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Tuesday, 16 August 2011

जड़ी बूटिया

गृह सम्बन्धी रोग व् उनका उपशमन
ग्रहों से सम्बंधित रोग उनके उपशमन के लिए धारण करने योग्य रत्न , उपरत्न , जड़ी बूटिया , दान आदि का वर्णन निम्न प्रकार है | 
सूर्य गृह से सम्बंधित :- 
रोग : सिरदर्द , ज्वर , नैत्रविकार , मधुमेय , पित्त रोग , हैजा , हिचकी आदि | 
रत्न उपरत्न : माणिक्य , लालड़ी , तामडा , महसूरी | 
जड़ी बूटिया : बेलपत्र की जड़ 
दान : गेंहू , लाल और पीले मिले हुए रंग के वस्त्र , लाल फल लाल मिठाई , सोने के कण , गाय, गुड और तांबा 
चन्द्रमा से सम्बंधित :- 
रोग : तिल्ली , पांडू , यकृत , कफ , उदार सम्बन्धी विकार , मनोविकार 
रत्न उपरत्न : मोती , निमरू , चंद्रमणि , सफ़ेद पुखराज , ओपल 
जड़ी बूटिया :खिन्नी की जड़ 
दान : चावल , श्वेत वस्त्र , कपूर , चांदी , शुद्ध , सफ़ेद चन्दन , वंश फल , श्वेत पुष्प , चीनी , वृषभ , दधि , मोती आदि | 
मंगल से सम्बंधित :- 
रोग : पित्त , वायु , कर्ण रोग , गुणगा , विशुचिका , खुजली , रक्त सम्बन्धी बीमारिया , प्रदर , राज , अंडकोष रोग , बवासीर आदि | 
रत्न - उपरत्न : मूंगा , विद्रुम 
जड़ी बूटिया : अनंत मूल की जड़ 
दान : लाल मक्का , लाल मसूर , लाल वस्त्र , लाल फल , लाल पुष्प 
बुध से सम्बंधित :- 
रोग : खांसी , ह्रदय रोग , वातरोग , कोढ़ , मन्दाग्नि , श्वास रोग , दम , गूंगापन 
रत्न उपरत्न : पन्ना , संग पन्ना , मरगज तथा ओनिक्स 
जड़ी बूटिया : विधारा की जड़ 
दान : हरी मुंग , हरे वस्त्र , हरे फल , हरी मिठाई , कांसा पीतल , हाथी दांत , स्वर्ण कपूर , शस्त्र , षटरस भोजन , घृत आदि 
वृहस्पति से सम्बंधित :- 
रोग : कुष्ठ रोग , फोड़ा , गुल्म रोग , प्लीहा , गुप्त स्थानों के रोग 
जड़ी बूटिया : नारंगी या केले की जड़ 
दान : चने की दल , पीले वस्त्र , सोना , हल्दी , घी , पीले वस्त्र , अश्व , पुस्तक , मधु , लवण , शर्करा , भूमि छत्र आदि 
शुक्र से सम्बंधित :- 
रोग : प्रमेह , मंद बुद्धि , वीर्य विकार , नपुंसकता , वीर्य का इन्द्रिय सम्बन्धी रोग 
रत्न उपरत्न : हिरा, करगी , सिग्मा 
जड़ी बूटिया : सरपोखा की जड़ 
दान : चावल , चांदी , घी , सफ़ेद वस्त्र , चन्दन , दही , गंध द्रव्य , चीनी , गाय , जरकन , सफ़ेद पुष्प आदि 
शनि से सम्बंधित :- 
रोग : उन्माद , वाट रोग , भगंदर , गठिया , स्नायु रोग , टीबी , केंसर , अल्सर 
रत्न उपरत्न : नीलम , नीलिमा , जमुनिया , नीला कटहल 
जड़ी बूटिया : बिच्छु बूटी की जड़ या शमी की जड़ 
दान : काले चने , काले कपडे , जामुन फल , कला उड़द , काली गाय , गोमेद , काले जूते , तिल , उड़द , भैस , लोहा , तेल , उड़द , कुलथी , काले पुष्प , कस्तूरी सुवर्ण 
राहू से सम्बंधित :- 
रोग : अनिंद्रा , उदर रोग , मस्तिष्क रोग, पागलपन 
जड़ी बूटिया : सफ़ेद चन्दन 
रत्न उपरत्न : गोमेद , तुरसा , साफा 
दान : अभ्रक , लौह , तिल , नीला वस्त्र , छाग , ताम्रपत्र , सप्त धान्य , उड़द , कम्बल , जोऊ , तलवार 
केतु से सम्बंधित :- 
रोग : चर्म रोग , मस्तिष्क तथा उदर सम्बन्धी रोग , जटिल रोग , अतिसार , दुर्घटना , शल्य क्रिया आदि 
रत्न उपरत्न : वैदूर्य , लहसुनिया , गोदंती संगी 
जड़ी बूटिया : असगंध की जड़ 
दान : कस्तूरी तिल , छाग , कला वस्त्र , ध्वज , सप्त धान्य , उड़द , कम्बल | 
यदि औसधि से रोग तो ग्रह का प्रकोप अर्थात ग्रह की महादशा , अन्तर्दशा लगी हुई समझनी चाहिए | मंत्र जाप , रत्न ,एवं जड़ी बूटिया धारण करनी चाहिए | इससे रोग हल्का होगा और ठीक होने लगेगा | रत्न उपरत्न सम्बंधित ग्रह के वार व् नक्षत्र में धारण करने चाहिए | दान संकल्प करके ब्रह्मण या जरूरतमंद को श्रद्धापूर्वक देना चाहिए |

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