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Friday, 8 July 2011

किस ग्रह की छाँव में है आपका घर

गृह से काबू करें ग्रहों को
 



मनुष्य जब जंगल में रहता था, आँधी, तूफान, बारिश और तेज धूप से वह जूझता रहता था, लेकिन आज मानव घरों में सुरक्षित है। निश्चित ही वह आज प्रत्यक्ष प्राकृतिक आपदाओं से स्वयं को सुरक्षित महसूस करता है, लेकिन उन प्राकृतिक आपदाओं का क्या जो दिखाई नहीं देतीं?
जो आपदाएँ दिखाई नहीं देतीं उनमें शामिल हैं धरती पर अन्य ग्रहों, नक्षत्रों और तमाम तरह के ऊर्जा पुंजों के प्रभाव। इन प्रभावों का असर धरती के प्रत्येक भू-भाग पर अलग-अलग होता है। जैसे मंगल ग्रह का प्रभाव जहाँ समुद्र में मूँगे के पहाड़ का कारण हैं, वहीं जंगलों के लाल फूल या मानव की रगों में दौड़ रहे लाल रंग को मंगल ही तो संचालित करता है।
दसों दिशाओं से जो नकारात्मक और सकारात्मक ऊर्जा का बहाव जारी है उसके प्रभाव को समझना जरूरी है। कुछ लोग इस प्रभाव से बच जाते हैं तो कुछ इसकी चपेट में आ जाते हैं। जो चपेट में आ जाते हैं उनमें भी कुछ इसे झेल जाते हैं तो कुछ इसी में बह जाते हैं।
मजबूत और वास्तु के अनुसार बने घर जहाँ दिखाई देने वाली आपदाओं से बचाते हैं, वहीं वे न दिखाई देने वाली आपदाओं से भी बचाते हैं। जरूरत है यह जानने कि आखिर उत्तम घर कौन-सा है?
हमारा शरीर भी एक घर है। इसका अपना एक अलग वास्तु है। इसके वास्तु को ठीक करने के लिए भोजन और योगासन है, लेकिन घर के वास्तु को ठीक करने के लिए समझना होगा वास्तु शास्त्र के नियम को। लाल किताब अनुसार जानें स्वयं के मकान की स्थिति।

(1)
सूर्य का मकान : जिनका मकान पूर्व में है। पानी का स्थान मकान के गेट में दाखिल होते ही दाएँ हाथ पर। बड़ा-सा दरवाजा प्रकाश का रास्ता। हो सकता है कि तेज फल का वृक्ष लगा हो।

(2)
चंद्र का मकान : चंद्र का मकान अधिकतर पश्चिम या उत्तर कोण में होता है। चंद्र है तो मकान से 24-25 कदम दूर या ठीक सामने कुआँ, हैंडपंप, तालाब या बहता हुआ पानी अवश्य होगा। दूध वाले वृक्ष होंगे। घर में शांति होगी।

(3)
मंगल का मकान : मंगल की दिशा दक्षिण मानी गई है। नीम का पेड़ मंगल की स्थिति तय करता है कि मंगल शुभ असर देगा या नहीं।

(4)
बुध का मकान : बुध के मकान के चारों ओर खाली जगह होती है। हो सकता है कि यह मकान सभी मकानों से अलग-थलग अकेला ही हो। मकान के पास चौड़े पत्तों के वृक्ष होंगे। गुरु और चंद्र के वृक्ष के साथ मकान नहीं होगा और अगर हुआ तो वह घर बुध की दुश्मनी का पुख्ता प्रमाण माना जाएगा।

(5)
बृहस्पति का मकान : बृहस्पति के मकान में सुहानी हवा के रास्ते होंगे। दरवाजा उत्तर-दक्षिण न होगा। हो सकता है कि पीपल का वृक्ष या कोई धर्मस्थान मकान के आसपास हो। ईशान या उत्तर हो तो ऐसा घर गुरु का घर कहलाएगा।

(6)
शुक्र का मकान : घर में कोई ऐसा स्थान होगा जो कच्चा हो अर्थात जहाँ फर्श न लगा हो। यदि पूरे घर में ही फर्श नहीं लगा तो शुक्र का घर माना जाएगा। घर के आसपास आमतौर पर कपास का पौधा नहीं होता फिर भी मनी प्लांट या जमीन पर आगे बढ़ने वाली लेटी हुई कोई भी बेल है तो वह शुक्र की कारक है।

(7)
शनि का मकान : शनि के मकान के पास कीकर, आम या खजूर के वृक्ष हो सकते हैं। घर में तलघर हो सकता है। पीछे की दीवार कच्ची हो सकती है। यदि वह ‍दीवार गिर जाए तो शनि के खराब होने की निशानी मानी जाती है।

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(8) राहु का मकान : वैसे आमतौर पर भारत के दक्षिण इलाके के अलावा अन्य घरों के आसपास नारियल के पेड़ नहीं होते तो केक्टस को भी राहु का कारक माना जाता है। अंदर से बहुत ही भयानक अहसास वाला। कई दिनों से खाली पड़ा डरावना-सा मकान।

(9)
केतु का मकान : कोने का मकान होगा। तीन तरफ मकान एक तरफ खुला या तीन तरफ खुला हुआ और एक तरफ कोई साथी मकान या खुद उस मकान में तीन तरफ खुला होगा। केतु के मकान में नर संतानें लड़के चाहे पोते हों लेकिन कुल तीन ही होंगे। इस मकान में बच्चों से संबंधित, खिड़कियाँ, दरवाजे, बुरी हवा, अचानक धोखा होने का खतरा रहता है। हो सकता है कि मकान के आसपास इमली का वृक्ष, तिल के पौधे या केले का वृक्ष हो।
अत: सबसे उत्तम गुरु और चंद्र का घर माना जाता है। अर्थात ईशान, उत्तर, वायव्य और पश्चिम दिशा। इस दिशा में यदि मकान है तो उसे गुरु और चंद्र के वृक्ष और पौधों से सुंदर तथा शांतिदायक बना सकते हैं। इस प्रकार के घर में जल और अग्नि के स्थान को अच्छी तरह से नियुक्त किया जाना चाहिए जिससे सुख और समृद्धि बढ़ती जाए।

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