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Wednesday, 15 February 2012

मंत्र पितृ दोष

अद्भुत मंत्र, जो दिलाता है पितृ दोष से मुक्ति

धर्म शास्त्रों के अनुसार मंत्रों में इतनी शक्ति होती है कि वह सभी प्रकार की बाधाओं का नाश कर सकती है। यदि मंत्र जप पूरे विधि-विधान से किया जाए तो ऐसी कोई बाधा या दोष नहीं जिसका निवारण नहीं हो सकता। नीचे ऐसा ही एक मंत्र दिया गया है जिसका जप करने से पितृ दोष का प्रभाव अप्रत्याशित रूप से कम हो जाता है व पितृ प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं। पितृ पक्ष में इस मंत्र का जप करना श्रेष्ठ रहता है इसके अलावा प्रत्येक मास की अमावस्या तिथि को भी इसका जप कर सकते हैं।



मंत्र

ऊँ सर्व पितृ प्रं प्रसन्नों भव ऊँ



जप विधि

- पितृ पक्ष में प्रत्येक दिन व प्रत्येक मास की अमावस्या तिति को सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि नित्य कर्म से निवृत्त होकर भगवान सूर्य नारायण की ओर मुख करके उनका पूजन करें व अध्र्य दें।

- इसके बाद कुश के आसन पर बैठकर रुद्राक्ष की माला से इस मंत्र का जप करें।

- कम से कम 5 माला जप अवश्य करें।

- एक ही समय, स्थान, माला व आसन होने से शीघ्र लाभ होता है।

Saturday, 9 July 2011

पितृदोष

कई बार शनि का न्याय इतना अधिक कष्ट देने वाला होता है कि व्यक्ति का जीना मुश्किल हो जाता है। इन कष्टों से बचने के लिए शनि की आराधना सटीक उपाय है। शनि को मनाने के लिए प्रति शनिवार किसी काली गाय को हरी घास खिलाना चाहिए।

घर में कभी कबाड़ा एकत्रित नहीं होने देना चाहिए। इससे घर में दरिद्रता आती है। वास्तु के अनुसार भी घर में कबाड़ का इकट्ठा होना अच्छा नहीं माना जाता। मान्यता है कि घर में कबाड़ इकट्ठा होने से वास्तुदोष बढ़ता है। 

साथ ही घर की सकारात्मक ऊर्जा में कमी आती है। नकारात्मक ऊर्जा बढऩे लगती है। इससे घर में रहने वाले लोगों को मानसिक तनाव व आर्थिक तंगी का भी सामना करना पड सकता है। इसीलिए जो लोग कबाड़े के नकारात्मक प्रभाव से दूर रहना चाहते हैं। वे अपने घर में कबाड़े को एकत्रित नहीं होने दें। यह जरूरी है। 

साथ ही कबाड़ जहां तक हो सकें शनिवार के दिन बेचना चाहिए और ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार कबाड़ बेचकर कभी उसका पैसा अपने पास नहीं रखना चाहिए। दरअसल पुराने लोहे के सामान में शनि का व अन्य सामानों में पितृ का वास माना जाता है। इसीलिए कहा जाता है कि घर में कबाड़ा इकट्ठा होने पर पितृदोष भी लगता है। 

इसलिए पितृदोष व शनि के कुप्रभाव से बचने के लिए कबाड़ बेचकर उसका पैसा गरीबों में दान कर देना चाहिए या उससे मिठाई खरीदकर गरीब बच्चों में बांटना चाहिए। इससे घर की सुख समृद्धि में वृद्धि होती है। साथ ही दरिद्रता दूर होती है।

Friday, 8 July 2011

पितरों को नहीं भूलें

कोई श्राद्ध का अधिकारी पितृपक्ष की सभी तिथियों पर पितरों का श्राद्ध या तर्पण चूक जाएं या पितरों की तिथि याद न हो तब इस तिथि पर सभी पितरों का श्राद्ध कर सकते हैं। इसलिए यह पितृमोक्ष अमावस्या या सर्वपितृ अमावस्या के नाम से प्रसिद्ध है।

