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Tuesday, 29 October 2013

धन की बारिश

धन की बारिश
आवश्यकताओं और सुविधाओं के बढऩे के साथ-साथ हम चाहे जितना पैसा कमा ले, कम ही है। धन की बढ़ती जरूरत के लिए अतिरिक्त कार्य करना होता है। फिर भी आवश्यकताएं पूरी नहीं हो पाती। ऐसे में मेहनत के साथ-साथ धन की देवी लक्ष्मी की उपासना भी जाए तो व्यक्ति सभी ऐश्वर्य और सुख-शांति प्राप्त करता है।यहां एक प्रयोग दिया जा रहा है जिसे अपनाने वाले व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं शत-प्रतिशत पूर्ण होती हैं
-प्रयोग की विधि:
- दीपावली, अक्षय तृतीया या अन्य किसी भी शुभ दिन, शुभ मुहूर्त में इस प्रयोग को करें।
- स्नानादि से निवृत्त होकर साफ और पवित्र स्थान पर आसन बिछा लें और महालक्ष्मी का चित्र को अपने सामने स्थापित करें।
- महालक्ष्मी की विधिवत पूजा करने के पश्चात निम्न मंत्र का (11 मालाएं) जप करें:
मंत्र: ऊँ ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं दारिद्रय विनाशके जगत्प्रसूत्यै नम:।।
- माला कमल के गट्टे की होनी आवश्यक है।
- इस दिन के पश्चात नित्य अपनी इच्छानुसार मंत्र का जप करें।
- 12 लाख मंत्र जप के पश्चात महालक्ष्मी सिद्ध हो जाती हैं और उपासक को अपार धन, समृद्धि, वैभव, यश, सुख और शांति प्राप्त हो जाती है।
इस प्रयोग की सफल शुरूआत के कुछ ही दिनों में व्यक्ति की मनोकामनाएं पूर्ण होना शुरू हो जाती है।- प्रयोग पूरी श्रद्धा और भक्ति से करें। मन में कोई संदेह ना लाएं। यह प्रयोग अचूक है।

1 comment:

  1. कृष्ण निराश होकर लौट चुके हैं, संधि प्रस्ताव असफल हो चुका है . महाभारत का युद्ध टालने की सारी कोशिशें जब बेकार साबित हो गई तो अब सिवाय इसके कोई चारा नही बचा कि युद्ध की तैयारियां की जाये . प्रत्येक व्यक्ति अपने अपने स्तर पर मशगूल हो गया. अब कोई भी उपाय नही बचा कि इस विभीषिका से बचा जा सके . गांधारी और कुंती भी अपने अपने स्तर पर तैयारियों में सलंग्न हो गई .
    दोनों ही , गांधारी और कुंती, राजमहल के पीछे दूर जंगल में बने शिव मन्दिर में राजोपचार विधि से, अपने अपने पुत्रो को राज्य दिलवाने की कामना से शिव पूजन करने लगी . कुछ दिन पश्चात भगवान् भोलेनाथ दोनों पर ही प्रशन्न हो गए और वर मांगने के लिए कहा . दोनों ही माताओं ने अपने अपने पुत्रो के लिए राज्य माँगा .
    भगवान् शिव बोले – यह असंभव है . राज्य एक है तो दोनों को नही मिल सकता . एक काम करो एक पक्ष राज्य ले लो और दूसरा मोक्ष ले ले . आप लोग आपस में निर्णय कर लीजिये .

    जब कुंती और गंधारी के समक्ष महादेव शिव ने रखी एक अनोखी शर्त, महाभारत की अनकही कथा !

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