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Friday, 2 September 2011

गणेश शाबर मन्त्र


गणेश शाबर मन्त्र (पाठान्तर सहित)



“GANAPAT VEER BHOOKHE MASAAN, JO PHAL MANGOO SO PHAL DET, GANAPAT DEKHE, GAJAPAT DAREY, GANAPAT KE CHHATR SE BADSHAH DAREY, MUKH DEKHE RAJA PRAJA DAREY, HAATA CHADHEY SINDOOR AULIYA GAURI KAA PUTRA, GOOGAL KHEY KAROONGA DHERI, RIDDHI SIDDHI GANAPAT LAYE GHANERI, GIRNAR PATI AUM NAMO SWAHA!!”

“गणपत वीर भूखे मसान, जो फल माँगू सो फल देत, गणपत देखे, गजपत डरे, गणपत के छत्र से बादशाह डरे, मुख देखे राजा-प्रजा डरे, हाथा चढ़े सिन्दूर औलिया गौरी का पुत्र, गूगल खेये करुँगा ढेरी, रिद्धि-सिद्धि गणपत लाये घनेरी, गिरनार पति ॐ नमो स्वाहा”

Thursday, 1 September 2011

आज भगवान गणेश को चढ़ाएं ये पत्ते, हर चिंता होगी दूर

भगवान गणेश अपने भक्तों की हर चिंता दूर कर देते हैं। तंत्र शास्त्र के अतंर्गत  विभिन्न पेड़-पौधो व पत्तों से भी भगवान की पूजा करने का विधान है। उसी के अनुसार यदि भगवा गणेश को विभिन्न प्रकार के पत्ते विधि-विधान से अर्पित किए जाएं तो हर चिंता दूर हो जाती है। उसी के अनुसार सबसे पहले भगवान गणेश को शमीपत्र चढ़ाकर 'सुमुखाय नम:' कहें। इसके बाद क्रम से यह पत्ते चढ़ाएं और नाम मंत्र बोलें ।

1. बिल्वपत्र 'उमापुत्राय नम:'

2. दूर्वादल 'गजमुखाय नम:'

3. बेर  'लम्बोदराय नम:'

4. धतूरे का पत्ता 'हरसूनवे नम:'

5. तुलसीदल 'शूर्पकर्णाय नम:'

6. सेम का पत्ता 'वक्रतुण्डाय नम:'

7. तेजपत्ता 'चतुर्होत्रे नम:'

8. कनेर का पत्ता 'विकटाय नम:'

9. कदली या केला 'हेमतुंडाय नम:'

10. आक का पत्ता 'विनायकाय नम:'

11. अर्जुन का पत्ता 'कपिलाय नम:'

12. मरुआ का पत्ता 'भालचन्द्राय नम:'

13. अगस्त्य का पत्ता 'सर्वेश्वराय नम:'

14. वनभंटा 'एकदन्ताय नम:'

15. भंगरैया का पत्ता 'गणाधीशाय नम:'

16. अपामार्ग का पत्ता 'गुहाग्रजाय नम:'

17. देवदारु का पत्ता 'वटवे नम:'

18. गान्धारी पत्र 'सुराग्रजाय नम:'

19. सिंदूर या सिंदूर वृक्ष का पत्ता 'हेरम्बाय नम:'

20. केतकी पत्र चढ़ाकर 'सिद्धिविनायकाय नम:'

अंत में दो दूर्वादल गन्ध, फूल और अक्षत के साथ गणेशजी पर चढ़ाना चाहिए।  

Wednesday, 31 August 2011

आंकड़े के गणेश


हिन्दू धर्म परंपराओं में कुदरत में बसे ईश्वर को स्मरण की परंपराओं में आंकड़े के श्री गणेश की पूजा वैभव, धन, ऐश्वर्य व सफलता लाने वाली मानी गई है। धार्मिक आस्था है कि आंकड़े के गणेश नियमित पूजा गुण, व्यवहार, शरीर और धन से जुड़ी सारी दरिद्रता, व रोग का अंत करती है।

कब और कैसे आंक ड़े के गणेश की पूजा सुख, सफलता के साथ धन का भण्डार भर देती है, यहां जानते हैं..

