel, and filbert trees.

Venus: Apples, archangel, artichoke, beans, bearberry, bishop's weed, black alder, bubbleholly, burdock, cloves, cock's head, couch grass, cowslip, cranebill, cudweed, daffodils, elder, featherfew, ferns, foxgloves, goldenrod, gooseberry, grapes and other vines, groundsel, kidneywort, lily, little daisy, marshmallows, mint, pennyroyal, pennywort, peppermint, red cherries, roses, sanicle, sea holly, sorrel, spearmint, tansy, throatwort, vervain, violets, wheat; also almond, apple, apricot, ash, cypress, pecan and pomegranate trees.

Mars: All-heal, aloes, anemone, arsmart, barberry, basil, box tree, broom, butcher's broom, cactus, capers, catmint, coriander, crowfoot, flax-weed, furze-bush, garden cress, garlic, gentian, ginger, hawthorn, honeysuckle, hops, horse radish, horsetongue, hyssop, leadwort, leeks, madder, masterwort, mousetail, mustard, nettles, onions, peppers, plantain, radish, savin, tobacco, wake-robin, wormwood, and all briars and thistles; also trees with thorns.

Jupiter: Agrimony, aniseed, apricots, asparagus, balm, balsam, betony, bloodwort, borage, chestnut, cinquefoil, cloves, currants, daisy, dandelion, hart's tongue, house leek, jessamine, liver wort, mint, myrrh, nailwort, nutmeg, polypody, rhubarb, sage, scurvy grass, small samphire swallow wort, strawberry, sugar cane, thorn apple, wild pinks, wild succory; also ash, almond, birch, fig, lime, linden, mulberry and oak trees
.
Saturn: Aconite, barley, barren wort, beech, black hellebore, blue bottle, comfrey, crosswort, flaxweed, fleawort, fumitory, gladwin, ground moss, hemlock, hemp, henbane, holly, horsetail, ivy, jew's ear, knap-weed, knotgrass, mandrake, mangel, medlar, moss, navelwort, nightshade, pansies, parsnips, quince, rue, rupture wort, rushes, rye, sciatica wort, senna, shepherd's purse, sloes, Solomon's seal, spinach, tamarisk, vervain, wintergreen. Also cypress, elm, pine, willow and yew trees.

Pluto. Modern astrology seldom concerns itself with adding to or even using these classifications. Furthermore, the second-octave planets externalize more on the mental and spiritual plane than the physical, hence no additions to these ancient lists have been made as applicable to Uranus, Neptune and Pluto.

medicinal plants

 medicinal plants ruled by the planets,

Sun - Chamomile, Rosemary, Eyebright


Moon - Willow, Watercress, Poppy, Cucumber, White Roses


Mercury - Caraway, Lavender


Venus - Coltsfoot, Woodsage, Alder, Elder, Wild Thyme


Mars - Bryonia, Hops


Jupiter - Cinquefoil, Hyssop, Red Roses, Henbane


Saturn - Comfrey, Ivy, Hemlock, Belladonna

Plants associated with the Planets:



THE SUN :
Food-stuffs-Rice, honey and aromatic herbs, as used for flavouring.

Flowers - Marigold, sunflower, peonies, etc.

Trees-The bay, walnut and palm.

THE MOON :
Food-stuffs-Cabbage, melons, cucumbers, pumpkins, turnips, mushrooms, lettuce, watercress.
Flowers-Mostly night-growing varieties.

Trees-Traditionally, those which are mostly rich in sap, e.g. Maple and Sycamore.

MERCURY :
Food-stuffs-Many seed-bearing plants; carrots, parsley, the majority of nuts.
Flowers-The wilder varieties.
Trees-Hazel, walnut, and other nut-bearing trees.

VENUS :
Food-stuffs-Gooseberry and other berries, wheat, and most of the spices.
Flowers-Daffodil, goldenrod, violet, rose, lily, etc.
Trees-Apple, pear, peach, fig, almond, ash, cypress and most of the vines.

