Search This Blog

Loading...

Tuesday, 21 May 2013

दुर्गा सप्तशती

दुर्गा सप्तशती के अध्याय से कामनापूर्ति

1) प्रथम अध्याय- हर प्रकार की चिंता मिटाने के लिए |

2) दूसरा अध्याय- मुकदमे,झगडे आदि मे विजय पाने के लिए |

3) तीसरा अध्याय- शत्रु से छुटकारा पाने के लिए |

4) चतुर्थ व पंचम अध्याय- भक्ति,शक्ति तथा दर्शन के लिए |

5) छठा अध्याय- डर,शक बाधा हटाने के लिए |

6) सप्तम अध्याय-हर कामना पूर्ण करने के लिए |

7) अष्टम अध्याय-मिलाप व वशीकरण करने के लिए |

8)नवम व दशम अध्याय- गुमशुदा की तलाश एवं पुत्र प्राप्ति के लिए |

9) एकादश अध्याय- व्यापार व सुख संपती के लिए |

10) द्वादश अध्याय-मान सम्मान व लाभ के लिए|

11) त्रियोदश अध्याय- भक्ति प्राप्ति के लिए |

शुगर,

शुगर, जोड़ों का दर्द, मूत्र रोग, रीढ़ की हड्डी में दर्द के लिए काले कुत्ते की सेवा करें।

यदि कुण्ड़ली में

यदि कुण्ड़ली में शनि, राहू, केतु की अशुभ दृष्टि, इसकी अशुभ दशा , शनि की ढ़ैया या साढ़े साती चल रही तो-
एक सूखे मेवे वाला नारियल लेकर उस पर मुँह के आकार का एक कट करें. उसमें पाँच रुपये का मेवा और पाँच रुपये की चीनी का बुरादा भर कर ढ़क्कन को बन्द कर दें. पास ही किसी किसी पीपल के पेड़ के नीचे एक हाथ या सवा हाथ गढ्ढ़ा खोदकर उसमें नारियल को स्थापित कर दें. उसे मिट्टी से अच्छे से दबाकर घर चले जायें. ध्यान रखें कि पीछे मुड़कर नही देखना. सभी प्रकार के मानसिक तनाव से छुटकारा मिल जायेगा

धन प्राप्ति मंत्र

विशेष ऋग्वेद का प्रसिद्ध धन प्राप्ति मंत्र इस प्रकार है -

ॐ भूरिदा भूरि देहिनो, मा दभ्रं भूर्या भर।
भूरि घेदिन्द्र दित्ससि।
ॐ भूरिदा त्यसि श्रुत: पुरूत्रा शूर वृत्रहन्।
आ नो भजस्व राधसि।।´
ऋग्वेद (4/32/20-21)

हे लक्ष्मीपते ! आप दानी हैं, साधारण दानदाता ही नहीं बहुत बड़े दानी हैं।

आप्तजनों से सुना है कि संसार भर से निराश होकर जो याचक आपसे प्रार्थना करता है, उसकी पुकार सुनकर उसे आप आर्थिक कष्टों से मुक्त कर देते हैं - उसकी झोली भर देते हैं। हे भगवान मुझे इस अर्थ संकट से मुक्त कर दो।

आँवला

आँवला

आँवला खाने से आयु बढ़ती है। इसका रस पीने से धर्म का संचय होता है और रस को शरीर पर लगाकर स्नान करने से दरिद्रता दूर होकर ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।

जो दोनों पक्षों की एकादशियों को आँवले के रस का प्रयोग कर स्नान करते हैं, उनके पाप नष्ट हो जाते हैं।

मृत व्यक्ति की हड्डियाँ आँवले के रस से धोकर किसी भी नदी में प्रवाहित करने से उसकी सदगति होती है।

(स्कंद पुराण, वैष्णव खंड, का.मा. 12.75)
 रत्येक रविवार, विशेषतः सप्तमी को आँवले का फल त्याग देना चाहिए। शुक्रवार, प्रतिपदा, षष्ठी, नवमी, अमावस्या और सक्रान्ति को आँवले का सेवन नहीं करना चाहिए।

आँवला-सेवन के बाद 2 घंटे तक दूध नहीं पीना चाहिए।