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Saturday, 23 April 2011

ऋण पितरी

ऋण पितरी
ऋण पितरी से मुराद कुण्डली वाले पर उसके अपने बज़ुर्गों के पाप का खुफिया असर होता है । यानि गुनाह तो कोई करे मगर सज़ा उसकी कोई और भुगते मगर भुगतेगा उस गुनाह करने वाले का असल करीबी ताल्लुकदार ही ।
'' घर 9वें हो ग्रह कोई बैठा, बुध बैठा जड़ साथी जो।
ऋण पितरी उस घर से होगा, असर ग्रह सब निष्फल हो।

साथी ग्रह जब जड़ कोई काटे, दृष्टि मगर वह छुपता हो।

5 ,12, 2, 9, कोई मन्दे, ऋण पितरी बन जाता हो ॥''

जन्म कुण्डली में जिस ग्रह की जड़ (उसकी अपनी राशि) में उसका दुश्मन ग्रह बैठकर उसका फल रद्दी कर रहा हो और साथ ही वह ग्रह खुद भी मन्दा हो रहा हो तो ऋण पितरी होगा । जिसकी आम निशानी यह होगी कि बाबे, बाप, बेटे, भाई वगैरह सब के सब या कई एक की जन्म कुण्डलियों में मन्दा ग्रह एक ही या ऐसे किसी दूसरे घर में जहां कि वह ग्रह पूरा मन्दा गिना जा रहा हो, ज़ाहिर होता चला आ रहा होगा। मसलन् राहु नम्बर 11 या सनीचर 4, 6 या बुध 2 , 3, 8, 11, 12 उस खानदान में कई एक ही जन्म कुण्डलियों में ज़ाहिर होता चला आ रहा होगा।


दर असल यह हालत खाना नम्बर 9 के ग्रहों से मुराद होती है । यानि जब उस घर के मालिक ग्रह यानि बृहस्पति के किसी दूसरे घर में कोई और ग्रह एक या एक से ज्यादा बैठे हुये बाहम दुश्मनी पर हों या वह बाहम या हर एक बृहस्पति की ताकत को खराब करते या बृहस्पति के असर में ज़हर मिलाते हों तो पितरी ऋण होगा। राहु को बृहस्पति चुप कराने वाला गिना है । वह अगर बृहस्पति का मुंह बन्द करके खुद मन्दी हालत का असर बृहस्पति के ताल्लुक से यानि या तो बृहस्पति के घरों में या बृहस्पति के पक्के घर में देवे तो भी पितरी ऋण का बोझ होगा। इसी तरह ही और ग्रह भी यानि चन्द्र की खराबी में माता तरफ के मातरी ऋण वगैरह का बहाना हो सकते है, ऐसे शख्स के (कुण्डली वाले के) अपने ग्रह चाहे लाख राजयोग ही क्यों न हों । बुरा असर दो ग्रहों का ही होगा और उपाये भी दो ही ग्रहों का करना होगा । जैसे कुण्डली वाले के बाप ने बिना वजह कुत्तो मारे या मरवाये तो उस पर बृहस्पति और केतु दो ही ग्रहों का पितरी ऋण होगा। जो कुण्डली वाले पर उसकी 16 से 24 साल उम्र तक या बालिग होने की उम्र से 16 से 24 साल तक रह सकता है ।


इसी तरह ही बाकी सब ग्रहों का उपाये होगा। यानि एक तो उस ग्रह का उपाये करेंगे जो खुद निकम्मा हो गया हो और दूसरा उस ग्रह का उपाय करेंगे जो उसकी जड़ की राशि (जो उसके लिए बाहैसियत मालकियत ग्रह मुकर्र हो) में बैठकर उसको निकम्मा कर रहा हो ।


