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Tuesday, 13 September 2011

भदावरी ज्योतिष : देशी जडी-बूटिया

भदावरी ज्योतिष के अनुसार ग्रहो की कमजोरी मे प्रयोग की जाने वाली देशी जडी-बूटिया

ज्योतिष मे किसी ग्रह की कमजोरी मे लोग महन्गे रत्नो की तरफ़ इशारा करते है,मगर भदावरी ज्योतिष मे ग्रह की कमजोरी के लिये जडी बूटियो की सहायता लेते है.ये जडी बूटिया बहुत ही काम करती है,और इनको परखने के लिए किसी जौहरी के पास भी नही जाना पडता है,साथ ही जो ग्रह कमजोर होता है और उस ग्रह की बीमारी मे रत्न तो खाया नही जा सकता है,जबकि जडी बूटी को खा कर भी ग्रह की कमजोरी को शरीर से दूर किया जा सकता है,जडी बूटियो के लिये उनको प्रयोग करने का समय भी रत्नो की तरह से देखना पडता है,और रत्न की तरह धारण करने के बाद जो लोग पढे लिखे नही है,वे बिना किसी पूजा पाठ के जडी बूटी को पहिन सकते है,मगर ध्यान यह रखना पडता है कि ग्रह की कमजोरी कब तक चलेगी,जैसे ही ग्रह की कमजोरी खत्म होती है,जडी का काम खत्म हो जाता है,फिर वह उसी प्रकार से है,जैसे कि बिना सिर दर्द के सिर दर्द की दवा को खाया जाये,इन जडी बूटियो के नाम और उनके पहिनने के समय इस प्रकार से है:- 

सूर्य ग्रह की कमजोरी के लिये:-बील जिसके पत्ते भगवान शिव पर चढाये जाते है,की जड को रविवार के दिन जब हस्त या क्रितिका नक्षत्र हो उस दिन लाकर,या पहले से ही इसको इस नक्षत्र मे लाकर रख लेना चाहिये,और जब धारण करनी हो तभी,इस नक्षत्र को देख कर लाल रन्ग के धागे मे बान्ध कर अपने गले मे या पुरुष अपनी दायी भुजा मे और औरत अपनी बायी भुजा मे बान्ध सकते है,सूर्य बाली किसी बीमारी मे बील की जड को इन नक्षत्रो मे लाकर महीन पीस कर दिन मे तीन बार रोजाना तेतालीस दिन तक प्रयोग करना चाहिये
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चन्द्र ग्रह की कमजोरी के लिये:-खिन्नी की जड को सोमवार को रोहिणी नक्षत्र मे सफ़ेद धागे मे सूर्य की जड के अनुसार स्त्री और पुरुष दोनो धारण करे,खिन्नी एक अनाज होता है,जो कानपुर और बान्दा जिले मे खूब होती है,लोग इसको भून कर मक्के की खील की तरह से खूब खाते है. 

मन्गल ग्रह की कमजोरी के लिये:-अनन्त मूल की जड को मन्गलवार को म्रग्सिरा नक्षत्र मे लाल रन्ग के धागे मे बान्धना चाहिये,मन्गल की किसी भी बीमारी मे भी इसका प्रयोग किया जा सकता है,मगर ध्यान यह रखना चाहिये कि शुगर वाली बीमारियो मे खेजडे की जड को साथ मे खाना चाहिये,और कोई न कोई मीठी चीज का मन्दिरो मे दान करते रहना चाहिये,अगर कोई मीठा प्रसाद दे तो नही लेना चाहिये. 

बुध ग्रह की कमजोरी के लिये:-बिधारा की जड को बुधवार को अशलेशा नक्षत्र को हरे रन्ग के धागे मे उपरोक्त तरीके से बान्धना चाहिये.बिधारा आयुर्वेद मे बहुत ही ग्यान दायक बूटी मानी जाती है,कमजोर बुध मे बुद्धि की कमजोरी के लिये,पागल पन और गणित तथा दूसरी भाषाओ के ग्यान के लिये बिधारा बहुत ही मह्त्वपूर्ण है. 

