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Thursday, 26 May 2011

मोहिनी एकादशी-बिगड़ते रिश्तों को थामें"

मोहिनी एकादशी-बिगड़ते रिश्तों को थामें"
"प्रेम का रहस्य मंत्र"

बिछुड़ी मुहब्बत मिल जायेगी
बिछड़े यार भी मिल जायेंगे
नए रिश्तों को मिलेगी मजबूती
प्रेम के तीर भी चल जायेंगे
रिश्तों में आई दरार मिट जायेगी
क्योंकि आ गयी है मोहिनी एकादशी

                                                  देव दानव समुद्र मंथन की तैयारियां कर रहे थे, क्षीर सागर में शेष शैय्या पर विराजमान भगवान विष्णु कुछ चिंतित प्रतीत हो रहे थे, तो उनको चिंतित जान कर देवी योगमाया जी ने पूछा कि भगवान आप भला कैसे चिंतित हो सकते हैं आप तो पालनहार है, आखिर इस तरह परेशानी का रहस्य क्या है, तो भगवान् विष्णु जी बोले देवी मैं भविष्य की चिंता और देवताओं की चिंता से व्यथित हूँ, यदि समुद्र मंथन से अमृत निकलता है तो राक्षस मायावी विद्या से या बाहू बल से उसे भी देवताओं से छीन लेंगे, तो इस सागर मंथन का औचित्य ही क्या रह जाएगा? तो देवी योगमाया बोली प्रभु आप तो भविष्य जानते है अन्तर्यामी है, आपके रहते देवताओं का अहित कैसे हो सकता है? और रही छल बल की बात तो आपको त्रिलोकी में कौन हरा सकता है? भगवान् विष्णु ने देवी को कहा कि बात केवल इतनी नहीं है मुझे आकर्षण शक्ति के साथ साथ नारी सौन्दर्य व चातुर्य भी प्रदर्शित करना पड़ सकता है, इसी कारण उपाय सोच रहा हूँ, तब देवी नें विष्णु जी कि इच्छा जान कर कहा प्रभु मैं आपके ह्रदय में महामोहिनी के रूप में स्वयं बिराजमान हो जाती हूँ इससे समाधान हो जाएगा, ये कह कर देवी योगमाया मोहिनी के रूप में प्रकट हुई, देवी का रूप सौन्दर्य अद्भुत था, उनके जैसा सुन्दर त्रिलोकी में कोई नहीं और प्रकट हो वे विष्णु जी में समां गयी, इसके कुछ समय बाद जब सागर मंथन से अमृत निकला और उसे राक्षसों नें छीन लिया तो भगवान् विष्णु नें योगमाया के मोहिनी स्वरुप को ही धारण किया जिस कारण उनको विश्वमोहिनी कहा गया था, जिस दिन पहली बार ये देवी उतपन्न हुई उस दिन भगवान विष्णु जी कि प्रिय एकादशी तिथि भी थी इसी कारण इसका नाम मोहिनी एकादशी पड़ गया, इस दिन मोहन आकर्षण प्रेम सम्मोहन जोइसी शक्तियां प्राप्त होती हैं, साथ ही सच्चा भक्त मोह से मुक्त भी इसी दिन होता है, ब्रत पूजा का भी बड़ा ही महत्त्व है, मोहिनी एकादशी के महात्म्य के बारे में कहा गया है कि वैशाख मास के शुक्लपक्ष में जो एकादशी होती है, उसका नाम ‘मोहिनी’ है । वह सब पापों को हरने वाली और उत्तम है । उसके व्रत के प्रभाव से मनुष्य मोहजाल तथा पातक समूह से छुटकारा पा जाते हैं । सरस्वती नदी के रमणीय तट पर भद्रावती नाम की सुन्दर नगरी थी । वहाँ धृतिमान नामक राजा, जो चन्द्रवंश