Mars :
Food-stuffs-Practically all the "hot" foods, such as ginger, and peppers, and those of strong taste such as the onion, garlic, etc. Hops are also under Mars.
Flowers-The unusual and rather coarser bright flowers.
Trees-Holly, fir (?) and all thorn-bearing trees, or bushes.

JUPITER :
Food-stuff-Vegetables such as sage, leeks; asparagus; rhubarb; mints; and fruits such as strawberries and the currants.
Flowers-The daisies and similar flowers.
Trees-Lime, birch, mulberry, ash, oak, birch.

SATURN :
Food-stuffs-Most vegetables, such as potatoes, etc.; parsnips, spinach and barley.
Flowers-Very few known to be associated, but the various bushes when in flower are thought to be so placed

Trees-Pine, yew, willow, elm.

URANUS and NEPTUNE are similar to Venus and the Moon, respectively.

Planetary Rulers of Herbs


When choosing plants for a spell or amulet it can be very useful to take note of the planetary rulers of the plants or plant parts you are using.

To get the most potency from the planetary influence harvest your plant at the time when its ruling planet is in a position of strength.

However this is not always possible if that specific plant doesn’t grow in a location that is accessible to you.

This should not be a problem as each planet rules over a huge variety of herbs and plants so it should be quite simple to find an alternative

When deciding on what plant to use consider the appearance of the plant, whether you are using its leaves, fruit or roots and where it grows naturally.

leaves
Different parts of the plant have different rulerships and uses. Roots are thought to influence the brain, stems the bones, flowers the lower belly and genitals. Each part of the plant are also ruled by different planets:
Fruit – Jupiter
Flowers – Venus
Seeds or Bark – Mercury
Wood – Mars
Roots - Saturn
Leaves – Moon
roots
The planetary ruler of the plant part being used is thought to be the secondary ruler. Most of the rulerships now used survive from lists written in the seventeenth century, and these lists were often simplified from earlier sources. If you want to study the subject of herb associations a good book to get is Culpeper’s Herbal, originally called The English Physician.
Below is a list of Planets and the way they influence the herbs.
Sun
Herbs ruled by the Sun promote personal success and self-confidence. They help develop a sense of willpower and identity and impart a sense of purpose. Sun herbs bring vitality, health, creativity and dignity. They are plants that love the Sun, smell pleasant and grow majestically and are usually red or yellow. Some Sun plants are ash, cedar and frankincense.
Moon
These herbs affect the subconscious mind and aid in the development of intuition. All Moon plants are juicy and full of sap; they include all herbs that turn toward the Moon. These herbs have leaves that are thick, soft, round and juicy. Moon herbs are often pale and white in colour. Examples of Moon plants are lily, mugwort, mushroom and willow.
fruit
Mercury
These herbs facilitate good communication through eloquence and clear thinking. They help in business and trading and all situations where clear thinking is essential. They also help in recovery from illness. Herbs ruled by Mercury are useful for learning and to stimulate the central nervous system and brain. They are often of mixed colours. Some plants ruled by Mercury are lavender, liquorice and parsley.
Venus
These herbs bring joy, beauty, artistry, sensitivity and compassion. Venus herbs attract love; they include all scented plants and herbs that smell pleasant and sweet. All fragrant and sweet spices are ruled by Venus too. Some plants ruled by Venus are apricot, apple tree, daffodil and elder.
Mars
These herbs give energy they promote independence and assertiveness and stimulate the passions. Mars plants can be used for protection and to promote motivation. When used with plants of other planetary rule, they strengthen them. Examples of these are basil, garlic, onion and pepper.
Jupiter
These herbs expand consciousness and opportunity. They expand the body ability to heal itself. They expand the mind allowing for greater understanding and aid in success. Herbs and other plants of Jupiter tend to be large, examples of these are almond, bay, birch and oak.
Saturn
These herbs give grounding and stability. They teach that success comes from patience and perseverance. Saturn herbs are binding herbs and protect in a non-aggressive manner. Examples of herbs ruled by this planet are angelica, hemlock, pine and sage.
Neptune
Herbs ruled by Neptune are useful in dream working, trance and hypnosis; they are plants of the mystic. They intensify the imagination and lead to visions and ideas. These herbs can be useful for developing telepathy and astral projection. Some of these herbs are poppies, lobelia and lotus.
Uranus
These herbs excite, stimulate and energize; for example this planet rules guarana, used in energy drinks. They lend themselves to practical idealism genius and the development of telekinesis. They also bring change and sometimes unforseen results.
Pluto
Herbs and plants that are ruled by Pluto can transform and illuminate the shadow side of ourselves. They can promote growth and insight. They can also help in cases of sexuality impotency. Examples of plants ruled by this planet are damiana, rye and amaranth.
Herbs are such a useful tool in magick, knowing more about herbs and other plants help you in making the right choice of herb for your spells and charms. Think about the planetary rulers for every herb you use, this will help you in making a decision on which herb is the best one for your purpose.



