| (भारती पंडित) प्लॉट खरीदने के बाद उस पर घर बनाते समय कई बातों का ध्यान रखना चाहिए। प्लॉट के चारों तरफ बने रास्ते, प्लॉट की लंबाई-चौड़ाई, प्लॉट पर लगे पेड़, प्लॉट पर बने कुएँ या कूप आदि सभी का ध्यान रखना चाहिए। घर कहाँ न बनाए- ब्रह्मदेव के मंदिर के पीछे या विष्णु, सूर्य, शिव या जैन मंदिर के सामने/पीछे बने प्लॉट पर घर न बनाएँ। इसके अलावा प्लॉट पर घर बनाते समय उत्तर, पूर्व और ईशान में अधिक जगह छोड़े। घर की छत का उतार (ढलान) भी उत्तर या ईशान में हो। सीवेज, नल आदि भी ईशान या नैऋत्य में हो। खिड़कियाँ पूर्व और उत्तर की तरफ ज्यादा हो। दक्षिण में खिड़की न बनाएँ। ईशान कोण में किचन भी न बनाएँ। आउट हाऊस हमेशा पश्चिम या दक्षिण में तथा गैरेज पूर्व या उत्तर में बनाएँ। घर का दरवाजा-मुख्य दरवाजा दरवाजे के सामने रास्ता न हो अन्यथा गृहस्वामी की उन्नति नहीं होगी। दरवाजे के सामने पेड़ होने से बच्चे बीमार रहते है। दरवाजे के सामने पानी बहता रहे तो धन हानि होती है। दरवाजे के सामने मंदिर हो तो घर में कभी सुख नहीं मिलता। स्तंभ (खंभे) के सामने दरवाजा हो तो स्त्राr हानि होती है। यदि मुख्य दरवाजा एक हो (मुख्य द्वार) तो हमेशा पूर्व में रखें। यदि दो दरवाजों का प्रवेश हो तो पूर्व व पश्चिम में बनाएँ। जमीन की तुलना में यदि दरवाजा नीचा हो तो घर के पुरुष व्यसनासिक्त व दुःखी रहते हैं। घर के आगे वीथिशूल हो (रास्ता, मंदिर आदि) तो घर की ऊँचाई से दोगुनी जगह आगे छोड़ने से दोष नहीं लगता। यदि कोई रास्ता आपके घर या इमारत से आड़ा होकर निकले या इमारत तक आकर समाप्त हो तो यह शुभ होता है। घर का मुख्य द्वार हमेशा अन्य दरवाजों से बड़ा होना चाहिए। भारत के लोगों की नक्षत्र और ग्रहों के प्रति गहरी आस्था है। ग्रहों की अनुकूलता एवं प्रतिकूलता का प्रभाव अवश्य पड़ता है। यज्ञ, जाप, धार्मिक अनुष्ठान करते-कराते हैं और इन सबसे प्राय अभीष्ठ की कामना निहित होती है। पेड़-पौधों का भी काल में सूर्य-चंद्र आदि नवग्रहों व ज्योति से अत्यंत निकट का और घनिष्ठ संबंध बताया जाता है। हवन यानी यज्ञ में लगने वाली सामग्री (समिधा) विभिन्न पेड़-पौधों एवं वनस्पतियों से निर्मित होती है। पेड़-पौधों पर लगभग समस्त प्राणी निर्भर हैं। जो लोग कीमती रत्न खरीदने में असमर्थ हों, वे पेड़-पौधों के पत्ते या जड़ की सहायता ले सकते हैं। सूर्य ग्रह- यदि आपकी पुंडली में सूर्य कमजोर, नीच या अशुभ प्रभाव दे रहा है तो बेल-पत्र लाल या गुलाबी धागे में रविवार को धारण करें। अशुभ प्रभाव में कमी आएगी। चंद्र ग्रह- यदि चंद्र दूषित है या अशुभ है तो सोमवार को सुबह खिरनी की जड़ सफेद धागे में धारण करें। मंगल ग्रह- यदि आप मांगलिक हैं, मंगल अष्टम या बारहवें भाव में है तो मंगलवार को दोपहर के समय अनंत मूल की जड़ लाल धागे में धारण करें। बुध ग्रह- बुध नकारात्मक प्रभाव दे रहा हो तो बुधवार की सुबह