मसलन् बृहस्पति खाना नम्बर 9 में बैठा हो और राहु नम्बर 11 में बैठ जावे तो एक उपाये राहु नम्बर 11 की मन्दी हालत का करेंगे और दूसरा बृहस्पति नम्बर 9 के बरबाद का मददगार होगा। मियाद उपाये अब 40-43 दिन की बजाये 40-43 हफते लगातार होगी जो तमाम खानदान की बेहतरी के लिए होगा। एक वक्त में दो उपाये करने ठीक न होंगे। इसलिए पहले एक उपाये करें फिर कुछ हफते छोड़कर दूसरा उपाये करें । ऋण पितरी के वक्त खुद उस ग्रह का जो मन्दा हो गया हो और जिस ग्रह ने जड़ राशि से बरबाद किया हो, दोनो का ही उपाये और दोनो ही की मियाद तक करना मददगार होगा।


ऋणों की किस्में


जैसी करनी वैसी भरनी । नहीं की तूने तो करके देख ।


1. बृहस्पति: पितरी ऋण : खाना नम्बर 2, 5, 9, 12 में शुक्र, बुध, राहु।

पाप की वजह: बज़ुर्गों का पाप । खानदानी कुल पुरोहित से बदल गया होगा। चाहे बावजह लावल्दी खानदान कुल पुरोहित ।

आम निशानी: हमसाया धर्म मन्दिर या बृहस्पति की अशिया पीपल वगैरह को तबाह बरबाद ही कर चुके या करते होंगे ।


2 सूरज: जाती (अपना) ऋण : खाना नम्बर 5 में शुक्र या पापी ।
पाप की वजह : अन्त खराब । नास्तिकपन, पुरानी रस्मों पर पेशाब की धार मारने के कौल का आदमी होना । आम निशानी: उस घर में ज़मीन के नीचे अग्नि कुण्ड आम होंगे या आसमान की तरफ से छत में से रोशनी के रास्ते आम होंगे।
3 चन्द्र : मातरी ऋण : खाना नम्बर 4 में केतु।

पाप की वजह: माता नीयत बद। अपनी औलाद पैदा होने के बाद अपनी माता को दर बदर जुदा या दुखी करना या उसके दुखी हो जाने पर लापरवाही करना ।

आम निशानी: हमसाया कुंआ, नदी, नाला पूजने की बजाये घर की गन्दगी बहाने या

जमा करने का ज़रिया बनाया जा रहा होगा।
4 शुक्र: स्त्री ऋण : खाना नम्बर 2, 7 में सूरज, चन्द्र, राहु ।

पाप की वजह : कुटुम्बी पेट मार । औरत को बच्चा जनने की हालत में किसी लालच की वजह से जान से खत्म कर देना ।

आम निशानी: उस घर में गाय को पालना या अपने घर में रखने से खानदानी नफरत का असूल चलता होगा।


5 मंगल : रिश्तेदारी का ऋण : खाना नम्बर 1, 8 में बुध केतु ।
पाप की वजह : मित्र मार । ज़हर के वाक्यात करना या किसी की पकी पकाई खेती को आग लगा देना या किसी की भैंस आखीर बच्चा देने को आई, उसको मरवा दिया या मार देना । मकान बनाने पर आग लगा देना वगैरह ।आम निशानी : रिश्तेदारों के मिलने बरतने के असूल से नफरत या बच्चों की पैदायश और गृहस्थिी दिन त्यौहार के वक्त खुशी मनाने से गुरेज़ (दूर रहना या नफरत करना) होगा।


6 बुध: बेटी बहन का ऋण : खाना नम्बर 3, 6 में चन्द्र ।
पाप की वजह : ज़ुबानी धोखा । किसी की बेटी बहन की हत्या (हद से ज्यादा ज़ुल्म करना)।

आम निशानी : मासूम कम उम्र या गुमराह बच्चों को फरोखत करना या उनका लालच में तबादला कर जायज़ कर लेना ऐसे ढंग पर जिसका आम दुनियादारों को भेद न खुल सके।



7 सनीचर (शनि) : ज़ालिमाना ऋण : खाना नम्बर 10, 11 में सूरज चन्द्र मंगल ।

पाप की वजह : जीव हत्या । मकान (शनि के मतल्लका अशिया) धोखे से ले लेना मगर उसकी कीमत किसी तरह भी अदा न करना ।

