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Wednesday, 1 June 2011

ग्रह-नक्षत्रों के आराघ्य वृक्ष

ग्रह-नक्षत्रों के आराघ्य वृक्ष
जून को हम पर्यावरण दिवस मनाने जा रहे हैं जबकि हमारे आदि ऋषि-मुनियों ने प्रकृति और पर्यावरण के महžव को आज से हजारों वर्ष पूर्व समझ कर वृक्षारोपण और उनके पालन-पोषण तथा आराधना का संदेश हमें दिया था।

सभी नक्षत्रों के अपने एक आराघ्य देव और वृक्ष हैं, जिनकी उपासना उसी नक्षत्र में जन्मे व्यक्ति द्वारा करने से भौतिक एवं आघ्यात्मिक लाभ मिलते हैं। यजुर्वेद में इन्हीं देवताओं का उल्लेख किया गया है-

आज हम अश्विनी को पहला नक्षत्र मानते हैं, लेकिन वेदांग ज्योतिष में कृतिका ही पहला नक्षत्र था। इसलिए कृतिका से शुरूआत कर क्रमानुसार 27 नक्षत्रों-देवताओं को श्लोकबद्ध किया गया था। नक्षत्रों के गण-योनि-नाड़ी-तžव से उस नक्षत्र में जन्मे व्यक्ति का स्वभाव, प्रकृति, इत्यादि का बोध होता है। इन सबका विचार कर हमारे आदि ऋषिमुनियों ने अनुकूल वनस्पति प्रत्येक नक्षत्र के लिए निर्धारित की है। इसके उपयोग और उपासना से जीवन निरोगी और संपन्न होता है। हमारे त्रिकाल ऋषि-मुनियों ने वनस्पति की केवल पूजा को ही नहीं, बल्कि वृक्षारोपण- वृक्ष संवर्धन करना हमारे रोजमर्रा के कामों में उपयोगी बताया है। इनके तने, छिलके, पत्ते और फूल-फलों का उपयोग करना सही वृक्षोपासना बताई है। प्राचीन ग्रंथ तंत्रराज तंत्र में अश्विनी से रेवती तक 27 नक्षत्रों में वृक्षों को श्लोकबद्ध किया गया है।

प्राचीनकाल से ही हमारी संस्कृति में वृक्षों की आराधना घरों में होती आ रही है और आज भी हम बहुत से पेड़ों को देवस्वरूप पूजते हैं। कदम्ब, गूलर, पीपल, नागचंपा, शमी, बड़ यह सब नक्षत्रों के आराघ्य वृक्ष हैं, जिनकी पूजा पीढि़यों से परंपरानुसार हम करते आ रहे हैं। हमारे ज्योतिष महर्षियों ने ज्योतिषशास्त्र की संरचना करते समय-ग्रह-राशि के लिए रत्न, देवता और आराघ्य वृक्ष नामांकित किए थे, जिनकी पूजा करने से नक्षत्र या ग्रहों की प्रतिकूलता दूर की जा सकती है।

किसी भी ग्रह एवं नक्षत्र से उत्पन्न पीड़ा या दोष निवारण के लिए अधिकांश ज्योतिषी ग्रह संबंधी रत्न पहनने की सलाह देते हैं। रत्न महंगे होने के कारण जन सामान्य के लिए सहज सुलभ हों, यह जरू री नहीं है। इसीलिए हमारे ऋषियों ने विशिष्ट रत्नों की बजाए, ग्रह संबंधी वनस्पति या ग्रह-नक्षत्र के आराघ्य वृक्ष को लगाने और उन्हें पूजने की सलाह दी। सारांशत: आप यह जान लें कि ग्रह-नक्षत्र पीड़ा निवारण के लिए यदि आप अपने जन्म नक्षत्र का वृक्ष लगाते हैं, तो इससे आपकी पीड़ा का निवारण होगा।

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