Search This Blog

Showing posts with label ग्रहों. Show all posts
Showing posts with label ग्रहों. Show all posts

Tuesday, 18 October 2011

ग्रहों के

ग्रहों के देवता रंग रत्न धातु जानवर शरीर के अंग वस्तुयें

अलग अलग ग्रहों के अलग अलग देवता है और उन्ही के अनुसार रंग है रत्न भी हर ग्रह के अनुसार ही अपना काम करते है उसी प्रकार से ग्रह को पहिचानने के लिये जानवर को भी देखा जाता है शरीर के अंग भी अपने अपने अनुसार ग्रहों का बखान करते है.
ग्रह देवता रंग रत्न धातु जानवर शरीर के अंग वस्तुयें
सूर्य विष्णु गेंहुआं माणिक तांबा पहाडी गाय बन्दर पूरा शरीर और शरीर का दाहिना अंग गेंहूं तांबा तेजपात
चन्द्रमा शिव दूधिया मोती चांदी गोडा घोडी ह्रदय चेहरे का बायां भाग चावल
मंगल नेक हनुमान लाल बिना चमक वाला मूंगा लोहा चीता जिगर ऊपर का होंठ लाल मसूर की दाल
मंगल बद भूत प्रेत लाल खूनी चमकीला मूंगा ऊंट हिरण जिगर नीचे का होंठ शहद पका हुआ मांस
बुध दुर्गा हरा पन्ना कांसा भेड बकरी चमगादड दिमाग स्नायु नाक का अग्ला हिस्सा जीभ दांत साबुत मूंग खिलौने
गुरु ब्रह्मा पीला सोना पुखराज शेर शेरनी गर्दन नाक चने की दाल हल्दी
शुक्र लक्ष्मी दही जैसा हीरा चिकनी मिट्टी गाय बैल स्वरयंत्र गाल चाल मक्खन छाछ कपूर
शनि भैरों काला रांगा नीलम काला भैंस आंखों के पलक बाल खाल साबुत उडद सूखे नारियल
राहु सरस्वती नीला गोमेद नीलम नीला पंचधातु जंगली चूहा पतंगे मस्तिष्क का कंपन थोडी सरसों काली हल्दी
केतु गणेश चितकबरा कैट्स आई त्रिधातु कुत्ता सूअर गधा छिपकली धड रीढ की हड्डी जोड पंजे कान तिल काले सफ़ेद कम्बल

Friday, 30 September 2011

ग्रहों के लिए प्रतिनिधि

नीचे दी हुई तालिका में प्रत्येक देवी के भैरव , विष्णु अवतार और ग्रहों के लिए प्रतिनिधि स्वरुप बताया गया है 

 

महाविद्या  गृह  भैरव  विष्णु अवतार 
1काली  शनि  महाकाल  श्री कृष्ण 
2तारा  गुरु 
 मतस्य 
3छिन्नमस्ता  राहु क्रोध भैरव  नरसिंह 
4षोडशी  बुध  कामेश्वर  परशुराम 
5भुवनेश्वरी  चन्द्र  त्रयम्बक  वामन 
6भैरवी  लग्न  दक्षिण मूर्ति  बलराम 
7धूमावती  केतु  - वाराह 
8 बगलामुखी मंगल  मृत्युंजय   श्री कूर्म 
9 मातंगी  सूर्य  मातंग / सदाशिव  श्री राम 
10कमला  शुक्र  विष्णु  बुद्ध 

Saturday, 10 September 2011

शरीर के अंगों पर ग्रहों का प्रभाव

     हमारे  शरीर  का  प्रत्येक   अंग  पर  हमारे  सौर  मंडल  के  विभिन्न  ग्रहों  का  प्रभाव  पड़ता  है . आपको 

यह  जानकर  आश्चर्य   हो  सकता  है  कि   हमारे  शरीर  के  अलग  अलग  भागों  पर  अलग  अलग  ग्रहों  का

  नियंत्रण / प्रभाव  होता   है  , दूसरे  शब्दों  में  हम  /  आप  किसी  भी  व्यक्ति  के  केवल  शरीर  के  जिस  भाग

में  व्यक्ति  रोग  से  पीड़ित  होता  है  सिर्फ  उस  भाग  का  पता  कर  आप  जान  सकते  हैं  कि  उनकी  कुंडली

में  कौन   सा  ग्रह  गड़बड़  है  और  कौन   सा ठीक !




कारक   ग्रह   --      शरीर  के  प्रभावित  अंग 

 
*  सूर्य          -   सिर  से  मुख   तक 

 
*  चन्द्र         -   गले  से  ह्रदय  तक 

 
*  मंगल       -   पेट  से  पीठ    तक 

 
*  बुध          -   हाथ  और  पाँव  पर 

 
*  गुरु          -   कमर  से  जांघ  तक 

 
*  शुक्र         -   गुप्तांग  से  वृष्ण  तक 

 
*  शनि        -   घुटनों  से  पिंडली  तक   

 
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
    कुंडली  में  ग्रहों  कि शुभाशुभ   स्थिति  के  अनुसार  मनुष्य  शरीर  के  अंग   पुष्टापुष्ट  होंगे  !  
*** नोट  : अपने  कुंडली  में  देखकर  या  उपरोक्त  शरीर  के  अंगों   में  हो रहे  परेशानी  का  समाधान  हेतु  आप  उपाय   स्वतः  प्रारंभ  कर  सकते  हैं  ! ***