सफेद आंकड़े के गणेश की साधना के लिए सबसे पुष्य नक्षत्र का योग सबसे अच्छा माना जाता है, किंतु रवि-पुष्य योग श्रेष्ठ काल माना जाता है। इसके अलावा गुरु-पुष्य और गणेश जन्मोत्सव के 10 दिन भी शुभ फलदायी समय होता है।

- इसके लिए सफेद आंकड़े की जड़ मिलने पर उसे साफ जल से स्नान कराएं। उसे लाल कपड़े पर रखकर लाल चन्दन, अक्षत, लाल फूल, सिन्दूर से पूजा करें। धूप-दीप जलाएं, भोग लगाएं साथ ही एक सिक्का भी चढाएं।

- इसके बाद कुछ विशेष गणेश मंत्रों की तय संख्या का जप करने के लिए संकल्प  लें। इन मंत्रों की 10 माला का जप लाल माला, रुद्राक्ष की माला या मूंगे की माला से करें। जप के लिए सरल और प्रचलित मंत्र हैं -

ऊँ भालचन्द्राय नम:

ऊँ एकदन्ताय नम:

ऊँ गं गणपतये नम:

ऊँ श्री गणेशाय नम:

ऊँ लम्बोदराय नम:



आंकड़े की जड़ का रूप में साक्षात गणेश की पूजा धन के साथ ही ज्ञान, संतान, संपत्ति देकर संकटमोचक भी है। 

Saturday, 6 August 2011

अच्छी शुरूआत

अगर आप दिन और काम की अच्छी शुरूआत चाहते हैं तो भगवान श्री गणेश के स्मरण का यह छोटा-सा तरीका अपनाए- सुबह स्नान के बाद देवालय या भगवान श्री गणेश की प्रतिमा या तस्वीर के सामने यह मंत्र बोल कर धूप या अगरबत्ती लगाएं - 

वनस्पतिरसोद्भूतों गन्धाढ्यो गन्ध उत्तम:। आघ्रेय सर्वदेवानां धूपो यं प्रतिगृह्यताम।।

श्री गणेश को धूप या अगरबत्ती दिखाकर इस मंत्र से श्री गणेश का ध्यान कर लें-

अभीप्सितार्थसिद्धयर्थं पूजितो य: सुरासुरै:। सर्वविघ्रहरस्तस्मै गणाधिपतये नमो नम:।।


इसके बाद भगवान श्री गणेश को प्रणाम कर दिन और काम बिन बाधा पूरा होने की कामना कर कार्य के लिए निकलें। यह उपाय आप कार्यस्थल पर पवित्रता का ध्यान रखते हुए अपना सकते हैं।

Thursday, 4 August 2011

नीम की लकड़ी गणेश


         



हिंदू संस्कृति में जब भी कोई शुभ कार्य प्रारंभ किया जाता है सबसे पहले भगवान गणेश का पूजन अवश्य होता है। इसीलिए भगवान गणेश को प्रथम पूज्य कहा गया है। ये सभी बाधाओं का निवारण करने वाले तथा अपने भक्तों को सभी सुख प्रदान करने वाले हैं। भगवान गणेश के कई रूप विशेष फलदाई माने गए हैं। नीम की लकड़ी से निर्मित भगवान गणेश की मूर्ति का पूजन करने बिगड़े काम भी बन जाते हैं। 

- भगवान गणेश की नीम की लकड़ी से बनी मूर्ति को यदि घर में स्थापित कर लिया जाए तो सोने पर सुहागा जैसी बात है। नीम जहां आपके घर के वातावरण की शुद्ध एवं सात्विक बनाता है।