में उत्पन्न और सत्यप्रतिज्ञ थे, राज्य करते थे । उसी नगर में एक वैश्य रहता था, जो धन धान्य से परिपूर्ण और समृद्धशाली था । उसका नाम था धनपाल । वह सदा पुण्यकर्म में ही लगा रहता था । दूसरों के लिए प्याऊ, कुआँ, मठ, बगीचा, पोखरा और घर बनवाया करता था । भगवान विष्णु की भक्ति में उसका हार्दिक अनुराग था । वह सदा शान्त रहता था । उसके पाँच पुत्र थे : सुमना, धुतिमान, मेघावी, सुकृत तथा धृष्टबुद्धि । धृष्टबुद्धि पाँचवाँ था । वह सदा बड़े-बड़े पापों में ही संलग्न रहता था । जुए आदि दुर्व्यसनों में उसकी बड़ी आसक्ति थी । उसकी बुद्धि न तो देवताओं के पूजन में लगती थी और न पितरों तथा ब्राह्मणों के सत्कार में । वह दुष्टात्मा अन्याय के मार्ग पर चलकर पिता का धन बरबाद किया करता था। एक दिन वह वेश्या के गले में बाँह डाले चौराहे पर घूमता देखा गया । तब पिता ने उसे घर से निकाल दिया तथा बन्धु बान्धवों ने भी उसका परित्याग कर दिया । अब वह दिन रात दु:ख और शोक में डूबा तथा कष्ट पर कष्ट उठाता हुआ इधर उधर भटकने लगा । एक दिन किसी पुण्य के उदय होने से वह महर्षि कौण्डिन्य के आश्रम पर जा पहुँचा । वैशाख का महीना था । तपोधन कौण्डिन्य गंगाजी में स्नान करके आये थे । धृष्टबुद्धि शोक के भार से पीड़ित हो मुनिवर कौण्डिन्य के पास गया और हाथ जोड़ सामने खड़ा होकर बोला : ‘ब्रह्मन् ! द्विजश्रेष्ठ ! मुझ पर दया करके कोई ऐसा व्रत बताइये, जिसके पुण्य के प्रभाव से मेरी मुक्ति हो ।’ कौण्डिन्य बोले: वैशाख के शुक्लपक्ष में ‘मोहिनी’ नाम से प्रसिद्ध एकादशी का व्रत करो । ‘मोहिनी’ को उपवास करने पर प्राणियों के अनेक जन्मों के किये हुए मेरु पर्वत जैसे महापाप भी नष्ट हो जाते हैं |’ मुनि का यह वचन सुनकर धृष्टबुद्धि का चित्त प्रसन्न हो गया । उसने कौण्डिन्य के उपदेश से विधिपूर्वक ‘मोहिनी एकादशी’ का व्रत किया । इस व्रत के करने से वह निष्पाप हो गया और दिव्य देह धारण कर गरुड़ पर आरुढ़ हो सब प्रकार के उपद्रवों से रहित श्रीविष्णुधाम को चला गया । इस प्रकार यह ‘मोहिनी’ का व्रत बहुत उत्तम है । इसके पढ़ने और सुनने से सहस्र गौदान का फल मिलता है । तो कथा से भी पुन्य मिलता है लेकिन हम आपको आज बताएँगे के कैसे आप देवी की शक्ति प्राप्त कर अपने जीवन में आकर्षण प्रेम व प्रसन्नता ला सकते हैं
1)मधुर संबंधों व नए रिश्तों में प्रगाढ़ता के लिए महामंत्र
देवी की प्रतिमा को चुनरी तथा इत्र चढ़ाना चाहिए
पुष्प फल धूप दीप चढ़ाएं
स्वयं मंत्र जाप के लिए लाल रंग के आसन का प्रयोग करे
पूर्व दिशा की ओर मुख रखें
मोती या स्फटिक की माला से 9000 मन्त्र जप करने चाहिए
मंत्र-ॐ ह्रीं सर्वचक्र मोहिनी जाग्रय जाग्रय ॐ हुं स्वाहा:
एक दिन में संभव न हो तो थोडा-थोडा प्रतिदिन भी कर सकते हैं