Saturday, 3 September 2011

ग्रहों के दुश्मन और दोस्त




ग्रहों के दुश्मन और दोस्त
 
ग्रह का नाम
बराबर की ताक़त के
दोस्त
दुश्मन
1
बृहस्पति
सनिचर, राहू, केतू
सूरज, चँदर, मंगल
शुकर , बुध
2
सूरज
बुध नदारद , केतू मध्धम करे
बृहस्पति, चँदर,मंगल
सनिचर, शुकर, राहू से सूरज ग्रहण
3
चँदर
सनिचर, शुकर, मंगल, बृहस्पति
सूरज बुध, राहू मध्धम करे
केतू से चँदर ग्रहण
4
शुकर
मंगल, बृहस्पति
सनिचर, बुध, केतू,
सूरज, चँदर, राहू
5
मंगल
सनिचर,शुकर, राहू नदारद
सूरज, चँदर,बृहस्पति
बुध, केतु
6
बुध
सनिचर, केतु, मंगल, बृहस्पति
सूरज, शुकर, राहू
चँदर
7
सनिचर
केतु, बृहस्पति
बुध, शुकर, राहू,
सूरज, चँदर, मंगल
8
राहू
बृहस्पति, चँदर मध्धम हो जावे
बुध,सनिचर, केतु
सूरज, शुकर, मंगल
9
केतू
बृहस्पति, सनिचर, बुध, सूरज मध्धम हो जावे
शुकर, राहू
चँदर, मंगल

Friday, 2 September 2011

ग्रहों के उपाय

ग्रहों के उपाय

संयुक्त ग्रहों के उपाय :-



- यदि किसी जातक की जन्मकुंडली में शुक्र और सूर्य की युति किसी भी भाव में हो तो जातक को दुर्गा पूजन लाभदायक होगा ।

- सूर्य.शनि की युति कुण्डली के किसी भी भाव में होने पर जातक बादाम,नारियल बहते पानी में बहाए।

- सूर्य.राहू की युति होने पर जातक जौ को दूध या गौ मूत्र से धोकर बहते पानी में बहायें।

- यदि जातक की कुण्डली में बुध अशुभ या नीच राशि का हो तब जातक मंगल एवं राहू के उपाय करके बुध के दुश्प्रभाव को दूर करें।

- सूर्य.केतु की युति होने पर सूर्य ग्रहण के समय तिल,नींबू,पका केला बहते पानी जैसे नदी में बहायें।

- गौ मूत्र घर में छिड़कने से केतु.शुक्र एवं बुध का अशुभ प्रभाव कम हो जाता है ।

- जातक की जन्म कुण्डली में चंद्र.शुक्र की युति हो तो चांदी की ठोस गोली हमेसा अपने जेब में रखें ।

- चंद्र.शनि की युति होने पर भानि एवं केतु के उपाय लाभकारी होते है। चंद्रग्रहण के समय भानि की वस्तुएं बहते पानी में बहाने से लाभ होता है।

- भानि.चंद्र के अशुभ प्रभाव को दूर करने के लिए सूर्य का उपाय करें ।

- कुण्डली में मंगल.राहू की युति होने पर मिट्टी के बर्तन में जौ भरकर बहते पानी जैसे नदी में बहाये तथा मंगल का उपाय करें ।

- बुध.शनि की युति में जातक को भाराब मांस का सेवन नहीं करना चाहिए।

- बुध.राहू की युति हो तो जातक को कच्ची मिट्टी की सौ गोलियां बनाकर एक गोली प्रतिदिन धर्म स्थल में पहुंचानी चाहिएं।

- गुरू.बुध की युति में खांड से भरा मिट्टी का बर्तन भूमि में दबाना चाहिए।

- चंद्र.राहु की युति हो, तब चंद्रग्रहण पर जौं, कोयला, सरसों आदि राहु की वस्तुएं बहते पानी में बहायें और मंगल,गुरू का उपाय करें।

- चंद्र.केतु की युति होने पर जातक बुध एवं केतु की वस्तुओं का दान करें । तीन केले प्रतिदिन ४८ दिन तक मंदिर में दान करें।

- मंगल.बुध की अशुभ युति में जातक मंगल का उपाय करें ।

- मंगल. शनि की युति होने पर मंगल या भानि का उपाय करें साथ ही चंद्र का उपाय करें।

- शुक्र.राहु की युति होने पर दूध एवं हरे नारियल का दान करें ।

- यदि कुण्डली में सूर्य.चंद्र.राहु की युति हो तो जातक दुर्गा उपासना करें एवं बुध का उपाय करें ।

-इसी तरह सूर्य.चंद्र.केतु की युति होने पर भी दुर्गा उपासना करें एवं बुध का उपाय करें ।

- कुण्डली में सूर्य.बुध.शुक्र की युति होने पर जातक कान में स्वर्ण धारण करें तथा काला,सफेद कुत्ता पाले

शुध्द चांदी का छल्ला भी धारण कर सकते है।

- गुरू. शनि की युति में, शराब,मांस,मदिरा का उपयोग न करे। शिव उपासना करें। चंद्र का उपाय करें ।

- गुरू.राहु की युति में अशुभता से बचने के लिए सोना धारण करें। चितकबरें कुत्ते की सेवा करें। जौं को दूध से धोकर लगातार ४३ दिन तक बहते पानी में बहायें।

