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Monday, 8 August 2011

पेड़-पौधों से करें चिकित्सा

पेड़-पौधों से करें चिकित्सा
सेहत डेस्क








नीम : नीम की 10-12 पत्तियों को पीसकर सुबह खाली पेट पीने से गर्मी की घमौरियों व चर्मरोग का शमन होता है। नीम की पत्तियों को पानी में उबालकर सिर धोने से बाल झड़ना रुक जाता है व जुएँ, लीख मर जाते हैं।
तुलसी : तुलसी के 8-10 पत्तों को पीसकर चीनी में मिलाकर पीने से लू नहीं लगती है। अगर लू लग गई है तो आराम मिल जाता है। रोज प्रातः खाली पेट तुलसी के चार पत्ते नियमित खाने से बीमारी नहीं होती है।
बबूल : बबूल की पत्तियों को उबालकर उस पानी को कुल्ला करने से दाँत व मसूड़े मजबूत होते हैं। बबूल की पत्तियों का रस निकालकर सरसों के तेल में मिलाकर लगाने से गर्मी के फोड़े-फुंसी में आराम मिलता है।
बड़ : बड़ के दूध में एक नींबू का रस मिलाकर सिर में आधे घंटे तक लगा रहने दें। फिर सिर को गुनगुने पानी से धो लें। इससे बालों का झड़ना बंद हो जाता है व बाल तेजी से बढ़ते हैं।
बेर : बेर की पत्तियों व नीम की पत्तियों को बारीक पीसकर उसमें नींबू का रस मिलाकर बालों में लगा लें व दो घंटे बाद बालों को धो लें। इसका एक माह तक प्रयोग करने से नए बाल उग आते हैं व बाल झड़ना बंद हो जाते हैं।




बेलफल : बेलफल के गूदे को शकर में मिलाकर तीन दिन नियमित डेढ़ से 2 कप पीने से अतिसार में लाभ होता है।
मेहँदी : मेहँदी की पत्तियों को पीसकर रात को सोते समय पैर के तलवों व नाखूनों पर लगाने से शरीर की गर्मी शांत होती है व लू लगने का भय नहीं रहता। मेहँदी हर हफ्ते बालों में लगाने से सिर की गर्मी शांत हो जाती है।
चमेली : अगर आपके मुँह में छाले हो गए हों तो तीन दिन नियम से चमेली की पाँच पत्ती चबाने से आराम मिलता है। अगर मुँह से दुर्गंध आ रही हो तो चमेली की पत्तियों को उबालकर उसमें आधे नींबू का रस निचोड़कर कुल्ला करने से दुर्गंध दूर हो जाती है। 
पान : पान के पत्ते में मिश्री के कुछ दाने रखकर खाने से सूखी खाँसी ठीक हो जाती है।



पुदीना : पुदीने की पत्तियों को पीसकर उसके रस में आधा नींबू व चुटकीभर काला नमक मिलाकर पीने से पेट का अफरा व अपच खत्म हो जाता है। इसकी पत्तियों को खाने से मुँह की दुर्गंध खत्म हो जाती है।
नींबू : नींबू के रस में चीनी डालकर शर्बत बना लें। इसे कई बार थोड़ा-थोड़ा हैजे के रोगी को दें। इससे लाभ मिलता है। नींबू के रस में मूली व अदरक के टुकड़े करके डालें व नमक तथा कालीमिर्च लगाकर पीलिया के रोगी को रोज दें।
शहतूत : शहतूत की पत्तियों को उबालकर उसमें एक चुटकी सेंधा नमक डालकर गरारे करने से टॉन्सिल्स की सूजन में आराम मिलता है व गले की खराश दूर हो जाती है। शहतूत के रस में थोड़ी चीनी मिलाकर पीने से पेट की जलन व पेडू की गर्मी में आराम मिलता है।
अनार : अनार की छाल का काढ़ा बना लें। एक कप काढ़े में आधा चम्मच सौंठ का चूर्ण डालकर सुबह-शाम पीने से खूनी दस्त व खूनी बवासीर में आराम मिलता है। इसके दानों का रस पीने से हिचकी बंद हो जाती है और घबराहट मिट जाती है।
अंजीर : सफेद दाग शुरू होते ही अंजीर के पत्तों व इसकी जड़ को घिसकर लेप लगाने से सफेद दाग का बढ़ना बंद हो जाता है व धीरे-धीरे दाग मिट जाते हैं। एक अंजीर के चार टुकड़े खाने से कफ वाली खाँसी ठीक हो जाती है।

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