जिन दंपत्तियों के यहां ३ पुत्रियों के बाद एक पुत्र जन्म लेता है या जुड़वां संतान पैदा होती है। उनको सर्वपितृ अमावस्या का श्राद्ध जरुर करना चाहिए।

सर्वपित् अमावस्या को पितरों के श्राद्ध से सौभाग्य और स्वास्थ्य प्राप्त होता है। धार्मिक मान्यता है कि इस तिथि पर पितृ आत्मा अपने परिजनों के पास वायु रुप में ब्राह्मणों के साथ आते हैं। उनकी संतुष्टि पर पितर भी प्रसन्न होते हैं। परिजनों के श्रद्धापूर्वक श्राद्ध करने से वह तृप्त और प्रसन्न होकर आशीर्वाद देकर जाते हैं, किंतु उनकी उपेक्षा से दु:खी होने पर श्राद्धकर्ता का जीवन भी कष्टों से बाधित होता है।

सर्वपितृ अमावस्या के दिन पितरों की तृप्ति से परिवार में खुशियां लाने का श्राद्धपक्ष का अंतिम अवसर न चूक जाएं। इसलिए यहां बताए जा रहे हैं कुछ उपाय जिनका अपनाने से भी आप पितरों की तृप्ति कर सकते हैं -

- सर्वपितृ अमावस्या को पीपल के पेड़ के नीचे पुड़ी, आलू व इमरती या काला गुलाब जामुन रखें।
- पेड़ के नीचे धूप-दीप जलाएं व अपने कष्टों को दूर करने की प्रार्थना करें। पितरों का ध्यान कर नमस्कार करें। ऐसा करने पर आप जीवन में खुशियां व अनपेक्षित बदलाव जरुर देखेंगे।
- घर के मुख्य प्रवेश द्वार सफेद फूल से सजाएं।
- इस दिन पांच फल गाय को खिलाएं।
- पितरों के निमित्त धूप देकर इस दिन तैयार भोजन में से पांच ग्रास गाय, कुत्ता, कौवा, देवता और चींटी या मछली के लिए जरुर निकालें और खिलाएं।
- यथाशक्ति ब्राह्मण को भोजन कराएं। वस्त्र, दक्षिणा दें। जब ब्राह्मण जाने लगे तो उनके चरण छुएं, आशीर्वाद लें और उनके पीछे आठ कदम चलें।
- ब्राह्मण के भोजन के लिए आने से पहले धूपबत्ती अवश्य जलाएं।

इस तरह सर्वपितृ अमावस्या को श्रद्धा से पूर्वजों का ध्यान, पूजा-पाठ, तर्पण कर पितृदोष के कारण आने वाले कष्ट और दुर्भाग्य को दूर करें। इस दिन को पितरों की प्रसन्नता से वरदान बनाकर मंगलमय जीवन व्यतीत किया जा सकता है।

पितृदोष

पितृदोष के बारे में मनीषियों का मत है कि पूर्व जन्म के पापों के कारण या पितरों के शाप के कारण यह दोष कुंडली में प्रकट होता है अतः इसका निवारण पितृ पक्ष में शास्त्रोक्त विधि से किया जाता है।

अन्य उपाय :

* प्रत्येक अमावस्या को एक ब्राह्मण को भोजन कराने व दक्षिणा-वस्त्र भेंट करने से पितृदोष कम होता है।

* प्रत्येक अमावस्या को कंडे की धूनी लगाकर उसमें खीर का भोग लगाकर दक्षिण दिशा में पितरों का आह्वान करने व उनसे अपने कर्मों के लिए क्षमायाचना करने से भी लाभ मिलता है।

* पिता का आदर करने, उनके चरण स्पर्श करने, पितातुल्य सभी मनुष्यों को आदर देने से सूर्य मजबूत होता है।

* सूर्योदय के समय किसी आसन पर खड़े होकर सूर्य को निहारने, उससे शक्ति देने की प्रार्थना करने और गायत्री मंत्र का जाप करने से भी सूर्य मजबूत होता है।