-शुक्र. शनि की युति हो तो तांबे का पैसा बहते पानी में बहायें और दाम भाव में जो भी ग्रह बैठा हो उसका उपाय करें।

- सूर्य.बुध.राहु की युति हो तो जातक चंद्रमा का उपाय करें।

- यदि सूर्य.बुध की युति हो तो गायत्री पाठ करें । हरे तोते पाले ।

- चंद्र.मंगल और भानि की युति में मंगल का उपाय करें।

- चंद्र.मंगल.राहु की युति हो तो दूध में मीठा हलुआ बनाकर स्वयं खाये तथा दुसरों को खिलाएं।

- गुरू.शनि.राहु की युति हो तो भानि की वस्तुएं भूमि में दबायें।

- यदि शनि.राहु.शुक्र की युति हो तो जातक रोटी के तीन टुकड़े करके एक गाय को एक कुत्ता और एक कौएं को खिलाएं।

- गुरू.शनि.बुध की युति हो तो बुध की वस्तुएं जैसे हरा मूंग कुएं में गिराये तथा बुध को उच्च करें।

- गुरू.मंगल.बुध की युति हो तो जातक सोना धारण करे।

- शुक्र.शनि.बुध की युति हो,तो काली गाय या काला कुत्ते को रोटी दें।

ग्रहों के लिए प्रतिनिधि

नीचे दी हुई तालिका में प्रत्येक देवी के भैरव , विष्णु अवतार और ग्रहों के लिए प्रतिनिधि स्वरुप बताया गया है 

 

महाविद्या  गृह  भैरव  विष्णु अवतार 
1काली  शनि  महाकाल  श्री कृष्ण 
2तारा  गुरु 
 मतस्य 
3छिन्नमस्ता  राहु क्रोध भैरव  नरसिंह 
4षोडशी  बुध  कामेश्वर  परशुराम 
5भुवनेश्वरी  चन्द्र  त्रयम्बक  वामन 
6भैरवी  लग्न  दक्षिण मूर्ति  बलराम 
7धूमावती  केतु  - वाराह 
8 बगलामुखी मंगल  मृत्युंजय   श्री कूर्म 
9 मातंगी  सूर्य  मातंग / सदाशिव  श्री राम 
10कमला  शुक्र  विष्णु  बुद्ध 

Monday, 29 August 2011

ग्रहों की दिशाएँ

ग्रहों की दिशाएँ :-

* ग्रहों में सूर्य ईस्ट का,


चंद्र नॉर्थ-वेस्ट (वायव्य) का,

मंगल साउथ का,

बुध नॉर्थ का,

गुरु नॉर्थ-ईस्ट का,

शुक्र साउथ ईस्ट का,

शनि वेस्ट का,

राहु-केतु साउथ-वेस्ट का स्वामी है।

हॉरोस्कोप में रूलिंग प्लेनेट की (मनुष्य ग्रह) की दिशा के अनुसार भी भाग्योदय या धनलाभ की दिशा को जाना जा सकता है।

Friday, 12 August 2011

ग्रहों के पक्के घर

ग्रहों के पक्के घर
ग्रह दिन घर
सूर्य रविवार 5
चंद्र सोमवार 4
मंगल मंगलवार1, 8
बुध बुधवार 6
बृहस्पति वीरवर9
शुक्र शुक्रवार 7
शनि शनिवार 10
राहुरविवार शाम
सोमवार की सुबह
12

ग्रहों का जातक के परिवार से सबंध

ग्रहों का जातक के परिवार से सबंध
ग्रहों से जातक के परिवारकी स्थिति समझने में मदद मिलती है | लाल किताब के अनुसार जातक के परिवार से ग्रहों का सबंध निम्न प्रकार से रहता है :-

सूर्य : राज्य, सत्ता |
चंद्र : माता, दादी |
मंगल : भाई, मित्र |
बुध : पुत्री, बहन, भुआ |
बृहस्पति : ब्राह्मण, पिता, दादा |
शुक्र : पत्नी |
शनि : ताऊ, चाचा |
राहू : ससुराल, ननिहाल |
केतु : पुत्र |

Wednesday, 10 August 2011

ग्रहों की शांति

सूर्य - सूर्य ग्रह को अपने अनुकूल बनाने के लिए रूबी या मानिक सोने में बनवाकर दाहिने हाथ में अनामिका अंगुली में धारण करे और सूर्य देव को एक लोटा जल नित्य दे। अपने पिता की सेवा करे और गेहू,ताम्बा,कमल का फूल,लाल चन्दन,लाल वस्त्र,सोना,केशर आदि दान करे। ॐ सूम सूर्याय नमः का नित्य जप करे। 


 चंद्रमा - चंद्रमा को अपने अनुकूल बनाने के लिए मोती चाँदी में बनवाकर सोमवार को रात में दाहिने हाथ में छोटी अंगुली में धारण करे। शंकर जी की और उनके परिवार की पूजा करे साथ में अपनी माँ की भी सेवा करे और उनका आश्रीवाद ले। सफ़ेद चीजो का दान करे - चावल,सफ़ेद वस्त्र,सफ़ेद फूल,चीनी,घी,कपूर,दूध,दही |  ॐ चम चन्द्राय नमः का नित्य जप करे और रात में सफ़ेद चीजो का सेवन न करे। 