आम निशानी: घर के मकानों का बड़ा रास्ता अमूमन दक्षिण में होगा या लावल्दो से जगह लेकर मकान बनाया होगा या रास्ता व कुआं छतकर मकान बनायें होंगे।



8 राहु: अनजन्मे का ऋण : खाना नम्बर 12 में सूरज शुक्र मंगल ।

पाप की वजह : ससुराल या बाहमी दुनियावी ताल्लुकदारोें से धोखा फरेब या दगा के वाक्यात ऐसे ढंग पर किए हों कि दूसरे की कुल गर्क हो जावे ।

आम निशानी : घर से बाहर निकलते हुए दरवाज़े की दहलीज़ के नीचे से घर का गन्दा पानी बाहर निकलने के लिए नाली चलती होगी या दक्षिण की दीवार के साथ उजाड़, वीरान कब्रिस्तान या भड़भूंजे की भट्ठी होगी।

9 केतु: दरगाही (कुदरती)ऋण खाना नम्बर 6 में चन्द्र मंगल ।पाप की वजह: कुत्ता फकीर बदचलनी, बदफैली मगर ऐसे ढंग पर कि दूसरे की गरीब कुत्तो की तरह हद से ज्यादा दुर्दशा या तबाही हो जावे और ऐसी कारवाई में नीयत बद की बुनियाद होवे ।

आम निशानी: दूसरों की नर औलाद किसी न किसी खुफिया, गुमनाम बहाने से जाया (खत्म) करवाना । कुत्तों को बिना वजह गोली से मरवाना या केतु की दूसरी मतल्लका अशिया या रिश्तेदारों की अपनी लालच की वजह से कुल नष्ट करवाना या करना, हर हालत में नीयत बद बुनियाद गिनते हैं ।


ऋण पितरी की पहली हालत:
जब बुध जड़ में बैठा हो :-बृहस्पति हो खाना नम्बर 9 में और बुध हो खाना नम्बर 12 में ।

सूरज हो खाना नम्बर 9 में और बुध हो खाना नम्बर 5 में ।

चन्द्र हो खाना नम्बर 9 में और बुध हो खाना नम्बर 4 में ।

शुक्र हो खाना नम्बर 9 में और बुध हो खाना नम्बर 2, 7 में ।

मंगल हो खाना नम्बर 9 में और बुध हो खाना नम्बर 1, 8 में ।

सनीचार हो खाना नम्बर 9 में और बुध हो खाना नम्बर 10,11 में ।

राहु हो खाना नम्बर 9 में और बुध हो खाना नम्बर 12 में ।
केतु हो खाना नम्बर 9 में और बुध हो खाना नम्बर 6 में ।

ऋण पितरी की दूसरी हालत :
जब ग्रह मतल्लका की जड़ में उसका दुश्मन बैठा हो:-बृहस्पति खाना नम्बर 2, 3, 5, 6, 9, 12 से बाहर कहीं भी हो और नम्बर 2 में सनीचर बाहैसियत पापी ग्रह या नम्बर 5 में शुक्र या नम्बर 9 में बुध या नम्बर 12 में राहु या नम्बर 3, 6 बुध शुक्र या सनीचर बाहैसियत पापी ।

सूरज खाना नम्बर 1, 11 से बाहर और नम्बर 5 में शुक्र या पापी ।

चन्द्र खाना नम्बर 4 से बाहर और नम्बर 4 में शुक्र बुध सनीचर ।

शुक्र खाना नम्बर 1, 8 से बाहर और नम्बर 2, 7 में सूरज चन्द्र राहु ।

मंगल खाना नम्बर 7 से बाहर और नम्बर 1, 8 में बुध केतु ।

बुध खाना नम्बर 2, 12 से बाहर और नम्बर 3, 6 में चन्द्र ।

शनि खाना नम्बर 3, 4 से बाहर और नम्बर 10, 11 में सूरज चन्द्र मंगल ।राहु खाना नम्बर 6 से बाहर और नम्बर 12 में सूरज शुक्र मंगल । केतु खाना नम्बर 2 से बाहर और नम्बर 6 में चन्द्र मंगल ।