- रोज इस प्रतिमा की धूप- दीप व पूजा करने से भगवान गणपति प्रसन्न होकर अपने भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करते हैं। इस प्रतिमा के स्थापित होने पर आपके घर में कोई संकट, कोई परेशानी नहीं आ सकती।

- नीम की लकड़ी से निर्मित प्रतिमा घर में स्थापित कर रोजाना धूप- दीप व पूजन करने से कितना ही बड़ा शत्रु हो वह भी शत्रुता की भावना को छोड़कर पीछे हट जाएगा।

- नीम की लकड़ी को घर में स्थापित करने से घर में धनधान्य में वृद्धि होती है। गृह क्लेश के साथ ही शत्रुओं का नाश होता हैं और विपत्तियों का नाश होता है।

Saturday, 23 July 2011

आपकी राशिः और गणेश जी ....

अपनी राशि पर आई दुविधा को दूर करने के लिए ऐसे करे गणेश पूजा....
क्या आप जानते है की सभी ग्रह और नक्षत्रो और राशिओं के देव गणेश जी है. यानि सभी ग्रह और राशियाँ गणेश जी के ही अंश है. गणेश जी हर राशिः को अलग अलग तरह से प्रभावित करते है. आइये जानते है कि आपकी राशिः में क्या दुविधा है और गणेश जी उसे कैसे ठीक कर सकते है. इस्सके लिए गणेश जी कि कैसे पूजा अर्चना करनी होगी....

मेष:(चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
इस राशि के गणेशस्वरूप को मेषेश्वर कहा जाता है। मेष राशि के लग्न और राशियों के व्यक्तियों को जिन समस्याओं का सामना करना पड़ता है उनमें प्रमुख है, लाभ की कमी, अपने से अधीनस्थों से पीड़ा ,अत्यधिक क्रोध और तनाव।

उपचार-
स्फटिक से बनी गणेश प्रतिमा का पूजन करें। पूजन करते समय जिस सामग्री का उपयोग करना है उसमें गंध, पुष्प, धूप, दीप ओर पंचोपचार प्रमुख है। इसी के साथ इष्ट मंत्र से काले तिल में शहद को मिलाकर नीम की लकड़ी की समिधा पर हवन का आयोजन करें। हवन संपूर्ण होने के वाद हवन सामग्री को किसी शूद्र को दान में दें, इसी के साथ उन्हें भोजन कराएं।
अगर आप गणेश जी का विशेष अनुष्ठान करना चाहते है तो फाल्गुन शुल्क चतुर्थी से फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा तक व्रत रखें और इसी दौरान अनुष्ठान का आयोजन करें। व्रत के दौरान ब्राह्मणों को भोजन कराएं और दान दें। रोज गणेश प्रतिमा (स्फटिक के बनी) का पंचोपचार पूजन करें। इसी के साथ इष्ट मंत्र से कम से कम ३१ बार माला का जाप करें। पीले वस्त्रों का दान करें।

वृषभ:(इ, उ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे)
इस राशि के गणेशस्वरूप को वृषभेश्वर गणेश कहा जाता है। वृष राशि के लग्न और राशि के व्यक्ति को जिन समस्याओं का सामना करना पड़ता है उनमें भाग्य का साथ न देना, पिता एवं भाई बंधुओं से रिश्तों को लेकर तनाव, संतान के साथ तारतम्य न बैठ पाना प्रमुख है।

उपचार-
रुद्राक्ष के मनके पर भगवान गणेश के वासुदेव स्वरूप की प्रतिष्ठा करें और उनके पूजन करते समय गंध, पुष्प, धूप, दीप व पंचोपचार का प्रयोग करें। इसी के साथ अपने इष्ट का मंत्र जाप कर घी में काले तिल मिलाकर नीम की समिधा पर हवन करने से काफी फायदा होगा।
गणेश चतुर्थी को इष्ट मंत्र का जाप करते हुए ३१ बार माला का जाप करें। ब्राह्मणों को भोजन कराएं। शूद्रों को भोजन का दान करें। इसी के साथ नीले वस्त्रों का दान करना भी लाभकारी होता है।