 मंगल - मंगल या मांगलिक दोष को दूर करने के लिए मूंगा ८ से १४ रति का सोने या चांदी में अनामिका अंगुली में धारण करे।मंगल यंत्र की पूजा करे | लाल रंग की चीजो का दान करे जैसे - लाल मसूर की दल,लाल कपडा,लाल फूल,लाल फल,ताम्बा आदि | ताम्बे का कड़ा हाथ में भी धारण कर सकते है | हर मंगलवार हनुमान जी का दर्शन करे और मीठी रोटी कुतो को खिलाये | अगर आप क़र्ज़ में डुबे है तो मंगल की साधना आपको ऋण से मुक्ति दिला सकती है | ऋण मोचक मंगल स्तोत्र का पाठ नित्य करे और भैरव जी की आराधना करे | ॐ भोम भोमाय नमः की एक माला का जप नित्य करे |



बुध - बुध के अशुभ लक्षण को दूर करने के लिए और शुभ फल को प्राप्त करने के लिए हर बुधवार को गणेश जी का दर्शन करे और गणेश चालीसा का पाठ करे | हरी दुब गणेश जी को चढ़ाये | बूंदी के लड्डू चढाने से गणेश जी और बुध दोनों प्रसन्न होते है | इसके अलावा छोटी कन्याओ को पेंसिल,किताब,कपडे,चोकलेट बुधवार को देने से भी बुध ग्रह खुश होता है |हरे मुंग,हरी सब्जी,हरे फल,हरे वस्त्र,हरे पत्ते आदि बुधवार को दान करे | स्कुलो में किताब,पेन,पेंसिल आदि दान करे,कुंवारी कन्याओ की शादी करवाए |
पन्ना 5 से 6 रति का सोने में बनवाकर दाहिने हाथ में सबसे छोटी वाली अंगुली में बुधवार सुबह धारण करे |
ॐ बुम बुधाय नमः की एक माला का जप नित्य करे |
 


गुरु - धन की प्राप्ति सिर्फ गुरु या वृहस्पति ही करवा सकते है बिना गुरु वृहस्पति के धन की प्राप्ति नहीं हो सकती है |गुरु को प्रसन्न करने के लिए हर गुरुवार को पीले वस्त्र धारण करे या पिली रुमाल पास में रखे |शरीर पर सोना धारण करे | हर गुरुवार पीली चने की दाल और गुड गाय को खिलाये | केले के पेड़ का पूजन करे परन्तु इस दिन केला न खाए और न ही प्याज और लहसुन ही खाए | 
पुखराज 7 रति का सोने में बनवाकर दाहिने हाथ में तर्जनी अंगुली में धारण करे | 
कृष्ण भगवान और अपने गुरु का ध्यान करने से वृहस्पति प्रसन्न होते है |
ॐ वृहम वृह्स्पते नमः और ॐ नमो भगवते वासुदेवाय की एक माला का जप नित्य करे |
घर में तुलसी का पेड़ लगाये और सुबह - शाम घी का दिवा जलावे पेड़ के पास | हर गुरुवार 11 दिवा घी का शाम को तुलसी जी के पेड़ के पास जलावे |



शुक्र - ये देत्यो के गुरु है लेकिन सांसारिक उपभोग की जितनी भी चीजे है वो शुक्र के सिवाय कोई नहीं दे सकता | शरीर की सुन्दरता,वाणी में मिठास,कलाकारी ये सब शुक्र ही दे सकता है |शुक्र को प्रसन्न करने के लिए सफ़ेद चीजो का दान हर शुक्रवार को करे|इसके अलावा हर शुक्रवार को खीर बनाकर लक्ष्मी माँ को चढ़ाये इससे आपके घर में अन्न - धन की कमी नहीं होगी |
हीरा 100 सेंट का या A.D 3 रति  का सोने में बनवाकर दाहिने हाथ में सबसे छोटी वाली अंगुली में शुक्रवार को शाम को धारण करे | 
किसी सुन्दर कन्या को गहने,वस्त्र,परफ्यूम आदि देने से भी शुक्र प्रसन्न होता है |
ॐ शुम शुक्राय नमः इस मन्त्र की एक माला का जप नित्य करे |


शनिदेव जी - शनिदेव जी की नाराजगी इन्सान को आसमान से उतार कर जमीं पर ले आती है | शनिदेव जी कर्म के दाता है जो इन्सान जितनाव्यक्ति को  परिश्रम और कर्म करेगा शनिदेव जी उतना ही लाभ देंगे | 
इनको प्रसन्न करने के लिए काले वस्त्र धारण न करे | कला बेल्ट,कला पर्स,काले जूते - चप्पल न पहने | हर शनिवार को काली चीजो का दान करे | अपने पहने हुए कपडे और जूते - चप्पल शनिवार को दान करे | 

हर शनिवार को सरसों का तेल या तिल का तेल मंदिर में चढ़ाये |

नौकरों,लूले,लंगड़े इन सब की दुआ लेने की कोशिश करे बददुआ न ले |

हनुमान चालीसा और बजरंग बाण का पाठ नित्य करे | रात में घर में अँधेरा न रखे और न ही अँधेरे में सोये | 

शंकर जी को जल और कच्चा दूध चढ़ावे | हर मंगलवार हनुमान जी का दर्शन करे | हर शनिवार शनिदेव जी का दर्शन करे |

ॐ शम शनिश्चराय नमः इस मन्त्र की एक माला का नित्य जप करे |


 