विधारा की जड़ को हरे धागे में पहनें। गुरु ग्रह- गुरु केन्द्राधिपति दोष से पीड़ित हो, अशुभ प्रभाव दे रहा हो या प्रभावहीन हो, ऐसे में भारंगी या केले की जड़ गुरुवार को दोपहर के समय पीले धागे में धारण करें। पा ग्रह- केन्द्राधिपति दोष से ग्रस्त हो तो पावार की सुबह सरपोरवा की जड़ सफेद धागे में पहनें। शनि ग्रह- शनि की साढ़ेसाती या अढैया की स्थिति में शनिवार की सुबह नीले धागे में बिच्छू की जड़ धारण करें। राहु ग्रह- राहु ग्रह की अशुभता दूर करने के लिए सफेद चंदन का टुकड़ा नीले धागे में बुधवार को पहनें, लाभ होगा। केतु ग्रह- केतु ग्रह की शुभता प्राप्त करने हेतु अश्वगंध की जड़ को नीले धागे में गुरुवार को धारण करें। अशुभ प्रभाव समाप्त हो सकता है। घर में अलग-अलग किस्म की लकड़ी कई बाधाओं को जन्म देती है। इस दृष्टि से प्राय शीशम, साल, पनस, सुपारी और नाग आदि के वृक्षों की लकड़ी ज्यादा उपयोगी होती है। कुछ वास्तु ग्रंथों में बबूल की लकड़ी को अच्छा नहीं माना जाता, किंतु मजबूती के कारण इसे ग्राह्य मान लिया गया है। काँटे तथा दूधवाले पेड़ों की लकड़ी का उपयोग वर्जित माना है। दूध वाले वृक्षों गूलर, बरगद और आक आदि की लकड़ी का प्रयोग नहीं करना चाहिए। सामान्य नियम यह है कि मुख्य द्वार की चौखट और उसके साथ लगने वाले दरवाजे एक ही प्रकार के वृक्ष की लकड़ी के होना चाहिए। यही नियम घर में लगने वाली खिड़कियों आदि के लिए भी लागू होता है। जिस नक्षत्र में आपका जन्म हुआ है, उससे संबंधित वृक्ष आपका कुल वृक्ष है। वह कल्प वृक्ष बनकर आपको सुख प्रदान करेगा। किसी व्यक्ति को घर में पौधे लगाने का शौक है तो वास्तुशास्त्र इस संबंध में दिप् दर्शक कराता है। वास्तुशास्त्र के अनुसार घर की पश्चिम दिशा की ओर पीपल का वृक्ष होना शुभ है। बिल्व, नारियल, आँवला, तुलसी और चमेली सभी दिशाओं में शुभ हैं, कुछ अन्य वृक्षों के लिए शुभ दिशाओं की सूची निम्नानुसार हैं- 1. जामुन- दक्षिण-पूर्व उत्तर। 2. केला- तुलसी के साथ सभी दिशाओं में। 3. बरगद- पूरब (पश्चिम विशेष अशुभ)। 4. नीम- वायव्य-आग्नेय (विशेष अशुभ)। 5. अनार- आग्नेय-नैऋत्य। |
We cannot change the circumstances in which our soul chose to be born, but we can definitely change the circumstances in which we grow.ASTROLOGY, VASTU SASTRA, AURA, AROMA. SHIVYOG,ARTOF LIVING, ISHAYOG,OSHO AND NEWAGE MEDITATION अध्यात्म, ज्योतिष, यन्त्र-मन्त्र-तन्त्र, वेद, पुराण, इतिहास, गुढ़-रहस्य समस्त समस्या का निराकरण सम्भव नहीं है, मात्र कुछेक समस्या का ही समाधान सम्भव है। Accurate Horoscope Analysis and Remedies for All Problems
Search This Blog
Friday, 8 July 2011
घर बनाएँ मगर सम्हल करके..
घर बनाएँ मगर सम्हल करके..
Labels:
plants,
plants Herbs,
उपाय,
उपाय upay
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment