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Thursday, 18 August 2011

कालसर्प योग

परब्रह्म परमेश्वर श्री कृष्ण - कालसर्प योग उपाय


ज्योतिष विज्ञान अनुसार छायाग्रहों यानि दिखाई न देने वाले राहू और केतु के कारण कुण्डली में बने कालसर्प योग के शुभ होने पर जीवन में सुख मिलता है, किंतु इसके बुरे असर से व्यक्ति जीवन भर कठिनाईयों से जूझता रहता है। दूसरी तरह कालसर्प दोष के शमन के लिए बताए गए समय और धन खर्च करने वाले उपाय हर व्यक्ति वहन नहीं कर सकता। किंतु सनातन धर्म में नित्य देव आराधना संकट मुक्ति की सबसे उचित राह मानी जाती है। इसलिए यहां बताया जा रहा है

इन विघ्र और बाधाओं से पार पाने के लिए एक बड़ा ही आसान उपाय शास्त्रों में बताया गया है। यह है भगवान श्री कृष्ण का स्मरण। भगवान श्रीकृष्ण के कालिया नाग के मर्दन के प्रसिद्ध प्रसंग में भी साहस और मेहनत द्वारा विघ्र और बाधाओं के शमन का संदेश है। इसलिए कृष्ण भक्ति कालसर्प दोष शांति के साथ सुखद नतीजे भी देती है।

भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति को मोर पंख से सजाकर उनकी पूजा करने से कालसर्प दोष के कष्ट से मुक्ति मिलती है |

प्रात: स्नान के बाद घर में भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा को जल व पंचामृत से स्नान के बाद केसरयुक्त चंदन, अक्षत, फूल, पीताम्बरी वस्त्र अर्पित कर माखन-मिश्री का भोग लगाएं और नीचे लिखे दो मंत्रों का विषम संख्या यानी 1, 2, 5, 7, 11, 21 बार जप करें। एक माला यानी 108 बार जप श्रेष्ठ माना गया है -

- कृं कृष्णाय नम:

- ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

इन मंत्रों के जप के बाद भगवान श्रीकृष्ण की आरती करें और अपार सफलता की कामना करें ।

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