गुरु ग्रह की कमजोरी के लिये:-नारन्गी जिसे सन्तरा भी कहते है,या केले की जड को गुरुवार के दिन पुनर्वसु नक्षत्र मे पीले रन्ग के धागे मे धारण करना चाहिये,जिन लोगो का गुरु कमजोर हो वे सन्तरे का प्रयोग खाना खाने के बाद करते रहे.मन्दिरो मे गुरु की कमजोरी के लिये ही केले चढाये जाते है,मगर आजकल लोग केले को केतु का फल भी मनते है,उसका कारण है कि केले की जड तो गुरु की होती है,पत्ता बुध का होता है,फल केतु का होता है,फूल राहु का होता है,घर मे केले के पेड को नही लगाना चाहिये,कारण कि केला रहे अकेला
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शुक्र ग्रह की कमजोरी के लिये:-शुक्रवार के दिन भरणी नक्षत्र मे सर्पोन्खा की जड को सफ़ेद धागे मे बान्धने से शुक्र ग्रह के दोष शान्त होते है,जिस किसी के पुत्र नही होता हो,या सन्तान की बाधा मे पुरुष या स्त्री कमजोर हो,वीर्याणु या स्त्रियो मे शुक्राणु कमजोर हो वे सरपोन्खा की जड की चाय बना कर शाम को सोते समय लेना चालू करे तो निश्चित रूप से पुत्र या सन्तान की प्राप्ति होती है,कोर्थ गाव जो आगरा जिला मे है,मेरा ही गाव है,मैने स्वर्गीय राजा सिह को यह दवा बताई थी,उन्होने अपनी दोनो बहुओ को बताई तो वे सरपोन्खा की गन्ध से उबकाइया लेने लगी,मैने उनको सुझाव दिया कि सरपोन्खा की लकडी से घर मे रोटी पकाने पकाने और रोटी को पति और पत्नी के द्वारा खाने पर सन्तान जितनी चाहो,उतनी मिल जाती है,उनके घर के आस पास सरपोन्खा खूब उगता था,गायो को भी सरपोन्खा चारे मे दिया जाता था,गाये जल्दी ही पनपने लगती थी और उनके आज दो पुत्रो मे आठ लडके और चार लडकिया है,उनका द्वार आज भी गायो के शोर से गून्जता है।

शनि ग्रह की कमजोरी के लिये:-भदावर मे बिच्छू नामक घास का पेड बरसात के दिनो मे खूब उगता है,क्वार के महिने मे गुलाबी रन्ग के फूल आते है,और दिवाली के आस पास काले रन्ग के बिच्छू जैसे बीज जिनमे दो नुकीले कान्टे बिच्छू की तरह से मुडे होते है,को शनिवार के दिन काले रन्ग के धागे मे बान्धना चाहिये,शनि से चर्म रोग होते है,बिच्छू की जड को केन्सर जो कि मन्गल और शनि की युती से होता है,को अनन्तमूल की जड के साथ पीस कर तेतालीस दिन तक रोज साम को एक तोला गुड के साथ खाने से ठीक हो जाता है

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राहु की कमजोरी के लिये:-सफ़ेद चन्दन जो घिस कर माथे मे तिलक की जगह पर लगाया जाता है,को बुधवार की आधी रात मे आर्द्रा नक्षत्र मे काले मे बान्धना चाहिये,साथ ही राहु जैसे रोगो मे जिनमे पागलपन,हिस्टीरिया,मिरगी,और भूत प्रेत बाले रोगो मे सफ़ेद चन्दन को घिस कर पानी के साथ पीने से और माथे मे लगाने से राहत मिल जाती है,जिनके लगन मे राहु और सूर्य हो,वे लोग लाल चन्दन को रोजाना घिस कर माथे पर लगावे तो तुरत ही आराम मिल जाता है. 


केतु की कमजोरी के लिये:-असगन्ध की जड को मन्गलवार की रात मे अश्विनी नक्षत्र मे काले धागे मे बान्धना चाहिये,जोडो के रोग और पेट के रोगो के लिये जिनमे आन्तो के रोग भी शामिल है,असगन्ध के चूर्ण को लेते रहने से आराम मिलता है.

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