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Monday, 11 July 2011

कोई भी कर सकता है इन उपायों को


यहां कुछ उपाय दे रहे हैं इनको कोई भी कर सकता है। चाहे आपके पास कुंडली हो या न हो। कोई भी लग्‍न हो कोई भी राशि हो। ये उपाय करके आप भी लाभ उठा सकते हैं। ये उपाय अचूक एवं प्रभावशाली हैं, करके लाभ उठायें और दूजों को बताकर उनकी समस्‍या का समाधान करके यश और दुआएं पाएं। उपाय इस प्रकार हैं-
1- अपनी खुराक या भोजन की थाली से तीन कौर या श्रद्धानुसार जो देना चाहें गाय, कौए एवं कुत्ते के लिए निकाल कर दें। ये दान आपको जीवन में आने वाली समस्‍याओं से मुक्‍त करके सुख-शान्ति, बरकत, धन, सन्‍तान सुख आदि से परिपूर्ण करेगा। इसे आजीवन भी कर सकते हैं।
2-चौका प्रारम्‍भ करते समय या सर्वप्रथम गैस जलाकर तवा गर्म करें और फिर उस पर पानी का छींटा मारें, पानी उड़ जाएगा और फिर उस पर तीन रोटी गाय, कौए एवं कुत्ते के‍ लिए बनाकर उनको खाने को दें। गाय की रोटी घर में बरकत व शान्ति लाती है, कौवे की रोटी धन वृद्धि करती है और कुत्ते की रोटी सन्‍तान की समस्‍याएं दूर करके सन्‍तान की उन्‍नति व उसके सुख में वृद्धि करती है। इसे आजीवन भी कर सकते हैं।
3-आपका खर्चा बढ़ा हुआ है और राहु अशुभ फल कर रहा है तो रसोईघर में बैठकर खाना खाएंगे तो इनसे मुक्ति मिलेगी। इसे आजीवन भी कर सकते हैं।
4-आपको नींद नहीं आ रही है, मन परेशान है तो रात को सोते समय पलंग के नीचे या सिरहाने एक लोटे में पानी भरकर रखें और फिर बाद में अगले दिन घर के मुख्‍य द्वार के आधा दाएं एवं आधा बाएं डाल दें। ऐसा करने से उक्‍त परेशानियों से मुक्ति मिल जाएगी। इसे आजीवन कर सकते हैं।
5-रात को सोते समय पलंग के नीचे या सिरहाने में एक लोटे में जल भरकर रखें और अगले दिन गमलों या क्‍यारियों में डाल देंगे तो अकारण झगड़े, अपमान, रोग, झूठा आरोप आदि से बचाव होगा। इसे आजीवन कर सकते हैं।
6-जब भी आपको शमशान में जाने का अवसर मिले तो वहां दूजों की नजर बचारक एक दो रुपए गिरा दें, ऐसा करने से दैवीय सहायता मिलती है या यूं कह लीजिए कि अचानक आपदा आ जाने पर बचाव हो जाता है। इसे आजीवन कर सकते हैं।
7-यदि आपका रोग पीछा नहीं छोड़ रहा है और आपको औषधि भी ठीक नहीं कर पा रही है या डॉक्‍टर का ईलाज से कुछ नहीं हो रहा है या दवाई काम नहीं कर रही है तो रात को रोगी के तकिए के नीचे कुछ सिक्‍के रख दें और अगले दिन सफाई कर्मचारी को दान में दे दें, ऐसा करने से रोग शीघ्र ठीक हो जाएगा। इसे 43 दिन करें।
छह माह में एक बार पका हुआ बिल्‍कुल पीला शीताफल या कद्दू बीच में से काटकर उसमें से बीज निकालकर पुन: गोला बनाकर धर्मस्‍थान में स्‍वास्‍थ्‍य की कामना करके रखने से रोग से मुक्ति मिलती है। इसे छह माह, तीन दिन या रोग ठीक होने तक करें।
जिस दिन यह उपाय करें उस दिन परिवार में मौजूद सभी सदस्‍यों एवं मेहमानों की संख्‍या गिनकर उसमें चार अतिरिक्‍त जोड़ कर उतनी मीठी रोटी तन्‍दूर में एक तरफा लगवाकर दो भागों में बांटकर एक भाग गायों को और दूसरा भाग कुत्तों को देने से रोग से मुक्ति मिलती है। इसे छह माह, तीन दिन या रोग ठीक होने तक करें।
उक्‍त उपाय कम से कम 43 दिन करें। चतुर्थी, नवमी या चतुर्दशी में प्रारम्‍भ न करें। ये उपाय किसी के लिए कोई भी कर सकता है परन्‍तु उसका उससे रक्‍त का सम्‍बन्‍ध अवश्‍य होना चाहिए।

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