Search This Blog

Loading...

Tuesday, 13 September 2011

ग्रह रिस्तेदार

ग्रह अपने आसपास रिस्तेदार के रूप में है.

ग्रह का रूप अपने रिस्तेदार के रूप में भी सामने आता है,
पिता का रूप सूर्य से होता है,भारत में पिता के द्वारा ही नाम दिया जाता है
,पिता के द्वारा ही जन्म सम्भव है,यानी सूर्य पिता है,लेकिन पिता केवला आत्मा का देने वाला है,पिता का रूप सांस देने वाला है,और जो एक दिन और रात में इक्कीस हजार छ: सौ बार सांस का आना जाना है,वह केवल पिता के द्वारा दिये गये जीवन के द्वारा ही संभव है,नाम जाति गोत्र बनावट सब पिता पर ही निर्भर करते है
 
,चन्द्रमा माता के रूप में विद्यमान है,ह्रदय की धडकन माता के द्वारा दी गयी है,माता नही होती तो कोख में कौन रखता,और फ़िर नौ माह दस दिन तक अपनी कोख में रखने के बाद पूरा रूप देकर और जीवन के लिये सांस का आदान प्रदान करने के बाद जब तक शादी नही हो जाती,और शादी के बाद भी अपना ह्रदय संतान के प्रति हर छड धडकाने वाली
 
केवल चन्द्रमा के रूप में माता ही तो है,जो सूर्य यानी पिता से रोशनी लेने के बाद रात में भी जीवन को प्रकाश युक्त करती है,वही प्रकाश ही आत्मा है,तो जीव के अन्दर विद्यमान रहता है,
 
मंगल भाइयों के रूप में है,स्त्री जातक के पास पति के रूप में भी है,कहा जाता है,कि भाई बडा दाहिनी बांह होता है,और छोटा भाई बायीं भुजा होता है,पराक्रम की बार आती है,तो फ़ौरन भाई की बात सामने आ जाती है,भाई कभी दुश्मन भी बनता है,तो मारकर छाया में ही डालता है,जबकि दूसरा मारकर धूप में पडा छोड जाता है
 
,बुध बहिन,बुआ बेटी के रूप में विद्यमान होती है.बहिन बुआ बेटी का काम ही आगे से आगे सम्बन्ध बनाकर खुद की रिस्तेदारी में बढोत्तरी करना है,जातक के जानकारों को जानने के लिये पहले बहिन बुआ बेटी का नाम ही आगे आता है,
 
गुरु को परमपिता के रूप में जाना जाता है,उसके बिना इस शरीर में सांस जो भी आती है,जाती का लेखा जोखा कोई नही रख सकता है,हर दिन हर सांस का लेखा जोखा वही परमपिता परमात्मा ही रखता है,कि किस सांस के आने के समय क्या किया है,अच्छा किया है,या बुरा किया है,
 
शुक्र पत्नी के रूप में सामने होता है,जमीन के रूप में होता है,भौतिक सम्पत्ति के रूप में सामने होता है
 
,शनि कर्म के रूप में सामने होता है,घर मकान जायदाद के रूप में सामने होता है,बुजुर्ग के रूप में सामने होता है
 
.राहु अपने परिवार में ससुराली जन के रूप में सामने होता है
 
 
केतु की औकात लडके के रूप में,भान्जे के रूप में और भतीजे तथा मामा के रूप में मानी जाती है.

No comments:

Post a Comment