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Tuesday, 9 August 2011

महालक्ष्मी



परंपरा और आस्था की जगमग रोशनी में दीपावली पर्व पर देशभर में लोग धन और समृद्धि की देवी श्री महालक्ष्मीजी के स्वागत के लिए आतुर हैं। पूरा देश कुंदन की तरह दमक रहा है। उत्साह और उल्लास के उजाले में मां लक्ष्मी हर घर सुख-समृद्धि का आशीष लेकर आएंगी। इसी उम्मीद के साथ घर-आंगन सजे-संवरे हैं। इंतजार है उस शुभ घड़ी का जब पूजन के साथ ही खुशियों के पटाखे छूटेंगे, उमंगों की लड़ियां चलेंगी।
ऐसे करें पूजन
* पूर्व या पश्चिम दिशा की ओर मुंह करके बैठ जाएं। लक्ष्मीजी की प्रतिमा या चित्र सामने रखें।
* लाल, सफेद या पीले वस्त्र को पाट पर बिछाकर उस पर हल्दी से स्वस्तिक बना दें। इस पर चावल व पुष्पदल बिछाकर लक्ष्मीजी की स्थापना करें।
* लक्ष्मीजी के आगे गणोश जी की प्रतिमा या सुपारी रखें। लक्ष्मी जी के दाहिनी ओर कुबेर व बाईं ओर सरस्वतीजी की स्थापना करें।
* लक्ष्मीजी का पूजन हमेशा नारायण (विष्णु भगवान जी के साथ) ही करना चाहिये।
* घी का दीपक, जल, दूध, पंचामृत व गंगाजल से स्नान कराकर वस्त्र, चंदन (केशर), अक्षत, पुष्प (कमल, मोगरा, गुलदावदी, गेंदा,) अर्पण करें।
* आंवला, कमलगट्टा, सिंगाड़े, सीताफल, अनार, सेव, ईख आदि अर्पण करते हुए मिष्ठान्न व विभिन्न व्यंजन बनाकर नैवेद्य लगाएं।
* घी की बत्ती से आरती करें, तदनंतर प्रार्थना करते हुए पटाखे छोड़ें।
ऐसे स्थिर होगी लक्ष्मी
जो आस्तिकजन लक्ष्मी की स्थिरता चाहते हैं उन्हें सायंकाल  लक्ष्मी का स्थिर लग्न में पूजन करना चाहिए। पूजन में आंवला, साल की धानी व ईख विशेष रूप से होना चाहिये। लक्ष्मी के प्रतीक चांदी के सिक्कों का पूजन कर हल्दी, कंकू चढ़ा चित्र के दाहिनी ओर लाल या पीले वस्त्र में स्वस्तिक बना चांदी के सिक्कों को रखें तथा पूजनोपरांत उन्हें उन्हीं वस्त्र में लपेटकर अपने कपाट (आलमारी) में रखें। लक्ष्मी की स्थिरता बनेगी तथा लंबे समय तक उसका उपभोग कर सकेंगे।

व्यापार में लाभ
व्यापार विनिमय में सदैव आर्थिक परेशानी रहती हो, वे पूजन स्थल पर लक्ष्मीजी के चित्र के दाहिनी ओर रक्तकमल का पुष्प रखें तथा बाईं बाजू में गोमती चक्र रखें। पूजा के बाद शुभ मुहूर्त में चांदी के सिक्कों के साथ लाल कपड़े में मुलेट, ईख के खंड व गोमती चक्र के साथ सेफ में स्थापित करें लाभ होगा।


(मुहूर्त पंडितों के मुताबिक, पूजन करने वाले अपनी परिस्थति के अनुसार समय का चयन कर सकते हैं)
दीपक का महत्व
दीपावली पर दीपक प्रज्वलित किए जाते हैं। ज्योतिषाचार्य पं. आनंदशंकर व्यास के अनुसार वस्तुत: दीपावली पर दीपकों के पूजन का महत्व है। दीपक की लौ रोशनी की प्रतीक है। एक अर्थ में दीपक की रोशनी ज्ञान की प्रतीक है। ज्ञान ही सुख और समृद्धि का आधार है।
ऐसे होंगी प्रसन्न..
* दीपावली के दिन किसी गरीब सुहागिन स्त्री को सुहाग सामग्री दान दें। मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।
* दीपावली के दिन नई झाड़ू खरीद लाएं। पूजा से पहले उससे थोड़ी सफाई करें फिर उसे एक तरफ रख दें। अगले दिन उसका प्रयोग करें। इससे दरिद्रता दूर होगी और घर में लक्ष्मी का आगमन होगा।
* महानिशा काल (मध्यरात्रि १२ से २ बजे तक का समय) में लक्ष्मीजी के मंत्रों का जप करने से लक्ष्मी की प्रसन्नता से धन की प्राप्ति होती है।
* आर्थिक स्थिति में उन्नति के लिए दीपावली की रात सिंह लग्न में श्रीसूक्त का पाठ करें।
* दक्षिणावर्ती शंख, मोती शंख, कुबेर पात्र, गोमती चक्र घर में रखें। लक्ष्मीजी की कृपा प्राप्त होगी।
* दीपक को दोनों हाथों में लेकर अपने घर के ऐसे स्थान पर आ जाएं, जहां से आकाश दिखाई देता हो। वहां मां लक्ष्मी से घर की समृद्धि के लिए प्रार्थना करें। फिर दीपक को लेकर पूरे घर में घूम जाएं और अंत में उसे पूजा स्थल पर रख दें। इस प्रयोग से लक्ष्मीजी प्रसन्न होती हैं।

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