मिथुन:(क, की, कु, घ, ड, छ, के, को, ह) इस राशि के गणेशस्वरूप को मिथुनेश्वर गणेश कहा जाता है। इस राशि और लग्न के व्यक्ति को जिन समस्याओं का सामना करना पड़ता है उनमें वैवाहिक जीवन में तनाव, सार्वजनिक जीवन में कष्ट , विवादों में संलिप्तता, धन का नाश प्रमुख है।

उपचार-
स्वर्ण से बनी गणेश प्रतिमा का पूजन करें। पूजन करते वक्त गंध, पुष्प, धूप, दीप और पंचोपचार का होना जरूरी है। इसी के साथ गणेश चतुर्थी को इष्ट मंत्र का जाप करते हुए ३१ बार माला का जाप करना शुभकारी है।
वैशाख माह में पडऩे वाली चतुर्थी को भगवान गणेश संकर्षण स्वरूप का पूजन विधिवत किया जाए तो समस्याओं से काफी हद तक निदान हो सकता है। ब्राह्मणों को भोजन कराना और शंख का दान करना भी काफी लाभकारी होगा।


कर्क:(ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
इस राशि के गणेशस्वरूप को कर्केश्वर कहा जाता है। इस राशि और लग्न के व्यक्तियों को जिन समस्याओं का सामना करना पड़ता है उनमें, आर्थिक क्षेत्र में कठनाई, दाम्पत्य जीवन में दु:ख, भाइयों से अनबन होना प्रमुख है।

उपचार-
सफेद आंकड़ों से बने गणेश की पूजा करें। पूजा में गंध, पुष्प, धूप, दीप ओर पंचोपचार का होना लाभकारी होगा। प्रत्येक माह की संकष्टी चतुर्थी को व्रत रखकर भी भगवान गणेश को प्रसन्न किया जा सकता है ।
इसी के साथ ज्येष्ठ माह की शुक्ल पक्ष चतुर्थी को षोडशापचार पूजन कर गणेश की आरती करें तो काफी लाभकारी होता है। ब्राह्मणों को भोजन कराना, श्वेत वस्त्र का दान करना, फल और कन्द का दान करना भी लाभकारी होता है।


सिंह:(मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टे)
इस राशि के गणेशस्वरूप को सिंहेश्वर गणेश कहा जाता है। इस राशि और लग्न के व्यक्तियों को जिन समस्याओं का सामना करना पड़ता है उनमें जीवन में तनाव का होना, कुटुम्बियों से झगड़ा, दाम्पत्य जीवन में दु:ख होना प्रमुख है।

उपचार-
प्रवाल से बने गणपति का पूजन करें। पूजन सामग्री में गंध, धूप, पुष्प, दीप और पंचोपचार का होना शुभ माना जाता है। इसी के साथ माघ शुक्ल पक्ष की गणेश चतुर्थी को उपवास रख गणेश के अनिरूद्ध स्वरूप षोडशोपचार की पूजा करनी चाहिए।
सन्यासियों को तंूबी पात्र का दान करना लाभकारी होता है। गुड़ मिले हुए काले तिलों से कनेर एवं देवदारू की समिधा पर हवन करना चाहिए। ब्राह्मणों को भोजन कराना भी शुभ होता है।


कन्या:(टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
इस राशि के गणेशस्वरूप को कन्येश्वर कहा जाता है। इस राशि और लग्न के व्यक्तियों को जिन मूल समस्याओं का सामना करना पड़ता है उनमें धन की उत्पत्ति से संबंधित समस्याएं, निर्णय क्षमता की कमी का होना, दाम्पत्य जीवन में सामन्जस्य की कमी प्रमुख है।