2)शारीरिक सौंदर्य व आकर्षण पाने के लिए मंत्र
देवी को पुष्प मालाएं और गुलावी वस्त्र चढाने चाहियें
केसर ओर पान अर्पित करें
भगवान विष्णु जी की साथ ही पूजा करें
चाँदी अथवा रत्नों की बनी माला से मंत्र जाप करना चाहिए
माला न होने पर स्फटिक की माला से मंत्र जपना चाहिए
मंत्र संख्या 7000 होनी चाहिए
पीले रंग के आसन पर पश्चिमाभिमुख हो मात्र जपें
मंत्र-ॐ वं वं वं क्रीं आकर्षिनी स्वाहा :

3)प्रेम में सफलता हेतु अचूक महामंत्र
देवी को कुमकुम श्रृंगार अर्पित करना चाहिए
अखंड जोत जला कर मंत्र जाप करें
रुद्राक्ष की माला से ही मंत्र का जाप करना चाहिए
मंत्र संख्या 11000 निश्चित होती है
लाल रंग के आसन का प्रयोग करें
पूर्व दिशा की ओर मुख रखें
मंत्र-ॐ नमो योगमाये सर्व मोहने ह्रीं ज्वल स्वाहा:
थोडा थोडा बाँट कर मंत्र जप करें

4)मनोवांछित व्यक्ति को आकर्षित करने का मंत्र
देवी को पानी वाला नारियल अर्पित करें
ऋतू फल समर्पित करें
मूंगे की माला से मंत्र जप करना चाहिए
मंत्र संख्या 10000 निश्चित होती है
पीले आसन पर बैठ कर जपें
उत्तर की ओर मुख रखें
मंत्र-ॐ नमो आकर्षिनी ज्वालामालिनी देव्यै स्वाहा:
बाँट कर मंत्र जप प्रतिदिन कर सकते हैं

5)शीघ्र विवाह हेतु विष्णु जी का मंत्र
विष्णु जी की प्रतिमा को पीताम्बर से सजाये
मिष्ठान का प्रसाद अर्पित करें
रक्त चन्दन की माला से मंत्र का जाप करें
मंत्र संख्या 8000 माला है
नीले रंग के आसन का प्रयोग करें
पश्चिम दिशा की ओर मुख रखें
भगवान को गोपी चन्दन अर्पित करना चाहिए
मंत्र-ॐ हं ह्रूम हं ह्रूम हं ह्रूम विषणवे नम:
इस मंत्र का जाप केवल सायकाल में ही किया जाता है

6)पारिवारिक मधुरता का मंत्र
देवी को कपूर पुष्प लौंग चढ़ाएं
दक्षिणा व मेवा अर्पित करें
कमल गट्टे की माला से मंत्र का जाप करना उचित माना गया है
मंत्र संख्या 9000 निश्चित होती है
काले रंग के आसन का प्रयोग करें
पूर्व दिशा की ओर मुख रखें
देवी को मिष्टान्न अर्पित करना चाहिए
मंत्र-ॐ ह्रीं मंडल मध्यस्थिते योगेश्वरी स्वाहा:
थोडा थोडा बिभक्त कर मंत्र जाप करें

7)सभी को आकर्षित कर लोकप्रियता हासिल करने का मंत्र
श्री विद्या की साधारण पूजा करें
अक्षत, पुष्प, मिष्ठान्न, फल आदि अर्पित करें
दूध, शहद, दही पुष्पमाला चढ़ाएं
मोतियों की माला से 5000 मंत्र का जाप करें
लाल रंग के आसन का प्रयोग करें
मुख पश्चिम की ओर ही रखें
सिन्दूर से या रक्त चन्दन से स्वस्तिक का निशान बनायें
मंत्र-ॐ त्रिदल स्वामिनी सर्व रंजिनी स्वाहा:

8)कलह क्लेश नाशक मंत्र
देवी दुर्गा जी की पूजा करें
गोटेदार चुनरी व नारियल फल चढ़ाएं
फल फूल धूप दीप अर्पित करें
हलवा बना कर प्रसाद स्वरुप बांटना चाहिए
रुद्राक्ष की माला से 4000 मन्त्रों का जाप करें
हल्के रंग के आसन पर मंत्र जाप करें
पश्चिम दिशा की ओर मुख रख कर मंत्र जपें
मंत्र-ॐ नमो भगवती क्लेश्नाशिनी स्वाहा:


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