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Thursday, 21 July 2011

तिथि अनुसार आहार -विहार ज्योतिष की नजर से


१     प्रतिपदा को कुष्मांड [कुम्हड़ा पेढा] न खाए . ये धन का नाश करता है !
२     दूज को व्रहली [ छोटा बैगन या  कटहरी ] खाना नही चाहिए !
३     तीज को परमल खाना नही चाहिए .यह शत्रुओ को बडाता है !
४     चतुर्थी को मुली नहीं खाना चाहिए .ये धन का नाश करता है !
५     पंचमी को बैल नहीं खाना चाहिए . ये कलंकित करता है !
६      छट के  दिन नीम की  पत्ती नहीं खाना चाहिए एवं दातुन नहीं करना चाहिए . ये करने से नीच की योनी
        प्राप्त  होती है !
७     सप्तमी के  दिन ताड़ का फल नहीं खाना चाहिए . ये खाने से रोग उत्पन्न होता है !
८    अष्टमी के दिन नारियल नहीं खाना चाहिए . ये खाने से बुद्धि का नाश होता है !
९    नोमी के दिन लोकी नहीं खाना चाहिए . ये गाय के मांस समान होता है !
१०  दशमी को कलाम्बी [परवाल ] नहीं खाना चाहिए . ये भी गाय के मांस समान होता है !
११  एकादशी को शिम्बी [सेम] नहीं खाना चाहिए .
१२  द्वादशी को [पोई] पुतिका नहीं खाना चाहिए .
१३ तेरस को बैगन नहीं खाना चाहिए . ये तीनो दिन उपरोक्त लिखी वस्तुए खाने से पुत्र का नाश होता है !
१४  अमावस्या , पूर्णिमा ,सक्रांति, चतुर्दशी और अष्टमी रविवार श्राद्ध तथा व्रत के दिन स्त्री सहवास तथा तिल का तेल ,
      लाल  रंग का साग तथा कांसे के पात्र मे भोजन नहीं खाना चाहिए  !
१५  रविवार के दिन अदरक नहीं खाना चाहिए !

१६   कार्तिक मास में बैगन एवम माघ मास में मुली का त्याग करना चाहिए  !
१७   अंजली से या खड़े होकर जल नही पीना चाहिए  !
१८  जो भोजन लढाई करके बनाया गया हो ,जिस भोजन को किसी ने लांघ दिया हो , जिस पर ऍम सी .वाली स्त्री
     की नजर पड़ गई हो तो वह भोजन नही करना  चाहिए  . ये राछस भोजन होता है !
१९  लक्ष्मी प्राप्त करने वाले को रत में दही और सत्तू नही खाना चाहिए  !यहाँ नरक  की प्राप्ति करता  है !

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