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Friday, 19 August 2011

ज्योतिष में पाया विचार










ज्योतिष में पाया विचार

ज्योतिष विद्या में पाया (जन्म के पैर) का विचार दो प्रकार से होता है। नक्षत्र एवं चन्द्र से, चन्द्र से पाया विचार स्थूल माना जाता है लेकिन यह अधिक प्रचलित और व्यवहार में है।
१. नक्षत्र से पाया विचार
सोने का पाया- २७. रेवती, १. अश्विनी, २. भरणी, ३. कृत्तिका, ४. रोहणी या ५. मृगशिरा नक्षत्र में जन्म होने पर सोने के पैर होते हैं।
चाँदी का पाया- ६. आद्रा, ७. पुनर्वसु, ८. पुष्य, ९. आश्लेषा, १०. मघा, ११. पूर्वा फाल्गुनी, १२. उत्तरा फाल्गुनी, १३. हस्त, १४. चित्रा या १५. स्वाती नक्षत्र में जन्म होने पर चाँदी के पैर होते हैं।
ताम्बे का पाया- १६. विशाखा, १७. अनुराधा, १८. ज्येष्ठा, १९. मूल, २०. पूर्वा षाढा, २१. उत्तरा षाढा, २२. श्रवण २३. धनिष्ठा या २४. शतभिषा नक्षत्र में जन्म होने पर ताम्बे के पैर होते हैं।
लोहे का पाया- २५. पूर्वा भाद्रपद या २६. उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में जन्म होने पर लोहे के पैर होते हैं।

२. चन्द्र से पाया विचार
सोने का पाया- चन्द्र यदि लग्न, षष्ठ या एकादश भाव हो तो सोने के पैर होते हैं। (अत्यंत शुभ)
चाँदी का पाया- चन्द्र यदि द्वितीय, पंचम या नवम भाव हो तो चाँदी के पैर होते हैं। (शुभ)
ताम्बे का पाया- चन्द्र यदि तृतीय, सप्तम या दशम भाव हो तो ताम्बे के पैर होते हैं। (साधारण)
लोहे का पाया- चन्द्र यदि चतुर्थ, अष्टम या द्वादश भाव हो तो लोहे के पैर होते हैं। (अशुभ)


























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