* सूर्य को मजबूत करने के लिए माणिक भी पहना जाता है, मगर यह कुंडली में सूर्य की स्थिति पर निर्भर करता है।

यह तय है कि पितृदोष होने से जातक को श्रम अधिक करना पड़ता है, फल कम व देर से मिलता है अतः इस हेतु मानसिक तैयारी करना व परिश्रम की आदत डालना श्रेयस्कर रहता है।

क्या है पितृ दोष और उसका निवारण

जन्म कुण्डली का नौवां घर धर्म का घर कहा जाता है। यही पिता का घर भी होता है। यदि किसी प्रकार से यह नवां घर खराब ग्रहों से ग्रसित हो जाए तो यह सूचना है कि पूर्वजों की इच्छाएं अधूरी रह गयी थीं। सूर्य, मंगल और शनि प्राकृतिक रूप से खराब ग्रह कहे जाते है और कुछ लग्नों में अपना काम करते हैं लेकिन राहु और केतु सभी लग्नों में अपना दुष्प्रभाव देते हैं। ज्योतिषविदों के मुताबिक, नवां भाव, नवें भाव का मालिक ग्रह, नवां भाव चन्द्र राशि से और चन्द्र राशि से नवें भाव का मालिक अगर राहु या केतु से ग्रसित है तो यह पितृ दोष कहा जाता है। इस प्रकार का जातक हमेशा किसी न किसी प्रकार के तनाव में रहता है और उसकी शिक्षा पूरी नहीं हो पाती।वह जीविका के लिए तरसता रहता है,वह किसी न किसी प्रकार से दिमागी या शारीरिक रूप से अपंग होता है। यदि किसी भी तरह से नवां भाव या नवें भाव का मालिक राहु या केतु से ग्रसित है तो यह सौ प्रतिशत पितृदोष के कारणों में आ जाता है। पितृ दोष किसी भी प्रकार की सिद्धि को नहीं आने देता है। सफ़लता कोसों दूर रहती है और व्यक्ति केवल भटकाव की तरफ़ ही जाता रहता है। लेकिन अगर कोई व्यक्ति माता काली का उपासक है तो किसी भी प्रकार का दोष उसके जीवन से दूर रहता है। व्यक्ति की अनदेखी या अधिक आधुनिकता के प्रभाव के कारण समय से अर्पण न करने पर जो पितृ पिशाच योनि मे चले जाते हैं और दुखी रहते हैं। पितृ दोष हर व्यक्ति को परेशान कर सकता है इसलिये निवारण बहुत जरूरी है।
पितृदोष को दूर करने का एक बढ़िया उपाय एक बार की ही पूजा है। यह पूजा किसी भी प्रकार के पितृदोष को दूर करती है। सोमवती अमावस्या को (जिस अमावस्या को सोमवार हो) पास ही स्थित किसी पीपल के पेड़ के पास जाइये और उस पेड़ को एक जनेऊ दीजिये और एक जनेऊ भगवान विष्णु के नाम का उसी पीपल को दीजिये। पीपल के पेड़ और भगवान विष्णु की प्रार्थना कीजिये, फिर उस पीपल के पेड़ की एक सौ आठ परिक्रमा दीजिये। हर परिक्रमा के बाद एक मिठाई (जो भी आपके स्वच्छ रूप से हो) पीपल को अर्पित कीजिये। परिक्रमा करते वक्त :ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करते जाइये। परिक्रमा पूरी करने के बाद फ़िर से पीपल के पेड़ और भगवान विष्णु की प्रार्थना कीजिये। उनसे जाने-अनजाने में हुए अपराधों के लिए क्षमा मांग लीजिए। सोमवती अमावस्या की पूजा से बहुत जल्दी ही उत्तम फ़लों की प्राप्ति होने लगती है।
दूसरा उपाय है, जिसके तहत कौओं और मछलियों को चावल और घी मिलाकर बनाए गए लड्डू हर शनिवार को दीजिए।
आगे के पांच साल में आने वाली सोमवती अमावस्यायें :-29th August 2011
23rd Jan. 2012
15th October 2012
11th March 2013.
8th July 2013
2nd December 2013
25th August 2014
22nd December 2014