Search This Blog

Showing posts with label गणेशशनि. Show all posts
Showing posts with label गणेशशनि. Show all posts

Saturday, 3 September 2011

शनि पीड़ा व संकट होंगे दूर


बुद्धि से ही जीवन में हर सुख संभव है। साथ ही बुद्धि और विवेक के संतुलन से हर संकट दूर किया जा सकता है। हिन्दू धर्म मान्यताओं में भगवान शनि का दण्ड भी कष्ट और पीड़ा देने वाला होता है। इसलिए हिन्दू माह भाद्रपद के शनिवार विशेष रूप से शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से लेकर अनंत चतुर्दशी तक की शुभ घड़ी में बुद्धिदाता श्री गणेश की उपासना संकटनाशक मानी गई है।

शनिवार को गणेश उपासना के संकटनाशक होने के पीछे श्री गणेश के श्रीकृष्ण अवतार की धार्मिक मान्यता भी है। चूंकि शनि भी कृष्ण भक्त माने गए हैं। इसलिए शनिवार को गणेश की उपासना शनि देव को भी प्रसन्न कर शनि दशा या जीवन में आने वाले संकटों से रक्षा करने वाली मानी गई है।

इस दिन श्री गणेश की उपासना के लिए विशेष मंत्र जप का महत्व बताया गया है। यह मंत्र है..

- भगवान गणेश की पूजा सिंदूर, फूल, दूर्वा और जनेऊ  चढ़ाकर धूप व दीप लगाकर एक कुश या पीले रंग के आसान पर बैठकर नीचे लिखा मंत्र कम से कम मूंगे या रुद्राक्ष की माला के साथ संकटमोचन की कामना के साथ कर श्री गणेश की आरती करें -

ऊँ गणायै पूर्णत्व सिद्धिं देहि देहि नम:।