ग्रहों के माध्यम से वरदान और सहयाग का आंकलन
कुंडली के पंचम घर से जातक के पूर्व जन्म के शुभ और अशुभ कर्मों का आंकलन होता है.अगर पंचम घर में ग्रह शुभ प्रभाव में हैं तो वरदान के कारण जीवन में सफलता मिलती है जिसका सम्बन्ध इस प्रकार है :
पंचम घर शुभ प्रभाव :-
सूर्य : पिता की सेवा या राष्ट्रिय धर्म के आचरण के कारण
चन्द्र: माँ के आशिर वचन से या किसी पीड़ित महिला की सेवा से
मंगल: भाई के सहयाग के कारण
बुध : मामा के सहयोग से, किसी लेखक या कवि की सेवा से
गुरु : इश्वर की भक्ति ,धर्म का आचरण ,पंडित वर्ग तथा गुरु की सेवा तथा गो सेवा एवं नैतिक मूल्यों के रक्षण के कारण
शुक्र : पीड़ित महिला वर्ग के सहयोग ,पत्नी के सहयाग या प्रसन्नता के कारण लक्ष्मी वा गायत्री उपासना के कारण
शनि: दरिद्र, कोडी तथा मलेछ लोगों की सेवा के कारण
राहू : पितरों की प्रसन्नता और सेवा के कारण
केतु : प्रेत पिशाच की सहयोग सेवा
अगर किसी साधक की कुंडली का नवांश कुंडली के ६,८,१२ के भाव से बनता है तो उसका सम्बन्ध भी पूर्व जनम के पाप कर्मों के कारण होता है इस से जातक को कठिनाई से सफलता मिलती है लेकिन यदि नवां घर जातक का शुभ प्रभाव आयर शुभ नवांश में है तो अपनें ही कर्मों से तथा ईश्वरीय आशीर्वाद के कारण एक समय के बाद जीवन फलीभूत होता है .
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