Thursday, 21 July 2011

आहार एवं सुगंध


किसी भी ग्रह की प्रतिकूलता व्यक्ति को अशांत बना देती है। ग्रह संबंधी आहार या सुगंध का प्रयोग
करके आप प्रतिकूल ग्रह को अनुकूल बना सकते हैं। शास्त्रों में ग्रहों की प्रकृति के अनुसार उनके आहार और सुगंधों का उल्लेख मिलता है। इनमें नौ ग्रहों के अलग-अलग आहार और सुगंध हैं। जिनका प्रयोग करके हम ग्रहजनित दोषों के प्रभाव में कमी ला सकते हैं।

ग्रह संबंधी आहार और सुगंध

-सूर्य की अनुकूलता के लिए आप अपने आहार में केसर, गेहूं, आम, चिकने पदार्थ तथा शहद का उपयोग कर लें। केसर तथा गुलाब के इत्र के उपयोग से भी सूर्य की अनुकूलता प्राप्त होती है।

-चंद्रमा की अनुकूलता के लिए गन्ना, सफेद गुड़, शक्कर, दूध या दूध से बने पदार्थ या सफेद रंग की मिठाई का सेवन करें। चमेली तथा रातरानी का परफ्यूम या इत्र चंद्र संबंधी पीड़ा को शांत करता है।

-मंगल की पीड़ा को कम करने के लिए आप अपने आहार में मूंग, मसूर की दाल, प्याज, गुड़, अचार, जौ या सरसों का उपयोग करें। लाल चंदन के इत्र या तेल के प्रयोग से भी मंगल प्रसन्न होते हैं।

-बुध को इलायची सर्वाधिक प्रिय है। मटर, ज्वार, मोठ, कुलथी, हरी दालें, मूंग, हरी सब्जियां बुध के दोष को कम करती हैं। चंपा के इत्र या तेल के प्रयोग से बुध प्रसन्न होते हैं।

-बृहस्पति की कृपा के लिए चने की दाल, बेसन, मक्का, केला, हल्दी, सेंधा नमक, पीली दालों का प्रयोग कर लें। पीले फूल, केसर या केवड़े का दूध प्रयोग करने से बृहस्पति की कृपा प्राप्त होगी।

-शुक्र की कृपा प्राप्ति के लिए त्रिफला, दालचीनी, कमल गट्टे, मिश्री, मूली या सफेद शलजम का उपयोग आहार में करते रहें। सफेद फूल, चंदन या कपूर की सुगंध शुभ फलदायी है। चंदन के तेल में कपूर डालकर उपयोग करना भी श्रेष्ठ रहता है
।
-शनि की कृपा प्राप्त करने के लिए तिल, उड़द की दाल, काली मिर्ची, अलसी एवं मूंगफली का तेल, अचार, लौंग, तेजपत्ता तथा काले नमक का उपयोग आहार में करें। कस्तूरी, लोबान तथा सौंफ की सुगंध शनि को अति पसंद है।

-राहु एवं केतु की पीड़ा से बचने के लिए उड़द, तिल तथा सरसों का प्रयोग लाभदायक होता है। काली गाय का घी, कस्तूरी की सुगंध इन्हें प्रिय है।