ग्रहों की प्रसन्नता औषधि स्नान से


औषधियों, तीर्थोदक जल से स्नान करने से ग्रहों की पीड़ा नष्ट होती है।
ग्रह प्रतिकूल होने पर प्राय: लोग ग्रह संबंधी रत्न की अंगूठी पहनते हैं या ग्रह संबंधी दान, जप, तप करते हैं। ये उपाय साधारण व्यक्ति के लिए हो सकता है कर पाना संभव नहीं हो। ऎसे लोग यदि चाहें तो ग्रह संबंधी औषधि से स्नान करके लाभांवित हो सकते हैं। हमारे आदि ऋषियों ने ग्रहों की अनुकूलता के लिए औषधि स्नान करना भी एक उपाय बताया है। ज्योतिष में प्रत्येक ग्रह के लिए पेड़-पौधे और जड़ीबूटियों का उल्लेख किया है।

सूर्य: अर्क पर सूर्य का अधिकार है। इसे पहनने तथा आकड़े की लकड़ी से हवन करने से सूर्य प्रसन्न होते हैं। केशर, कमलगट्टा, जटामांसी, इलायची, मैनसिल, खस, देवदारू और पाटल का चूर्ण जल में डालकर स्नान करने से सूर्यजनित दोष समाप्त होते हैं।

चंद्रमा: पलाश चंद्रमा के आधिपत्य में है। पलाश की जड़ धारण करने या उसकी समिधा से हवन करने से चंद्रमा प्रसन्न होते हैं। पंचगव्य, बेल गिरी, गजमद, शंख, सिप्पी, श्वेत चंदन, स्फटिक से स्नान करना चंद्रमा जनित अनिष्ट प्रभावों को कम करता है।


मंगल: खदिर यानी खेर के वृक्ष पर मंगल का प्रभाव है। बिल्वछाल, रक्त चंदन, रक्त पुष्प, सिगरफ, माल कांगनी, मौलसिरी आदि औषधि डालकर नित्य स्नान करने से मंगल ग्रह प्रसन्न होता है।

बुध: अपामार्ग बुध की औषधि है। स्नान के लिए अक्षत, फल, गोरोचन, मधु व सुवर्ण मिश्रित जल से स्नान बुध ग्रह की प्रसन्नता के लिए है।

बृहस्पति: पीपल व पीले कनेर पर बृहस्पति का अधिकार है, मालती पुष्प, पीली सरसों, हल्दी, पीतफल आदि से युक्त जल से स्नान करना बृहस्पति को प्रसन्न करने वाला है।

शुक्र: गूलर के पेड़ की जड़ धारण करना व उसकी समिधा से हवन करना शुक्र की प्रसन्नता के लिए है। इलायची, मनशिला, केशर, श्वेत पुष्प डालकर स्नान करने से शुक्र की अनिष्टता शांत होती है।


शनि: खेजड़े के पेड़ पर शनि का आधिपत्य है। स्नान के लिए काले तिल, सुरमा, लोबान, धमनी, सौंफ, चावल की खील आदि का प्रयोग करना शनि देव को प्रसन्न करता है। जिन लोगों के साढ़ेसाती व ढय्या चल रही है, उन्हें शनिवार को तेल की मालिश करके उक्त औषधि युक्त जल से स्नान शुभ फल देता है।

राहू: हरी दोब पर राहु ग्रह का आधिपत्य है। गजदंत, कस्तूरी, कृष्ण पुष्प, दूब मिश्रित जल से स्नान करने से राहू की शांति की जा सकती है।

केतु: कुशा धारण करना केतु के लिए है। रतनजोत, नागरमोथा, गजमद आदि मिश्रित जल से स्नान करने से केतु प्रसन्न होता है।

