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Thursday, 29 September 2011

श्री नाथ सिद्ध यंत्र


श्री नाथ सिद्ध यंत्र
 
     
   
 
श्री नाथ सिद्ध यंत्र
 
     
   
     
 
श्री नाथ सिद्ध यंत्र का कार्य
श्री नाथ सिद्ध यन्त्र के प्रति पूर्ण विश्वा्स, श्रद्धा एवं भक्ति होना अनिवार्य है।
स्थान मे स्थापित यन्त्र का पूजन पंचोपचारे या शोडोषचारे पूजन करके यन्त्र सन्मुख अपने गुरू मन्त्र या ‘’ॐ शिव गोरक्ष योगी’’ इस बीज मन्त्र का या अपने इष्ट देवी-देवताओं का या इच्छित कार्यानुसार लिए हुए मन्त्र का कम से कम १०८ बार या इच्छानुसार ज्यादा समय करें। ऐसा नित्य तनयम करने से यन्त्र महाचेतन होकर शीघ्र फल देगा।
इस यन्त्र में सभी देवी-देवता एवं नाथ सिद्ध इधिष्ठित है। इसलिये यह यन्त्र किसी भी देवी देवता, सिद्ध महात्माओं के पूजन हवन या उत्सव मे स्थापना कर पूजन कर सकते है। उदाहरण-नाथ सिद्ध नवनाथ पाठ-पूजन, नवदुर्गा (दश महाविद्या) नवरात्री तथा गुरू गोरक्षनाथ पूजन (गोरक्ष जयन्ती) तथा अन्य समाधि पूजन, गणेश पूजन (उत्सव) होली, दशहरा, दीपावली (लक्ष्मी पूजन) सोमवती अमावस्या, पूर्णिमा, गुरू पूर्णिमा, श्रावण मास, चार्तुमासादि सब व्रत विधि में तथा भैरव (भैरवाष्टमी), काली, तन्त्र पूजन, सिद्धि विधि में, रामायण पाठ, श्रीमद् भगवत पाठ, गीता-ज्ञानेश्वीरी पाठ, शिव पुराण नाथ पुराणादि सभी पुराण पाठों में तथा किसी भी हवन विधि मे स्थापन करने से योग्य फल प्राप्त कर देगा।
इसमे अस्त्र, शस्त्र, क्षेत्रपाल, रक्षपाल, कोटवाल, दस महाविद्या, नाथ सिद्ध जोगन इत्यादि महाशक्तियों का अनुष्ठान होने से तन्त्र मन्त्र साधना एवं सिद्धयां,शक्ति साधना को पूर्ण सुरक्षा एवं शुभ फल तथा पुर्ण सुयश ‍होता है।
खास अनुष्ठान, तपस्या, सिद्ध प्राप्ति देवी देवता, सिद्ध महात्माओं के दर्शन अनुभूति इत्यादि के लिए भी यह यन्त्र सुयश देगा।
इस यन्त्र मे सर्व सिद्धयां एवं कुण्डलिनी चक्रों के अधिष्ठित देवी देवताओं का अनुष्ठान ‍होने से साधे यन्त्र स्थानप सन्मुख योग साधना, ‍हठ योग, चक्र जागृति, कुण्डलिनी योग, ध्यान धारना समाधि सिद्ध प्राप्ति जन-भजन इत्यादि कर्म साधना में शीघ्र लाभ एवं अनुभूति देता है तथा साधक ज्योति दर्शन ज्योति स्वरूप ब्रह्माण्ड भ्रमण इत्यादि का भी अनुभव आता है।
साधना मे या शूभ कार्यों मे, काम, क्रोध, मत्सर सताते होगे तो ९ मुठ्ठी भस्म से यन्त्र का अभिषेक करें और वह भस्मी सर्वांग लेपन करें या माथे पर बाहु वक्षस्थल, नाभि स्थान, हाथ-कलाई इत्यादि पर भस्म त्रिपुण्ड लगकर कर्म करें शुभ ‍कार्य सफल होगा आध्यात्मिक अनुभूति होगी तथा भूत प्रेतादि अनिष्ट विद्या सताती ‍हो तो यही भस्मी जल में प्राशन करें और उपरोक्त शुभ दिन उपयुक्त मन्त्र विधि ‍कर ७ मिस्री मिठाई सवा किलो कच्चा या पक्का रोट का भोग लगावें उद, गुग्गल धूप दीप से पूजन एवं गुरू मन्त्र से जप करें बाहरी बाधा अनिष्ट संकट टल जायेगा। विशेषत: यन्त्र के मन्त्रों से हवन करें तो शीघ्र प्रभाव पड़ेगा।
यह यन्त्र मठ मन्दिर आश्रमों दुर्गा-दरबार में तथा घर के पूजा स्थान में, दुकान, गाड़ी-वाहनों में, चलते-फिरते व्यवसाय में शुद्ध स्थान, शुद्ध स्वरूप में रखे अवश्यब लाभ होगा।
कोर्ट-कचहरी कार्य, किसी से महत्वपूर्ण कार्य बातचीत, चर्चा हो, सम्मेलन, स्पर्धा, सत्संग, लेन-देन व्यवहार तथा सम्बन्धी संवाद तथा स्कूल-कोलेज के विद्या अभ्यास में यह यंत्र अपने जेब में या बैग में रख सकते है। अवश्य कार्य फल-लाभ देगा।
अगर कोई जटिल समस्या या प्रश्न हो जिसका कोई हल नही है रात्री सोने से पूर्व इस यन्त्र को वह समस्या का (हल) जवाब पूछ कर एवं प्रार्थना कर अपने सिरहाने मे रख कर सोये रात्री मे स्वप्न या दृष्टांत में वह जरूर जवाब देगा। इसमें कम से कम ७ या ९ दिन रात्री का अवकाश होगा।
अगर कोई बिमार ‍हो तो इस यन्त्र के अभिषेक का जल या पंचामृत उन्हें पीने को दो बीमारी ७ से ९ दिनों मे ठीक ‍हो जायेगी।
घर मे कलह अशान्ति हो तो यन्त्र मन्त्रों से (विशेषत: शनिवार को) अभिषेक कर शान्ति हवन करें तो शान्ति अवश्य होगी।
समृद्धि के ‍लिए घी या पायस (खीर) से अभिषेक, हवन करके सबको प्रसाद रूप मे खाने मे दो समृद्धि आयेगी।
शुभ मंगल कार्यो मे अत्तर या गुला‍ब जल का उपयोग करें।
यन्त्र ‍हमेशा सुरक्षित एवं पवित्र स्थान पर रखें।
मांस-मछली मीट, शराब पूर्ण निषेध है तथा यन्त्र उपलक्ष मे कोई भी अनुचित कार्य या अनुचित संकल्प ना करें।कूटनीति, कपट, संशय नहीं करें अन्यथा यन्त्र अनुचित कार्य करेगा।
   
 

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