-रविवार को उड़द, सोमवार को खीर या दूध, मंगलवार को चूरमा या हलुवा, बुध को हरी सब्जी, गुरूवार को पीले चने की दाल या बेसन का प्रयोग, शुक्रवार को मीठा दही, शनि को चने का सेवन करने से सभी ग्रहों की शांति होती है।

-रेखा सिंह

Wednesday, 20 July 2011

पेड़-पौधों

पेड़-पौधों के टोटके

हमारे आसपास पाए जाने वाले विभिन्न पेड़-पौधों के पत्तों, फलों आदि का टोटकों के रूप में उपयोग भी हमारी सुख-समृद्धि की वृद्धि में सहायक हो सकता है। यहां कुछ ऐसे ही सहज और सरल उपायों का उल्लेख प्रस्तुत है, जिन्हें अपना कर पाठकगण लाभ उठा सकते हैं।

विल्व पत्र : अश्विनी नक्षत्र वाले दिन एक रंग वाली गाय के दूध में बेल के पत्ते डालकर वह दूघ निःसंतान स्त्री को पिलाने से उसे संतान की प्राप्ति होती है।

अपामार्ग की जड़ : अश्विनी नक्षत्र में अपामार्ग की जड़ लाकर इसे तावीज में रखकर किसी सभा में जाएं, सभा के लोग वशीभूत होंगे।

नागर बेल का पत्ता : यदि घर में किसी वस्तु की चोरी हो गई हो, तो भरणी नक्षत्र में नागर बेल का पत्ता लाकर उस पर कत्था लगाकर व
सुपारी डालकर चोरी वाले स्थान पर रखें, चोरी की गई वस्तु का पला चला जाएगा।

संखाहुली की जड़ : भरणी नक्षत्र में संखाहुली की जड़ लाकर तावीज में पहनें तो विपरीत लिंग वाले प्राणी आपसे प्रभावित होंगे।

आक की जड़ : कोर्ट कचहरी के मामलों में विजय हेतु आर्द्रा नक्षत्र में आक की जड़ लाकर तावीज की तरह गले में बांधें।

दूधी की जड़ : सुख की प्राप्ति के लिए पुनर्वसु नक्षत्र में दूधी की जड़ लाकर शरीर में लगाएं।

शंख पुष्पी : पुष्य नक्षत्र में शंखपुष्पी लाकर चांदी की डिविया में रखकर तिजोरी में रखें, धन की वृद्धि होगी।

बरगद का पत्ता : अश्लेषा नक्षत्र में बरगद का पत्ता लाकर अन्न भंडार में रखें, भंडार भरा रहेगा।

धतूरे की जड़ : अश्लेषा नक्षत्र में धतूरे की जड़ लाकर घर में रखें, घर में सर्प नहीं आएगा और आएगा भी तो कोई नुकसान नहीं पहुंचाएगा।

बेहड़े का पत्ता : पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में बेहड़े का पत्ता लाकर घर में रखें, घर ऊपरी हवाओं के प्रभाव से मुक्त रहेगा।

नीबू की जड़ : उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में नीबू की जड़ लाकर उसे गाय के दूध में मिलाकर निःसंतान स्त्री को पिलाएं, उसे पुत्र की प्राप्ति होगी।

चंपा की जड़ : हस्त नक्षत्र में चंपा की जड़ लाकर बच्चे के गले में बांधें, बच्चे की प्रेत बाधा तथा नजर दोष से रक्षा होगी।

चमेली की जड़ : अनुराधा नक्षत्र में चमेली की जड़ गले में बांधें, शत्रु भी मित्र हो जाएंगे।

काले एरंड की जड़ : श्रवण नक्षत्र में एरंड की जड़ लाकर निःसंतान स्त्री के गले में बांधें, उसे संतान की प्राप्ति होगी।

तुलसी की जड़ : पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र में तुलसी की जड़ लाकर मस्तिष्क पर रखें, अग्निभय से मुक्ति मिलेगी।