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Thursday, 2 June 2011

देवी-देवताओं की परिक्रमा

शास्त्रों के अनुसार पूजा के समय सभी देवी-देवताओं की परिक्रमा करने की परंपरा है। सभी देवी-देवताओं की परिक्रमा की संख्या अलग-अलग बताई गई है जैसे-
- श्री गणेश की तीन परिक्रमा ही करनी चाहिए। जिससे श्री गणेश भक्त को रिद्ध-सिद्धि सहित समृद्धि का वर देते हैं।
 शिवजी की आधी परिक्रमा करने का विधान है। शिवजी बड़े दयालु हैं वे बहुत जल्द प्रसन्न हो जाते हैं और भक्त पर सब कुछ न्यौछावर कर देते हैं।- माताजी की एक परिक्रमा की जाती है। माता अपने भक्तों को शक्ति प्रदान करती है।
भगवान नारायण अर्थात् विष्णु की चार परिक्रमा करने पर अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है
 एक मात्र प्रत्यक्ष देवता सूर्य की सात परिक्रमा करने पर सारी मनोकामनाएं जल्द ही पूरी हो जाती है।

सामान्यत: पूजा हम सभी करते हैं परंतु कुछ छोटी-छोटी बातें जिन्हें ध्यान रखना और उनका पालन करना अतिआवश्यक है। इन छोटी-छोटी बातें के पालन से भगवान जल्द ही प्रसन्न होते हैं और मनोवांछित फल प्रदान करते हैं। यह बातें इस प्रकार हैं-
- सूर्य, गणेश, दुर्गा, शिव, विष्णु- यह पंचदेव कहे गए हैं, इनकी पूजा सभी कार्यों में करनी चाहिए।- भगवान की केवल एक मूर्ति की पूजा नहीं करना चाहिए, अनेक मूर्तियों की पूजा से कल्याण की कामना जल्द पूर्ण होती है। - मूर्ति लकड़ी, पत्थर या धातु की स्थापित की जाना चाहिए।- गंगाजी में, शालिग्रामशिला में तथा शिवलिंग में सभी देवताओं का पूजन बिना आवाहन-विसर्जन किया जा सकता है।- घर में मूर्तियों की चल प्रतिष्ठा करनी चाहिए और मंदिर में अचल प्रतिष्ठा।- तुलसी का एक-एक पत्ता कभी नहीं तोड़ें, उसका अग्रभाग तोड़ें। मंजरी को भी पत्रों सहित तोड़ें।- देवताओं पर बासी फूल और जल कभी नहीं चढ़ाएं।- फूल चढ़ाते समय का पुष्प का मुख ऊपर की ओर रखना चाहिए।

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