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Thursday, 4 August 2011

ग्रह-बाधा,

ग्रह-बाधा, ज्वर-नाशक विघ्नेश-मन्त्र
“ॐ नमो गणपतये महा-वीर ! दश-भुज ! मदन-काल-विनाशन ! मृत्युं हन-हन, धम-धम, मथ-मथ, कालं संहर-संहर, सर्व-ग्रहांश्चूर्णय-चूर्णय, नागान् मोटय-मोटय, रुद्र-रुप त्रिभुवनेश्वर सर्वतोमुख !  हुं फट्-स्वाहा ।।”
प्रयोगः-
क॰ १०० बार उक्त मन्त्र जप कर भस्म का लेप करने से ज्वर का नाश होता है ।
ख॰ उक्त मन्त्र से जल अभिमन्त्रित करके छींटे मारने से चूहे, सर्प आदि भाग जाते हैं ।
ग॰ नित्य उक्त मन्त्र का १०० जप करने से ग्रह-बाधा तथा अप-मृत्यु का शमन होता है ।

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