-पं. चंद्रमोहन दायमा

Thursday, 4 August 2011

ग्रहों के उपाय

ग्रहों के उपाय

संयुक्त ग्रहों के उपाय :-



- यदि किसी जातक की जन्मकुंडली में शुक्र और सूर्य की युति किसी भी भाव में हो तो जातक को दुर्गा पूजन लाभदायक होगा ।
- सूर्य.शनि की युति कुण्डली के किसी भी भाव में होने पर जातक बादाम,नारियल बहते पानी में बहाए।
- सूर्य.राहू की युति होने पर जातक जौ को दूध या गौ मूत्र से धोकर बहते पानी में बहायें।
- यदि जातक की कुण्डली में बुध अशुभ या नीच राशि का हो तब जातक मंगल एवं राहू के उपाय करके बुध के दुश्प्रभाव को दूर करें।
- सूर्य.केतु की युति होने पर सूर्य ग्रहण के समय तिल,नींबू,पका केला बहते पानी जैसे नदी में बहायें।
- गौ मूत्र घर में छिड़कने से केतु.शुक्र एवं बुध का अशुभ प्रभाव कम हो जाता है ।
- जातक की जन्म कुण्डली में चंद्र.शुक्र की युति हो तो चांदी की ठोस गोली हमेसा अपने जेब में रखें ।
- चंद्र.शनि की युति होने पर भानि एवं केतु के उपाय लाभकारी होते है। चंद्रग्रहण के समय भानि की वस्तुएं बहते पानी में बहाने से लाभ होता है।
- भानि.चंद्र के अशुभ प्रभाव को दूर करने के लिए सूर्य का उपाय करें ।
- कुण्डली में मंगल.राहू की युति होने पर मिट्टी के बर्तन में जौ भरकर बहते पानी जैसे नदी में बहाये तथा मंगल का उपाय करें ।
- बुध.शनि की युति में जातक को भाराब मांस का सेवन नहीं करना चाहिए।
- बुध.राहू की युति हो तो जातक को कच्ची मिट्टी की सौ गोलियां बनाकर एक गोली प्रतिदिन धर्म स्थल में पहुंचानी चाहिएं।
- गुरू.बुध की युति में खांड से भरा मिट्टी का बर्तन भूमि में दबाना चाहिए।
- चंद्र.राहु की युति हो, तब चंद्रग्रहण पर जौं, कोयला, सरसों आदि राहु की वस्तुएं बहते पानी में बहायें और मंगल,गुरू का उपाय करें।
- चंद्र.केतु की युति होने पर जातक बुध एवं केतु की वस्तुओं का दान करें । तीन केले प्रतिदिन ४८ दिन तक मंदिर में दान करें।
- मंगल.बुध की अशुभ युति में जातक मंगल का उपाय करें ।
- मंगल. शनि की युति होने पर मंगल या भानि का उपाय करें साथ ही चंद्र का उपाय करें।
- शुक्र.राहु की युति होने पर दूध एवं हरे नारियल का दान करें ।
- यदि कुण्डली में सूर्य.चंद्र.राहु की युति हो तो जातक दुर्गा उपासना करें एवं बुध का उपाय करें ।
-इसी तरह सूर्य.चंद्र.केतु की युति होने पर भी दुर्गा उपासना करें एवं बुध का उपाय करें ।
- कुण्डली में सूर्य.बुध.शुक्र की युति होने पर जातक कान में स्वर्ण धारण करें तथा काला,सफेद कुत्ता पाले । शुध्द चांदी का छल्ला भी धारण कर सकते है।
- गुरू. शनि की युति में, शराब,मांस,मदिरा का उपयोग न करे। शिव उपासना करें। चंद्र का उपाय करें ।
- गुरू.राहु की युति में अशुभता से बचने के लिए सोना धारण करें। चितकबरें कुत्ते की सेवा करें। जौं को दूध से धोकर लगातार ४३ दिन तक बहते पानी में बहायें।
-शुक्र. शनि की युति हो तो तांबे का पैसा बहते पानी में बहायें और दाम भाव में जो भी ग्रह बैठा हो उसका उपाय करें।
- सूर्य.बुध.राहु की युति हो तो जातक चंद्रमा का उपाय करें।
- यदि सूर्य.बुध की युति हो तो गायत्री पाठ करें । हरे तोते पाले ।
- चंद्र.मंगल और भानि की युति में मंगल का उपाय करें।
- चंद्र.मंगल.राहु की युति हो तो दूध में मीठा हलुआ बनाकर स्वयं खाये तथा दुसरों को खिलाएं।
- गुरू.शनि.राहु की युति हो तो भानि की वस्तुएं भूमि में दबायें।
- यदि शनि.राहु.शुक्र की युति हो तो जातक रोटी के तीन टुकड़े करके एक गाय को एक कुत्ता और एक कौएं को खिलाएं।
- गुरू.शनि.बुध की युति हो तो बुध की वस्तुएं जैसे हरा मूंग कुएं में गिराये तथा बुध को उच्च करें।
- गुरू.मंगल.बुध की युति हो तो जातक सोना धारण करे।
- शुक्र.शनि.बुध की युति हो,तो काली गाय या काला कुत्ते को रोटी दें।

Wednesday, 3 August 2011

ग्रहों की शांति के लिए आसान व अचूक उपाय


ज्योतिष के अनुसार हर व्यक्ति के जीवन को सौरमंडल के विभिन्न ग्रह प्रभावित करते हैं। इन्हीं ग्रहों के कारण व्यक्ति के जीवन में अच्छा व बुरा समय आता है। यह बात तंत्र शास्त्र भी मानता है। इन ग्रहों की शांति के लिए तंत्र शास्त्र में कुछ अचूक उपाय बताए गए हैं जो इस प्रकार हैं-

उपाय
- यदि कुंडली में सूर्य बुरा प्रभाव डाल रहा है तो पलंग के नीचे तांबे के पात्र में जल या तकिए के नीचे लाल चंदन रखें।

- चंद्र के कारण जीवन में परेशानी आ रही हो तो पलंग के नीचे चांदी के बर्तन में जल रखें या चंादी के आभूषण धारण करें।

- यदि मंगल से संतप्त हों तो पलंग के नीचे कांसे के बर्तन में जल रखें या सोने-चांदी मिश्रित आभूषण तकिए के नीचे रखें।


- बुध की वजह से जीवन में परेशानी हो तो तकिए के नीचे सोने के आभूषण रखें।


- यदि गुरु के कारण उन्नति में व्यवधान आ रहा हो तो पलंग के नीचे पीतल के बर्तन में जल रखें या हल्दी की गांठ पीले कपड़े में बांधकर तकिए के नीचे रखें।

- शुक्र के कारण समस्याएं आ रही हों तो चांदी की मछली बनाकर तकिए के नीचे रखें या पलंग के नीचे चांदी के पात्र में जल रखें।


- शनि से संतप्त हों तो लोहे के पात्र में पलंग के नीचे जल रखें या तकिए के नीचे लोहा या नीलम रखें।

