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Friday, 21 October 2011

मनोकामना पूर्ति में सहायक हें--गोमती चक्र


मनोकामना पूर्ति में सहायक हें--गोमती चक्र 
लक्ष्मी-साधक गोमती चक्र से भली-भाँति परिचित हैं। गोमती
चक्र समुद्र प्रदत्त दुर्लभ एंव चामत्कारिक तंत्रोक्त वस्तु है गोमती
चक्र के प्रयोग अन्य तंत्रोक्त साधनाओं एंव प्रयोगों की भाँति कठिन
अथवा दुष्कर नहीं हैं। बड़े ही सरल, किन्तु प्रभावकारी प्रयोग
गोमतीचक्र के होते है। पाठको के हित के लिए दीपावली एंव अन्य
शुभ मुहूर्तो में किए जा सकने वाले लाभकारी गोमतीचक्र-प्रयोगों
में संे कुछ प्रयोगों का वर्णन प्रस्तुत लेख में किया गया है।
1. दीपवाली के दिन ग्यारह गोमतीचक्रों को लक्ष्मीपूजन में
प्रयुक्त जल से सिक्त करें और यमद्वितीया के दिन दोपहर 11ः48
से 12ः12 के मध्य उन पर सिन्दूर लगाएँ। उसके बाद उन्हें लाल
कपडे में बाँधकर अपनी दुकान, शोरूम, आॅफिस, फैक्टी अथवा
व्यवसाय स्थल के मुख्य द्वार की चैखट अथवा मुख्यद्वार के निकट
अन्य गुप्त स्थान पर बाँध दें। ऐसा करने से व्यापार में अपूर्व वृद्धि
होती है।
2. दीपवाली के दिन महालक्ष्मी पूजन के समय आठ गोमतीचक्र,
आठ कौड़ी एंव आठ लाल गुंजा साथ लेकर उनका पुजन करें।
उन्हें दक्षिणावर्ती शंख में थोड़े से चावल डालकर स्थापित कर दें।
रात्रि में ही उन्हें लाल कपडे में बाँधकर धर अथवा व्यवसाय स्थल
की तिजौरी में स्थापित कर दें। यह प्रयोग आपकी आय में वृद्धि
के लिए है।
3. शत्रुओं से परेशानी का अनुभव कर रहें हों, तो दीपावली की
रात्रि में बारह बजे के पश्चात् छह गोमती चक्र लेकर शत्रु का नाम
लेते हुए उस पर लाल सिन्दूर लगाएँ और किसी एकांत स्थान पर
जाकर गाड़ दें। गाडना ऐसे चाहिए कि वे पुनः निकालें नहीं। ऐसा
करने से शत्रु बाधा में शीघ्र ही कमी होगी।
4. महानिशा में माँ लक्ष्मी का ध्यान करते हुए एक गोमती चक्र
एंव दो कौडी एक लाल कपड़े में बाँधकर गर्भवती महिला की कमर
में बाँध दें। ऐसा करने से गर्भ गिरने की आशंका नहीं रहती है।
5. यदि आप गृह क्लेश से पीडित है और आपकी सुख शांति
दूर हो गई है, तो आपको दीपावली के दिन महालक्ष्मी पूजन के
पश्चात दो गोमती चक्र लेकर एक डिब्बी में पहले सिन्दूर रखकर
उसके ऊपर रख देना चाहिए और उस डिब्बी को किसी एकांत
स्थान पर रख दें। यह प्रयोग घर में किसी अन्य सदस्य को भी नहीं
बताएँ, ऐसा करने से शीघ्र ही आपकी मनोकामना पूर्ण होगी।
6. यदि बीमार ठीक नहीं हो पा रहा हो अथवा दवाइयाँ नही
लग रही हों, तो उसके सिरहाने पाँच गोमती चक्र मंत्र से
अभिमंत्रित करके रखें। ऐसा करने से रोगी को शीघ्र ही स्वास्थ्य
लाभ होगा।
गोमती चक्र को लाल वस्त्र में बाँधकर यदि दूकान की
चैखट पर बाँध दिया जाए, तो इससे व्यवसाय में वृद्धि होती हैं।
साथ ही व्यवसाय में बाधा के लिए किए गए अभिचार कर्म भी सफल
नहीं हो पाते।
8. यदि गोमती चक्र को लकड़ी की डिब्बी में पीले सिंदूर के
साथ रख दिया जाए, तो ऐसे व्यक्ति को जीवन में सफलता मिलने
लगती है। यदि धनागम के सभी मार्ग अवरूद्ध हो रहे हों तों वह
प्रयोग करने से शीघ्र ही धन लाभ प्रराम्भ हो जाता है।
9. यदि किसी व्यक्ति से कोई कार्य सिद्ध करवाना हो, तो उस
व्यक्ति के ऊपर से गोमती चक्र पाँच बार बहते हुए जल में डाल दें।
10. यदि किसी व्यक्ति का मन उखडा-उखडा रहता हो,
किसी काम में मन नही लगता हो, विधार्थियों को शिक्षा में एकाग्रता
न मिल रही हो, तो गोमती चक्र को सात बार अपने सिर पर
फिराकर खुद ही अपने पीछें फेंक देना चाहिए। यह प्रयोग एकांत
स्थान पर करना चाहिए तथा प्रयोग के बाद किसी से इनका जिक्र
नहीं करना चाहिए।
यदि किसी व्यक्ति को दिया हुआ धन वापस नही मिल
रहा हो, तो उस व्यक्ति का नाम लेकर मन ही मन धनप्राप्ति की
कामना करते हुए गोमतीचक्र को एक हाथ गहरी भूमि खोदकर
एकांत स्थान में गाड़ दें। इस प्रयोग से धन वापस मिल जाता है

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