Search This Blog

Monday, 27 June 2011

साधना हैं वशीकरण की



यह साधना बहुत ही उच्च कोटि की साधना हैं वशीकरण  की, इसमें कोई दो मत हैं ही नहीं ,जिसके माध्यम से आप किसी को भी अपने नियंत्रण में ला कर  अनुकूल बना  सकते हैं, मैंने महर्षि देवदत्त को इतने उच्च कोटि  की साधना ,वह भी इस महान संत की ,प्रदान करने के लिए  धन्यवाद  दिया   
        इस साधना को किसी भी सोमबार की रात्रि  में ११ बजे के बाद प्रारंभ किया जा सकता हैं ,साधना  प्रारंभ करने से पूर्व स्नान करके लाल वस्त्र धारण  करले .
 कोई एक प्लेट  ले ,जो लोहे या स्टील की बनी हो .| इसके अंदर पूरी तरह  काजल लगा दे, और निम्नाकित मंत्र  लिखे (काजल को इस प्रकार से हटा हैं की ) 
" ॐ अघोरेभ्यों  घोरेभ्यों नमः "
उस प्लेट के उपर जिस व्यक्ति का वशीकरण करना हैं उसका एक वस्त्र का टुकड़ा विछा दें | यदि ये किसी भी प्रकार से संभव न हो तो ,तो कोई भी नया  कपडे  का टुकड़ा उस  पूरी  प्लेट   पर बिछा दें. |उस के ऊपर उस व्यक्ति का नाम लिख दे, जिस पर ये प्रयोग करना हैं  ये नाम  लेखन  की  प्रक्रिया ,सिन्दूर से ही की जाना चाहिए | 
. अपने सामने भगवान् शिव का कोई भी चित्र जो  भी आपके पास हो और उस व्यक्ति का भी (जिस पर ये प्रयोग किया जाना हैं ) रखे.

इसके बाद पूर्ण मनोयोग से  उसी रात्रि में , काली हकीक या रुद्राक्ष माला से  ५१  माला  निम्नाकित मंत्र जप करें.

शिवे  वश्ये  हुं  वश्ये  अमुक  वश्ये  हुं  वश्ये  शिवे  वश्ये  वश्य्मे  वश्य्मे  वश्य्मे      फट  
इस मंत्र में अमुक की जगह उस व्यक्ति का नाम  उच्चारित  करें जिसे आपको वश में करना हैं .
जब ये मंत्र जप पूर्ण हो आप  ऋषि मुंड केश और भगवान् अघोरेश्वर   से  इस साधना में  सफलता के लिए  प्राथना करें.
साधना काल के दौरान आपको कुछ आश्चर्य जनक अनुभव  हो सकते हैं, पर इनसे  न परेशान या   बिचलित न हो , ये तो साधना सफलता के  लक्षण हैं .

No comments:

Post a Comment