Monday, 1 August 2011

ग्रहों की शांति के लिए आसान व अचूक उपाय


ज्योतिष के अनुसार हर व्यक्ति के जीवन को सौरमंडल के विभिन्न ग्रह प्रभावित करते हैं। इन्हीं ग्रहों के कारण व्यक्ति के जीवन में अच्छा व बुरा समय आता है। यह बात तंत्र शास्त्र भी मानता है। इन ग्रहों की शांति के लिए तंत्र शास्त्र में कुछ अचूक उपाय बताए गए हैं जो इस प्रकार हैं-




उपाय



- यदि कुंडली में सूर्य बुरा प्रभाव डाल रहा है तो पलंग के नीचे तांबे के पात्र में जल या तकिए के नीचे लाल चंदन रखें।



- चंद्र के कारण जीवन में परेशानी आ रही हो तो पलंग के नीचे चांदी के बर्तन में जल रखें या चंादी के आभूषण धारण करें।



- यदि मंगल से संतप्त हों तो पलंग के नीचे कांसे के बर्तन में जल रखें या सोने-चांदी मिश्रित आभूषण तकिए के नीचे रखें।




- बुध की वजह से जीवन में परेशानी हो तो तकिए के नीचे सोने के आभूषण रखें।



- यदि गुरु के कारण उन्नति में व्यवधान आ रहा हो तो पलंग के नीचे पीतल के बर्तन में जल रखें या हल्दी की गांठ पीले कपड़े में बांधकर तकिए के नीचे रखें।



- शुक्र के कारण समस्याएं आ रही हों तो चांदी की मछली बनाकर तकिए के नीचे रखें या पलंग के नीचे चांदी के पात्र में जल रखें।



- शनि से संतप्त हों तो लोहे के पात्र में पलंग के नीचे जल रखें या तकिए के नीचे लोहा या नीलम रखें।

ग्रहों के मंत्र



नवग्रहों के मूल मंत्र

सूर्य :      ॐ सूर्याय नम:

चन्द्र :     ॐ चन्द्राय नम:

गुरू :       ॐ गुरवे नम:

शुक्र :      ॐ शुक्राय नम:

मंगल :    ॐ भौमाय नम:

बुध :      ॐ बुधाय नम:

शनि :     ॐ शनये नम:  अथवा  ॐ शनिचराय नम:

राहु :      ॐ राहवे नम:

केतु :     ॐ केतवे नम:


नवग्रहों के बीज मंत्र

सूर्य :       ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं स: सूर्याय नम:

चन्द्र :      ॐ श्रां श्रीं श्रौं स: चन्द्राय नम:

गुरू :       ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरवे नम:

शुक्र :       ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:

मंगल :    ॐ क्रां क्रीं क्रौं स: भौमाय नम:

बुध :       ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:

शनि :     ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनये नम:

राहु :       ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं स: राहवे नम:

केतु :      ॐ स्त्रां स्त्रीं स्त्रौं स: केतवे नम:


नवग्रहों के वेद मंत्र 

सूर्य :     ॐ आकृष्णेन रजसा वर्त्तमानो निवेशयन्नमृतं मतर्य च

            हिरण्येन सविता रथेना देवो याति भुवनानि पश्यन॥
           इदं सूर्याय न मम॥
 
चन्द्र :    ॐ इमं देवाSसपत् न ग्वं सुवध्वम् महते क्षत्राय महते ज्येष्ठयाय
            महते जानराज्यायेन्द्रस्येन्द्रियाय इमममुष्य पुत्रमुष्यै पुत्रमस्यै विश एष    
            वोSमी राजा सोमोSस्माकं ब्राह्मणानां ग्वं राजा॥ इदं चन्द्रमसे न मम॥

गुरू :     ॐ बृहस्पते अति यदर्यो अहार्द् द्युमद्विभाति क्रतुमज्जनेषु।
            यददीदयच्छवस ॠतप्रजात तदस्मासु द्रविणं धेहि चित्रम॥
            इदं बृहस्पतये, इदं न मम॥

शुक्र :     ॐ अन्नात् परिस्रुतो रसं ब्रह्मणा व्यपिबत् क्षत्रं पय:।
             सोमं प्रजापति: ॠतेन सत्यमिन्द्रियं पिवानं ग्वं
            शुक्रमन्धसSइन्द्रस्येन्द्रियमिदं पयोSमृतं मधु॥ इदं शुक्राय, न मम।

मंगल :   ॐ अग्निमूर्द्धा दिव: ककुपति: पृथिव्या अयम्।
            अपा ग्वं रेता ग्वं सि जिन्वति। इदं भौमाय, इदं न मम॥

बुध :     ॐ उदबुध्यस्वाग्ने प्रति जागृहित्वमिष्टापूर्ते स ग्वं सृजेथामयं च।
            अस्मिन्त्सधस्थे अध्युत्तरस्मिन् विश्वेदेवा यजमानश्च सीदत॥
            इदं बुधाय, इदं न मम॥

शनि :    ॐ शन्नो देविरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये।
             शंय्योरभिस्त्रवन्तु न:। इदं शनैश्चराय, इदं न मम॥

राहु :     ॐ कयानश्चित्र आ भुवद्वती सदा वृध: सखा।
            कया शचिंष्ठया वृता॥ इदं राहवे, इदं न मम॥