उपचार-
हल्दी व स्वर्ण से गणेश प्रतिमा का निर्माण कर पूजन करना चाहिए। पूजन सामग्री में गंध, पुष्प, धूप , दीप व पंचोपचार का होना अच्छा माना जाता है।
चतुर्थी को बाटी के लड्डु गुड़ में तैयार कर केल की समिधा पर हवन करना अति लाभकारी है। कृष्णपक्षीय व्रत रखना भी शुभकारी है। ब्राह्मणों को भोजन कराए भोजन में लड्डू होना चाहिए, जो लड्डू भोजन में दिया हो उसका स्वंय भी भोग करें। दूध देने वाली गाय का दान लाभकारी है।


तुला:(र, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
इस राशि के गणेश को तुलेश्वर गणेश कहा जाता है। इस राशि और लग्न के व्यक्तियों को जिन समस्याओं का सामना करना पड़ता है उनमें अजीविका के साधनों में कमी, आर्थिक लाभ में कमी, सरकारी मशीनरी से कष्ट प्रमुख है।

उपचार-
रक्त चंदन से बने गणेश का पूजन करना चाहिए। पूजन में गंध, पुष्प, धूप, दीप व पंचोपचार का उपयोग हो। माह की चतुर्थी को उपवास रख गणेश जी कि आराधना करें। इसी के साथ अष्विन शुक्ल चतुर्थी को भगवान कपर्दिश गणेश का षोडशोपचार पूजन करना चाहिए। दान में लाल कम्बल और औषधि दें। अश्विन शुक्ल चतुर्थी को भगवान कपर्दिश गणेश का षोडशोपचर पूजन करें। पुरूषों को अर्जुन की समिधा पर हवन करना चाहिए।


वृश्चिक:(तो, ता, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
इस राशि के गणेशस्वरूप को वृश्चिकेश्वर गणेश कहा जाता है। इस राशि और लग्न के व्यक्तियों को जिन समस्याओं का सामना करना पड़ता है उनमें परिवार में आर्थिक संकटों का होना, बचपन में असुविधा, भाग्यमंदता और सांसारिक कष्ट प्रमुख है।

उपचार-
गजदंत से बनी गणेश प्रतिमा का पूजन करें। पूजन में गंध, पुष्प, धूप, दीप और पंचोपचार का होना शुभकारी है। इसी के साथ कार्तिक शुक्ल की चतुर्थी को भगवान भालचन्द्र गणेश का षोडशोपचार पूजन बहुत ही लाभकारी है। गणेश चतुर्थी का व्रत करें, व्रत के दौरान एक समय बाटी और एक समय लड्डू का प्रसाद लगा कर उसे ग्रहण करें।

स्त्रियों को सुहाग की वस्तुएं दान देना इस राशि के जातकों के लिए शुभ माना गया है। मरूआ अथवा आम की समिधा पर चावल व घी से हवन करें। ब्राह्मणों को भोजन कराए।


धनु:(ये, यो, भा, भी, का, फा, ढा, भे)
इस राशि के गणेशस्वरूप को धनेश्वर गणेश कहा जाता है। इस राशि और लग्न के व्यक्तियों को जिन कष्टों का सामना करना पड़ता है उनमें सार्वजनिक जीवन में बाधा, वैवाहिक जीवन में तनाव, गुप्त शत्रुओं से पीड़ा और माता के जीवन से कष्ट प्रमुख है।

उपचार-
मूंगे से निर्मित गणपति का पूजन करें। पूजन में गंध, पुष्प, धूप, दीप और पंचोपचार का होना शुभकारी है। इसके अलावा भगवान गणेश के सुरागृज स्वरूप का पूजन करना चाहिए। चतुर्थी का उपवास विशेष लाभकारी है।
प्रात:काल उठकर इष्ट मंत्र से आक की समिधा पर हवन करें। गंधारी अथवा केतकी की समिधा पर मूंग के बने मोदक का हवन करना चाहिए। मूंग के पदार्थों का निर्माण कर ब्राह्मण को दान में दें। इसी के साथ अंग-वस्त्र का दान करना लाभकरी होता है।


