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Wednesday, 7 November 2012

चावल को अक्षत भी कहा जाता है और अक्षत का अर्थ है अखंडित। जो टूटा हुआ न हो वही अक्षत यानि चावल माना गया है। शास्त्रों के अनुसार यह पूर्णता का प्रतीक है। इसी वजह से सभी प्रकार के पूजन कर्म में भगवान को चावल अर्पित करना अनिवार्य माना गया है। इसके बिना पूजा पूर्ण नहीं मानी जाती है। चावल चढ़ाने से भगवान प्रसन्न होते हैं और भक्त को देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त होती है।

धन संबंधी समस्याओं को दूर करने के लिए ज्योतिष शास्त्र में कई सटीक उपाय बताए गए हैं। जिन्हें अपनाने से सभी प्रकार के ग्रह दोष दूर होते हैं और आय बढऩे में आ रही समस्त रुकावटें दूर हो जाती हैं। यदि किसी ग्रह दोष के कारण आपकी आय बढऩे में समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं तो संबंधित ग्रह का उपचार करें। इसके साथ ही यह उपाय अपनाएं-

प्रति सोमवार शिवलिंग का विधिवत पूजन करें। पूजन में बैठने से पूर्व अपने पास करीब आधा किलो या एक किलो चावल का ढेर लेकर बैठें। पूजा पूर्ण होने के बाद अक्षत के ढेर से एक मुठ्ठी चावल लेकर शिवजी को अर्पित करें। तत्पश्चात शेष बचे चावल को मंदिर में दान कर दें या किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दे दें। ऐसा हर सोमवार को करें। इस उपाय को अपनाने से कुछ ही समय में सकारात्मक परिणाम प्राप्त होने लगेंगे। ध्यान रहे इस दौरान किसी भी प्रकार का अधार्मिक या अनैतिक कर्म न करें। अन्यथा उपाय का प्रभाव निष्फल हो जाएगा।

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