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Thursday, 30 June 2011

उपाय :-



(१) धन प्राप्ति के लिये :- महा मत्स्या, महा कूर्मा, महा वाराह रूपिणी |
नर सिंह प्रिया रम्या वामना वटु रूपिणी ||
इस मन्त्र को मंगलवार से शुरू करके नित्य 36 बार पढ़ने से खूब धन प्राप्त होता है |
(२) दाम्पत्य सुख की प्राप्ति के लिये :- जामदग्न्य - स्वरूपा च रामा राम प्रपूजिता |
कृष्ण कपर्दिनी कृत्या, कलहा कल कारिणी ||
इस मन्त्र को चतुर्दशी के दिन मसूर की दाल पर 36 बार पढ़ कर वह दाल पति - पत्नी द्वारा खाये जाने से दाम्पत्य प्रेम बढ़ जाता है |
(३) बच्चों का मन पढ़ाई में लगाने के लिये :- किसी भी महीने में कृष्ण पक्ष की अष्टमी से चतुर्दशी तक एक सेब पर छ: बार देवी का यह मन्त्र पढ़ कर बच्चे को खिलाने से उसका भटकाव रुक जाता है और पढ़ाई में उसका मन लगता है |
बुद्धि रूपा, बुद्ध भार्या, बौद्ध - पाखण्ड - खंडिनी |
कल्कि रूपा कलि हरा, कलि दुर्गति नाशिनी ||
(४) प्रेमी या प्रेमिका को जीवन साथी के रूप में पाने के लिये :- इस मन्त्र को 36 बार पढ़ कर एक रूमाल पर फूंक मारें | फिर वह रूमाल लेकर अपने प्रेमी या प्रेमिका से मिलने पर वह जीवन साथी बन जाता है |
केशवी केशवाराध्या किशोरी केशवस्तुता |
रूद्र रूपा रूद्र मूर्ति: रूद्राणी रूद्र देवता ||
(५) नवग्रह की बाधा से मुक्ति के लिये :- इस मन्त्र का नियमित जप करने से ग्रहों की दशा, अंतरदशा, मारकेश इत्यादि का बुरा प्रभाव ख़त्म हो जाता है |
नक्षत्र - रूपा नक्षत्रा, नक्षत्रेश प्रपूजिता |
नक्षत्रेश - प्रिया नित्या , नक्षत्र - पति - वन्दिता ||
(६) कुंआरी कन्याओं को वर की प्राप्ति के लिये :-
रक्ता नीला घना शुभ्रा, श्वेता सौभाग्य दायिनी |
सुंदरी सौभगा सौम्या, स्वर्णाभा स्वर्गति प्रदा ||
इस मन्त्र को कृष्ण पक्ष की अष्टमी से चतुर्दशी तक रोज 36 बार पढ़ने से कुंआरी कन्याओं को उत्तम वर की प्राप्ति होती है |
(७) शत्रुओं के विनाश और मुकदमे में विजय के लिये :- नित्य प्रात: मौन रह कर यह मन्त्र पढ़ने से शीघ्र ही शत्रु नष्ट हो जाते हैं और मुकदमे में विजय प्राप्त होती है |
रिपु त्रास करी रेखा शत्रु संहार कारिणी |
भामिनी च तथा भाया स्तंभिनी मोहिनी शुभा |
(८) नजर टोना टोटका आदि से बचने के लिये :- शाम के समय यह मन्त्र पढ़ते हुये घर में धूपबत्ती जलाने से दूसरे की बुरी नजर, टोना टोटका आदि अभिचार कर्म नष्ट हो जाते हैं और घर का वातावरण निर्मल हो जाता है |
देव - दानव - सिद्धौघ पूजिता परमेश्वरी |
पराणु रूपा परमा पर तंत्र विनाशिनी ||


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