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Wednesday, 20 March 2013

जीवनीशक्ति अनुसार दिनचर्या

जीवनीशक्ति अनुसार दिनचर्या –
 

सुबह ३ से ५ तक जीवनीशक्ति फेफ्सों में होती है | तो ५ के पहले प्राणायाम करने चाहिये |

५ से ७ जीवनीशक्ति बड़े आँत में होती है | पानी पी ले और शौच का काम निपटा ले | आसन, कसरत और लँटरिन आदि का काम निपटा लें | तो १०० – १०० दवाईयाँ खाने से भी पेट की गड़बड़ियाँ नहीं जाती ऐसा करेगा तो पेट ठीक रहेगा |

  ७ से ९ जीवनीशक्ति आमाशय में रहती है | इस समय पेय पदार्थ पीना चाहे तो पी ले, थोडा हलका – फुलका दूध वगैहरा | भोजन और दूध में ढाई घंटे का फरक होना चाहिये |

 ९ से ११ के बीच जीवनीशक्ति प्लीहा में होती है | भोजन के लिए बहुत उत्तम काल है |

  ११ से १ जीवनीशक्ति ह्रदय में रहती है | उस समय भोजन करेंगे तो ह्रदय में जो दिव्यगुण विकसित होने चाहिये दया, करुणा, प्रेम, उदारता, प्रसन्नता, आध्यात्मिक संवेदनाएँ विकसित होनी चाहिये पोषित होने के लिए वो नही होंगी | दोपहर को ११ से १ बीच संध्या भी उसी लिए की गयी है |

  १ से ३ छोटी आँत में जीवनीशक्ति होती है | जो ११ बजे भोजन कर लिया उसके पोषक तत्व १ से ३ के बीच छोटी आंत तपने में वो पोषित करती है | और पूरा शरीर को पुष्टि मिलती है | जब भोजन करेंगे १-२ बजे तो कमरदर्द, गर्दन दर्द ये वो है होता है | १ से ३ बड़ी आंत पोषक तत्व छोटी आंत अपने में खिचती है और बाकी का कचरा बड़ी आंत में ढकेल देती है | तो कब्जियात भी नहीं होगी इस समय पानी पी ले | इस समय भोजन करने से दुर्बलता आयेगी, नस-नाड़ियाँ कमजोर होगी |

३ से ५ जीवनीशक्ति मूत्राशय में होती है | उस समय पानी पी ले और १०–१५ मिनट के बाद पिशाब कर लें | तो पथरी की बिमारी आदि नहीं होगी और कान भी ठीक रहेंगे, किडनी भी ठीक रहेगी |

 ५ से ७ गुर्दे में जीवनीशक्ति होती है | उस समय हलका भोजन कर सकते है | उस समय संध्या करना है | जो रात को दूध पीना चाहते हो उनको हलका भोजन करना चाहिये |

  ७ से ९ जीवनीशक्ति मस्तक में रहती है | उस समय ध्यान, पाठ, भजन, करना चाहिये |

 ९ से ११ मेरुरज्जु में जीवनीशक्ति रहती है | उस समय नींद सर्वाधिक विश्रांति देती है | ९ से ११ जागते रहेंगे तो थकान रहेगी, भोजन करेगा तो भी हानि रहेगी |

  ११ से १ तक पित्ताशय में जीवनीशक्ति होती है | इस समय नये कोषों का निर्माण होता है | अगर कोई जागेगा ११ से १ तक तो नये कोष बनेगें नहीं बुढ्ढा जलदी हो जायेगा, पित्त प्रकोपित होगा, निद्रा का रोग लगेगा, सिरदर्द, नेत्र रोग आदि होंगे |

  १  से ३ यकृत में ( Liver में ) जीवनीशक्ति होती है | इस समय संसार का व्यवहार, पत्नी का काम विकार व्यवहार गहरी हानि करेंगा | इस समय गहेरी नींद होने से स्वास्थ अच्छा रहता है और इस समय गहरी नींद नहीं किया और पति-पत्नी झंजट वाले गपसप में रहे तो पाचनतंत्र बिघड जायेगा और पति-पत्नी लडेगें, झगडा करेंगे, जल्दी मौत को बुलाना | इस समय जागते रहो तो दृष्टि मंद हो जायेगी | सूझबूझ मंद हो जायेगी, गुस्सेवाला शरीर हो जायेगा | और शरीर की प्रतिकिया मंद होती है | अत: इस समय रात को एक्सीडेंट होते है | जल्दी स्वस्थ होना है तो ९ से ११ सो जाना ११ से १, १ से ३ बस ध्यान और नींद |





- Pujya Bapuji Nashik 11th March' 2013

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