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Wednesday, 3 August 2011

यात्रा में दिशा शूल का विचार

सोमवार और शनिवार को पूर्व दिशा में यात्रा न करे.
सोमवार और गुरुवार को आग्नेय दिशा में यात्रा न करे.
गुरुवार को दक्षिण दिशा में यात्रा न करे.
रविवार और शुक्रवार को पश्चिम दिशा में यात्रा न करे.
शुक्रवार को नैरत्य दिशा में यात्रा न करे.
मंगलवार को वायव्य दिशा में यात्रा न करे.
बुधवार और मंगलवार को उत्तर दिशा में यात्रा न करे.
बुधवार और शुक्रवार को ईशान दिशा में यात्रा न करे.
दिशा शूल के समय यात्रा करने से यात्रा सफल नहीं होती और यात्रा मार्ग में भी परेशानियों का सामना करना होता है. दिशा शूल होने पर यथा संभव यात्रा को टाल देना चाहिए. यदि यात्रा टालना संभव न हो तो अग्रलिखित उपाय करके यात्रा करनी चाहिए -
नासिका का जो स्वर चलता हो उसी तरफ का पैर आगे बड़कर यात्रा शुरू करनी चाहिए.
रविवार को पान खाकर यात्रा पर जाना चाहिए.
सोमवार को दर्पण देखकर यात्रा पर जाना चाहिए.
मंगलवार को धनिया खाकर यात्रा पर जाना चाहिए.
बुधवार को गुड़ खाकर यात्रा पर जाना चाहिए.
गुरुवार को दही खाकर यात्रा पर जाना चाहिए.
शुक्रवार को राइ खाकर यात्रा पर जाना चाहिए.
शनिवार को वाय विन्डिंग खाकर यात्रा पर जाना चाहिए.
उप दिशाओं के लिए रविवार को चन्दन का तिलक, सोमवार को दही का तिलक, मंगल को मिट्टी का तिलक, बुधवार को घी का तिलक, गुरुवार को आटे का तिलक, शुक्रवार को तिल खाकर और शनिवार को खल खाकर जाने से दोष नहीं लगता.

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