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Wednesday, 10 August 2011

नक्षत्र

विष्णु सहस्त्रनाम के द्वारा कष्टों का उपचार


विष्णु सहत्रनाम महाशक्तिशाली स्तोत्र है। विष्णु सहस्त्रनाम के १०८ श्लोकों का पाठ करने से सभी प्रकार के ग्रह दोषों और कष्टों का निराकरण हो कर परम शान्ति प्राप्त होती है। अश्विनी नक्षत्र से रेवती नक्षत्र तक २७ नक्षत्र होते हैं। प्रत्येक नक्षत्र में चार चरण होते हैं। इस प्रकार २७ * ४ = १०८ हुए। अश्विनी नक्षत्र के प्रथम चरण में जन्मे जातक को प्रथम श्लोक का पाठ करना चाहिए। भरणी नक्षत्र के प्रथम चरण में जन्मे जातक को पंचम श्लोक का पाठ करना चाहिए। इस प्रकार क्रमशः प्रत्येक व्यक्ति सम्बंधित नक्षत्र शान्ति के लिए पाठ करें। जिसे अपने नक्षत्र का ज्ञान ना हो, वह सम्पूर्ण विष्णु सहस्त्रनाम स्तोत्र का पाठ करें।

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