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Saturday, 9 July 2011

मंत्र जो कैंसर का काल है

आधुनिक चिकित्सा विज्ञान ने चाहे जितनी प्रगति कर ली हो, पर बीमारियों पर नियंत्रण का उसका सपना आज तक अधूरा है। आंकड़े तो यहां तक बयान करते हैं कि दवाओं के अनुपात में रोगों की वृद्धि अधिक तेजी से हो रही है। किन्तु ऐसी विकट स्थिति में भी निराश होने की आवश्यकता नहीं है। प्राचीन समय में भारत में यंत्र-तंत्र और मंत्र के रूप में एक ऐसे विज्ञान का प्रचलन रहा है, जो बहुत ही शक्तिशाली और चमत्कारी है। आज जिन बीमारियों को लाइलाज माना जा रहा है, उनका मंत्रों के द्वारा स्थाई निवारण संभव है। तो आइये जाने ऐसे ही कुछ दुर्लभ और गुप्त मंत्र-
कैंसर रोग:
कैंसर के रोगी इंसान को नीचे दिये गए सूर्य गायत्री मंत्र का प्रतिदिन कम से कम पांच माला और अधिक से अधिक आठ माला जप, नियम पूर्वक एवं पूरी श्रृद्धा और विश्वास के साथ करना चाहिये। इसके अतिरिक्त दूध में तुलसी की पत्ती का रस मिलाकर पीना चाहिए। सूर्य-गायत्री का का जप एक अभेद्य कवच का काम करता है-
सूर्य गायत्री मंत्र - भास्कराय विद्यहे, दिवाकर धीमहि , तन्नो सूर्य: प्रचोदयात्।

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