मकर:(भो, जा, जी, जू, खू, खे, खो, ग, गी)
इस राशि के गणेश को मकरेश्वर कहा जाता है । इस राशि और लग्न के व्यक्तियों को जिन समस्याओं का सामना करना पड़ता है उनमें आर्थिक कष्ट, लाभ की प्राप्ति में रुकावट, भाइयों से पीड़ा प्रमुख है।

उपचार-
चंदन से निर्मित गणेश की पूजा करें। पूजन में गंध, पुष्प, धूप, दीप, व पंचोपचार का होना शुभकारी है। भगवान गणेश के लम्बोदर स्वरूप की पूजा करना भी इस राशि के जातकों के लिए शुभ माना गया है। विशिष्ट अनुष्ठान के दौरान बरे की समिधा पर तिल्ली एवं मोदक से हवन करना चाहिए। महीने की संकष्टी चतुर्थी को उपवास करें और उपवास के दिन रात्रि में चंद्रमा के उदय हो जाने के बाद भोजन को ग्रहण करना चाहिए।
चतुर्थी को अनुष्ठानपूर्वक लम्बोदर गणेश का षोडशोपचार पूजन करें इसी के साथ ब्राह्मणों को भोजन कराकर कांस्य पात्र का दान करना चाहिए।


कुंभ:(गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, द)
इस राशि के गणेशस्वरूप को कुंभेश्वर गणेश कहा जाता है। इस राशि और लग्न के व्यक्तियों को जिन समस्याओं का सामना करना पड़ता है उनमें जीवन में बार-बार संत्रास, परिवार में असंतोष, वैवाहिक जीवन कष्टकारी और भाग्यमंदता प्रमुख है।

उपचार-
श्वेतार्क गणपति का पूजन करें। पूजन के समय गंध, पुष्प,धूप, दीप और पंचोपचार का प्रयोग शुभकारी माना जाता है। इस राशि के व्यक्तियों के लिए चतुर्थी का उपवास करना अच्छा माना जाता है। पौष शुक्ल चतुर्थी को भगवान गणेश के विघ्रेश्वर स्वरूप का पूजन करना चाहिए। विशेष अनुष्ठान के लिए अगस्त की समिधा पर चावल, शकर एवं घृत से हवन करना चाहिए। ब्राह्मणों को भोजन कराकर चांदी के पात्र दान करना चाहिए।


मीन:(दी, दू, थ, झ, त्र, द, दो, चा, ची)
इस राशि के गणेशस्वरूप को मीनेश्वर गणेश कहा जाता है। इस राशि और लग्न के व्यक्तियों को जिन समस्याओं का सामना करना पड़ता है उनमें मनपसंद जीवनसाथी का न मिलना, पत्नी से अनबन, आर्थिक मार, परिवार के किसी व्यक्ति को असाध्य रोगों की पीड़ा प्रमुख है।

उपचार-
प्रवाल के गणपति का पूजन करें। पूजन में गंध ,पुष्प, धूप, दीप और पंचोपचार का उपयोग करना चाहिए। चतुर्थी का व्रत रखना लाभकारी होता है। भगवान गणेश के ढुण्ढीराज स्वरूप का पूजन करना अति लाभकारी होता है। इसके अलावा माघ माह की चतुर्थी को मृत्तिका की मूर्ति पर षोडशोपचार पूजन करें।
विशिष्ट अनुष्ठान में आक की समिधा बनाकर शमी-पत्र से हवन करें साथ ही गुड़ के मोदक का भी प्रयोग किया जा सकता है। ब्राह्मणों को भोजन कराकर तांबे के पात्र और और छाते का दान करना शुभ है।