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Thursday, 18 August 2011

नव्ग्रह वाटिका

NAVGRAH VATIKA

Courtesy : UP Forest Department

Madar

Palas

Khair
नव्ग्रह वाटिका
भारतीय ज्यॊतिष में ग्रहॊं की संख्या ९ मानी गई हॆ। ऎसी मान्यता हॆ कि ईन ग्रहॊं की विभिन्न नक्शत्रों में स्थिति का विभिन्न प्रकार का प्रभाव पडता हे, ये प्रभाव अनुकुल व प्रतिकुल दोनों होतें हें।ग्रहों के प्रतिकुल प्रभाव के शमन के लिये अनेक उपाय बताये गये हॆं, जिन्में एक उपाय यग्य हें।

Latjeera

Peepal

Gooler
यग्य द्वारा ग्रह शन्ति में हर ग्रह के लिये अलग अलग विशिश्ट वनस्पति की समीधा प्रयोग की जाती हें।जिसका विव्रन नीचे हए।
संस्क्रित नाम
ग्रह
स्थानीय हिन्दी नाम वॆएग्यानिक नाम
सूर्य अर्क आक कॆलोट्रिस प्रॊसेरा
चन्द्र पलाश ढ़ाक  
ढ़ाक खदिर खैर आकसिया कटेचू
बुध अपामार्ग चिचिडा आकइरेन्थस एस्पेरा
ब्रिहस्पति पिप्पल पीपल फाइकस लिलीजिऒसा
शुक्र औड्म्बर गूलर फाइकस ग्लॊम्रेटा
शनि शमी छ्यॊकर प्रोसोपिस सिनेरिया
राहु दूव्वरा दूब साइनोडान डेक्टाइलान
केतु कुश कुश डेस्मोस्टेचिया

Shami

Doob

Kush
ग्रह शान्ति के यग्यीय कार्यॊं में सही पह्चान के आभाव में अधिकतर लोगों को सही वनस्पति नहीं मिल पाती, इस्लिये नवग्रह पेडों को धार्मिक स्थलों के समीप रोपित करना चाहिए ताकि यग्य के लिए लोगों को शुद्ध सामग्री मिल सके। नवग्रह मंडल में ग्र्हानुसार वनस्पतियों की स्थापना करने पर वाटिका की स्थिति निम्नानुसार होगी
 

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