जन्म कुण्डली के मुताबिक ऊपर ज़िक्र की गई हर हालत में खाना नम्बर 2 ,5, 9, 12 की मन्दी हालत भी साथ हो तो ऋण पितरी होगा। ऋण पितरी हमेशा जन्म कुण्डली से देखा जायेगा।

ऋण पितरी के उपाये:


ऐसा पाप जो किया तो था बज़ुर्गों ने इसका हर्जाना भरना पड़ा मौजूदा पुश्त को । इसलिए ऐसे उपाये के वक्त तमाम का तमाम खानदान यहां तक खून का ताल्लुक हो, सबको इस उपाये में हिस्सा डालना मददगार बल्कि ज़रूरी होगा। अगर किसी वजह से कोई रिश्तेदार उपाये में शामिल न हो सके तो उसका हिस्सा दस गुणा डाल देना होगा।


बृहस्पति: कुल खानदान के हर एक सदस्य, जहां तक खून का असर हो, सबसे एक रूपया पैसा लेकर धर्म मन्दिर में एक ही दिन देना ।


सूरज: कुल खानदान के हर सदस्य से बराबर हिस्सा लेकर यज्ञ करना ।


चन्द्र: कुल खानादान के हर सदस्य से बराबर हिस्से की चांदी लेकर दरिया में एक ही दिन बहा दी जाये।


शुक्र: सौ गाय को जो अंगहीन न हो, कुल खानदान के सदस्यों के बराबर बराबर खर्च पर एक ही दिन भोजन वगैरह खिलाया जाये।


मंगल: कुल खानदान के हर सदस्य से रूपया पैसा लेकर अपने गांव में या घर के पास शनि के मुतल्लका काम करने वाले को देना ।


बुध: कुल खानदान के हर सदस्य से एक एक ज़र्द कोड़ी लेकर एक ही जगह इकट्ठी करके जलाकर उसकी राख को उसी दिन दरिया बहा दें ।


शनि: सौ अलग-अलग जगह की मछलियों को एक ही दिन में कुल खानदान के सदस्यों के खर्च से खाना देवें ।


राहु: कुल खानदान के सदस्यों से एक एक नारियल लेकर एक जगह इकट्ठे करके एक ही दिन दरिया में बहा दें ।


केतु: सौ कुतों को एक ही दिन में कुल खानदान के सदस्यों के खर्च से खाना खिलायें । जन्म कुण्डली में ऋण पितरी देखने की ज़रूरत बहुत कम पड़ेगी । क्योंकि ऐसा प्राणी जो सालों साल लगातार मन्दा ज़माना देखता आ रहो हो भलां कब तक अपनी ज़िन्दगी कायम रख सकता है ।
Posted by D.S.Thakur at 7:55 PM 0 comments
Labels: उपाये
Friday, March 19, 2010
ग्रहों के उपाये
ज्योतिष में जब ग्रहों के उपायों की बात होगी तो लाल किताब का नाम सबसे पहले आयेगा। कुंडली में ग्रहों की नेक या मन्दी हालत के मुताबक ही आदमी पर अच्छा या बुरा असर होता है। ग्रहों के बुरे असर से बचने और अच्छे असर को बरकरार रखने के लिये लाल किताब में उपायों का तफसील से ज़िक्र किया गया है।

लेकिन सवाल यह है, ''क्या उपाये से कोई फायदा हो सकता है?'' रात को बिजली से रोशनी करना, बिमारी को दूर करने के लिये दवा लेना, मौसम के मुताबक सर्द गर्म कपड़े पहनना..............यह सब उपाये नही तो क्या है ? दरअसल ज़िन्दगी को बेहतर बनाने के लिये इन्सान लगातार उपाये कर रहा है । कुंडली की ग्रहचाल को दरूस्त करने के लिये लाल किताब के उपाये लाजवाब है। इन उपायों की चार किस्मों में रखा जा सकता है।

