Search This Blog

Loading...

Wednesday, 26 February 2014

भगवान शिव

ज्योतिषीय दृष्टि से चतुदर्शी (1+4) अपने आप में बड़ी ही महत्वपूर्ण तिथि है। इस तिथि के देवता भगवान शिव हैं। जिसका योग 5 हुआ अर्थात्‌ पूर्णा तिथि बनती है, साथ ही कालपुरुष की कुण्डली में पांचवां भाव भक्ति का माना गया है।
—यह करें उपाय कारोबार वृद्धि के लिए—
महाशिवरात्रि के सिद्ध मुहर्त में पारद शिवलिंग को प्राण प्रतिष्ठित करवाकर स्थापित करने से व्यवसाय में वृद्धि व नौकरी में तरक्की मिलती है।
—बाधा नाश के लिए शिवरात्रि के प्रदोष काल में स्फटिक शिवलिंग को शुद्ध गंगा जल, दूध, दही, घी, शहद व शक्कर से स्नान करवाकर धूप-दीप जलाकर निम्न मंत्र का जाप करने से समस्त बाधाओं का शमन होता है। ॥ॐ तुत्पुरूषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रूद्र: प्रचोदयात्॥
—-बीमारी से छुटकारे के लिए शिव मंदिर में लिंग पूजन कर दस हज़ार मंत्रों का जाप करने से प्राण रक्षा होती है। महामृत्युंजय मंत्र का जाप रुद्राक्ष की माला पर करें।
—-शत्रु नाश के लिए शिवरात्रि को रूद्राष्टक का पाठ यथासंभव करने से शत्रुओं से मुक्ति मिलती है। मुक़दमे में जीत व समस्त सुखों की प्राप्ति होती है।
—-मोक्ष के लिए शिवरात्रि को एक मुखी रूद्राक्ष को गंगाजल से स्नान करवाकर धूप-दीप दिखा कर तख्ते पर स्वच्छ कपड़ा बिछाकर स्थापित करें। शिव रूप रूद्राक्ष के सामने बैठ कर सवा लाख मंत्र जप का संकल्प लेकर जाप आरंभ करें। जप शिवरात्रि के बाद भी जारी रखें। ॐ नम: शिवाय।
—-रुद्राभिशेक से यदि लाभ् लेना चाह्ते है तो जल से रुद्राभिशेक करे ।
—–व्यधि नाश के लिये कुशा से करे ।
—–यदि पशुओ कि कामना चाह्ते है तो दहि से रुद्रभिशेक करे ।
—-यदि लक्ष्मी कि कामना चाह्ते है तो गन्ना के रस से रुद्रभिशेक करे ।
—-अगर आपकी जन्मकुंडली में ” चन्द्र – शनि ” एक ही स्थान पर स्थित है – तो – आपकी कुंडली में ” बिष योग ” का निर्माण हो रहा है – जिससे जीवन में अनेक कष्ट प्राप्त होते है – अतः ” महाशिवरात्रि ” के दिन अपने वज़न के बराबर ” पुडी – पचमेला सब्जी ओर मूली ” का दान करे

2 comments: