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Friday, 26 August 2011

बिज मंत्र
'ॐ प्रा प्री प्रौ स: शनैचार्य  नम: |'
 
सामान्य मंत्र
'ॐ श शनैश्च्राय नम:
 
सव्र्बाधा निवारक वैदिक गायत्री मंत्र
ॐ भगभवाय विद्वाहे मृत्युपुराय धीमहि तन्नो शहनी: प्रचोदयात: |
रावण शनि एवं हनुमान
महर्षि पिप्लाद और शनिदेव
सम्राट हरीशचंद्र एवं शनि
महाराजा नल-दमयंती एवं शनि
लक्ष्मी और शनि संवाद
पांडव और शनि देव
वैदिक मंत्र
बिज मंत्र
भविष्य पुराण की कथाओ
 
 
शनिग्रह पीडा निवारक मंत्र
सिउर्यपुतरे दिर्घ्दाहो विश्लाछ : शिवप्रिय :|
मंद्चार: प्रसन्नात्मा पीडा हस्तु में शनि:|
 
कष्ट निवारण शनि मंत्र
नीलाम्बर: शुल्धर: किरीट: गर्ध्स्तिथ्स्र्सक्रो धनुष्मान |
चतुभुर: सुर्यसुत: प्रसान्त: स्दाद्स्तु मह व्रंदोद्ल्पगामी||
 
सुख-स्म्रधिदायक शनि मंत्र
कोणस्थ : पिंगलो बभ्र: कृष्णो रौद्रांत को यम: |
सौरी: शनैश्रौ मंद पिपलादेन संस्तुत: ||
 
भविष्य पुराण की कथाओ के अनुसार सूर्य शनि के अथवा छाया उनकी मां है | छाया को विकसूभ सुर्वना भी कहा जाता है | ये क्र्रुर गृह माने जाते हैं | इनकी द्रष्टि में जो क्र्रुर्ता हैं , वेह इनकी पत्नी के श्राप के कारण है | ब्र्हम्पुरान में उनकी कथा इस प्रकार आई है -बचपन के शनिदेव भागवान श्रीकृष्ण के परमभक्त थे | वे श्री कृष्ण अनुराग में निम्नगिन रहा करते हैं | व्यस्क होने पर उनके पिता ने चित्ररथ की कन्या के उनका विवाह कर दिया | उनकी पत्नी-सती-साह्वी और परम तेजस्वनी थी | एक रात वेह र्र्तु स्नान करके पुत्र प्राप्ति की इच्छा से उनके पास पहुचीं पर शनिदेव श्री कृष्ण ध्यान में निम्नगिन थे | उन्हें ब्रह्माण संसार की सुद्धि नहीं थी | पत्नी प्रतीछा करके थक गयी | उसका र्र्तुकाल निष्फल हो गया | इश्लिया उसने क्रुद्ध होकर शनिदेव को श्राप दे दिया की आज से जिसे तुम देख लोगे वो नष्ट हो जायेगा | ध्यान टूटने पर शनि अपनी पत्नी को मनाया | पत्नी को अपनी भूल का पश्चाताप हुआ किन्तु श्राप के प्रतिकार की शक्ति उनमें ना थी , तभी तभी से शनि देव अपना सर निचा करके रहने लगे | क्योंकि वह नहीं कहते थे की उनकी वजह से कोई अनिष्ट हो जाए |
शनि पत्नी नाम स्तुति
ॐ शं शनैचारय नम:
धव्जनी धामिनी चैव कंकाली कलाह्प्रिया |
कंटकी कलही चादय तुरंगी महिषी अजा|
ॐ शं शनैचारय नम:|
ज्योतिशशात्र के अनुसार सहनी यदि कहीं रोहिणी भेदन कर दें तो प्रथ्वी पर 12 घोर दुर्भिक्ष पड़ता है और प्राणियों का बचना ही कठिन हो जाता है | यह रोग महाराजा दशरथ के समय में आने वाला था |

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