पहली किस्म के आम उपाये हैं जो मदद के लिये सभी कर सकते हैं । जैसे दुनियावी सुख के लिये गऊ ग्रास देना, परेशानी से बचने के लिये नारियल दरिया में बहाना, बिमारी से बचने के लिये हलवा कद्दू धर्मस्थान में देना । अचानक चोट या नुकसान से बचने के लिये सिगरेट से परहेज करना वगैरह।

दूसरी किस्म के उपाये कुंडली में मन्दे ग्रह की हालत के मुताबिक हैं। यानि कुंडली में देखना होगा कौन सा ग्रह किस खाने में बुरा असर दे रहा है। उसका उपाये लाल किताब के मुताबिक ही होगा। जैसे राहु खाना नं. 8 के लिए सिक्का दरिया में बहाने से, मंगल खाना नं. 8 के लिये बेवा की दुआ से, बुध खाना नं. 8 के लिये नाक छेदन से, शनि खाना नं. 6 के लिये तेल की कुन्जी पानी के नीचे तह ज़मीन में दबाने से, शनि खाना नं.1 के लिये सुर्मा ज़मीन में दबाने से फायदा होगा।

तीसरी किस्म में आते हैं फौरन उपाये। जब किसी मन्दे ग्रह का कोई उपाये काम न करे तो कुछ घण्टों के अन्दर अन्दर फैसले के लिये उसका फौरन उपाये करना होगा। जैसे सूरज के लिये गुड़, मंगल के लिये रेवड़ियां, बुध के लिये तांबे का पैसा, राहू के लिये कोयला दरिया में बहाना मददगार होगा।

चौथी किस्म में ऋण पित्री के उपाये आते हैं । इनकी ज़रूरत बहुत कम पड़ेगी । ऋण पित्री से मुराद कुण्डली वाले पर अपने बज़ुर्गों के पाप का खुफिया असर होता है। यानि गुनाह तो कोई करे मगर उसकी सज़ा कोई और भुगते। मगर भुगतेगा उस गुनाह को करने वाले का असल करीबी ताल्लुकदार ही। जैसी करनी वैसी भरनी। कुंडली में जो ग्रह खाना नं. 9 में बैठा हो, उसकी जड़ में बुध बैठ जाये या किसी ग्रह की जड़ में दुश्मन ग्रह बैठ जाये और साथ में वो खुद भी किसी दूसरे खाने में मन्दा हो जाये तो कुंडली पर बज़ुर्गों के पाप का बोझ होगा। जिसका उपाये जुदा जुदा हालत में जुदा जुदा होगा। जो खानदान के सब मैंम्बरों को साथ लेकर करना पड़ेगा।
आम तौर पर उपाये की मियाद कम से कम 40 दिन और ज्यादा 43 दिन लगातार होगी। मगर खानदान की बेहतरी के उपाये की मियाद लगातार की बजाये हफतावार होगी।

लाल किताब उर्दू ज़बान में गैबी ताकत से लिखी गई थी। जिसको समझने के लिये सोच भी गैबी चाहिये। यह किताब गागर में सागर समेटे हुये हैं। फरमान नं. 6 के मुताबिक शक्की हालत के ग्रह के बुरे असर से बचने के लिये शक्क का फायदा उठाया जा सकता है। मगर पक्की हालत के ग्रह का असर हमेशा के लिये मुकर्रर हो चुका है और उसके बुरे असर को तबदील करना इन्सानी ताकत से बाहर होगा। सिर्फ खास खास खुदा रसीदा और महदूद हस्तियां ही रेख में मेख लगा सकती हैं। लेकिन इसका भी कोई न कोई तबादला दिया गया । मन्दी ग्रह चाल को दरूस्त करके फायदा लिया जा सकता है। मगर यह दरूस्ती सबके बस की बात न होगी।

काबलियत और कोशिश के बावजूद अगर नतीजा हक में न आये या बिना वजह जहमत गले लगी रहे तो मदद के लिये कुंडली में किस्मत के ग्रह की तलाश करनी होगी। जो ग्रह रूकावट डाले उसका उपाये करना होगा तांकि ज़िन्दगी को बेहतर बनाया जा सके।

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