केतु :    ॐ केतुं कृण्वन्न केतवे पेशो मर्या अपेशसे।
            समुषदभिरजा यथा:। इदं केतवे, इदं न मम॥ 

             
                               मंत्र जाप के द्वारा सर्वोत्तम फल प्राप्ति के लिए मंत्रों का जाप नियमित रूप से तथा अनुशासनपूर्वक करना चाहिए। वेद मंत्रों का जाप केवल उन्हीं लोगों को करना चाहिए जो पूर्ण शुद्धता एवम स्वच्छता का पालन कर सकते हैं। किसी भी मंत्र का जाप प्रतिदिन कम से कम 108 बार जरूर करना चाहिए। सबसे पहले आप को यह जान लेना चाहिए कि आपकी कुंडली के अनुसार आपको कौन से ग्रह के मंत्र का जाप करने से सबसे अधिक लाभ हो सकता है तथा उसी ग्रह के मंत्र से आपको जाप शुरू करना चाहिए। 

ग्रहों के दान

ग्रहों के दान 
 
ग्रहों के दुष्प्रभाव को दूर करने में दान-धर्म
ग्रहों के दुष्प्रभाव को दूर करने के लिए दान-धर्म की भूमिका अहम् होती है। जब गंभीरतापूर्वक इसपर अध्ययन किया गया, तो निम्न बातें दृिष्टगोचर हुई———–

1. चंद्रमा कमजोर हो, तो जातक अनाथाश्रम को दान देकर तथा अनाथो को हर प्रकार का सुख पहुंचाकर चंद्रमा के बुरे प्रभाव को कम कर सकते हैं। 12 वषZ से कम उम्र की कन्याओं की पूजा करने के पीछे भी यही कारण हो सकता है। सफेद या संतरेे के रंग की वस्तु का भूलकर भी दान न करें।

2. बुध ग्रह कमजोर हो, तो जातक विद्यार्थियों को अनुदान या िशक्षण-संस्थाओं को दान देकर तथा उन्हें हर संभव सहायता कर बुध के बुरे प्रभाव को कम कर सकते हैं। हरे रंग की वस्तु का भूलकर भी दान न करें।

3. मंगल कमजोर हो, तो उन्हें रोजगार के लिए संघषZ कर रहे युवक-युवति को मदद करना चाहिए। इससे मंगल का बुरा प्रभाव काफी हद तक दूर होगा। लाल रंग की वस्तु का भूलकर भी दान न करें।

4. शुक्र कमजोर हो, तो उन्हें विवाह-योग्य वर और कन्याओं के विवाह में सहायता करनी चाहिए। ध्यान रखना चाहिए कि उस विवाह से दोनो ही पक्षों को फायदा हो रहा हो। इससे शुक्र को बुरा प्रभाव काफी कम होगा। हल्के नीले रंग की वस्तु का भूलकर भी दान न करें।

5. सूर्य कमजोर हो, तो उन्हें अपनी गृहस्थी को खींच पाने में कमजोर पड़ रहे लोगों की मदद करनी चाहिए। इस उम्र में हर व्यक्ति की जवाबदेही बढ़ जाती है और बहुतों के लिए यह समय भारी हो जाता है। वैसे लोगों की मदद कर आप अपने सूर्य के बुरे प्रभाव को कम कर सकते हैं। ईंट के रंग की वस्तु का भूलकर भी दान न करें।

6. बृहस्पति कमजोर हो, तो आपकोें अपने माता-पिता की विशेष सेवा करनी चाहिए। अपने सभी गुरुओं, जिससे छोटा या बड़ा—किसी भी तरह का ज्ञान आपने प्राप्त किया है, उसके लिए उनका शक्रगुजार होना चाहिए । साथ ही यदि वे आपको कोई आज्ञा दें, तो उनका पालन करना चाहिए। इससे आपके उपर पड़नेवाला बृहस्पति का बुरा प्रभाव कम होगा। पीले रंग की वस्तु का भूलकर भी दान न करें।

7. शनि कमजोर हो, तो आपको अतिवृद्धों के प्रति अधिक जवाबदेह होना होगा। वृद्धाश्रमों को अनुदान देकर, उनकी देखभाल में योगदान कर तथा उनकी समस्याओं को समझकर आप खुद पर पड़नेवाले शनि के बुरे प्रभाव को कम कर सकते हैं। काले रंग की वस्तु का भूलकर भी दान न करें

Saturday, 16 July 2011

ग्रहों के लिए प्रतिनिधि के लिए प्रतिनिधि

नीचे दी हुई तालिका में प्रत्येक देवी के भैरव , विष्णु अवतार और ग्रहों के लिए प्रतिनिधि स्वरुप बताया गया है 

 

महाविद्या  गृह  भैरव  विष्णु अवतार 
1काली  शनि  महाकाल  श्री कृष्ण 
2तारा  गुरु 
 मतस्य 
3छिन्नमस्ता  राहु क्रोध भैरव  नरसिंह 
4षोडशी  बुध  कामेश्वर  परशुराम 
5भुवनेश्वरी  चन्द्र  त्रयम्बक  वामन 
6भैरवी  लग्न  दक्षिण मूर्ति  बलराम 
7धूमावती  केतु  - वाराह 
8 बगलामुखी मंगल  मृत्युंजय   श्री कूर्म 
9 मातंगी  सूर्य  मातंग / सदाशिव  श्री राम 
10कमला  शुक्र  विष्णु  बुद्ध